Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

पोएटिक्स

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

पोएटिक्स अरस्तु द्वारा लगभग ३५० ई.पू। में लिखी गई साहित्य चिंतन और सिद्धांत संबंधी पुस्तक है। यह नाट्य सिद्धांत संबंधी विश्व की सर्वाधिक प्राचीन उपलब्ध पुस्तक है। यह पाश्चात्य साहित्य सिद्धांतों का विस्तृत परिचय देने वाली पहली पुस्तक है। इसमें अरस्तु ने काव्य के अर्थ में ग्रीक काव्य और नाटक दोनों को शामिल किया है। उन्होंने काव्य में प्रगीत काव्य और महाकाव्य दोनों को शामिल किया है। नाटकों में उन्होंने कॉमेडी, ट्रेजेडी और सटायर का उल्लेख किया है। ये इस अर्थ में समान हैं कि ये सभी अनुकरण हैं लेकिन अरस्तु के अनुसार ये तीन तरह से एक दूसरे से भिन्न हैं- संगीतात्मक लय, छंद, गीतात्मकता आदि में इनमें अंतर है चरित्रों की अच्छाई में इनमें अंतर है कथानक के प्रस्तुतिकरण के ढंग में इनमें अंतर है। कहानी कही गई है या अभिनय किया गया है। पहले सिद्धांत के परीक्षण में अरस्तु ने दो तरह के सिद्धांत पाए जिनके जरिए सत्य उद्घाटित होता है- १ अनुकरण तथा २ विधाओं की और अन्य संकल्पना। उनके चिंतन के केंद्र में त्रासदी का विश्लेषण है। यद्यपि अरस्तु के पोएटिक्स को पाश्चात्य चिंतन परंपरा में सार्वभौम मान्यता प्राप्त है किंतु उनकी रचना के हर अंश पर मत भिन्नता मिलती है। यह रचना पश्चिमी जगत में बहुत लंबे समय तक अनुपलब्ध रही। मध्यकाल और पुनर्जागरण के आरंभिक दौर में यह अबेर्रोस लिखित अरबी संस्करण के लैटिन अनुवाद के माध्यम से उपलब्ध हुई। == रूप और सामग्री == सौंदर्य संबंधी अरस्तु के कार्यों में काव्यशास्त्र, राजनीति तथा वाक् कला शामिल हैं। लेकिन पोएटिक्स का संबंध मुख्यतः नाटक से है। किसी समय अरस्तु की यह रचना मूल रूप में दो भागों में विभक्त थी । प्रत्येक भाग अलग-अलग भोजपत्रों के थान पर लिखा गया था। इसका केवल पहला भाग ही सुरक्षित रह सका जिसके २३ वें अध्याय में नाट्य कला के भाग के रूप में त्रासदी और महाकाव्य का वर्णन किया गया है। दूसरे खो गए भाग में कॉमेडी का वर्णन किया गया था। कुछ विद्वानों का अनुमान है कि ट्रैकटेटस कोइसलिनियनस ने दूसरे खो गए भाग की सामग्री का सार प्रस्तुत किया है। कुछ अन्य विद्वान इसकी ओर संकेत करते हैं कि “ट्रेजेडी” ग्रीक ट्रजोयडोस का भ्रांतिकारक अनुवाद है। === रूप === आधुनिक पुस्तकालयों में उपलब्ध २००१ में प्रकाशित अरस्तु की मूल रचनाओं के पोएटिक्स की विषय सूची पाँच भागों में विभक्त है। अनुकरणात्मक काव्य के मुख्य रूप त्रासदी, महाकाव्य तथा कॉमेडी संबंधी प्रारंभिक विमर्श त्रासदी की परिभाषा, तथा इसकी रचना के नियम। गुणात्मक हिस्से की परिभाषा तथा विश्लेषण। त्रासदी की संरचना के नियम: त्रासद आनंद, अथवा दर्शकों में भय या त्रास से विरेचन की उत्पत्ति। चार प्रकार के चारित्रिक गुणों की अनिवार्यता: अच्छा, उपयुक्त, वास्तविक, तथा सतत। कथानक के भीतर खोज जरूर होना चाहिए। कथ्य, कहानी, संरचना तथा काव्यशास्त्र से ऊपर। कवि के लिए यह आवश्यक है कि कथानक निर्माण करते समय वह सभी दृश्यों का मानसिक रूप से दृश्यांकन कर ले। कवि को कथानक के भीतर ही जटिलता और गतिशीलता का समावेश करना चाहिए साथ ही त्रासदी के विभिन्न तत्वों का समावेश करना चाहिए। कवि को विचार अनिवार्यतः चरित्रों के शब्दों और कार्यों द्वारा व्यक्त करना चाहिए, उन चरित्रों द्वारा बोले गए शब्दों के उच्चारण और उसके द्वारा व्यक्त होने वाले खास विचारों पर करीबी ध्यान रखते हुए। अरस्तु मानते थे कि ये सभी विभिन्न तत्व काव्य में इस क्रम में आने चाहिए कि वह सुफलदायक हो। हालांकि १९४८ ई. से मैसिडोनियन शास्त्रवादी एम.डी. पेट्रुसेव्सकी तथा अन्य विद्वानों ने यह मानने से इनकार कर दिया कि अरस्तु ने स्वयं ही त्रासदी की परिभाषा देते हुए विरेचन (कैथालसिस) शब्द का प्रयोग किया था। क्योंकि जैसा कि परिभाषा में प्रयुक्त अन्य शब्दों के साथ हुआ है वैसे इसपर पूर्व में या बाद में कहीं चर्चा नहीं हुई है। महाकाव्य और त्रासदी की संभावित आलोचनाएं और उनके समाधान त्रासदी महाकाव्य से उच्चतर कला: त्रासदी में वह सबकुछ है जो महाकाव्य में होता है, यहाँ तक कि उसके छंद भी। प्रस्तुतिकरण की वास्तविकता का अनुभव नाटक को पढ़ने में भी होता है और उसके अभिनय में भी। त्रासद अनुकरण को अपेक्षाकृत कम स्थान की आवश्यकता होती है। यदि उसमें और भी संघनित प्रभाव हो तो यह अधिक आनन्ददायक होता है। इसे खोने या कम होने का समय नहीं मिलता है। अनुकरण के महाकाव्य रूप में एकता की कमी होती है और घटनाओं की बहुलता होती है। और यह इस तथ्य से सिद्ध होता है कि एक महाकाव्य कई त्रासदियों के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध करा सकता है। === सामग्री === पोएटिक्स में अरस्तु ने काव्य के विभिन्न रूपों को तीन तरीकों से अलग बताया: सामग्री (मैटर) भाषा, लय, तथा गेयता, अरस्तु के अनुसार काव्यात्मक रचना की सामग्री तैयार करते हैं। जहाँ महाकाव्य केवल भाषा का प्रयोग करता है, उसके गायन में लय और गेयता भी शामिल होते हैं। कुछ काव्य रूपों में सभी सामग्रियों का मिश्रण शामिल रहता है। उदाहरण के लिए ग्रीक त्रासदी नाटक में कोरस गायन शामिल रहता है और इस तरह संगीत और भाषा सभी प्रस्तुति के अंग होते हैं। विषय अरस्तु ने त्रासदी और कॉमेडी में मौजूद मानवीय चरित्रों की प्रकृति में अंतर के द्वारा दोनों नाट्य रूपों में हमेशा अंतर किया है। अरस्तु ने पाया कि त्रासदी में गंभीर, महत्वपूर्ण, और सम्मानित लोगों को पात्र बनाया जाता है। दूसरी तरफ कॉमेडी कम मूल्यवान लोगों और मानवीय कमजोरियों तथा त्रुटियों पर केंद्रित रहता है। Aristotle introduces here the influential tripartite division of characters in superior (βελτίονας) to the audience, inferior (χείρονας), or at the same level (τοιούτους). पद्धति (मेथड) चरित्र (कैरेक्टर) == इन्हें भी देखें == पाश्चात्य काव्यशास्त्र == संदर्भ ==