411 REFERENCE · Wikipedia
कोलेस्टेरॉल
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
changed 267188022 Cholesterol.svg Cholesterol-3d.png (3β)-कोलेस्ट-5-एन-3-ओल (10R,13R)-10,13-डाइमिथाइल-17-(6-मिथाइलहैप्टेन-2-yl)-2,3,4,7,8,9,11,12,14,15,16,17-डोडेकाहाइड्रो-1H-साइक्लोपैन्टा[a]फिनैन्था-3-ओल 57-88-5 5775 5997 CC(C)CCCC(C)C1CCC2C1 (CCC3C2CC=C4C3(CCC(C4)O)C)C
C27H46O ३८६.६५ ग्रा./मोल श्वेत क्रिस्टलाइन चूर्णhttp://physchem.ox.ac.uk/MSDS/CH/cholesterol.html सेफ़्टी (एमएसडीएस) डाटा फ़ॉर कोलेस्ट्रॉल 20 अक्टूबर 2007 https://web.archive.org/web/20070712214801/http://physchem.ox.ac.uk/MSDS/CH/cholesterol.html 12 जुलाई 2007 dead १४८-१५०°से. ३६०°से. ०.०९५ मि.ग्रा/ली. (३० °से.)
thumb|200px|right|कोलेस्ट्रॉल क्रिस्टल का सूक्ष्मदर्शी दर्शन, जल में। छायाचित्र ध्युवीकृत प्रकाश में लिया गया है।
कोलेस्ट्रॉल या पित्तसांद्रव मोम जैसा एक पदार्थ होता है, जो यकृत से उत्पन्न होता है। यह सभी पशुओं और मनुष्यों के कोशिका झिल्ली समेत शरीर के हर भाग में पाया जाता है। कोलेस्ट्रॉल कोशिका झिल्ली का एक महत्वपूर्ण भाग है, जहां उचित मात्रा में पारगम्यता और तरलता स्थापित करने में इसकी आवश्यकता होती है। कोलेस्ट्रॉल शरीर में विटामिन डी, हार्मोन्स और पित्त का निर्माण करता है, जो शरीर के अंदर पाए जाने वाले वसा को पचाने में मदद करता है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल भोजन में मांसाहारी आहार के माध्यम से भी पहुंचता है यानी अंडे, मांस, मछली और डेयरी उत्पाद इसके प्रमुख स्रोत हैं। अनाज, फल और सब्जियों में कोलेस्ट्रॉल नहीं पाया जाता। शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लगभग २५ प्रतिशत उत्पादन यकृत के माध्यम से होता है। कोलेस्ट्रॉल शब्द यूनानी शब्द कोले और और स्टीयरियोज (ठोस) से बना है और इसमें रासायनिक प्रत्यय ओल लगा हुआ है। १७६९ में फ्रेंकोइस पुलीटियर दी ला सैले ने गैलेस्टान में इसे ठोस रूप में पहचाना था। १८१५ में रसायनशास्त्री यूजीन चुरवेल ने इसका नाम कोलेस्ट्राइन रखा था।http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/gyan/67-75-64331.html
कोलेस्ट्रॉल
15 जुलाई 2009
एचटीएमएल
हिन्दुस्तान लाइव
हिन्दी
https://web.archive.org/web/20150417065654/http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/gyan/67-75-64331.html
17 अप्रैल 2015
live
मानव शरीर को कोलेस्ट्रॉल की आवश्यकता मुख्यतः कोशिकाओं के निर्माण के लिए, हारमोन के निर्माण के लिए और बाइल जूस के निर्माण के लिए जो वसा के पाचन में मदद करता है; होती है। फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में नैशनल पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट के प्रमुख रिसर्चर डॉ॰ गांग हू के अनुसार कोलेस्ट्रॉल अधिक होने से पार्किंसन रोग की आशंका बढ़ जाती है।
प्रकार
कोलेस्ट्रॉल रक्त में घुलनशील नहीं होता है। उसका कोशिकाओं तक एवं उनसे वापस परिवहन लिपोप्रोटींस नामक वाहकों द्वारा किया जाता है। निम्न-घनत्व लिपोप्रोटीन या एलडीएल, बुरे कोलेस्ट्रॉल के नाम से जाना जाता है। उच्च-घनत्व लिपोप्रोटीन या एचडीएल, अच्छे कोलेस्ट्रॉल के नाम से जाना जाता है। ट्राइग्लीसिराइड्स एवं Lp (a) कोलेस्ट्रॉल के साथ ये दो प्रकार के लिपिड, कुल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बनाते हैं, जिसे रक्त परीक्षण के द्वारा ज्ञात किया जा सकता है।
कोलेस्ट्रॉल मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं।
एल डी एल
निम्न घनत्व कोलेस्ट्रॉल
न्यूनघनत्व लिपोप्रोटीन (लो डेनसिटी लिपोप्रोटीन्स) कोलेस्ट्रॉल को सबसे ज्यादा नुकसानदायक माना जाता है। इसका उत्पादन लिवर द्वारा होता है, जो वसा को लिवर से शरीर के अन्य भागों मांसपेशियों, ऊतकों, इंद्रियों और हृदय तक पहुंचाता है। यह बहुत आवश्यक है कि एल डी एल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम रहे, क्योंकि इससे यह पता चलता है कि रक्त के प्रवाह में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो गई है। ऐसे में यह रक्तनली की दीवारों पर यह जमना शुरू हो जाता है और कभी-कभी नली के छिद्र बंद हो जाते हैं। परिणामस्वरूप हार्टअटैक की संभावना बढ़ जाती है। राष्ट्रीय कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार शरीर में एल डी एल कोलेस्ट्रॉल का स्तर १०० मिली ग्राम/डीएल से कम होना चाहिए। एलडीएल (बुरा) कोलेस्ट्रॉल अत्यधिक होता है, तो यह धीरे-धीरे हृदय तथा मस्तिष्क को रक्त प्रवाह करने वाली धमनियों की भीतरी दीवारों में जमा होता जाता है। यदि एक थक्का (क्लॉट) जमकर संकरी हो चुकी धमनी में रुकावट डाल देता है, तो इसके परिणामस्वरूप हृदयाघात या स्ट्रोक हो सकता है।
एच डी एल
उच्च घनत्व कोलेस्ट्रॉल
उच्च घनत्व लिपोप्रोटीन (हाई डेनसिटी लिपोप्रोटीन्स) को अच्छा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है।http://hindi.webduniya.com/miscellaneous/health/disease/0807/29/1080729037_1.htm
कोलेस्ट्रॉल बुरा ही नहीं अच्छा भी
पांड्या
डॉ॰ सोना
वेब दुनिया
०२
हिन्दी
जून 2023 InternetArchiveBot
इसका उत्पादन भी यकृत ही से होता है, जो कोलेस्ट्रॉल और पित्त को ऊतकों और इंद्रियों से पुनष्चक्रित करने के बाद वापस लिवर में पहुंचाता है। एच डी एल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का अधिक होना एक अच्छा संकेत है, क्योंकि इससे हृदय के स्वस्थ होने का पता चलता है।राष्ट्रीय कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार शरीर में एच डी एल कोलेस्ट्रॉल का स्तर ६० मिली ग्राम/डीएल से अधिक नहीं होनी चाहिए। अच्छे कोलेस्ट्रॉल भोजन में शामिल हैं अखरोट,आवला,प्याज,लहसुन,ओमेगा 3 फैटी एसिड,अलसी,फाइबर युक्त फल, मछली का तेल, सोयाबीन उत्पाद, एवं हरी पत्तेदार सब्ज़ियां।https://webpostguru.com/2022/03/how-to-increase-hdl-cholesterol-in-hindi/ एच डी एल कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने के घरेलू उपाय पांडे डॉ अमित 2022-03-04 webpostguru.com Hindi 2022-12-04 4 दिसंबर 2022 https://web.archive.org/web/20221204104605/https://webpostguru.com/2022/03/how-to-increase-hdl-cholesterol-in-hindi/ dead सप्ताह में पांच दिन, एवं प्रत्येक बार लगभग ३० मिनट के लिए ऐरोबिक व्यायाम (पैदल चलना, दौड़ना, सीढ़ी चढ़ना आदि) करें तो केवल दो महीनों में एचडीएल ५ प्रतिशत से बढ़ा सकते हैं। धूम्रपान कम या बंद करने भर से एचडीएल १० प्रतिशत से बढ़ सकता है। वज़न कम करना भी अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का अन्य तरीका है। शरीर का वज़न प्रत्येक छ: पाउण्ड कम करने पर शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रॉल १ मिली ग्राम/डेसि.लि. से बढ़ा सकते हैं।
वी एल डी एल
अत्यधिक निम्न घनत्व कोलेस्ट्रॉल
अतिन्यून घनत्व लिपोप्रोटीन (वेरी लो डेनसिटी लिपोप्रोटीन्स) शरीर में लिवर से ऊतकों और इंद्रियों के बीच कोलेस्ट्रॉल को ले जाता है। वी एल डी एल कोलेस्ट्रॉल, एल डी एल कोलेस्ट्रॉल से ज्यादा हानिकारक होता है। यह हृदय रोगों का कारण बनता है।
वृद्धि के कारक
सामान्य परिस्थितियों में यकृत कोलेस्ट्रॉल के उत्सजर्न और विलयन के बीच संतुलन बनाए रखता है, किन्तु यह संतुलन कई बार बिगड़ भी जाता है। इसके पीछे कुछ कारण हैं। यह संतुलन तब बिगड़ता है, जब:
अधिक मात्रा में वसा युक्त भोजन सेवन
शरीर का वजन की अति वृद्धि
खानपान में लापरवाही
नियमित व्यायाम का अभाव
आनुवांशिक कारण भी है। देखा गया है कि अगर किसी परिवार के लोगों में अधिक कोलेस्ट्रॉल की शिकायत होती है तो अगली पीढ़ी में भी इसकी मात्रा अधिक होने की आशंका रहती है।
कई लोगों में शरीर में कोलेस्ट्रॉल उम्र के साथ भी बढ़ता देखा जाता है।
वृद्धि-लक्षण
कोलेस्ट्रॉल के बढ़ जाने का अनुभव स्वयं किया जा सकता है। ये वृद्धि तब होती समझें जब-
पैदल चलने पर सांस फूलने लगता हो।
उच्च रक्तचाप रहने लगा हो।
मधुमेह रोगी, शर्करा मात्रा अधिक रहने से उनका खून गाढ़ा होता है।
पैरों में दर्द रहने लगा हो। अन्य कोई कारण न होने से कोलेस्ट्रॉल वृद्धि हो सकता है।
परीक्षण
लिपिड प्रोफाइल
लिपिड प्रोफाइल परीक्षण, के अंतर्गत्त कुल कोलेस्ट्राल, उच्च घनत्व कोलेस्ट्रॉल (हाई डेनसिटी लिक्विड कोलेस्ट्राल), निम्न घनत्व कोलेस्ट्रॉल, अति निम्न घनत्व कोलेस्ट्रॉल और ट्राय ग्लिसेराइड की जांच होती है। ये जांच नियमित रूप से हर साल करवानी चाहिये। यदि उच्च रक्तचाप की पारिवारिक इतिहास है तो पैतालीस साल की आयु के बाद इसे जल्दी जल्दी करवा लेनी चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल का संतुलन
शरीर में कोलेस्ट्रॉल को स्वयं देख नहीं सकते, सिर्फ अनुभव कर सकते हैं। जब इसकी मात्रा अधिक हो जाती है तो हृदयाघात और दिल से संबंधित अन्य रोगों की संभावना बढ़ जाती है। आम तौर पर पुरुषों के लिए ४५ वर्ष और महिलाओं के लिए ५५ वर्ष की आयु के बाद हृदय से जुड़े रोगों की संभावना अधिक होती है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि अपने शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को संतुलित न कर सकते हों। इसके लिए अपनी जीवन शैली में थोड़ा बदलाव करना होता है। यदि वजन अधिक है तो इसमें कमी लाने का प्रयास करना चाहिये। भोजन में कम कोलेस्ट्रॉल मात्रा वाले व्यंजन चुनें। तैयार भोजन और फास्ट फूड से बचें। तली हुई चीजें, अधिक मात्रा में चॉकलेट न खाएं। भोजन में रेशायुक्त सामग्री को शामिल करें। यह कोलेस्ट्रॉल को संतुलित बनाए रखने में सहायक होते हैं।
नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में बढ़ोतरी नहीं होती। इसके अलावा, योगासन भी सहायक होते हैं। कोलेस्ट्रॉल कम करने में प्राणायाम काफी सहायक सिद्ध हुआ है। धूम्रपान से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। कोलेस्ट्रॉल का चिकित्सकीय उपचार भी संभव है। कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा से पीड़ित व्यक्तियों हेतु कई तरह के उपचार संभव हैं, पर इस पर आरंभ से नियंत्रण करना ही इसका सबसे बढ़िया उपाय है। ऐलोपैथी में कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए स्टेटिन दवा दी जाती है। होम्योपैथी में कोलेस्ट्रॉल को हाइपरलिपिडिमिया कहते हैं। इसमें सिर्फ नियंत्रण के लिए ही कुछ दवाइयां उपलब्ध हैं, जबकि आयुर्वैदिक दवाओं में आरोग्यवर्धिनी, पुनर्नवा मंडूर, त्रिफला, चन्द्रप्रभा वटी और अर्जुन की छाल के चूर्ण का काढ़ा बहुत लाभकारी होता है।
अन्य नियंत्रक
हाल में हुए अध्ययनों में पता लगा है कि हरी और काली चाय कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने में कारगर है। जो लोग ज्यादा चाय पीते हैं उनमें कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है और स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएँ भी कम होती हैं। हरी और काली चाय में जो प्राकृतिक रूप से कुछ रसायनों का मिश्रण होता है, उनसे कोलेस्ट्रॉल काफ़ी कम हो जाता है। इसके लिए हरी चाय अकेले काफी नहीं है, बल्कि उसके साथ निम्न वसा आहार भी लिया जाए तो दिल के दौरे का खतरा १६-२४ प्रतिशत कम हो सकता है।http://hindi.webduniya.com/miscellaneous/health/healthnews/0903/17/1090317048_1.htm
चाय से कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण
२० सितंबर २००९
वेब दुनिया
हिन्दी
मई 2024 InternetArchiveBot
प्रोफेसर रोजर कॉर्डर के अनुसार एक गिलास रेड वाइन को अपनी दैनिक जीवन शैली में शामिल करना चाहिए। इसमें प्रोसाइन्डिंस नामक रसायन होता है जो स्वास्थ्यवर्धक होता है, यह डार्क चॉकलेट में भी पाया जाता है। यह रक्तवाहिका प्रकार्यों को बेहतर करते हैं, आर्टरी-क्लॉगिंग एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम करते हैं और हार्ट के लिए हेल्दी एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ाते हैं।
मछली का तेल भी बुरे कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में बहुत सहायक होता है।http://www.articlestreet.com/lang/hi/health/alternative-medicine/natural-alternative-remedies-to-lower-blood-pressure-and-cholesterol.html
प्राकृतिक वैकल्पिक लोअर रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को उपचार
लेख स्ट्रीट
हिन्दी
फोलिक एसिड के कैप्सूल भी लाभदायक होते हैं।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
9 खाद्य पदार्थ कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करने के लिए https://web.archive.org/web/20241208183504/http://www.neelscorner.com/hi/9-foods-to-help-reduce-cholesterol/ 8 दिसंबर 2024 ।।१६ दिसंबर,२००८। नील। नील्स कॉर्नर
कोलेस्टरोल की इतनी जानकारी सबको जरूरी है!
श्रेणी:कार्बनिक यौगिक
श्रेणी:स्टीरॉएड
श्रेणी:स्टिरॉल
श्रेणी:लिपिड रोग
श्रेणी:पोषण
श्रेणी:कोलेस्ट्रॉल
श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना