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रफिया मंजूरूल अमीन
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thumb|right|200px|रफिया मंजूरूल अमीनरफिया मंजूरूल अमीन (१९३०- ३० जून २००८) उर्दू की जानीमानी लेखिकाओं में से हैं। उनका पहला उपन्यास था 'सारे जहाँ का दर्द'। जो कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखा गया था और इसे लखनऊ के नसीम अनहोन्वी के प्रकाशन ने छापा था। उनका दूसरा उपन्यास था--'ये रास्ते' और इसके बाद आया 'आलमपनाह'। उन्होंने दो सौ से ज्यादा कहानियाँ लिखी हैं। वे विज्ञान की छात्रा थीं और उन्होंने एक विज्ञान-पुस्तक भी लिखी--'साइंसी ज़ाविये'। ९० के दशक में रेडियो पर आलमपनाह का रूपांतरण जितना लोकप्रिय हुआ था उतना ही लोकप्रिय हुआ था इसका टी.वी. रूपांतरण। http://radionamaa.blogspot.com/2008/07/blog-post_23.html नहीं रहीं मशहूर कृति 'आलमपनाह' की लेखिका रफिया मंजूरूल अमीन २४ जुलाई २००८ एचटीएमएल रेडियोनामा https://web.archive.org/web/20111002064038/http://radionamaa.blogspot.com/2008/07/blog-post_23.html 2 अक्तूबर 2011 dead
सन्दर्भ
श्रेणी:उर्दू साहित्यकार
श्रेणी:उर्दू लेखिका