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तमिल

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तमिळ लोग தமிழர் ta 7 करोड़ 60 लाखtam Tamil भारत 69,026,881 (2011)http://www.censusindia.gov.in/2011Census/Language-2011/Statement-1.pdf Statement 1 : Abstract of speakers' strength of languages and mother tongues – 2011 30 मार्च 2020 https://web.archive.org/web/20181114073426/http://www.censusindia.gov.in/2011Census/Language-2011/Statement-1.pdf 14 नवंबर 2018 live श्री लंका 3,135,770 (2012)Census of Population and Housing of Sri Lanka, 2012 – Table A3: Population by district, ethnic group and sex http://www.statistics.gov.lk/PopHouSat/CPH2011/Pages/Activities/Reports/FinalReport/Population/Table%20A3.pdf Department of Census and Statistics, Sri Lanka 30 मार्च 2020 https://web.archive.org/web/20160304202454/http://www.statistics.gov.lk/PopHouSat/CPH2011/Pages/Activities/Reports/FinalReport/Population/Table%20A3.pdf 4 मार्च 2016 live मलेशिया 1,800,000 सिंगापुर 192,665+ (2015)Basic Demographic Characteristics: Table 6 Indian Resident Population by Age Group, Dialect Group and Sex http://www.singstat.gov.sg/publications/publications_and_papers/cop2010/census_2010_release1/excel/t1-11.xls Census of Population 2010 Statistical Release 1: Demographic Characteristics, Education, Language and Religion Department of Statistics, Singapore dead https://web.archive.org/web/20130908091821/http://www.singstat.gov.sg/publications/publications_and_papers/cop2010/census_2010_release1/excel/t1-11.xls 8 September 2013 General Household Survey 2015 - Department of Statistics, Ministry of Trade & Industry, Republic of Singaporenote Note: The Singapore Tamil population data excludes Tamils who were unable to speak, and those in one-person households and households comprising only unrelated persons. other see तमिल प्रवासी तमिल, मलयालम, अंग्रेज़ी <b>15px हिन्दू धर्म<b> बहुमत15px शैवअल्पसंख्यकों:वैष्णव अय्यावड़ी 12pxजैन धर्म 18pxबौद्ध धर्म दूसरे द्रविड़, सिंहलीKshatriya, G.K. 1995 Genetic affinities of Sri Lankan populations Human Biology 67 6 843–66 8543296 right|thumb|260px|एक तमिल परिवार right|thumb|260px|श्रीलंका में तमिल बच्चे right|thumb|200px|भरतनाट्यम् तमिल (तमिळ)एक मानव प्रजातीय मूल है, जिनका मुख्य निवास भारत के तमिलनाडु तथा उत्तरी श्रीलंका में है। तमिल समुदाय से जुड़ी चीजों को भी तमिल कहते हैं जैसे, तमिल तथा तमिलनाडु के वासियों को भी तमिल कहा जाता है। तामिल, द्रविड़ जाति की ही एक शाखा है। मनुसंहिता, महाभारत आदि प्राचीन ग्रन्थों में द्रविड देश और द्रविड जाति का उल्लेख है। मागधी प्राकृत या पाली में इसी 'द्राविड' शब्द का रूप 'दामिलो' हो गया। तामिल वर्णमाला में त, ष, द आदि के एक ही उच्चारण के कारण 'दामिलो' का 'तामिलो' या 'तामिल' हो गया। शंकराचार्य के शारीरक भाष्य में 'द्रमिल' शब्द आया है। हुएनसांग नामक चीनी यात्री ने भी द्रविड देश को 'चि—मो—लो' करके लिखा है। तमिल व्याकरण के अनुसार द्रमिल शब्द का रूप 'तिरमिड़' होता है। आजकल कुछ विद्वानों की राय हो रही है कि यह 'तिरमिड़' शब्द ही प्राचीन है जिससे संस्कृतवालों ने 'द्रविड' शब्द बना लिया। जैनों के 'शत्रुंजय माहात्म्य' नामक एक ग्रन्थ में 'द्रविड' शब्द पर एक विलक्षण कल्पना की गई है। उक्त पुस्तक के मत से आदि तीर्थकर ऋषभदेव को 'द्रविड' नामक एक पुत्र जिस भूभाग में हुआ, उसका नाम 'द्रविड' पड़ गया। पर भारत, मनुसंहिता आदि प्राचीन ग्रन्थों से विदित होता है कि द्रविड जाति के निवास के ही कारण देश का नाम द्रविड पड़ा। तामिल जाति अत्यन्त प्राचीन हे। पुरातत्वविदों का मत है कि यह जाति अनार्य है और आर्यों के आगमन से पूर्व ही भारत के अनेक भागों में निवास करती थी। रामचन्द्र ने दक्षिण में जाकर जिन लोगों की सहायता से लंका पर चढ़ाई की थी और जिन्हें वाल्मीकि ने बन्दर लिखा है, वे इसी जाति के थे। उनके काले वर्ण, भिन्न आकृति तथा विकट भाषा आदि के कारण ही आर्यों ने उन्हें बन्दर कहा होगा। पुरातत्ववेत्ताओं का अनुमान है कि तामिल जाति आर्यों के संसर्ग के पूर्व ही बहुत कुछ सभ्यता प्राप्त कर चुकी थी। तामिल लोगों के राजा होते थे जो किले बनाकर रहते थे। वे हजार तक गिन लेते थे। वे नाव, छोटे मोटे जहाज, धनुष, बाण, तलवार इत्यादि बना लेते थे और एक प्रकार का कपड़ा बुनना भी जानते थे। राँगे, सीसे और जस्ते को छोड़ और सब धातुओं का ज्ञान भी उन्हें था। आर्यों के संसर्ग के उपरान्त उन्होंने आर्यों की सभ्यता पूर्ण रूप से ग्रहण की। दक्षिण देश में ऐसी जनश्रुति है कि अगस्त्य ऋषि ने दक्षिण में जाकर वहाँ के निवासियों को बहुत सी विद्याएँ सिखाई। बारह-तेरह सौ वर्ष पहले दक्षिण में जैन धर्म का बड़ा प्रचार था। चीनी यात्री हुएनसांग जिस समय दक्षिण में गया था, उसने वहाँ दिगम्बर जैनों की प्रधानता देखी थी। तमिल भाषा का साहित्य भी अत्यन्त प्राचीन है। दो हजार वर्ष पूर्व तक के काव्य तामिल भाषा में विद्यमान हैं। पर वर्णमाला नागरी लिपि की तुलना में अपूर्ण है। अनुनासिक पंचम वर्ण को छोड़ व्यंजन के एक एक वर्ग का उच्चारण एक ही सा है। क, ख, ग, घ, चारों का उच्चारण एक ही है। व्यंजनों के इस अभाव के कारण जो संस्कृत शब्द प्रयुक्त होते हैं, वे विकृत्त हो जाते हैं; जैसे, 'कृष्ण' शब्द तामिल में 'किट्टिनन' हो जाता है। तामिल भाषा का प्रधान ग्रन्थ कवि तिरुवल्लुवर रचित कुराल काव्य है। इतिहास भारत में प्रागैतिहासिक काल कई अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकला कि आम तौर पर प्रोटो-तमिल, और द्रविड़ लोग जुड़े हुए हैं और प्राचीन दक्षिणी ईरान में नियोलिथिक ज़ग्रोस किसानों के साथ एक आम उत्पत्ति साझा करते हैं, जो बाद में इलाम के रूप में जाना जाता है। यह नवपाषाण पश्चिम एशियाई संबंधित वंश सभी दक्षिण एशियाई लोगों का मुख्य पुश्तैनी घटक है। एस्को पारपोला के अनुसार, अधिकांश अन्य द्रविड़ लोगों के रूप में प्रोटो-तमिल, सिंधु घाटी सभ्यता के वंशज हैं, जो संभवतः एलामाइट्स से भी जुड़ा हुआ है।https://www.sciencedaily.com/releases/2016/07/160714151201.htm Prehistoric genomes from the world's first farmers in the Zagros mountains reveal different Neolithic ancestry for Europeans and South Asians ScienceDaily en 2020-05-14 https://web.archive.org/web/20200202131918/https://www.sciencedaily.com/releases/2016/07/160714151201.htm 2 फ़रवरी 2020 livehttps://books.google.at/books?id=Ld3XCQAAQBAJ&pg=PA166&lpg=PA166&dq=brahui+indus+valley+origin&source=bl&ots=QTq0zix1my&sig=ACfU3U0cyf1S25Cq5nFkeUxp6BJdfYWf1g&hl=de&sa=X&ved=2ahUKEwiKorCuyrroAhXvlYsKHZaqCq84ChDoATABegQIARAB#v=onepage&q=brahui%20indus%20valley%20origin&f=false The Roots of Hinduism: The Early Aryans and the Indus Civilization Parpola Asko 2015-07-15 Oxford University Press 978-0-19-022691-6 en आज के तमिलनाडु में तमिल लोगों की उपस्थिति के प्रमाण महापाषाणकाल के दफनाये गए पात्रों में के रूप में मिलते हैं जो संभवतः 1500 वर्ष ईसा पूर्व के आसपास के हैं, जिन्हें कई जगहों पर, विशेषकर तिरुनेलवेली जिले के आदिकनाल्ल्रूर में, उत्खनन में प्राप्त किया गया हैJohn Vino Reading the past in a more inclusive way: Interview with Dr. Sudharshan Seneviratne Frontline 27 January 2006 http://www.flonnet.com/fl2301/stories/20060127003610200.htm 9 July 2008 But Indian/south Indian history/archaeology has pushed the date back to 1500 B.C., and in Sri Lanka, there are definitely good radiometric dates coming from Anuradhapura that the non-Brahmi symbol-bearing black and red ware occur at least around 900 B.C. or 1000 B.C. dead https://web.archive.org/web/20090202174036/http://www.flonnet.com/fl2301/stories/20060127003610200.htm 2 February 2009 K. De B. Codrington October 1930 Indian Cairn- and Urn-Burials Man 30 30 190–196 10.2307/2790468 free ... at Perambair & Pallavaram a second type of burial exists in legged urns ... Royal Anthropological Institute of Great Britain and Ireland 2790468Comparative excavations carried out in Adichanallur in Thirunelveli district and in Northern India have provided evidence of a southward migration of the Megalithic culture – K.A.N. Sastri, A History of South India, pp49–51 और इनके द्वारा शास्त्रीय युग के तमिल साहित्य में वर्णित अंतिम संस्कार के वर्णनों की पुष्टि होती है। K. De B. Codrington October 1930 Indian Cairn- and Urn-Burials Man 30 30 194 It is necessary to draw attention to certain passages in early Tamil literature which throw a great deal of light upon this strange burial ceremonial ... 2790468 दसवीं सदी के बाद से तमिलों की प्राचीनता के विषय में कई प्रकार की कथाएँ प्रचलन में दिखलाई पड़ती हैं। इरइयन्नार अगप्पोरुल के अनुसार, जो संगम साहित्य पर दसवीं/ग्यारहवीं सदी की टीका है, तमिल देश का दक्षिणी विस्तार (कुमारि कंदम अथवा लेमूरिया) भारतीय उपमहादीप के वर्तमान भैतिक सीमाओं से कहीं अधिक दूर तक विस्तृत था और कुल 49 नाडुओं (उपविभागों) से मिलकर बना था। यह भूमि एक भयावह बाढ़ में नष्ट हो गयी मानी जाती है। संगम कथाएँ तमिल प्राचीनता के दावे के रूप में तीन संगमों के दौरान, दस हजार वर्षों के सतत साहित्यक गतिविधियों का उल्लेख करतीं हैं।Nilakanta Sastri, A history of South India, p 105 प्राचीन युग thumb|upright|उत्कीर्णित धूसर मृद्भांड, अरिकामेदु, पहली सदी ईसवी प्राचीन काल में तमिलों की भूमि पर तीन राजसत्ताओं का शासन था, जिनके मुखिया के रूप में राजा को "वेंधार" कहा गया है और कई जनजातीय सरदारों द्वारा नियंत्रित बड़े कबीलों में विभक्त था, सरदारों को "वेळ" अथवा "वेळिर" कहा गया ह।K.A.N. Sashtri, A History of South India, pp 109–112 और निचले स्तर के कबीलों के मुखिया को "किझर" अथवा "मन्नार" के नाम से जाना जाता था।'There were three levels of redistribution corresponding to the three categories of chieftains, namely: the Ventar, Velir and Kilar in descending order. Ventar were the chieftains of the three major lineages, viz Cera, Cola and Pandya. Velir were mostly hill chieftains, while Kilar were the headmen of settlements ...' — Perspectives on Kerala History P.J.Cherian (Ed), http://www.keralahistory.ac.in/historicalantecedents.htm https://web.archive.org/web/20060826094724/http://www.keralahistory.ac.in/historicalantecedents.htm 26 August 2006 Kerala Council for Historical Research 15 November 2006 तमिल सरदार और राजा हमेशा राज्यक्षेत्रों और संपत्ति को लेकर श्रेष्ठता साबित करने के लिए आपस में लड़ते रहते थे। शाही दरबार एक प्रकार के सामाजिक मेलमिलाप हेतु एकत्रण के स्थल थे न कि सत्ता के नियंत्रण के स्थल थे; वे संसाधनों के वितरण के केन्द्र के रूप में थे। प्राचीन तमिल संगम साहित्य; और व्याकरण सम्बन्धी रचना, तोलकप्पियम; दस काव्यगाथाएँ, पत्तुपट्टु; और आठ महा गाथाएँ, एट्टुत्तोकोइ; सभी प्राचीन तमिल लोगों पर प्रकाश डालते हैं।Kanchan Sinha, Kartikeya in Indian art and literature, Delhi: Sundeep Prakashan (1979). राजा और सरदार कला के प्रश्रयदाता थे और इस काल का साहित्य पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। K. Sivathamby December 1974 Early South Indian Society and Economy: The Tinai Concept Social Scientist 3 5 20–37 Those who ruled over small territories were called Kurunilamannar. The area ruled by such a small ruler usually corresponded to a geographical unit. In Purananuru a number of such chieftains are mentioned;.. 10.2307/3516448 free Social Scientist 3516448 इस साहित्यिक रचनाओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि बहुत से सांस्कृतिक रिवाज जो ख़ासतौर पर तमिलों के माने जाते हैं, इस शास्त्रीय युग जितने पुराने हैं। कृषि का इस युग में पर्याप्त महत्त्व था और इस बात के सबूत भी मिलते हैं कि सिंचाई के संजाल हेतु कृत्रिम जलमार्गों का निर्माण करने की कला तीसरी सदी ईसापूर्व तक पुरानी है। http://www.britannica.com/eb/article-9021884/Cauvery-River Grand Anaicut Encyclopædia Britannica 3 May 2006 https://web.archive.org/web/20080726171728/http://www.britannica.com/eb/article-9021884/Cauvery-River 26 जुलाई 2008 live आन्तरिक और बाह्य वाणिज्य काफी फलाफूला और प्राचीन रोम के साथ संपर्क के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध होते हैं। करूर और अरिकामेदु में उत्खननों में भारी मात्र में प्राप्त रोमन सिक्के यहाँ रोमन व्यापारियों की उपस्थति का प्रबल प्रमाण हैं। M. G. S. Narayanan September 1988 The Role of Peasants in the Early History of Tamilakam in South India Social Scientist 16 9 17–34 10.2307/3517170 free Social Scientist 3517170 पांड्य राजाओं द्वारा कम से कम दो दूतदल रोम के सम्राट ऑगस्टस के दरबार में भेजे गए थे। http://www.britannica.com/eb/article-9058245/Pandya-Dynasty Pandya Dynasty Encyclopædia Britannica 3 May 2007 https://web.archive.org/web/20070429111058/http://www.britannica.com/eb/article-9058245/Pandya-Dynasty 29 अप्रैल 2007 live तमिल लेखनयुक्त मृद्भांडों के टुकड़े लाल सागर के क्षेत्रों के उत्खनन में प्राप्त हुए हैं जो इस इलाके में तमिल व्यापारियों की उपस्थिति का प्रमाण हैं।Veluppillai, Prof. A. "Archaeologists Uncover Ancient Maritime Spice Route Between India, Egypt" तमिलों का यह प्राचीन स्वर्णयुग लगभग चौथी सदी के आसपास अपने अंत तक आ पहुँचा जब इनपर कालाभ्र द्वारा आक्रमण हुए। इन्हें तमिल साहित्य और शिलालेखों में कलप्पिरार के नाम से संबोधित किया गया है। इन आक्रान्ताओं का विवरण तमिल भूमि के उत्तर से आये बर्बर और दुर्दान्त लोगों के रूप में मिलता है।'Kalabhraas were denounced as 'evil kings' (kaliararar) – K.A.N. Sastri, A History of South India, p. 130 तमिल अंध युग के नाम से जाना जाने वाला यह दौर पल्लव साम्राज्य के उत्थान के साथ खत्म हुआ। Indian Geographical Society The Indian Geographical Journal 1941 69 These Kalabhras were thrown out by the powerful Pallava dynasty in the fourth century AD ... this period is aptly known as "Dark Ages" of Tamil Nadu.K.A.N. Sastri, A History of South India Marilyn Hirsh 1987 Mahendravarman I Pallava: Artist and Patron of Mamallapuram Artibus Asiae 48 1/2 http://www.jstor.org/stable/3249854 3 May 2007 122 10.2307/3249854 free 3249854 https://web.archive.org/web/20160201121405/https://www.jstor.org/stable/3249854 1 फ़रवरी 2016 live क्लैरेंस मेलनी के अनुसार, तमिल स्वर्णयुग के दौरान तमिल लोग मालदीव द्वीपसमूह पर भी बसे हुए थे।Maldives People Maloney, Clarence http://www.iias.nl/iiasn/iiasn5/insouasi/maloney.html 22 June 2008 https://web.archive.org/web/20020129221500/http://www.iias.nl/iiasn/iiasn5/insouasi/maloney.html 29 जनवरी 2002 dead संगम समाज और तमिल नैतिकता तमिल सभ्यता का आधारभूत ढाँचा संगम काल में स्थापित हुआ, जो एक धर्मनिरपेक्ष (secular), अत्यधिक शहरीकृत (urbanized) और साक्षर (literate) समाज था। यह काल ज्ञान, व्यापार और लौकिक जीवन के उत्सव के लिए जाना जाता है। अरम और धर्म में वैचारिक अंतर तमिल सभ्यता की वैचारिक, सामाजिक और नैतिक धुरी विशुद्ध रूप से 'अरम' (Aram - அறம்) की संकल्पना पर आधारित है। समाजशास्त्रीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह स्पष्ट करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि तमिल 'अरम' उत्तरी भारत की 'धर्म' (Dharma) की अवधारणा से मौलिक और दार्शनिक रूप से पूर्णतः भिन्न है, तथा इन दोनों वैचारिक प्रणालियों को एकसमान मानना एक गंभीर ऐतिहासिक त्रुटि है। उत्तर भारतीय शास्त्रीय ग्रंथों में 'धर्म' की अवधारणा प्रायः 'वर्ण' (Varna - जन्म-आधारित सामाजिक व्यवस्था), पदानुक्रमित सामाजिक व्यवस्था (hierarchical social order) और कर्मकांडीय अनुष्ठानों (ritualistic duty) के साथ अटूट रूप से जुड़ी हुई है। इसके विपरीत, तमिल 'अरम' एक अत्यंत धर्मनिरपेक्ष (secular), समतावादी (egalitarian) और सार्वभौमिक मानवतावाद (universal humanism) का प्रतीक है। 'अरम' किसी व्यक्ति के जन्म, जाति या धार्मिक कर्मकांडों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह विशुद्ध रूप से वस्तुनिष्ठ सद्गुण (objective virtue), व्यक्तिगत सम्मान (personal honor), सामूहिक कर्तव्य (collective duty) और निष्पक्ष न्याय (universal justice) की स्थापना करता है। इस दार्शनिक भिन्नता का प्राचीन तमिल समाज की संरचना पर गहरा प्रभाव पड़ा। जहाँ उत्तरी समाज पुरोहिती कर्मकांडों (priestly rituals) और धार्मिक पदानुक्रम के इर्द-गिर्द संरचित था, वहीं प्राचीन तमिल समाज नागरिक कर्तव्यों (civic duty) और शौर्यपूर्ण सम्मान के चारों ओर बुना गया था। इसी वैचारिक स्वतंत्रता ने संगम समाज को 'अगम' (Agam - प्रेम और पारिवारिक जीवन) और 'पुरम' (Puram - वीरता, युद्ध और राज्यकला) के एक आदर्श समाजशास्त्रीय संतुलन में ढाला। 'अरम' की यह सर्वोच्च और सबसे परिष्कृत अभिव्यक्ति महाकवि तिरुवल्लुवर द्वारा रचित 'तिरुक्कुरल' (Tirukkural) में मिलती है। तिरुक्कुरल केवल एक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह 'अरम' का एक परम और विधिवत संहिताबद्ध (codified) रूप है। तिरुक्कुरल एक शासक और एक नागरिक का मार्गदर्शन धार्मिक तुष्टीकरण (religious appeasement) या देवताओं को प्रसन्न करने के आधार पर नहीं, बल्कि पूर्ण रूप से सत्य, न्याय और मानवीय सद्गुणों के आधार पर करता है। यह तमिल लोगों का सर्वोच्च, धर्मनिरपेक्ष नैतिक विधान है, जो किसी भी विशिष्ट ईश्वर, धर्म या कर्मकांड से परे मानव जीवन के लिए एक सार्वभौमिक आचार संहिता प्रस्तुत करता है। शास्त्रीय तमिल समाज और साहित्य का समाजशास्त्रीय ढाँचा दो मूल श्रेणियों में विभाजित था: 'अगम' (Agam) और 'पुरम' (Puram)। 'अगम' का तात्पर्य मनुष्य के आंतरिक जीवन, प्रेम, भावनाओं और पारिवारिक संबंधों से था। वहीं, 'पुरम' मनुष्य के बाहरी जीवन, युद्ध, राज्यकला (statecraft), वीरता, और सार्वजनिक कर्तव्यों का प्रतिनिधित्व करता था। इस 'अगम' और 'पुरम' के दर्शन ने तमिल सभ्यता को एक आदर्श संतुलन प्रदान किया, जिससे एक ओर जहाँ वीर योद्धाओं और कुशल प्रशासकों का निर्माण हुआ, वहीं दूसरी ओर एक अत्यंत संवेदनशील, काव्यात्मक और प्रेमपूर्ण समाज भी फला-फूला।The Smile of Murugan: On Tamil Literature of South India https://archive.org/details/smileofmuruganon0000zvel Kamil Zvelebil 1973 Brill 90-04-03591-5Tirukkural Thiruvalluvar (translated by G. U. Pope) 1886 W.H. Allen & Co. मध्यकालीन साम्राज्य और भू-राजनीतिक प्रभुत्व तमिल इतिहास में मध्यकाल एक अभूतपूर्व भू-राजनीतिक और सैन्य वर्चस्व का युग था। इस काल में, विशेष रूप से चोल राजवंश के अंतर्गत, तमिल साम्राज्य ने भारतीय उपमहाद्वीप की सीमाओं को पार करते हुए एक अजेय "ब्लू-वाटर" (blue-water) नौसैनिक आधिपत्य स्थापित किया। महान सम्राट राजेन्द्र चोल प्रथम के नेतृत्व में चोल नौसेना ने हिंद महासागर के पार कठोर सैन्य शक्ति का प्रक्षेपण किया, जो कि भारतीय सैन्य इतिहास में अद्वितीय है। उनकी विजय यात्राओं के परिणामस्वरूप श्रीविजय साम्राज्य (आधुनिक इंडोनेशिया और मलेशिया), मालदीव और सम्पूर्ण श्रीलंका पर चोल साम्राज्य का अधिकार स्थापित हुआ। यह इतिहास का एकमात्र भारतीय साम्राज्य था जिसने समुद्र के पार जाकर अपनी प्रभुसत्ता स्थापित की और दक्षिण पूर्व एशिया के व्यापारिक मार्गों पर पूर्ण कूटनीतिक और सैन्य नियंत्रण प्राप्त किया। नौसैनिक वर्चस्व के अतिरिक्त, राजेन्द्र चोल प्रथम ने उत्तर भारत की ओर भी एक अभूतपूर्व सैन्य अभियान का नेतृत्व किया। उनकी अजेय सेनाओं ने उत्तर की ओर कूच करते हुए कलिंग को पार किया और बंगाल के शक्तिशाली पाल साम्राज्य (महीपाल प्रथम) को निर्णायक रूप से पराजित किया। इस महाविजय के प्रतीक स्वरूप, चोल सेनाएँ पवित्र गंगा नदी का जल लेकर दक्षिण लौटीं, जिसके आधार पर राजेन्द्र चोल ने 'गंगईकोंडा चोलपुरम' (Gangaikonda Cholapuram - गंगा को जीतने वाले चोलों का नगर) नामक अपनी नई भव्य शाही राजधानी और एक विशाल शिव मंदिर की स्थापना की। यह उत्तरी सैन्य विजय हिंदी भाषी क्षेत्रों सहित सम्पूर्ण उत्तर भारत में तमिल सैन्य शक्ति के सर्वोच्च विस्तार का अकाट्य प्रमाण है।A History of South India: From Prehistoric Times to the Fall of Vijayanagar https://archive.org/details/alf.2590.954.82.sas Nilakanta Sastri, K.A. 1955 Oxford University Press 0-19-560686-8 175-176The Cholas https://archive.org/details/dli.csl.7720 Nilakanta Sastri, K.A. 1935 University of Madras 207-210 चीन के साथ सामरिक गठजोड़ और कूटनीति तमिल साम्राज्यों का भू-राजनीतिक प्रभाव केवल दक्षिण पूर्व एशिया तक ही सीमित नहीं था, बल्कि पूर्व एशिया की सबसे बड़ी शक्तियों के साथ भी उनके प्रत्यक्ष कूटनीतिक और सैन्य संबंध थे। 720 ईस्वी में पल्लव सम्राट नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह) ने तिब्बती साम्राज्य के विस्तार को रोकने के लिए चीन के तांग राजवंश (Tang Dynasty) के सम्राट के साथ एक प्रत्यक्ष सैन्य गठबंधन स्थापित किया था। यह ऐतिहासिक घटना इस बात को प्रमाणित करती है कि तत्कालीन वैश्विक परिदृश्य में तमिल राजाओं को चीनी सम्राटों के समकक्ष एक महान भू-राजनीतिक शक्ति के रूप में मान्यता प्राप्त थी।Buddhism, Diplomacy, and Trade: The Realignment of Sino-Indian Relations, 600-1400 https://archive.org/details/buddhismdiplomac0000sent Tansen Sen 2003 University of Hawaii Press 978-0824825935 बाद के काल में, तमिल व्यापारिक संघों (जैसे कि अयंनूर्रुवर - Ainnurruvar) की आर्थिक और कूटनीतिक शक्ति इतनी प्रबल हो गई कि 1281 ईस्वी में मंगोल सम्राट कुबलई खान के प्रत्यक्ष शाही फरमान (Imperial Decree) के अंतर्गत, चीन के च्वानझोउ (Quanzhou) बंदरगाह शहर में एक स्थायी प्रस्तर शिव मंदिर का निर्माण किया गया। इस मंदिर में स्थापित द्विभाषी (तमिल-चीनी) शिलालेख आज भी मध्ययुगीन विश्व में तमिलों की असीमित व्यापारिक और संस्थागत शक्ति का ऐतिहासिक गवाह है।The Trading World of the Tamil Merchant: Evolution of Merchant Capitalism in the Coromandel Kanakalatha Mukund 1999 Orient Blackswan 978-8125016618 आधुनिक काल thumb|आरंभिक 1900 के दशक के में मलय तमिल संगम के दौरान मा पो सी और राजाजी|कड़ी=Special:FilePath/MylaiTamizhSangam.jpg ब्रिटिश उपनिवेश स्थापित करने वालों ने तमिल राज्यक्षेत्रों को संगठित रूप देकर मद्रास प्रेसिडेंसी का निर्माण किया, जो ब्रिटिश राज का अभिन्न अंग बना। इसी तरह, श्रीलंका के तमिल भाषी क्षेत्रों को इस द्वीप के अन्य हिस्सों से जोड़ा गया और सीलोन उपनिवेश बनाया गया, 1802 के आसपास। ये लोग भारत और श्रीलंका के क्रमशः 1947 और 1948 में आजाद होने के बाद भी राजनीतिक रूप से सम्बद्ध रहे। भारत की 1947 स्वतन्त्रता के बाद, मद्रास प्रेसिडेंसी मद्रास राज्य बना, जो वर्तमान में तमिलनाडु राज्य, तटीय आन्ध्र प्रदेश, उत्तरी केरल, और कर्नाटक का दक्षिणी पश्चिमी तटीय इलाका है। बाद में इस राज्य को भाषायी आधार पर विभाजित किया गया। 1953 में उत्तरी जिले आन्ध्र प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आये। 1956 के राज्य पुनर्गठन आयोग के लागू होने के बाद मद्रास राज्य के पश्चिमी तटीय हिस्से छिन गए। बेलारी और दक्षिण कन्नार को मैसूर राज्य में शामिल कर दिया गया। और मालाबार जिले और त्रावणकोर और कोचीन की राजशाहियों से केरल राज्य का निर्माण हुआ।अनीश भसीन भारत के राज्य https://books.google.com/books?id=JYxrBQAAQBAJ&pg=PA252 8 August 2017 978-93-5048-467-8 252} 1968 में मद्रास राज्य का नाम बदल कर तमिलनाडु कर दिया गया।ब्रज किशोर शर्मा भारत का संविधान : एक परिचय: (BHARAT KA SANVIDHAN : EK PARICHAY) https://books.google.com/books?id=PXmiDgAAQBAJ&pg=PA64 8 August 2017 1 April 2017 PHI Learning Pvt. Ltd. 978-81-203-5329-9 64} श्रीलंका की कुल जनसंख्या का 15% हिस्सा तमिलों का है।अरोरा राजनीतिक विज्ञान मुख्य परेक्ष https://books.google.com/books?id=D-lOAgAAQBAJ&pg=SA40-PA4 8 August 2017 Tata McGraw-Hill Education 978-0-07-014486-6 40} भौगोलिक क्षेत्र-विस्तार भारत भारत में ज्यादातर तमिल लोग तमिल नाडु राज्य में निवास करते हैं। संघराज्यक्षेत्र पुद्दुचेरी में तमिल लोग बहुसंख्यक हैं। पुद्दुचेरी पहले फ्रांसीसी उपनिवेश रह चुका है और चारों ओर से तमिलनाडु से घिरा हुआ है। अंडमान निकोबार द्वीप समूह में भी जनसंख्या का कम से कम छठवाँ हिस्सा तमिल है। इसके अतिरिक्त भारत के अन्य इलाकों में उल्लेखनीय तमिल जनसंख्या निवास करती है। इनमें से ज्यादातर काफी हाल में, औपनिवेशिक काल अथवा आजादी के बाद के दौर में यहाँ पहुँचे हैं, हालाँकि कि कुछ संख्या मध्यकाल के दौरान की भी है। तमिल जनसंख्या की महत्वपूर्ण उपस्थिति कर्नाटक (29 लाख), महाराष्ट्र (14 लाख), आन्ध्र प्रदेश (12 लाख), केरल (6 लाख) और दिल्ली (1 लाख) में है।http://www.censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/Statement3.htm Almost 5 million Tamils live outside Tamil Nadu, inside India Censusindia.gov.in 18 July 2010 https://web.archive.org/web/20170711051213/http://www.censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/Statement3.htm 11 जुलाई 2017 live श्री लंका thumb|170px|तमिल बोलने वाले लोगों का भौगोलिक विस्तार (1961) श्री लंका में दो प्रकार के तमिल लोग हैं, श्री लंकाई तमिल और भारतीय तमिल। श्री लंकाई तमिल, प्राचीन जाफना राजवंश और पूर्वी तटीय कबीलों के वंशज हैं। भारतीय तमिल (अथवा पहाड़ी तमिल) उन बंधुआ मजदूरों के वंशज हैं जिन्हें उन्निस्वीं सदी में चाय बागानों में मजदूरी के लिए भारत से ले जाया गया।de Silva 1997 177, 181 श्री लंका में एक महत्वपूर्ण समुदाय मुस्लिम तमिलों का भी है, जो तमिल भाषी है और इस्लाम में आस्था रखते हैं, हालाँकि इनके नृजातीय रूप से तमिल होने के प्रमाण भी कई हैं, हालाँकि ये लोग विवादास्पद रूप से श्रीलंका सरकार द्वारा अलग नृजातीय समुदाय के रूप में सूचीबद्ध किये जाते हैं।de Silva 1987 3–5,9 ज्यादातर श्रीलंकाई तमिल उत्तरी और पूर्वी प्रान्त में और कुछ मात्रा में राजधानी कोलम्बो में रहते हैं, जबकि ज्यादातर भारतीय तमिल मध्य प्रान्त के पहाड़ी इलाकों में बसते हैं।Population by Ethnicity according to District Department of Census and Statistics of Sri Lanka http://www.statistics.gov.lk/PopHouSat/PDF/Population/p9p8%20Ethnicity.pdf PDF statistics.gov.lk 3 May 2007 https://web.archive.org/web/20170713101148/http://www.statistics.gov.lk/PopHouSat/PDF/Population/p9p8%20Ethnicity.pdf 13 जुलाई 2017 live ऐतिहासिक रूप से दोनों समुदाय एक दूसरे को अलग मानते हैं, हालाँकि 1980 के दशक के बाद इनमें एकता की भावना मजबूत हुई है।V. Suryanarayan In search of a new identity Frontline 2001 http://www.flonnet.com/fl1816/18160950.htm 2 July 2008 dead https://web.archive.org/web/20080529221016/http://www.flonnet.com/fl1816/18160950.htm 29 May 2008 1960 के दशक में भारतीय और श्रीलंका सरकार के मध्य हुए कतिपय समझौतों के बाद लगभग 40 भारतीय तमिलों को नागरिकता मिल गयी और बाकियों को भारत भेज दिया गया।de Silva 1997 262 1990 के दशक आते-आते, ज्यादातर भारतीय तमिलों को श्रीलंकाई नागरिकता हासिल हो गयी। प्रवासी तमिल thumb|right|170px|परम्परागत पोशाक में तमिल औरत, c. 1880 190px|thumb|upright|left|बातु गुफाएँ, तमिल मलेशियाई लोगों द्वारा निर्मित मंदिर ca.1880s तमिलों का बाहर की ओर प्रवास महत्वपूर्ण रूप से अठारहवीं सदी में शुरू हुआ जब ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने बहुत से गरीब तमिलों को साम्राज्य के सुदूरवर्ती हिस्सों में मजदूर के रूप में भेजा, विशेषकर मलाया, दक्षिण अफ्रीका, फ़िजी, मॉरिशस, त्रिनिदाद और टोबैगो, गयाना, सूरीनाम, जमैका, फ्रेंच गयाना और मार्टिनीक के लिए। लगभग उसी दौर में, बहुत से तमिल व्यवसायी भी साम्राज्य के बिभिन्न भागों के लिए प्रवास कर गये, विशेषकर बर्मा और पूर्व अफ्रीका के लिए। The Tamil Migration Cycle 1830–1950 Christophe Z Guilmoto Economic and Political Weekly 4399307 111–120 28 3 Economic and Political Weekly 1993 इनमें से बहुत से तमिल अब भी इन देशों में निवास करते हैं, और सिंगापुर, रियूनियन, मलेशिया, और दक्षिण अफ्रीका में निवास करने वाले इन तमिल समुदायों ने काफी हद तक अपनी भाषा और मूल संस्कृति को बरकरार रखा है। मलेशिया में बहुत से तमिल बच्चे तमिल स्कूलों में पढ़ते हैं और काफी सारे तमिल बच्चों की परवरिश तमिल मातृभाषी के रूप में होती है। सिंगापुर में, और मॉरिशस और रियूनियन में, तमिल बच्चे तमिल भाषा को दूसरी भाषा के रूप में स्कूलों में पढ़ते हैं जबकि पहली भाषा अंग्रेजी होती है। सिंगापुर में तमिल भाषा के संरक्षण हेतु सरकार ने इसे आधिकारिक भाषा का दर्जा दे रखा है बावजूद इसके कि यहाँ कुल जनसंख्या का मात्र 5% तमिल हैं, और तमिल लोगों को तमिल भाषा में पढ़ाई को अनिवार्य कर रखा है। अन्य तमिल समुदाय, जैसे कि दक्षिण अफ्रीका, फ़िजी, मॉरिशस, त्रिनिदाद और टोबैगो, गयाना, सूरीनाम, जमैका, फ्रेंच गयाना, गुआदेलोप, मार्टिनीक और कैरेबियन देशों में अपनी पहली भाषा के रूप में भले ही तमिल न बोलते हों, मजबूत तमिल पहचान को अक्षुण्ण रखा है यह भाषा आसानी से समझ सकते हैं, जबकि बहुत से बुजुर्ग लोग इसे प्रथम भाषा के रूप में अब भी बोलते हैं। Tamil diaspora – a trans state nation http://searchko.in/literature/ta-cached.jsp?id=82&idx=0 Tamilnation.org 4 December 2006 https://web.archive.org/web/20110721181236/http://searchko.in/literature/ta-cached.jsp?id=82&idx=0 21 जुलाई 2011 dead पाकिस्तान में एक छोटी सी संख्या तमिलों की है जो 1947 में भारत विभाजन के बाद यहाँ बसे।http://www.thenews.com.pk/Todays-News-4-98530-Strangers-to-their-roots-and-those-around-them Strangers to their roots, and those around them The News 20 March 2012 8 September 2014 Ammar Shahbazi https://web.archive.org/web/20130617043012/http://www.thenews.com.pk/Todays-News-4-98530-Strangers-to-their-roots-and-those-around-them 17 जून 2013 live 1980 के दशक में भी बड़े पैमाने पर बाहर की ओर प्रवास शुरू हुआ जब श्री लंका के तमिलों ने नृजातीय संघर्षों के चलते बचने के लिए पलायन किया। ये बाद के प्रवासी लोग ऑस्ट्रेलिया, यूरोप उत्तर अमेरिका, और दक्षिण पूर्व एशिया में जा बसे हैं। Chris McDowell 1996 A Tamil Asylum Diaspora: Sri Lankan Migration, Settlement and Politics in Switzerland Berghahn Books New York 1-57181-917-7 आज का समकालीन तमिल समाज और प्रवासी तमिल विश्व भर में मात्र एक श्रमिक वर्ग के रूप में नहीं, बल्कि एक अति-प्रभावशाली बौद्धिक, तकनीकी और राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हो चुके हैं। उनका वैश्विक पदचिह्न (Global footprint) अत्यंत विशाल है। श्रीलंका और सिंगापुर जैसे संप्रभु राष्ट्रों में तमिल को आधिकारिक राज्य भाषा का दर्जा प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था और सिलिकॉन वैली (Silicon Valley) के शीर्ष तकनीकी नेतृत्व में तमिल मूल के लोगों का असाधारण वर्चस्व है। कई प्रमुख वैश्विक बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEOs), विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक और शिक्षाविद् इसी समुदाय से आते हैं, जो यह सिद्ध करता है कि समकालीन विश्व की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में तमिलों की भूमिका अपरिहार्य और निर्णायक है।The Tamil Diaspora: Intersectionality, Solidarities, and Disruption V. Vuppalapati 2020 Routledge आजकल दक्षिण एशिया से बाहर सबसे अधिक तमिल लोगों का संकेन्द्रण कनाडा के टोरंटो में है।Foster Carly Tamils: Population in Canada Ryerson University 2007 http://www.diversitywatch.ryerson.ca/backgrounds/tamils.htm 25 June 2008 According to government figures, there are about 200,000 Tamils in Canada dead https://web.archive.org/web/20080214141743/http://www.diversitywatch.ryerson.ca/backgrounds/tamils.htm 14 February 2008 http://www.thestar.com/opinion/columnists/2009/04/04/the_truth_about_tamil_statistics.html संग्रहीत प्रति 14 मई 2017 https://web.archive.org/web/20170923002748/https://www.thestar.com/opinion/columnists/2009/04/04/the_truth_about_tamil_statistics.html 23 सितंबर 2017 live http://heritagetoronto.org/new-beginnings-tamil-heritage-in-toronto/ संग्रहीत प्रति 14 मई 2017 https://web.archive.org/web/20170710051142/http://heritagetoronto.org/new-beginnings-tamil-heritage-in-toronto/ 10 जुलाई 2017 dead http://tamilculture.com/the-tamil-community-in-canada-a-brief-overview/ संग्रहीत प्रति 14 मई 2017 https://web.archive.org/web/20170517104812/http://tamilculture.com/the-tamil-community-in-canada-a-brief-overview/ 17 मई 2017 dead इन्हें भी देखें तमिल जैन तमिल भाषा तमिल लिपि बाहरी कड़ियाँ हिन्दी-तमिल शब्दकोश हिन्दी-हिन्दी-तमिल-अंग्रेजी शब्दकोश तमिल-हिन्दी व्यावहारिक लघु कोश (Hindi-Tamil Vyavaharik Laghu Kosh) सन्दर्भ श्रेणी:तमिल