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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अमनस्क योग

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अमनस्क योग गुरु गोरखनाथ कृत योग का ग्रन्थ है। यह ईश्वर एवं वामदेव के संवाद रूप में है। यह दो खण्डों में है, पूर्वार्ध और उत्तरार्ध। मुनिश्रेष्ठ श्री वामदेव श्री कैलास के शिखर पर पहुँचते है और वहीं पर स्वस्वभाव में कैलासपति शिवजी को श्रद्धाभक्तिपूर्वक प्रणाम कर रलस वृत्ति से जीवन्मुक्ति के उपाय के विषय में प्रश्न करते हैं। ज्ञान-पिपासा एवं अहेतुकी भक्ति देखकर योग-योगीश्वर भगवान् शिव जा उनको तारक योग का रहस्य, योगी गुरू के लक्षण, योग-साधना के लिये उपयुक्त स्थान, योगासन, क्रियायोग, विभूतियों के लक्षण इत्यादि के विषय में प्रकाश देते हैं। " मन न रंगाये, रंगाये जोगी कपड़ा " की उक्ति के अनुसार प्रसंगानुसार वे वहिर्मुखी वृत्तिवाले साधुओं की वेषभूषा, व्यवहार इत्यादि की निन्दा भी कर देते हैं जिससे योगमार्ग पर प्रस्थान करने वाला साधक सावधान रहे । उदरपूर्ति के लिये मारण, उच्चाटनादि मलिन मंत्रों में अभिरुचि को प्रपंच, विभिन्न प्रकार के आसन, बंध, मुद्रादि के अभ्यास में ही सारा समय व्यतीत करने की प्रवृत्ति को अज्ञान और यहाँ तक कि देहस्थ नाड़ी विशेषांतर्गत पट्चक्रों में ध्यान की क्रिया को चित्त का विभ्रम कहते हुए इन सबका परित्याग कर, जागतिक पदार्थ नौर अमनस्क सेवन का उपदेश देते हैं। तत्पश्चात् वे परम तत्त्व का निरूपण करते हैं और उसके बोध के विषय में साधना का रहस्य प्रशस्त करते हुए लयस्थयोगी, लय, लय के प्रकार, लययोग से प्राप्य सिद्धि इत्यादि के विषय में अद्भुत उपदेश देकर अन्त में चेतावनी देते हुए कहते हैं कि परब्रह्म में लीन होने के इच्छुक महापुरुष के लिये ये सिद्धियाँ सर्वनाशकारिणी होती हैं, इसलिये उन्हें उनकी ओर आकृष्ट नहीं होना चाहिये। लयसाधना द्वारा योगी को परमानन्द की प्राप्ति होने पर अजरत्व एवं अमरत्व दोनों की एक ही साथ महासिद्धि प्राप्त होती है जिससे महाप्रलय होने पर भी उसका पात नहीं होता। द्वितीय खण्ड या उत्तरार्द्ध में मुनिश्रेष्ठ श्री वामदेव जी भगवान् देवाधिदेव शिवजी से विनीत भाव से प्रार्थना करते हैं कि प्रथम की भाँति ही परमानन्द प्रदायक दूसरा उपदेश करने की कृपा करें। इसके उत्तर में भगवान उन्हें तारकयोग एवं अमनस्क योग में भेद, शांभवी मुद्रा का रहस्य, शांभव योग, अमनस्क विद्या और उसकी महिमा गाते बाह्याडम्बर की निन्दा और अमनस्क योगी के लक्षणादि के विषय में अतीव बोधप्रद उपदेश प्रदान करते हैं।अमनस्क योग (सम्पादक एवं टीकाकार - योगनाथ स्वामी) सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ स्वयंबोध अमनस्कयोग (संस्कृत विकिस्रोत) श्रेणी:योग