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जलियाँवाला बाग़
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जलियाँवाला बाग Panorama of Jallianwala Bagh-IMG 6348.jpg जलियाँवाला बाग में स्मारक अमृतसर S SHUKLA 13 APRIL1919 में हुए नरसंहार के शहीद 31.64 74.86
जलियाँवाला बाग अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर के पास का एक छोटा सा बगीचा है जहाँ 13 अप्रैल 1919 को ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेज़ी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे, शान्त बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हजारों लोगों को घायल कर दिया था। यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था, तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था। इसी घटना की याद में यहाँ पर स्मारक बना हुआ है।
स्थिति
जलियाँवाला बाग़ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास ही स्थित है।
स्मारक
इस स्मारक में लौ के रूप में एक मीनार बनाई गई है जहाँ शहीदों के नाम अंकित हैं। वह कुआँ भी मौजूद हैं जिसमें लोग गोलीबारी से बचने के लिए कूद गए थे। दीवारों पर गोलियों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं।http://www.punjabtourism.gov.in/District.aspx?CityName=Amritsar संग्रहीत प्रति 4 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20150320091347/http://www.punjabtourism.gov.in/District.aspx?CityName=Amritsar 20 मार्च 2015 dead
इस दुखद घटना के लिए स्मारक बनाने हेतु आम जनता से चंदा इकट्ठा करके इस जमीन के मालिकों से करीब 5 लाख 65 हजार रुपए में इसे खरीदा गया था।
http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/lifestylenews/article1-story-50-50-323389.html हिंदुस्तान टाइम्स 4 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20130516084601/http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/lifestylenews/article1-story-50-50-323389.html 16 मई 2013 dead
१९९७ में महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी। २०१३ में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे। विजिटर्स बुक में उन्होंनें लिखा कि "ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी।"http://www.dw.de/%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%97-%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%95-%E0%A4%98%E0%A4%9F%E0%A4%A8%E0%A4%BE/a-16613002 dw.de-जलियाँवाला बाग "शर्मनाक" घटना 4 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20150112123940/http://www.dw.de/%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%97-%E0%A4%B6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%95-%E0%A4%98%E0%A4%9F%E0%A4%A8%E0%A4%BE/a-16613002 12 जनवरी 2015 live तिजलियाँवाला बाग हत्याकांड
thumb|कांड के महीनों बाद 1919 में बाग़ का दृश्य
बैसाखी के दिन 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ में रोलेट एक्ट, अंग्रेज़ों की दमनकारी नीतियों व दो नेताओं सत्यपाल और सैफ़ुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में एक सभा रखी गई, जिसमें कुछ नेता भाषण देने वाले थे। शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था, फिर भी इसमें सैंकड़ों लोग ऐसे भी थे, जो बैसाखी के मौके पर परिवार के साथ मेला देखने और शहर घूमने आए थे और सभा की खबर सुन कर वहां जा पहुंचे थे। करीब 5,000 लोग जलियाँवाला बाग में इकट्ठे थे। ब्रिटिश सरकार के कई अधिकारियों को यह 1857 के गदर की पुनरावृत्ति जैसी परिस्थिति लग रही थी जिसे न होने देने के लिए और कुचलने के लिए वो कुछ भी करने के लिए तैयार थे।
जब नेता बाग़ में पड़ी रोड़ियों के ढेर पर खड़े हो कर भाषण दे रहे थे, तभी ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर 90 ब्रिटिश सैनिकों को लेकर वहां पहुँच गया। उन सब के हाथों में भरी हुई राइफलें थीं। सैनिकों ने बाग़ को घेर कर बिना कोई चेतावनी दिए निहत्थे लोगों पर गोलियाँ चलानी शुरु कर दीं। १० मिनट में कुल 1650 राउंड गोलियां चलाई गईं। जलियाँवाला बाग़ उस समय मकानों के पीछे पड़ा एक खाली मैदान था। वहां तक जाने या बाहर निकलने के लिए केवल एक संकरा रास्ता था और चारों ओर मकान थे। भागने का कोई रास्ता नहीं था। कुछ लोग जान बचाने के लिए मैदान में मौजूद एकमात्र कुएं में कूद गए, पर देखते ही देखते वह कुआं भी लाशों से पट गया। इस कुएं को शहीदी कुआं कहा जाता है।
thumb|शहीदी कुआं
अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियाँवाला बाग़ में कुल 388 शहीदों की सूची है। ब्रिटिश राज के अभिलेख इस घटना में 200 लोगों के घायल होने और 379 लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार करते है जबकि अनाधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 1000 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए। इस घटना के प्रतिघात स्वरूप सरदार उधमसिंह ने 13 मार्च 1940 को उन्होंने लंदन के कैक्सटन हॉल में इस घटना के समय ब्रिटिश लेफ़्टिनेण्ट गवर्नर मायकल ओ ड्वायर को गोली चला के मार डाला। उन्हें 31 जुलाई 1940 को फाँसी पर चढ़ा दिया गया।
चित्र दीर्घा
सन्दर्भ
Jallianwala Bagh जलियाँवाला बाग़
श्रेणी:अमृतसर