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411 समाचार
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अफ्रीकी ट्रिपेनोसोमयासिस

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अफ्रीकी ट्रिपेनोसोमयासिसनिद्रालु व्याधि Trypanosoma forms in a blood smear Trypanosoma sp. PHIL 613 lores.jpg  B 56 b 50  086.5 29277  13400 001362 med 2140 D014353 अफ्रीकी ट्रिपेनोसोमयासिस अथवा निद्रालु व्याधि मनुष्यों तथा अन्य पशुओं में होने वाली एक परजीवीजन्य बीमारी है। यह परजीवियों की एक प्रजाति ट्रिपैनोसोमा ब्रुसे के कारण होता है।001362 Sleeping sickness मनुष्यों को संक्रमित कर सकने वाले परजीवी दो प्रकार के होते हैं, ट्रिपैनोसोमा ब्रुसे गैम्बिएन्स (T.b.g) तथा ट्रिपैनोसोमा ब्रुसे रोडेसिएंस (T.b.r.). T.b.g दर्ज मामलों में 98% से अधिक का कारण बनता है।WHO Media centre Fact sheet N°259: Trypanosomiasis, Human African (sleeping sickness) June 2013 http://www.who.int/mediacentre/factsheets/fs259/en/ 21 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20161204153318/http://www.who.int/mediacentre/factsheets/fs259/en/ 4 दिसंबर 2016 live दोनों प्रकार आमतौर पर एक संक्रमित सीसी मक्खी के काटने से फैलते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे आम हैं।  प्रारंभ में, बीमारी के पहले चरण में, बुखार, सिर दर्द, खुजली और जोड़ों में दर्द होता है। यह काटने के एक से तीन सप्ताह के अन्दर शुरू होता है। कुछ सप्ताहों अथवा महीनों के अन्दर दूसरा चरण प्रारंभ होता है जिसमें मरीज़ भ्रम, ख़राब समन्वय, सुन्न होना तथा सोने में कठिनाई महसूस करता है। रोग परीक्षण रक्त स्मीयर में अथवा लिम्फ नोड के तरल पदार्थ में परजीवी खोजने के जरिए किया जाता है। अक्सर पहले और दूसरे चरण की बीमारी के बीच अंतर बताने के लिए लम्बर पंक्चर की आवश्यकता होती है। गंभीर बीमारी की रोकथाम के लिए जोखिमग्रस्त जनसंख्या की स्क्रीनिंग के साथ ही T.b.g. के लिए रक्त परीक्षण करना शामिल है। रोग का निदान अपेक्षाकृत सरल है जबकि रोग का पता जल्दी चल गया हो तथा स्नायविक लक्षण प्रकट न हुए हों। रोग के पहले चरण का उपचार पेंटामाईडीन अथवा स्यूरामिन दवाओं से किया जाता है। रोग के दुसरे चरण के उपचार के लिए एफ्लोनाईथीन अथवा T.b.g. के लिए नाईफर्टिमॉक्स तथा एफ्लोनाईथीन के संयोजन की आवश्यकता होती है।Kennedy PG Clinical features, diagnosis, and treatment of human African trypanosomiasis (sleeping sickness). Lancet neurology 2013 Feb 12 2 186-94 23260189 हालाँकि मेलार्सोप्रोल दोनों के लिए कारगर है, फिर भी इसे आमतौर पर केवल T.b.r. के लिए प्रयोग किया जाता है जिसका कारण इसके कुछ गंभीर साइड इफेक्ट हैं। उप-सहारा अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में यह बीमारी नियमित रूप से होती है, जिसमें जोखिम-ग्रस्त जनसँख्या 36 देशों में 70 मिलियन के लगभग है।Simarro PP, Cecchi G, Franco JR, Paone M, Diarra A, Ruiz-Postigo JA, Fèvre EM, Mattioli RC, Jannin JG  Estimating and Mapping the Population at Risk of Sleeping Sickness  PLoS Negl Trop Dis  6 10 e1859 2012 10.1371/journal.pntd.0001859 2010 में इस बीमारी के कारण लगभग 9,000 व्यक्तियों की मृत्यु हुई, जबकि 1990 में इनकी संख्या लगभग 34,000 थी।Lozano R Global and regional mortality from 235 causes of death for 20 age groups in 1990 and 2010: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2010. https://archive.org/details/sim_the-lancet_december-15-2012-january-4-2013_380_9859/page/2095 Lancet Dec 15, 2012 380 9859 2095–128 23245604 10.1016/S0140-6736(12)61728-0 एक अनुमान के अनुसार वर्तमान में लगभग 30,000 लोग इससे संक्रमित हैं जिसमें 2012 में हुए 7000 नए मामले भी शामिल हैं। इन मामलों में से 80% से अधिक कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में हैं। हाल ही के इतिहास में इस बीमारी के तीन बड़े प्रकोप हुए हैं: एक 1896 से 1906 के बीच मुख्यतः युगांडा तथा काँगो बेसिन में तथा दो 1920 एवं 1970 में अनेक अफ्रीकी देशों में। अन्य पशु, जैसे गाय, इस बीमारी के वाहक बन सकते हैं तथा इससे संक्रमित हो सकते हैं। सन्दर्भ श्रेणी:नींद संबंधी विकार श्रेणी:उष्णकटिबंधीय रोग श्रेणी:रोग