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411 समाचार
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आती रहेंगी बहारें

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आती रहेंगी बहारें ड्रामा सिनेविस्तास लिमिटेड औरबिगशॉट प्रोडक्शन्स विपुल मेहता और जयेश पाटिल अपूर्व आचार्य और अरविंद बब्बल राधेश्याम राय दिलीप थडेश्वर, पूजा घई रावल, मुन्नी झा, रागिनी शाह, हीरालाल ठक्कर, राजीव पॉल "आती रहेंगी बहारें" द्वारा अमित कुमार भारत हिंदी 1 कुल 118 रीना वाधवा और प्रेम किशन अंशुमा गुप्ता 22 मिनट ज़ी टीवी 480i (SDTV) 9 सितंबर 2002 26 मार्च 2003 आती रहेंगी बहारें हिन्दी भाषा में बनी भारतीय धारावाहिक है, जिसका प्रसारण ज़ी टीवी पर 9 सितम्बर 2002 से 26 मार्च 2003 तक हुआ था। यह धारावाहिक दोस्तों के मध्य एक अटूट रिश्ते को दर्शाता है। जिसमें सभी बिना किसी इच्छा के एक दूसरे कि सहायता को तैयार रहते हैं। पटकथा यह कहानी डॉ॰ अमर के मध्य घूमती रहती है, जो एक अमीर व्यापारी का बेटा रहता है। जिसका एक अपना कपड़े का दुकान भी होता है। उसके पिता को अपने बच्चे के कार्यों पर गर्व होता है। लेकिन उसकी माँ उसके भाई के बात में आ कर यह सोचती है कि व्यापारी का बेटा व्यापारी ही बनेगा। अमर के दो बहुत अच्छे मित्र रहते हैं। पड्डी और मिलिन्द नाम के यह दोनों मित्र उसके बचपन से साथ रहते हैं। लेकिन इसमें तब मोड़ आता है जब अमर को यह पता चलता है कि उसे एक खतरनाक बीमारी हो गई है और उसका इलाज नहीं है। इसके बाद अमर यह निर्णय लेता है कि वह उससे प्यार करने वालों अपने से दूर कर देगा जिससे उसके मरने के बाद कोई भी उसे याद न करे। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ