411 REFERENCE · Wikipedia
महर्षि दुर्वासा
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
thumb|महर्षि दुर्वासा और शकुंतला
सनातन धर्म में महर्षि दुर्वासा जो कि महर्षि अत्रि और देवी अनुसूया के पुत्र तथा महर्षि दत्तात्रेय और चंद्रदेव के भाई थे। वे जहाँ कहीं जाते थे, लोग देवता की तरह उन का आदर करते थे। महाकवि कालिदास की महान् रचना अभिज्ञान शाकुंतलम में उन्होंने शकुंतला को शाप दिया था कि उस का प्रेमी उसे भूल जाएगा जो कि सच साबित हुआ।
महाराज अंबरीश से भेंट
श्रीमद् भागवत पुराण में महाराज अंबरीश के साथ ऋषि दुर्वासा के झगड़े की कहानी बहुत ही प्रसिद्ध है। महाराज अंबरीश भगवान् विष्णु के महान् भक्त थे और सच बोलते थे। महाराज अंबरीश ने अपने राज्य की सुख, शांति और समृद्धि के लिए पूरी श्रद्धा से एक यज्ञ कराया। एक बार, राजा अंबरीश ने एकादशी का व्रत किया जिस में एकादशी को व्रत की शुरुआत होगी और द्वादशी को व्रत तोड़ा जाएगा। व्रत तोड़ने के बाद साधु जनों को भोजन कराना होगा। जब द्वादशी को व्रत तोड़ने का समय करीब आया तो राजा अंबरीश के गृह में महर्षि दुर्वासा पधारे। राजा ने महर्षि दुर्वासा का सादर स्वागत किया और उन्हें भोजन करने के लिए आग्रह किया। महर्षि दुर्वासा ने अंबरीश का आग्रह स्वीकार कर लिया और कहा कि जब तक वो नदी से स्नान करके नहीं आते तब तक राजा व्रत नहीं तोड़ें। काफी समय बीत गया, लेकिन महर्षि दुर्वासा नहीं आए। राजा अंबरीश को व्रत तोड़ना था। गुरु वरिष्ठ के आग्रह पर अंबरीश ने तुलसी के दल से उपवास तोड़ा और ऋषि की प्रतीक्षा करने लगे। महर्षि दुर्वासा को लगा की अंबरीश ने उनके आये बिना व्रत तोड़कर उन का अपमान किया। क्रोधित दुर्वासा ने अपने जटा से एक राक्षस पैदा किया और उसे अंबरीश को मारने को कहा, उसी समय भगवान् नारायण के सुदर्शन चक्र से राक्षस का वध कर दिया और राजा अंबरीश की रक्षा की। इस के बाद सुदर्शन चक्र दुर्वासा का पीछा करने लगा। सुदर्शन चक्र के भय से महर्षि दुर्वासा पहले ब्रह्मा जी और फिर शिव जी के पास अपनी रक्षा के लिए गये। दोनों ने दुर्वासा को बचाने में अपनी असमर्थता जताई और कहा कि अंबरीश से क्षमा मांगे। महर्षि दुर्वासा ने ऐसा ही किया। अंबरीश ने भगवान् विष्णु को याद किया और उन से दुर्वासा की रक्षा के लिए प्रार्थना की। हालांकि शिव पुराण में कहानी थोड़ी भिन्न है। शिव पुराण के अनुसार, अंबरीश ने महर्षि दुर्वासा को भोजन कराने से पहले व्रत तोड़कर उन का अपमान किया। इसलिए महर्षि दुर्वासा ने अंबरीश को मारने का निर्णय कर लिया। अंबरीश को बचाने के लिए सुदर्शन चक्र उत्पन्न हुआ लेकिन महर्षि दुर्वासा के रूप में साक्षात् शिव को पाकर वह रुक गया। उसी समय आकाशवाणी हुई, नंदी ने कहा, कि अंबरीश की परीक्षा लेने स्वयं शिव आए हैं इसलिए वह उन से माफी मांग ले। अंबरीश ने ऐसा ही किया और महर्षि दुर्वासा ने उसे आशीर्वाद दिया।
श्रेणी:महाभारत
श्रेणी:ऋषि