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शिलांग के पर्यटन स्थल
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शिलांग एक छोटा-सा शहर है जिसे पैदल घूमकर देखा जा सकता है। अपनी सुविधा के अनुसार सिटी बस या दिनभर के लिए ऑटो या टैक्सी किराए पर लेकर भी घूमा जा सकता है। शिलांग और उसके आसपास अनेक दर्शनीय स्थल है जैसे-
शिलांग पीक
शिलाँग_पीक
यह शिलांग का सबसे ऊंचा प्वाइंट है। इसकी ऊंचाई 1965 मीटर है। यहां से पूरे शहर का विहंगम नजारा देखा जा सकता है। रात के समय यहां से पूरे शहर की लाईट असंख्य तारों जैसी चमकती है।
लेडी हैदरी पार्क
यह लगभग हर प्रकार के फूलों से सुसज्जित खूबसूरत पार्क है। इसमें एक छोटा चिड़ियाघर और अनेक प्रजातियों की तितलियों का संग्रहालय है।
कैलांग रॉक
मेरंग-नोखलॉ रोड पर ग्रेनाइट की एक ऊंची और विशाल चट्टान है जिसे कैलांग रॉक के नाम से जाना जाता है। यह एक गोलाकार गुम्बदनुमा चट्टान है जिसका व्यास लगभग 1000 फुट है।
वार्डस झील
यह कृत्रिम झील है जो घने जंगलों से घिरी है।
मीठा झरना
हैप्पी वैली में स्थित यह झरना बहुत ऊंचा और बिलकुल सीधा है। मॉनसून में इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है।
हाथी झरना
यह अपर शिलांग में स्थित है, जहां वायुसेना का ईस्टर्न एयर कमान्ड भी है। यहां कई छोटे- छोटे झरने एक साथ गिरते हैं। यहां एक छोटे से रास्ते के सहारे झरने के नीचे भी जाया जा सकता है, जहां एक छोटी झील बनी हुई है।
निकाटवर्ती स्थल
चेरापूंजी
चेरापूंजी
यह शिलांग से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान दुनिया भर में मशहूर है। हाल ही में इसका नाम चेरापूंजी से बदलकर सोहरा रख दिया गया है। वास्तव में स्थानीय लोग इसे सोहरा नाम से ही जानते हैं। यह स्थान दुनियाभर में सर्वाधिक बारिश के लिए जाना जाता है। इसके नजदीक ही नोहकालीकाई झरना है, जिसे पर्यटक जरूर देखने जाते हैं। यहां कई गुफा भी हैं, जिनमें से कुछ कई किलोमीटर लम्बी हैं। चेरापूंजी बांगलादेश सीमा से काफी करीब है, इसलिए यहां से बांगलादेश को भी देखा जा सकता है।
उमियाम
शिलांग से 20 किलोमीटर दूर स्थित यह एक वाटर स्पोट्स कॉम्प्लेक्स है, जो उमियाम हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की वजह से बनी झील पर स्थित है। यहां कई प्रकार के वाटर स्पोट्र्स का आनन्द लिया जा सकता है।
एलिफेण्ट फॉल्स
एलिफण्ट फॉल्स बहुत ही बडा झरना है जिसकी आवाज बहुत दूर से सुनी जा सकती है। पहाडी से बहुत नीचे उतरकर यह मनोरम दृष्य देखा जा सकता है। फोटोग्राफी के लिये यह सर्वश्रेष्ठ झरना कहा जा सकता है क्योंकि इसमे झरने के पास जाया जा सकता है।
मौसिनराम
यह मनोरम पहाडियों के बीच में एक प्राकृतिक गुफा है। गुफा के मध्य बिल्कुल गौ थन के आकार की शिला से लगातार नीचे बने प्राकृतिक शिवलिंग पर बूंद बूंद गिरता पानी लगता है जैसे भगवान शिव का जलाभिषेक हो रहा हो। कुल मिलाकर हिंदु धर्म के अनुसार यह स्थल एक शक्ति पीठ बनने का सामर्थ्य रखता है।
जैकरम, हाट सप्रिंग
प्रकृति की अदभुद देन यह स्थान बहुत ही सुंदर है। सलफर युक्त गर्म पानी जो कि झरने से निकलता है चरम रोंगो के लिये एक औषधि का कार्य करता है। झरने के पानी को पाईप लाईन द्वारा स्नान घर में पहुंचाया गया है जहां पर महिला व पुरूष आराम पूर्वक स्नान कर सकते हैं। स्नान करने के बाद पूरी थकान दूर हो जाती है।
शिलांग पीक
शिलांग पीक शिलांग शहर से लगभग 1500 फुट की उंचाई पर है इसलिए यहां का तपमान कम होता है। यहां पर भारतीय वायु सेना का पूर्वी कमांड का कार्यलय है। बहुत उंची चोटियों पर बडे बडे RADAR लगाए गये हैं। यह देश की सुरक्षा के लिये अत्यंत संवेदनशील है। शिलांग पीक से खडे होकर पूरे शहर को देखा जा सकता है।
वार्डस झील
वार्डस झील बहुत ही सुंदर मनुष्य द्वारा निर्मित एक झील है को कि शिलांग क्लब के पीछे स्थित है। यहां पर पर्यटक बोटींग का आनन्द ले सकते हैं। झील के मध्य में एक लकडी का पुल है जहां से दर्शक झील में दाना डाल कर भांति- भांति प्रकार की मछलियों को देखा जा सकता है। झील में एक संगतमीय झरना भी है जो को आजकल बंद है।
महादेवखोला मंदिर
सुरंगमय पहाडियों के बीच में गोरखा रेजीमेंट द्वारा निर्मित एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर से भगवान शंकर की अनेक दंत कथाए जुडी हुई है। शिलांग के मारवाडी समाज के लिये यह श्रद्धा का केन्द्र है। शिवरात्रि के दिन यहां बडा मेला लगता है।
दुवान सिंग सैयम ब्रिज
यह पुल वायर रोप (तार की रस्सी) से बना है जो कि शिलाँग और चेरापुंजी के रास्ते के ठीक मध्य मे है। अकसर यहाँ लोग चाय पीने के लिये रुकते हैं। हरी भरी पहाड़ियॉ बहुत ही दर्शनीय है। नवंबर- दिसंबर के महीने में जब कोहरा (धुन्ध) होता है, तब लोग यहां आना पसंद करते हैं क्योंकि तब चेरापुंजी जाना संभव नही होता।
नोहकालिकाई फाल्स
यह बांग्लादेश की सीमा पर स्थित एक सुंदर झरना है। सीढियों की सहायता से झरने के पास तक जाया जा सकता है। इन दिनो में बरसात नही होने के कारण पानी कुछ कम है।
मोस्वाई केव
यह गुफा़ प्रकृति का अनुपम खजाना है। गुफा मै पत्थरों की सुंदरता व कटाई को देखकर लगता है कि कभी यहां समुद्र होगा। स्थानीय लोगों बताते हैं कि ये गुफा गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर तक जाती है। गुफा में लगभग 500-600 मी॰ अंदर तक जाने का अवसर मिला। एक जमाने में लोग गुफा में मशाल लेकर जाया करते थे। लेकिन अब मेघालय सरकार ने विद्युत का प्रबंध कर दिया है।
सेवन सिस्टर फाल्स
यह झरनों का एक समूह है जो कि पहाडो़ की घाटी के बीच में स्थित हैं। यहाँ के दृष्य बहुत ही सुंदर हैं। इसके ठीक सामने देहरादून की सहस्त्र धाराओं के समान छोटे-छोटे कल-कल करते झरने हैं। बरसात की कमी की वजह से निश्चित रूप से यह खूबसूरत झरने संकट में है।
थेंग गार्डन
यह मेघालय सरकार द्वारा बनाया गया एक छोटा सा उद्दान है। उसमे अनेक प्रकार के फूल लगाये गये हैं। उद्यान के अंत में एक एसा स्थान बनाया गया है, जहां से खडे होकर बांग्लादेश को साफ- साफ देखा जा सकता है।
बिशप और बीडन फाल्स
बिशप और बीडन फाल्स शिलांग के मध्य स्थित सुंदर झरना है जो कि एक गहरी खाई में गिरता है।
बरापानी या उनामाई झील
शिलांग से 17 कि॰मी॰ दूर स्थित हैं। बरापानी में एक बहुत विशाल झील है जिस से जल से बिजली उत्पन्न होती है। मोटर बोट (मोटर नौका) व अन्य पानी के खेलों का आनंद लिया जा सकता है। सुंदर रेसोर्ट व रेस्टोरेंट (रेस्तराँ) भी है।
गोल्फ कोर्स
यह भारत का तीसरा सबसे बडा गोल्फ कोर्स (गोक्फ़ का मैदान) है। इस में 26 होल हैं।
श्रेणी:शिलांग
श्रेणी:मेघालय में पर्यटन आकर्षण