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यातना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन

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यातना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन CAT members.svg 350 अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधि 10 दिसम्बर 1984 26 जून 1987 83 173 अरबी, चीनी, अंग्रेज़ी, फ़्रांसीसी, रूसी, और स्पेनिश यातना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (United Nations Convention Against Torture, संक्षेप में UNCAT), जिसका पूरा नाम यातना और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या दंड के विरुद्ध कन्वेंशन है, संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में अपनाई गई एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधि है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में यातना और अन्य प्रकार के अमानवीय या अपमानजनक व्यवहारों को पूरी तरह से रोकना और समाप्त करना है। इस संधि के तहत सदस्य देशों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में यातना को रोकने के लिए प्रभावी कानूनी, प्रशासनिक और न्यायिक कदम उठाएँ।https://www.ohchr.org/en/instruments-mechanisms/instruments/convention-against-torture-and-other-cruel-inhuman-or-degrading Convention against Torture and Other Cruel, Inhuman or Degrading Treatment or Punishment OHCHR पृष्ठभूमि और इतिहास मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा के अनुच्छेद 5 और नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय करार के अनुच्छेद 7 में पहले से ही यह स्पष्ट प्रावधान था कि किसी भी व्यक्ति को यातना या क्रूर व्यवहार का शिकार नहीं बनाया जाएगा। हालाँकि, इस दिशा में एक अधिक ठोस और बाध्यकारी कानूनी तंत्र की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। वर्ष 1975 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यातना से संरक्षण के संबंध में एक घोषणापत्र अपनाया था। इसके बाद, एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। अंततः 10 दिसम्बर 1984 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा प्रस्ताव 39/46 के माध्यम से इस कन्वेंशन को अपनाया गया। 26 जून 1987 को, जब इसे 20 देशों का अनुसमर्थन प्राप्त हो गया, तब यह कन्वेंशन आधिकारिक रूप से लागू हो गया। इसी ऐतिहासिक दिन की स्मृति में हर साल 26 जून को विश्व स्तर पर 'यातना के पीड़ितों के समर्थन में अंतर्राष्ट्रीय दिवस' मनाया जाता है।Nowak Manfred McArthur Elizabeth The United Nations Convention Against Torture: A Commentary https://archive.org/details/unitednationscon0000nowa Oxford University Press 2008 978-0199280001 12-15 मुख्य प्रावधान इस कन्वेंशन में यातना की रोकथाम के लिए कई अत्यंत कठोर और सुस्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून में मील का पत्थर माने जाते हैं: यातना की परिभाषा (अनुच्छेद 1): कन्वेंशन 'यातना' को ऐसे किसी भी कृत्य के रूप में परिभाषित करता है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति को जानबूझकर गंभीर शारीरिक या मानसिक दर्द पहुँचाया जाता है। यह परिभाषा मुख्य रूप से तब लागू होती है जब ऐसा कृत्य किसी सरकारी अधिकारी द्वारा (या उसकी सहमति से) जानकारी प्राप्त करने, कबूलनामा करवाने, या दंडित करने के उद्देश्य से किया गया हो।Burgers J. Herman The United Nations Convention against Torture: A Handbook on the Convention against Torture and Other Cruel, Inhuman, or Degrading Treatment or Punishment Martinus Nijhoff Publishers 1988 45-48 निरपेक्ष प्रतिबंध (अनुच्छेद 2): कन्वेंशन यह स्पष्ट करता है कि यातना पर प्रतिबंध 'पूर्ण और निरपेक्ष' है। युद्ध की स्थिति, युद्ध का ख़तरा, आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता, या कोई भी अन्य राष्ट्रीय आपातकालीन स्थिति यातना के प्रयोग को कानूनी रूप से जायज़ ठहराने का आधार नहीं बन सकती। नॉन-रिफाउलमेंट का सिद्धांत (अनुच्छेद 3): यह कन्वेंशन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है जो किसी भी देश को ऐसे व्यक्ति को निर्वासित, प्रत्यार्पित या वापस भेजने से रोकता है, जिसके बारे में यह मानने के ठोस और पर्याप्त कारण हों कि उसे दूसरे देश में यातना का सामना करना पड़ सकता है।https://www.unhcr.org/about-unhcr/who-we-are/1951-refugee-convention The Principle of Non-Refoulement Under International Human Rights Law UNHCR यातना विरोधी समिति कन्वेंशन के प्रावधानों को सही ढंग से लागू करने और सदस्य देशों की प्रगति की निगरानी करने के लिए 'यातना विरोधी समिति' का गठन किया गया है। यह समिति 10 स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों से मिलकर बनती है। सभी सदस्य देशों को हर चार साल में इस समिति को एक विस्तृत और नियमित रिपोर्ट सौंपनी होती है, जिसमें उन्हें यह बताना होता है कि उन्होंने अपनी घरेलू नीतियों में कन्वेंशन को लागू करने के लिए क्या संस्थागत कदम उठाए हैं। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2002 में इस कन्वेंशन का एक 'वैकल्पिक प्रोटोकॉल' भी अपनाया गया था। यह प्रोटोकॉल स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पर्यवेक्षक निकायों को सदस्य देशों के निरोध केंद्रों, जेलों और पुलिस थानों का अचानक निरीक्षण करने का अधिकार देता है, ताकि यातना के मामलों को ज़मीनी स्तर पर ही रोका जा सके।Evans Malcolm Preventing Torture: A Study of the European Convention for the Prevention of Torture and Inhuman or Degrading Treatment or Punishment https://archive.org/details/preventingtortur0000evan Oxford University Press 1998 978-0198262572 312-315 सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) की आधिकारिक वेबसाइट पर कन्वेंशन का पाठ श्रेणी:मानवाधिकार