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जनार्दन प्रसाद झा 'द्विज'
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जनार्दन प्रसाद झा जनार्दन प्रसाद झा 'द्विज'.jpg 200px जनार्दन प्रसाद झा 'द्विज' (१९०४ - ५ मई १९६४) हिन्दी कवि, कथाकार तथा शिक्षक थे। द्विज १९०५ रामपुर डीह ग्राम, भागलपुर , बिहार ५ मई १९६४ पूर्णिया, बिहार हिन्दी कवि, कथाकार तथा शिक्षक , विचारक, आलोचक भारतीय हिन्दी छायावाद कथा, कविता कवितासंग्रह :अनुभूति, अंतर्ध्वअंतर्ध्वनि असंगृहीत स्फुटरचनाएँ।
कहानीसंग्रह : किसलय, माका, मृदुदल, मधुमयी
जनार्दन प्रसाद झा 'द्विज' (१९०४ - ५ मई १९६४) हिन्दी कवि, कथाकार तथा शिक्षक थे। मिश्र
राजेन्द्र प्रशाद
आधुनिक हिन्दी काव्य
१९२२ ग्रन्थमा
५२८
ये कहानी लेखकों की अगली पंक्ति में थे व इनकी गणना हिन्दी के छायावाद काल के भावुक कवियों में की जाती है। कपूर
श्याम चन्द्र
हिन्दी साहित्य का इतिहास
https://books.google.co.in/books?id=MRWZ9DSZ6e0C&pg=PT257&lpg=PT257&dq=%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%A8+%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6+%E0%A4%9D%E0%A4%BE+%27%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%27&source=bl&ots=TYjvGLuax3&sig=rfsR79HHrPMGuwsMpMqI28TbpA8&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwj43rmZ87bUAhUFR48KHSx3BSE4ChDoAQg1MAQ#v=onepage&q=%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%A8%20%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6%20%E0%A4%9D%E0%A4%BE%20%27%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%27&f=false
२००९ प्रभात प्रकाशन
दिल्ली
ISBN 8185826714, 9788185826714
२४२/३४८
सिन्हा
प्रमोद
छायावादी कवियों का सांस्कृतिक दृष्टिकोण
१९७३ लोक भारती प्रकाशन
४३२
विद्यार्थी जीवन में ही इन्होंने कहानी और पद्यरचना आरंभ कर दी थी जब कि ये विद्यालय के एक आदर्श छात्र थे। स्वभाव में गंभीर, प्रकृत्या शांत, प्रत्युत्पन्नमति, हँसमुख व्यक्ति थे जिन्होंने सदा सरल जीवन ही जिया। ये प्रतिभाशाली विचारक, निर्भय आलोचक, एवं स्पष्ट वक्ता थे तथा उन्होंनें हिंदीहित को अपने जीवन में सर्वोपरि रखा।
परिचय
श्री जनार्दन प्रसाद झा का जन्म बिहार राज्य के भागलपुर जिलांर्तगत रामपुर डीह नामक ग्राम में २४ जनवरी,१९०५ में हुआ था। इनके पिता पं॰ उचित लाला झा माध्यमिक स्कूल में अध्यापक थे। द्विज जी की प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव में हुई। गांधी जी के राष्ट्रीय आंदोलन से प्रभावित होकर झा जी शिक्षा के लिए काशी चले आए। महामना मालवीय जी की प्रेरणा तथा पं॰ रामनारायण मिश्र के संपर्क में आकर सेंट्रल हिंदू स्कूल से प्रथम श्रेणी में ऐडमिशन परीक्षा में उत्तीर्ण हुए और हिंदू विश्वविद्यालय में प्रविष्ट हुए। यहीं से उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी से प्रथम श्रेणी में कला स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। प्रसाद जी तथा प्रेमचंद्र जी से इनकी घनिष्ठता थी। कविता और कहानी कला में इन दोनों का प्रभाव झा जी की कृतियों पर पड़ा। मुंशी प्रेमचंद ने इनकी कई स्थाणों पर भूरि-भूरि प्रशंसा की है व झा जी के १९३५ में पुरस्कार का अनुमोदन भी करवाया। मूर्ति मंगल प्रेमचंद - पत्रों में https://books.google.co.in/books?id=oNFQ4VSx2QEC&pg=PA165&lpg=PA165&dq=%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%A8+%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6+%E0%A4%9D%E0%A4%BE+%27%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%27&source=bl&ots=FCviiqPCzs&sig=uDmKFyeN8twIDfTT138z_bRZG60&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjEmYH58rbUAhUEpo8KHYhTCHIQ6AEIcDAO#v=onepage&q=%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%A8%20%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6%20%E0%A4%9D%E0%A4%BE%20%27%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%27&f=false प्रथम अनामिका पब्लिशर्स एण्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स ISBN 8179751392, 9788179751398 १६६/२३२ 11 जून 2017 https://web.archive.org/web/20190110234955/https://books.google.co.in/books?id=oNFQ4VSx2QEC&pg=PA165&lpg=PA165&dq=%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%A8+%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6+%E0%A4%9D%E0%A4%BE+%27%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%27&source=bl&ots=FCviiqPCzs&sig=uDmKFyeN8twIDfTT138z_bRZG60&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjEmYH58rbUAhUEpo8KHYhTCHIQ6AEIcDAO#v=onepage&q=%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%A8%20%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6%20%E0%A4%9D%E0%A4%BE%20%27%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%27&f=false 10 जनवरी 2019 liveगोपाल
मदन
कलम का मजदूर
https://books.google.co.in/books?id=WPbRqwdUrOEC&pg=PA40&lpg=PA40&dq=%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%A8+%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6+%E0%A4%9D%E0%A4%BE+%27%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%27&source=bl&ots=xsTzShqFCE&sig=P88TZtakkyF6MBQj12I1u_v1_AU&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwj43rmZ87bUAhUFR48KHSx3BSE4ChDoAQg6MAU#v=onepage&q=%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%A8%20%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6%20%E0%A4%9D%E0%A4%BE%20%27%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%27&f=false
१९९९ राजकमल प्रकाशन
ISBN 8171788688, 9788171788682
३१९
द्विज जी का कार्यक्षेत्र बिहार राज्य रहा। काशी से शिक्षण समाप्त कर देवधर हिंदी विद्यापीठ में रजिस्ट्रार हुए। वहाँ से थोड़े ही दिनों में हिंदी विभागाध्यक्ष हो कर छपरा के राजेंद्र कालेज में चले गए। फिर औरंगाबाद, गया के सच्चिदानंद कालेज के प्रधानाचार्य हुए। पूर्णिया में डिग्री कालेज खुलने पर वहाँ प्रधानाचार्य का पद ग्रहण किया और अंत समय ५ मई १९६४ तक वहीं रहे। द्विज पहले ऐसे लेखक थे जिन्होंने प्रेमचंद के जीवन काल में ही उनपर पुस्तक लिखी थी।यायावर
भारत
पुरखों के कोठार
प्रेरणा पब्लिकेशन्स
भोपाल
ISBN 978-81-932079-0-1
183
इनकी प्रसिद्ध पंक्ति है — मैं विरह प्रणय का मधुर मोल...... पीड़ा आंसू में घोल-घोल।
कृतियाँ
कवितासंग्रह
अनुभूति, अंतर्ध्वनि और कुछ असंगृहीत स्फुटरचनाएँ।
कहानीसंग्रह
किसलय, मालिका, मृदुदल, मधुमयी गुप्ता
शांति स्वरूप
साहित्यिक निबन्ध
१९६६ अशोक प्रकाशन
७२०
इनके अतिरिक्त कुछ पत्रिकाओं में प्रकाशित कहानियां जिनका अभी संकलन नहीं हुआ है।
स्केच
चरित्ररेखा; अनेक महत्वपूर्ण भाषण, निबंध भी जिनका अभी संकलन नहीं हुआ है।
सन्दर्भ
श्रेणी:हिन्दी कवि
श्रेणी:हिन्दी कथाकार
श्रेणी:1904 में जन्मे लोग
श्रेणी:१९६४ में निधन
श्रेणी:बिहार के लोग
श्रेणी:छायावादी कवि