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डॉक्टर सुरेश आडवाणी
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सुरेश अडवाणी का जन्म 1ऑगस्ट 1947 को कराची में हुआ था। यह बहुत ही आश्चर्य की बात है,उस समय भारत और पाकिस्तान का विभाजन हो चूका था। इस कारण सुरेश अडवाणी का परिवार मुंबई के घाटकोपर में बस गया था। सुरेश अडवाणी को 8 साल की उम्र में पोलियो हो गया था।उन्होने स्कूल की पढ़ाई सिंधी मिडियम स्कूल से की थी,और सोमैया कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन किया था। ग्रेजुएशन करने बाद सुरेश अडवाणी ने एम.बी.बी.एस (M.B.B.S) ग्रैंड मेडिकल कॉलेज से किया था। सुरेश अडवाणी बचपन से ही पोलियो के शिकार के थे,और वो नहीं चाहते है कोई और उनकी तरह हो इसलिए भारत में पोलियो के उपचार के लिए बहुत से शोध किये। वो भारत में पोलियो के उपचार लाना चाहते है।मास्टर डिग्री लेने के बाद डॉक्टर सुरेश अडवाणी ने कुछ दवाये उपलब्ध करवाये। सुरेश अडवाणी का मानना पोलियो उनकी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत है और ताकत के सहारे हर छेत्र में सफलता प्राप्त कर रहे है। सुरेश अडवाणी ने भारत में बोन मार्रो ट्रांसप्लांटेशन की शुरुवात की और देश के पहले ऑन्कोलॉजिस्ट oncologist है।डॉक्टर सुरेश अडवाणी (जसलोक हॉस्पिटल) में कैंसर विभाग के निर्देशक व कैंसर विभाग के चेयरमैन हैं। वह रहेजा हॉस्पिटल में कैंसर पीड़ितों का इलाज करते है, और उसके साथ टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के कैंसर मरीजों का भी इलाज करते है। मेडिकल ऑन्कोलॉजी medical oncology मुंबई यूनिवर्सिटी(mumbai university)पीएचडी गाइड बायोलॉजी biology में मुख्य भूमिका है।
डॉक्टर सुरेश अडवाणी के मुख्य रूप से बोन मार्रो ट्रांसप्लांटेशन, हेमाटोलॉजी लेबोरटरी, फ्लो कीटोमेर, साइटोजेनेटिक, मॉलिक्यूलर लेबोरटरी, दे केयर कीमोथेरेपी यूनिट कॉउन्सिलिंग समूह है। यह मुख्यअन्वेषक (cheif investigator) रहे चुके है ल्य्म्फोब्लास्टिक लेकिमिया प्रोजेक्ट के जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान वॉशिंगटन और क्रोनो लिम्फेटिक ल्यूकेमिया परियोजना द्वारा समर्थित है। हालही डॉक्टर सुरेश अडवाणी ने इंडियन मेडिकल और पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी एसोसिएशन के साथ मिलकर डीएम मेडिकल ऑन्कोलॉजी कोर्स के लिए शिक्षण नियमावली के साथ पाठ्यक्रम लिखने की परियोजना सुरु की है। Thankyou
डॉ सुरेश आडवाणी के सम्मानित पुरस्कार
राष्टीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मेडिकल और अकैडमी रिसर्च 654 पुब्लिकेशन्स के लिए मिला।
2002 में पद्मश्री पुरस्कार।
2012 में पद्म भूषण पुरस्कार।
2005 में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड हार्वर्ड मेडिकल इंटरनेशनल में मिला।
2004 में फिसिशन्स टीचर पुरस्कार मिला।
2002 में धन्वंतरि पुरस्कार मिला।
2000 में सहयोग फउंडेशन पुरस्कार।
1990 में इंडियन कौंसिल मेडिकल रिसर्च पुरस्कार।
1985 में इंडियन सोसाइटी ऑफ़ हेमाटोलोग्य एंड ब्लड ट्रांसफूसिओं पुरस्कार।
1983 में एसोसिएशन ऑफ़ फिसिशन्स ऑफ़ इंडिया पुरस्कार।