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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

त्राटक

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right|thumb|300px|त्राटक त्राटक का सामान्य अर्थ है 'किसी विशेष दृष्य को टकटकी लगाकर देखना'। मन की चंचलता को शान्त करने के लिये साधक इसे करता है। यह ध्यान की एक विधि है जिसमें किसी वाह्य वस्तु को टकटकी लगाकर देखा जाता है। विधि- त्राटक के लिये किसी भगवान, देवी, देवता, महापुरुष के चित्र, मुर्ति या चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा गोलाकार, चक्राकार, बिन्दु, अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, आदि दृष्य का भी प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए त्राटक केंद्र को अपने से लगभग ३ फीट की दूरी पर अपनी आंखों के बराबर स्तर पर रखकर उसे सामान्य तरीके से लगातार बिना पलक झपकाए जितनी देर तक देख सकें देखें। मन में कोई विचार न आने दें। धीरे धीरे मन शांत होने लगे! त्राटक का उल्लेख शास्त्रीय योगिक ग्रंथ Haṭha Yoga Pradīpikā में छह शुद्धिकरण तकनीकों (ṣaṭkarma) में किया गया है — जहाँ इसे “एक छोटे चिह्न पर लगातार तब तक दृष्टि जमाए रखना जब तक आँसू न बहने लगें” के रूप में परिभाषित किया गया है, और कहा गया है कि यह नेत्र रोगों, थकान और आलस्य को दूर करता है। Svātmārāma, Haṭha Yoga Pradīpikā, ch. 2, śloka 31–32; translation at sacred-texts.com इसे शास्त्रीय ग्रंथ Gheranda Saṃhitā में भी वर्णित किया गया है, जिसमें इसे शुद्धिकरण (ṣaṭkarma) अभ्यासों में शामिल किया गया है तथा गहन ध्यान और एकाग्रता (dhāraṇā) के लिए एक प्रारंभिक अभ्यास के रूप में भी अनुशंसित किया गया है। Gheranda Saṃhitā, ch. 1; see discussion in modern overview of Trāṭaka kriya पारंपरिक भारतीय योग परंपराओं में यह तकनीक śodhana (इंद्रिय/नेत्र शुद्धिकरण) विधि के रूप में तथा ध्यान-तैयारी हेतु एकाग्रता अभ्यास के रूप में उपयोग की जाती रही है। Review: “Tradition and science of Trataka kriya”, Yoga Mimamsa (2024) बाहरी कड़ियाँ एकाग्रता अभ्यास के लिए त्राटक योग की साधना (अखण्ड ज्योति) नेत्र शक्ति से त्राटक साधना (वेबदुनिया) त्राटक प्राणायाम का महत्व त्राटक (विजयवाणी) श्रेणी:साधना