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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

नियति से साक्षात्कार

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thumb|जवाहरलाल नेहरु के ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण। नियति से वादा या ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के द्वारा संसद में दिया गया पहला भाषण है। इस भाषण को 20वीं सदी के महानतम भाषणों में से एक माना जाता है।<ref name="Great_Speeches">http://www.guardian.co.uk/theguardian/series/greatspeeches Great speeches of the 20th century The Guardian 8 February 2008 5 सितंबर 2016 https://web.archive.org/web/20130620163708/http://www.guardian.co.uk/theguardian/series/greatspeeches 20 जून 2013 live </ref> भाषण भाषण असल में अंग्रेज़ी में दिया गया था। उसका हिन्दी अनुवाद नीचे है। कई सालों पहले, हमने नियति के साथ एक वादा किया था, और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभायें, पूरी तरह न सही पर बहुत हद तक तो निभायें। आधी रात के समय, जब दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग जाएगा। ऐसा क्षण आता है, मगर इतिहास में विरले ही आता है, जब हम पुराने से बाहर निकल नए युग में कदम रखते हैं, जब एक युग समाप्त हो जाता है, जब एक देश की लम्बे समय से दबी हुई आत्मा मुक्त होती है। यह संयोग ही है कि इस पवित्र अवसर पर हम भारत और उसके लोगों की सेवा करने के लिए तथा सबसे बढ़कर मानवता की सेवा करने के लिए समर्पित होने की प्रतिज्ञा कर रहे हैं।... आज हम दुर्भाग्य के एक युग को समाप्त कर रहे हैं और भारत पुनः स्वयं को खोज पा रहा है। आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, वो केवल एक क़दम है, नए अवसरों के खुलने का। इससे भी बड़ी विजय और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं। भारत की सेवा का अर्थ है लाखों-करोड़ों पीड़ितों की सेवा करना। इसका अर्थ है निर्धनता, अज्ञानता, और अवसर की असमानता मिटाना। हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही इच्छा है कि हर आँख से आंसू मिटे। संभवतः ये हमारे लिए संभव न हो पर जब तक लोगों कि आंखों में आंसू हैं, तब तक हमारा कार्य समाप्त नहीं होगा। आज एक बार फिर वर्षों के संघर्ष के बाद, भारत जागृत और स्वतंत्र है। भविष्य हमें बुला रहा है। हमें कहाँ जाना चाहिए और हमें क्या करना चाहिए, जिससे हम आम आदमी, किसानों और श्रमिकों के लिए स्वतंत्रता और अवसर ला सकें, हम निर्धनता मिटा, एक समृद्ध, लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील देश बना सकें। हम ऐसी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं को बना सकें जो प्रत्येक स्त्री-पुरुष के लिए जीवन की परिपूर्णता और न्याय सुनिश्चित कर सके? कोई भी देश तब तक महान नहीं बन सकता जब तक उसके लोगों की सोच या कर्म संकीर्ण हैं।http://sourcebooks.fordham.edu/mod/1947nehru1.html सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ The ‘Tryst With Destiny’ Speech That Divided India and Pakistan श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता का इतिहास श्रेणी:भाषण श्रेणी:जवाहरलाल नेहरू