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जुमा की नमाज़
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कड़ी=https://en.wikipedia.org/wiki/File:UTM-friday.JPG|अंगूठाकार|मलेशिया में मुसलमान ख़ुतबा को सुनते
जुमा की नमाज़ (ar صلاة الجمعة) इस्लाम में एक नमाज़ होती है जो मुसलमान हर शुक्रवार दोपहर को जमात में पढ़ते हैं।https://books.google.com/books?id=rNujP218FuQC&pg=PA20 The Muslim's Prayer Fahd Salem Bahammam Modern Guide 978-1909322950 29 January 2018
इस दिन, सभी मुस्लिम नरों को नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद जाना पड़ता है, हालाँकि दूरी और हाल के कारण कुछ अपवाद होते हैं।https://www.metmuseum.org/learn/educators/curriculum-resources/art-of-the-islamic-world/unit-one/the-mosque#:~:text=The%20English%20word%20%22mosque%22%20denotes,to%20the%20will%20of%20God. The Mosque The Metropolitan Museum of Art 2025-05-19Al-Tusi, M. H. "A concise description of Islamic law and legal opinions." 2008 स्त्रियों और बच्चों भी जा सकते हैं, किंतु उनके लिए वैकल्पिक है।https://www.britannica.com/topic/Islam/Prayer Islam – Prayer, Salat, Rituals www.britannica.com en 2024-04-06
कई मुस्लिम देशों में, सप्ताहांत में शुक्रवार शामिल होता है, और अन्य देशों में शुक्रवार विद्यालयों एवं कुछ कार्यालयों के लिए आधे दिन होते हैं। जुमा की नमाज़ इस्लाम में एक अनिवार्य काम तथा उसके सबसे प्रतिष्ठित अनुष्ठानों में से एक है।
अर्थ
यह सबसे उच्च इस्लामी अनुष्ठानों में से एक है और इसकी पुष्टि अनिवार्य कृत्यों में से एक है।फहद सलेम बहम्मम The Muslim’s Prayer आधुनिक गाइड https://www.google.co.in/books/edition/The_Muslim_s_Prayer/rNujP218FuQC?hl=en&gbpv=1&pg=PA20&printsec=frontcover
दायित्व
मुसलमानों के बीच शुक्रवार की प्रार्थना (सलात अल-जुमा) के वाजिब होने के बारे में आम सहमति है - कुरान की आयत के अनुसार, साथ ही शिया और सुन्नी स्रोतों द्वारा सुनाई गई कई परंपराओं के अनुसार। अधिकांश सुन्नी स्कूलों और कुछ शिया न्यायविदों के अनुसार, शुक्रवार की प्रार्थना एक धार्मिक दायित्व है,कामरान हाशमी Religious Legal Traditions, International Human Rights Law and Muslim States 2008 मार्टिनस निजॉफ पब्लिशर्स https://www.google.co.in/books/edition/Religious_Legal_Traditions_International/yj-MrJ_tOk4C?hl=en लेकिन उनके मतभेद इस पर आधारित थे कि क्या इसका दायित्व शासक या उसके डिप्टी की उपस्थिति के लिए सशर्त है या यदि यह बिना शर्त वाजिब है . हनफ़ी और इमाम मानते हैं कि शासक या उसके डिप्टी की उपस्थिति आवश्यक है; जुमे की नमाज़ वाजिब नहीं है अगर उनमें से कोई भी मौजूद न हो। इमामियों के लिए शासक को न्यायप्रिय होना आवश्यक है ('आदिल'); अन्यथा उसकी उपस्थिति उसकी अनुपस्थिति के बराबर है। हनफियों के लिए उनकी उपस्थिति पर्याप्त है, भले ही वह न्यायी न हों। शफी, मलिकिस और हनबली शासक की उपस्थिति को कोई महत्व नहीं देते।मुहम्मद जवाद मग्नियाही The Five Schools of Islamic Law Al-Hanafi, Al-Hanbali, Al-Ja'fari, Al-Maliki, Al-Shafi'i 1995 अंसारियान https://www.google.co.in/books/edition/The_Five_Schools_of_Islamic_Law/BZoQAQAAIAAJ?hl=en
समूह में कितने पढ़ सकते हैं?
जुमे की नमाज केवल समूह में पढ़ी जा सकती है सुन्नी मुसलमानों में नमाज पढ़ाने वाले के अलावा तीन नमाज पढ़ने वाले और शिया मुसलमानों की जुमें की नमाज में सात नमाज पढ़ने वाले होने चाहिए। अगर मजबूरी न हो तो अधिक संख्या को बेहतर समझा जाता है।
क़ुरआन में
कुरआन में जुमें की नमाज के लिए खरीदना बेचना अर्थात सांसारिक व्यस्तता को छोड़ देने को कहा गया है।
बुखारी की हदीस के अनुसार जुमे की नमाज के लिए इस दिन अधिक स्वच्छता का ख्याल रखना और खुत्बा(भाषण) का सुनना भी अनिवार्य है।
सूरए जुमुअह मदीना में नाजि़ल हुआ और इसकी ग्यारह (11) आयतें हैं
ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है
जो चीज़ आसमानों में है और जो चीज़ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा की तस्बीह करती हैं जो (हक़ीक़ी) बादशाह पाक ज़ात ग़ालिब हिकमत वाला है (1)
वही तो जिसने जाहिलों में उन्हीं में का एक रसूल (मोहम्मद) भेजा जो उनके सामने उसकी आयतें पढ़ते और उनको पाक करते और उनको किताब और अक़्ल की बातें सिखाते हैं अगरचे इसके पहले तो ये लोग सरीही गुमराही में (पड़े हुए) थे (2)
और उनमें से उन लोगों की तरफ़ (भेजा) जो अभी तक उनसे मुलहिक़ नहीं हुए और वह तो ग़ालिब हिकमत वाला है (3)
ख़ुदा का फज़ल है जिसको चाहता है अता फ़रमाता है और ख़ुदा तो बड़े फज़ल (व करम) का मालिक है (4)
जिन लोगों (के सरों) पर तौरेत लदवायी गयी है उन्होने उस (के बार) को न उठाया उनकी मिसाल गधे की सी है जिस पर बड़ी बड़ी किताबें लदी हों जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया उनकी भी क्या बुरी मिसाल है और ख़ुदा ज़ालिम लोगों को मंजि़ल मकसूद तक नहीं पहुँचाया करता (5)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ यहूदियों अगर तुम ये ख़्याल करते हो कि तुम ही ख़ुदा के दोस्त हो और लोग नहीं तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो मौत की तमन्ना करो (6)
और ये लोग उन आमाल के सबब जो ये पहले कर चुके हैं कभी उसकी आरज़ू न करेंगे और ख़ुदा तो ज़ालिमों को जानता है (7)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मौत जिससे तुम लोग भागते हो वह तो ज़रूर तुम्हारे सामने आएगी फिर तुम पोशीदा और ज़ाहिर के जानने वाले (ख़ुदा) की तरफ़ लौटा दिए जाओगे फिर जो कुछ भी तुम करते थे वह तुम्हें बता देगा (8)
ऐ ईमानदारों जब जुमा का दिन नमाज़ (जुमा) के लिए अज़ान दी जाए तो ख़ुदा की याद (नमाज़) की तरफ़ दौड़ पड़ो और (ख़रीद) व फरोख़्त छोड़ दो अगर तुम समझते हो तो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है (9)
फिर जब नमाज़ हो चुके तो ज़मीन में (जहाँ चाहो) जाओ और ख़ुदा के फज़ल (अपनी रोज़ी) की तलाश करो और ख़ुदा को बहुत याद करते रहो ताकि तुम दिली मुरादें पाओ (10)
और (उनकी हालत तो ये है कि) जब ये लोग सौदा बिकता या तमाशा होता देखें तो उसकी तरफ़ टूट पड़े और तुमको खड़ा हुआ छोड़ दें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि जो चीज़ ख़ुदा के यहाँ है वह तमाशे और सौदे से कहीं बेहतर है और ख़ुदा सबसे बेहतर रिज़्क़ देने वाला है (11)
सूरए जुमुअह ख़त्म
ख़ुत्बा जुमा
इस ख़ुत्बा में अल्लाह के तारीफ़ और मुहम्मद की सलावत व सलाम के साथ साथ अपने मौजूदा मुल्क के हुक्मरान के अच्छे कामों के ज़िक्र के साथ मुसलमानों को अच्छी बातों के ख़ुत्बा-ए-जाते था, अब पुराने छपे हुए पढ़े जाते हैं।
हदीस बुख़ारी के मुताबिक़ जुमे की नमाज़ और ख़ुत्बे के दौरान एक वक़्त दुआओं के क़बूल होने का भी होता है।
जुमा की नमाज़ की मशहूर बातें
मुस्लिम मैं मशहूर है की जुमे की नमाज से पिछले हफ़्ता के गुनाह माफ़ हो जाते हैं और एक जुमे की नमाज़ से 40 नमाज़ों के बराबर सवाब मिलता है।
इन्हें भी देखें
सुन्नह नमाज़
नमाज़
तरावीह
औरत की नमाज़
जुमा मुबारक
दज्जाल
हक़ीक़ा
अक़ीक़ा
संदर्भ
श्रेणी:नमाज़
श्रेणी:इस्लाम के पाँच मूल स्तंभ
श्रेणी:इस्लामी कैलंडर