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411 समाचार
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भारतीय ध्वज संहिता

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thumb|200px|लाल किला, दिल्ली की प्राचीर पर फहराता तिरंगा भारतीय ध्वज संहिता भारतीय ध्वज को फहराने व प्रयोग करने के बारे में दिये गए निर्देश हैं। इस संहिता का आविर्भाव 2002 में किया गया था। भारत का राष्ट्रीय ध्वज, भारत के लोगों की आशाओं और आकाँक्षाओं का प्रतिरूप है। यह राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। सभी के मार्गदर्शन और हित के लिए भारतीय ध्वज संहिता-2002 में सभी नियमों, औपचारिकताओं और निर्देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है। ध्वज संहिता-भारत के स्थान पर भारतीय ध्वज संहिता-2002 को 26 जनवरी 2002 से लागू किया गया है।ये हैं भारतीय ध्वज संहिता https://web.archive.org/web/20100121014805/http://hindi.webdunia.com/miscellaneous/special08/independenceday/0808/11/1080811050_1.htm 21 जनवरी 2010 । वेब दुनिया जब भी ध्वज फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे ऐसी जगह लगाया जाए, जहाँ से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे। सरकारी भवन पर ध्वज रविवार और अन्य छुट्‍टियों के दिनों में भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है, विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है। ध्वज को सदा स्फूर्ति से फहराया जाए और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाए। फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाता है तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि ध्वज को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए। जब ध्वज किसी भवन की खिड़की, बालकनी या अगले हिस्से से आड़ा या तिरछा फहराया जाए तो ध्वज को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए। ध्वज का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है तो उसे इस प्रकार फहराया जाएगा कि जब वक्ता का मुँह श्रोताओं की ओर हो तो ध्वज उनके दाहिने ओर हो। ध्वज किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए। फटा या मैला ध्वज नहीं फहराया जाता है। ध्वज केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है। किसी दूसरे ध्वज या पताका को राष्ट्रीय ध्वज से ऊँचा या ऊपर नहीं लगाया जाएगा, न ही बराबर में रखा जाएगा। ध्वज पर कुछ भी लिखा या छपा नहीं होना चाहिए। जब ध्वज फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकान्त में पूरा नष्ट किया जाए। संशोधन भारतीय नागरिक अब रात में भी राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहरा सकते हैं। इसके लिए शर्त होगी कि ध्वज का पोल वास्तव में लंबा हो और झंडा खुद भी चमके।रात में फहराया जा सकता है तिरंगानवंबर 2024 InternetArchiveBot । हिन्दुस्तान लाइव। २३ दिसम्बर २००९ गृह मन्त्रालय ने उद्योगपति सांसद नवीन जिंदल द्वारा इस सम्बन्ध में रखे गये प्रस्ताव के बाद यह फैसला किया। इससे पहले जिंदल ने हर नागरिक के मूलभूत अधिकार के तौर पर तिरंगा फहराने के लिहाज से अदालती लड़ाई जीती थी। कांग्रेस नेता जिंदल को दिये गये संदेश में मन्त्रालय ने कहा कि प्रस्ताव की पड़ताल की गयी है और कई स्थानों पर दिन और रात में राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के लिए ध्वज के बड़े पोल लगाने पर कोई आपत्ति नहीं है। जिंदल ने जून 2009 में मन्त्रालय को दिये गये प्रस्ताव में बड़े आकार के राष्ट्रीय ध्वज को स्मारकों के पोलों पर रात में भी फहराये जाने की अनुमति माँगी थी। जिंदल ने कहा था कि भारत की ध्वज संहिता के आधार पर राष्ट्रीय ध्वज जहाँ तक सम्भव है सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच फहराया जाना चाहिए, लेकिन दुनियाभर में यह सामान्य है कि बड़े राष्ट्रीय ध्वज 100 फुट या इससे उँचे पोल पर स्मारकों पर दिन और रात फहराये गये होते हैं। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ en Flag Code of India भारतीय ध्वज संहिता गृह मंत्रालय, भारत सरकार तथ्य सारणी: फ़्लैग कोड ऑफ इंडिया, २००२ न्यायालय मामले के बारे में अतिरिक्त जानकारी ध्वज