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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

इतेसाम उद्दीन

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उर्दू yes सितंबर 2020 शेख़ मिर्ज़ा पांचनूर, चाकदहा, नदिया जिला, बंगाल सूबा, मुग़ल साम्राज्य १८०० क़ाज़ीपाड़ा मस्जिद, पांचनूर, चाकदहा, नदिया जिला, बंगाल सूबा, मुग़ल साम्राज्य १७३० मुंशी शेख़ ताजुद्दीन सैयद मुहम्मद इतेसाम उद्दीन १८ वीं सदी इस्लाम हुक्का पीते हुए मिर्ज़ा की एक तस्वीर I'tisam-ud-Din.png पांचनूरी अंगूठाकार|उनकी जन्मभूमि प्राचीन क़ाज़ीपाड़ा मस्जिद है जो आज भी खड़ी है सैयद मुहम्मद इतेसाम उद्दीन (محمد اعتصام الدين; মুহাম্মদ ইতেশামুদ্দীন), एक मुग़ल राजनयिक और १७६५ मैं यूरोप की यात्रा करने वाला पहला शिक्षित हिन्दुस्तानी और बंगाली था।various archaic and incorrect spellings such as Itesa Modeen वो बंगाल के नवाबों के साथ साथ ईस्ट इण्डिया कम्पनी की सेवा करने वाला मुंशी भी था। इन्होंने इलाहाबाद की १७६५ के संधि का मूल भी लिखा था।http://archives.anandabazar.com/archive/1110822/22south-letter.html পর্যটন-পরিকল্পনা কোথায়? Sarkar Bipulranjan 22 August 2011 Anandabazar Patrika bn 14 February 2017 15 फ़रवरी 2017 https://web.archive.org/web/20170215031134/http://archives.anandabazar.com/archive/1110822/22south-letter.html deadC. A. Storey, Persian Literature: A Bio-Bibliographical Survey, Volume 1, Part 2, Psychology Press, 2002, p.1142 प्रारंभिक जीवन वो मुग़ल सल्तनत के बंगाल सुबा में स्थित गाऊँ पांचनूर, चाकदहा, नदिया, में सैयद मुहम्मद इतेसाम उद्दीन की नाम से जनम हुआ था। वो एक बंगाली मुसलमान घराने में जनम हुआ था और इसके पिता का नाम शेख ताज उद्दीन था जो शिहाब उद्दीन का बेटा था। उनकी जन्मस्थान क़ाज़ीपाड़ा मस्जिद आज भी खड़ी है और कहा जाता है कह इसके पूर्वजों युद्ध पांडुआ के बाद वहां पहुँचे थे। ये भी कहा जाता है कह इसके पूर्वजों फारस में मंगोल हमले से फ़रार होने की कोशिश कर रहे थे। वो एक विशेषाधिकार प्राप्त पिस दृश्य से आया था, जिसमें वो अरबी , बांग्ला , हिन्दुस्तानी और फ़ारसी भाषाओं में अच्छी शिक्षा शील और प्रवाह रखते थे। इसका बड़ा भाई नवाब ए बंगाल , अलीवर्दी खान का मुफ़्ती और सलाहकार था। मुंशी सलीमुल्लाह और मिर्ज़ा मुहम्मद क़ासिम, जो मीर जाफ़र के सहायक काम करते थे, ने इतेसाम को भी मुंशी बनने की शिक्षण दी और इन्हें फ़ारसी भाषा की शिक्षा दी।C.E. Buckland, Dictionary of Indian Biography, Haskell House Publishers Ltd, 1968, p.217 कैरियर इसने अपने कैरियर का आरंभ मुर्शिदाबाद मैं मीर जाफ़र के मुंशी के तौर पर किया।C. A. Storey, Persian Literature: A Bio-Bibliographical Survey, Volume 1, Part 2, Psychology Press, 2002, p.1142 मीर कासिम के परिग्रहण के बाद वो ईस्ट इण्डिया कम्पनी के मेजर मार्टिन योर्क और मेजर मार्क के साथ राजा असद उज़्ज़मान खान बीरभूम खिलाफ़ एक अभियान में हिस्सा लिया । युद्ध के बाद, शाह आलम द्वितीय ने अज़ीमाबाद के दौरे के दौरान इसकी प्रयासों को अभिनंदन किया।C.E. Buckland, Dictionary of Indian Biography, Haskell House Publishers Ltd, 1968, p.217 बाद मैं , इतेसाम ने अनाथालय के लिए बतौर तनख़्वाहदार कैप्टन मैकिनॉन के सहायक सेवाएँ नतीजा दें। इसने मैकिनॉन और ईस्ट इण्डिया कम्पनी के साथ मिल कर १७६३ मैं मीर कासिम के खिलाफ़ युद्ध ए गिरिया और उधवा की लड़ाई के दौरान लड़ी । बारडेट ने क़ुतुबपुर का तहसीलदार भी इतेसाम को बनाया। लिखित काम इलाहाबाद की संधि शिगर्फ़ नामा ए विलायत नसब नामा (इसका खानदानी वंश) मृत्यु एक अनुमान के मुताबिक़ इसका मृत्यु १८०० में हुआ। हवाला जात श्रेणी:बंगाली लोग श्रेणी:भारतीय मुस्लिम