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अनुच्छेद 122 (भारत का संविधान)

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भारत का संविधान भाग 5 स्वतंत्रता का अधिकार (मूल अधिकार) अनुच्छेद 123 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 121 (भारत का संविधान) भारतीय संविधान सभा भारत हिंदी संविधान 1949 प्रकाशित अनुच्छेद 122 भारतीय संविधान का एक अनुच्छेद है। यह भारतीय संविधान के भाग 5 में शामिल है। यह अनुच्छेद संसद की कार्यवाही की वैधता और न्यायालयों के हस्तक्षेप से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह स्पष्ट करता है कि संसद की कार्यवाही को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि उसमें किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी त्रुटि हुई है। यह अनुच्छेद विधायिका को स्वतंत्रता देता है, जबकि साथ ही संविधान की सर्वोच्चता को भी बनाए रखता है।https://www.mea.gov.in/Images/pdf1/Part5.pdf इस अनुच्छेद के अनुसार, संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—की कार्यवाही को न्यायालयों द्वारा जांच के दायरे में नहीं लाया जा सकता, यदि आपत्ति केवल प्रक्रिया से संबंधित हो। इसका अर्थ यह है कि यदि संसद के भीतर नियमों के पालन में कोई छोटी-मोटी गलती हो जाए, तो उसे लेकर अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। अनुच्छेद 122 यह भी कहता है कि संसद के किसी अधिकारी या सदस्य द्वारा अपने अधिकारों और कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए कार्यों को भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। इससे संसद के सदस्यों और अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने की सुरक्षा मिलती है। यह प्रावधान भारतीय लोकतंत्र में शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को मजबूत करता है। अनुच्छेद 122 न्यायालयों के हस्तक्षेप पर एक सीमा निर्धारित करता है। अनुच्छेद 122 का मुख्य उद्देश्य संसद की कार्यप्रणाली को सुचारु और स्वतंत्र बनाए रखना है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि संसद अपने नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार कार्य कर सके, बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के। साथ ही, यह न्यायपालिका और विधायिका के बीच संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मूल पाठ १२२. (१) प्रक्रिया में किसी कथित अनियमिता के आधार पर संसद् की किसी कार्यवाही की मान्यता पर कोई आपत्ति न की जायेगी। (२) संसद् का कोई पदाधिकारी या सदस्य, जिस में इस संविधान के द्वारा या अधीन संसद् में प्रक्रिया को, या कार्यसंचालन को विनियमन करने की, अथवा व्यवस्था रखने की, शक्तियाँ निहित हैं, उन शक्तियों के अपने द्वारा किये गये प्रयोग के विषय में किसी न्यायालय के क्षेत्राधिकार के अधीन न होगा। अनुच्छेद 122, भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र लेखक:राजेन्द्र प्रसाद 1957 46 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१३५ सन्दर्भ श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद