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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

स्क्वॉल लाइन

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स्क्वॉल लाइन मौसमीय घटना गरज-चमक वाले बादलों की रेखीय पंक्ति स्क्वॉल लाइन (Squall Line) मौसम विज्ञान में प्रयुक्त एक शब्द है, जो गरज-चमक वाले बादलों की एक लम्बी और संकरी रेखा को दर्शाता है। यह रेखा तेज़ हवाओं, भारी वर्षा, बिजली गिरने और कभी-कभी ओलावृष्टि के साथ आगे बढ़ती है। स्क्वॉल लाइन प्रायः ठंडे मोर्चों या वायुमंडलीय अस्थिरता के कारण विकसित होती है। परिभाषा स्क्वॉल लाइन एक प्रकार की रेखीय संवहन प्रणाली होती है, जिसमें कई क्यूम्यूलोनिम्बस बादल एक सीध में संगठित हो जाते हैं। यह प्रणाली कुछ घंटों से लेकर कई घंटों तक सक्रिय रह सकती है और बड़े भूभाग को प्रभावित कर सकती है। निर्माण स्क्वॉल लाइन के निर्माण के लिए निम्न परिस्थितियाँ अनुकूल मानी जाती हैं: निचली वायुमंडलीय परतों में गर्म और आर्द्र हवा ऊपरी परतों में अपेक्षाकृत ठंडी हवा पर्याप्त ऊर्ध्वाधर वायु कतरन इन परिस्थितियों में गरज-चमक वाले बादल एक रेखा के रूप में विकसित होकर स्क्वॉल लाइन का रूप ले लेते हैं। विशेषताएँ स्क्वॉल लाइन की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं: तेज़ और अचानक चलने वाली हवाएँ मूसलधार वर्षा गरज और बिजली मौसम में तीव्र और अल्पकालिक परिवर्तन कभी-कभी बवंडर या ओलावृष्टि प्रभाव स्क्वॉल लाइन के कारण जन-जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप: हवाई और समुद्री परिवहन बाधित हो सकता है बिजली आपूर्ति में रुकावट आ सकती है कृषि फसलों और ढाँचों को क्षति हो सकती है भारत में भारत में स्क्वॉल लाइन मुख्यतः प्री-मानसून अवधि के दौरान देखी जाती है। यह विशेष रूप से पूर्वी भारत और गंगा के मैदानी क्षेत्रों में सक्रिय रहती है, जहाँ इसे स्थानीय रूप से आंधी-तूफ़ान के रूप में जाना जाता है। महत्व स्क्वॉल लाइन का अध्ययन मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। समय पर चेतावनी जारी कर के जान-माल की हानि को कम किया जा सकता है।