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मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान केन्द्र
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मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान केन्द्रDesert Medicine Research Centre
1984
अनुसंधान संस्थान
Abbreviation
DMRC
जोधपुर
राजस्थान
भारत
26.233705 73.026960 type:edu inline, title
30 acre km2
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद
dmrcjodhpur.nic.in
मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान केन्द्र (Desert Medicine Research Centre /डीएमआरसी), भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत जैव चिकित्सकीय अनुसंधान के लिए शीर्ष स्वायत संगठन, ‘भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद’ (आईसीएमआर) का एक स्थायी संस्थान है। 27 जून 1984 को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा राजस्थान के जोधपुर शहर में इस केन्द्र की स्थापना की गई, ताकि देश की मरुस्थलीय क्षेत्र की स्वास्थ्य अनुसंधानिक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
यह केन्द्र इस क्षेत्र की मुख्य स्वास्थ्य समस्याओं के शोध व अनुसन्धान कार्यो, जैसे मलेरिया, कुपोषण, सिलीकोसिस, तपेदिक, अफीम मुक्ति, रोगवाहक पारिस्थितिकी अध्ययन, कीटनाशकों की प्रतिरोधकता, चिकित्सकीय उपयोग के पौधे आदि के अध्ययन में जुटा हुआ है।
अधिदेश
मरूस्थलीय क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्याओं पर शोध एवं इस शोध को बढावा देना,
क्षेत्र में विकास की गतिविधियों के साथ बदलती स्वास्थ्य समस्याओं का अध्ययन करना,
स्थानीय व राज्य स्तरीय संस्थाओं को वैज्ञानिक व तकनीकी जानकारी से सशक्त करना।
केन्द्र के कतिपय कार्य क्षेत्र
मानव क्रिया विज्ञान
भौगोलिक जीनॉमिक्स
पोषण की बीमारियां
प्रचालन अनुसन्धान
रोगवाहक बीमारियाँ
चिकित्सकीय एवं कीटनाशक पौधे
संचारी रोग, असंचारी रोग
उन्नत कार्यात्मक जैव उपादान
नैनो बायो इण्टरफेस
मरू वातावरण से सम्बद्ध स्वास्थ्य समस्याएँ
सूखा, बाढ, अफीम सेवन, निर्जलीकरण, पानी के द्वारा फैलने वाले रोग
रेडियो समस्थानिक उपयोग,
एनबीसी आंशकाएं एवं विपदा उतरोतर प्रबन्धन ।
केन्द्र की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ
प्रारम्भिक स्तर पर मरु क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्याओं की समझ हेतु व्यापक सर्वेक्षण एवं त्वरित सूखा सर्वेक्षण जिसके अनुसार लघु एवं दीर्घकालिक कुपोषण, रक्ताल्पता, कैलोरी की कमी, विटामिन ए तथा बी की कमियां व्यापक रूप से सामने आईं। रोग वाहकों के प्रकार व उनका वितरण एवं सामाजिक आर्थिक पार्श्विकी, इन सर्वेक्षणों से ज्ञात हुए। क्यूलेक्स सूडोविश्नोई एवं क्यूलेक्स ट्राइटेनॉरिंकस, जो जापानी इनसेफलाइटिस के रोग वाहक है और साधारणतया जो चावल के खेतों में पाए जाते है, प्रचुरता से इस क्षेत्र में मिले।
विटामिन ए की कमी व नमक कार्यकर्ताओं की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए ' कैम्प एप्रोच' की उपादेयता की स्थापना ।
राष्ट्रीय नारू रोग उन्मूलन कार्यक्रम के लिए विशिष्टता का विकास। आईसीएमआर द्वारा केन्द्र के एक वैज्ञानिक को राष्ट्रीय मरू रोग उन्मूलन प्रामाणिकता समिति के सदस्य के रूप में मनोनयन।
प्रयोगशालाई वातावरण में एडिस एजिप्टाई रोग वाहकों में 7 वंशों तक अण्डों के द्वारा वायरस के संचरण का खुलासा, जिससे प्रकृति में डेंगू वायरस के संवरण की अधिक समझ हो सकी, साथ ही मरू मलेरिया की अवधारणा।
पत्थर के खानों में काम करने वाले मजदूरों में सिलीकोसिस की रोकथाम हेतु मुखावरण एवं गीली छेदन प्रणाली की उपयोगिता का प्रदर्शन ।
राजस्थान जनजाति क्षेत्र से स्वदेशी औषधीय पौधों का सार-संग्रह।
200 केडी प्रोटीन की मच्छरों के मध्य अपवर्तक आंत में उपस्थित का प्रदर्शन।
अफीम सेवन से जुडी वक्षीय क्षय रोग की संवेदनशीलता, पत्थर के खानों में काम करने वाले मजदूरों में ट्यूबर-सिलीकोसिस, कुपोषण एवं सम्बंधित विकार, पथरी एवं गावों में व्याप्त रक्तचाप का अध्ययन।
बाहरी कड़ियाँ
मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान केन्द्र का जालघर
श्रेणी:भारत में आयुर्वैज्ञानिक अनुसन्धान