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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

जिगर मुरादाबादी

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जिगर मुरादाबादी Jigar Moradabadi.jpg अली सिकंदर yes 1890 4 6 मुरादाबाद, ब्रिटिश राज yes 1960 9 9 1890 4 6 गोण्डा, उत्तर प्रदेश, भारत कवि शास्त्रीय उर्दू कविताग़ज़ल दाग़-ए-जिगर (1928)शोला-ए-तूर (1932)आतिश-ए-गुल (1954)दीवान-ए-जिगर सैयग अली नज़र साहित्य अकादमी पुरस्कार (1958) अली सिकंदर (‎6 अप्रैल 1890 – 9 सितंबर 1960), छद्मनाम जिगर मुरादाबादी, 20वीं शताब्दी के सबसे प्रसिद्ध उर्दू कवि और उर्दू गजल के प्रमुख हस्ताक्षरों में से एक थे। https://archive.org/details/Soz-e-jigarMehfilByHamidaBanuChopra Soz-e-Jigar सोज-ए-जिगर 19 जुलाई 2016 https://web.archive.org/web/20160315225628/https://archive.org/details/Soz-e-jigarMehfilByHamidaBanuChopra 15 मार्च 2016 live http://www.arabnews.com/?page=21&section=0&article=88475&d=21&m=10&y=2006 संग्रहीत प्रति 19 जुलाई 2016 https://web.archive.org/web/20160303201605/http://www.arabnews.com/?page=21&section=0&article=88475&d=21&m=10&y=2006 3 मार्च 2016 dead उनकी अत्यधिक प्रशंसित कविता संग्रह "आतिश-ए-गुल" के लिए उन्हें 1958 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा जिगर का जन्म 6 अप्रैल 1890 को शायर पिता मौलाना अली 'नज़र' के घर में हुआ। शुरुआती शिक्षा तो उन्होने प्राप्त कर ली लेकिन घोर अस्वस्थता के साथ-साथ कुछ घरेलू परेशानियों के कारण उन्होने आगे की पढ़ाई नहीं की। वैसे भी किताबी पढ़ाई को शायरी के लिए वे नुकसानदेह समझते थे। हालांकि अपने व्यक्तिगत शौक़ के कारण उन्होंने घर पर ही फ़ारसी की पढ़ाई पूरी की। इस समय तक उनका नाम अली सिकंदर था। उनके पुर्वज मौलवी मुहम्मद समीअ़ दिल्ली निवासी थे और शाहजहाँ बादशाह के शिक्षक थे। किसी कारण से बादशाह के कोप-भाजन बन गए। अतः वे दिल्ली छोड़कर मुरादाबाद जा बसे थे। ‘जिगर’ के दादा हाफ़िज़ मुहम्मदनूर ‘नूर’ भी शायर थे। http://www.urducouncil.nic.in/urdu_wrld/u_auth/index_all.htm संग्रहीत प्रति 19 जुलाई 2016 https://web.archive.org/web/20120301184839/http://www.urducouncil.nic.in/urdu_wrld/u_auth/index_all.htm 1 मार्च 2012 dead साहित्यिक जीवन अली सिकंदर से जिगर मुरादाबादी हो जाने तक की यात्रा उनके लिए सहज और सरल नहीं रही थी। हालांकि शायरी उन्हें विरासत में मिली थी। अंग्रेज़ी से बस वाकिफ़ भर थे। पेट पालने के लिए कभी स्टेशन-स्टेशन चश्मे बेचते, कभी कोई और काम कर लिया करते। ‘जिगर’ साहब का शेर पढ़ने का ढंग कुछ ऐसा था कि उस समय के युवा शायर उनके जैसे शेर कहने और उन्हीं के अंदाज़ को अपनाने की कोशिश किया करते थे। इतना ही नहीं उनके जैसा होने के लिए नए शायरों की पौध उनकी ही तरह रंग-रूप करने का जतन करती थी। http://www.thehindu.com/life-and-style/metroplus/article1514638.ece ‘जिगर’ पहले मिर्ज़ा ‘दाग’ के शिष्य थे। बाद में ‘तसलीम’ के शिष्य हुए। इस युग की शायरी के नमूने ‘दागे़जिगर’ में पाये जाते हैं। असग़र’ की संगत के कारण उनके जीवन में बहुत बडा़ परिवर्तन आया। पहले उनके यहाँ हल्के और आम कलाम की भरमार थी। अब उनके कलाम में गम्भीरता, उच्चता और स्थायित्व आ गया। उनके पढ़ने का ढंग इतना दिलकश और मोहक था कि सैंकड़ो शायर उसकी कॉपी करने का प्रयत्न करते थे। http://www.salaam.co.uk/maktabi/aligarians.html संग्रहीत प्रति 19 जुलाई 2016 https://web.archive.org/web/20160303233102/http://www.salaam.co.uk/maktabi/aligarians.html 3 मार्च 2016 dead व्यक्तिगत जीवन उन्होने आगरा की तवायफ वहीदन से प्रेम विवाह किया और शीघ्र ही बेमेल मिज़ाज के कारण उनका तलाक भी हो गया। उसके बाद उन्होने मैनपुरी की एक गायिका शीरज़न से प्रेम विवाह किया, किन्तु उसका भी हस्र पहले जैसा ही हुआ। एक बार मशहूर गायिका अख़्तरी बाई फैजाबादी (बेगम अख़्तर) के शादी के पैग़ाम को भी वे ठुकरा चुके थे। https://openlibrary.org/works/OL363392W/Woh_Surten_Ilahi संग्रहीत प्रति 19 जुलाई 2016 https://web.archive.org/web/20160304234009/https://openlibrary.org/works/OL363392W/Woh_Surten_Ilahi 4 मार्च 2016 live शेअर मेरा कमाल-ए-शेर बस इतना ही है 'जिग़र',  आप हम पे छा गए और हम ज़माने पे छा गए.. निधन जिगर का निधन गोंडा में 9 सितंबर 1960 को हो गया। उनके निधन के पश्चात गोंडा शहर में एक छोटे से आवासीय कॉलोनी का नाम उनकी स्मृति में जिगरगंज रखा गया, जो उनके घर के काफी करीब था। साथ ही वहाँ के एक इंटर्मेडिएट कॉलेज का नाम भी उनके नाम पर "दि जिगर मेमोरियल इंटर कॉलेज" रखा गया। मज़ार-ए-जिगर मुरदाबादी, तोपखाना, गोंडा में स्थित है। http://urducouncil.nic.in/gia5.pdfजून 2020 InternetArchiveBot सन्दर्भ 2 बाहरी कड़ियाँ जिगर की कवितायें कविताकोश में श्रेणी:उर्दू शायर श्रेणी: 1890 में जन्मे लोग श्रेणी:१९६० में निधन श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत उर्दू भाषा के साहित्यकार