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ओम थानवी
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दिसम्बर 2018
दिसम्बर 2018
ओम थानवी Om Thanvi in a Conference.png 220 गाल पर हाथ रखे कैमरे से कुछ हटकर किनारे की ओर देखते एक व्यक्ति की क्लोज अप तस्वीर एक सम्मेलन के दौरान थानवी, 2012 1 अगस्त, 1957, फलोदी, जोधपुर जिला, राजस्थान, भारत पत्रकार, सम्पादक हिंदी दिल्ली राजधानी क्षेत्र भारतीय स्नातकोत्तर (व्यवसाय प्रशासन) संस्मरण, समालोचना हड़प्पा संस्कृति मुअनजोदड़ोअपने अपने अज्ञेय बिहारी पुरस्कार, के.के. बिड़ला फाउंडेशनशमशेर सम्मानसार्क सम्मानहिंदी अकादमी सम्मान 1977-अबतक
ओम थानवी हिंदी भाषा के लेखक वरिष्ठ भारतीय पत्रकार, संपादक तथा आलोचक हैं।http://www.hindisamay.com/writer/%E0%A4%93%E0%A4%AE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A5%80--OM-THANVI.cspx?id=1935 लेखक ओम थानवी का व्यक्तित्व OM THANVI Hindisamay.com 2018-09-03 वे हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर के संस्थापक-कुलपति हैंhttp://www.samachar4media.com/headlines/om-thanvi-joins-patrika-group-41621.html वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी Samachar4media.com 2018-09-03 https://web.archive.org/web/20180903215323/http://www.samachar4media.com/headlines/om-thanvi-joins-patrika-group-41621.html 3 सितंबर 2018 dead इससे पूर्व हिंदी के प्रमुख दैनिक अख़बार जनसत्ता के संपादक रह चुके हैं। इनकी चर्चित कृति संस्मरण विधा में लिखी गयी किताब "मुअनजोदड़ो" है, जिस पर उनको शमशेर सम्मान सहित अनेक पुरस्कार मिले।
जीवन
ओम थानवी का जन्म राजस्थान के फलोदी क़स्बे (अब स्वतंत्र ज़िला, तब जोधपुर ज़िले का अंग) में हुआ। इनके पिता एक शिक्षाशास्त्री और प्रतिष्ठित शैक्षिक पत्रिकाओं शिविरा पत्रिका और नया शिक्षक/टीचर टुडे के संपादक थे।
पत्रकारिता एवं संपादन
पैंतालीस वर्षों के पत्रकार-जीवन में श्री थानवी ने लेखक, वक्ता और विचारक की ख्याति अर्जित की है। उनकी रुचि के क्षेत्रों में मीडिया के साथ साहित्य, कला, संस्कृति, रंगमंच और सिनेमा से लेकर इतिहास, नृतत्त्वशास्त्र, समाज विज्ञान और पर्यावरण तक शामिल हैं।
श्री थानवी ने पत्रकारिता की शुरुआत 1977 में बीकानेर में छात्र जीवन के दौरान की। व्यवसाय प्रशासन में एमकॉम करने के बाद वे 1980 में जयपुर से निकलने वाले पत्रिका समूह से जुड़े। साप्ताहिक इतवारी पत्रिका और फिर राजस्थान पत्रिका के बीकानेर संस्करण के सम्पादकीय प्रभारी रहने के बाद 1989 में इंडियन एक्सप्रेस समूह से जुड़ते हुए जनसत्ता के स्थानीय संपादक होकर चंडीगढ़ चले गए। दस साल बाद दिल्ली में कार्यकारी संपादक के रूप में जनसत्ता के सम्पूर्ण संपादन का ज़िम्मा संभाला। 16 वर्षों के संपादन काल में उन्होंने इस प्रतिष्ठित समाचार पत्र के उच्च मानकों की विरासत को समृद्ध किया।
नैतिक मूल्यों के साथ भाषा और साहित्य के अनुराग और समाज, राजनीति और संस्कृति से प्रतिबद्ध सरोकार ने जनसत्ता की अलग बौद्धिक पहचान बनाई। छब्बीस साल बाद 2015 में श्री थानवी जनसत्ता से सेवानिवृत हुए। फिर विज़िटिंग प्रोफ़ेसर के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सेंटर फ़ॉर मीडिया स्टडीज़ में पत्रकारिता का अध्यापन किया। हरिदेव जोशी विश्वविद्यालय आरम्भ करने से पहले वे दिल्ली में राजस्थान पत्रिका के सलाहकार संपादक भी रहे। वे एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय एकता परिषद के सदस्य भी रहे हैं।
मीडिया के विभिन्न रूपों — पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो-टीवी, ऑनलाइन पोर्टल और सोशल मीडिया आदि — को उन्होंने अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया है। सम-सामयिक मुद्दों के अलावा उन्होंने भाषा, साहित्य, कला, सिनेमा, पुरातत्त्व, वास्तुशिल्प आदि पर भी महत्त्वपूर्ण लेख लिखे हैं।
अकादमिक उन्मुखता
श्री थानवी ने देश और विदेश की अनेक विश्वविद्यालयों और शैक्षिक संस्थाओं में पत्रकारिता, भाषा, पर्यावरण और अन्य विषयों पर व्याख्यान दिए हैं। इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, गुलबर्गा विश्वविद्यालय, पांडिचेरी विश्वविद्यालय, तोक्यो विश्वविद्यालय (जापान), जगेलोनियन विश्वविद्यालय (पोलैंड), भारतीय विद्याभवन, न्यूयॉर्क और एशियाटिक सोसाइटी, कोलकाता जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं।
वैचारिक सहभागिता
वैचारिक आयोजनों में श्री थानवी निरंतर शिरकत करते आए हैं। उन्होंने साउथ एशिया फ्री मीडिया एसोसिएशन के दिल्ली, काबुल, कोलंबो, कॉक्स बाज़ार (बांग्लादेश), काठमांडू और लाहौर में आयोजित हुए सम्मेलनों में हिस्सा लिया। पैनोस साउथ एशिया द्वारा नगरकोट (नेपाल), बेलाज्जो (इटली), इस्तांबुल (तुर्की) और ब्रसल्स (बेल्जियम) में आयोजित संपादकों के सम्मेलनों, विश्व संपादक फोरम और विश्व समाचार-पत्र संगठन द्वारा हैदराबाद में आयोजित संपादक सम्मेलन, एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, पैनोस और ब्रिटिश उच्चायोग के संयुक्त तत्वावधान में चेन्नई में आयोजित मीडिया, जनहित और नियमन संगोष्ठी और देश-विदेश में सार्क लेखक फाउंडेशन के विभिन्न संवादों भागीदारी की है। वे प्रवासी मज़दूरों की समस्याओं पर डैड-सी (जॉर्डन) में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) और अदीस अबाबा (इथियोपिया) में विकास के लिए वित्त विषय पर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित संगोष्ठी में भी संभागी रहे। देश की शीर्ष ख्यातनाम संस्थाओं यथा गांधी शांति प्रतिष्ठान (जीपीएफ), विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सीएसडीएस), साहित्य अकादेमी, केंद्रीय हिंदी संस्थान, भारतीय भाषा परिषद, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान (एफटीआईआई), पीयूसीएल, सहमत और अनहद आदि के विमर्शों में भी विचार व्यक्त किए हैं।
पेशेवर भागीदारी
श्री थानवी मीडिया प्रतिनिधि के नाते पर्यावरण, समाज विज्ञान और कला-संस्कृति पर दुनिया के लगभग सभी महाद्वीपों में गए हैं। अनेक अहम आयोजनों की रिपोर्टिंग और समालोचना की है। विशेष रूप से उन्होंने 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जलवायु परिवर्तन पर रियो द जनेरो (ब्राज़ील) में आयोजित प्रथम पृथ्वी-सम्मेलन और उस धारा में कोपेनहेगन (डेनमार्क), कानकुन (मैक्सिको), डरबन (द. अफ़्रीका), दोहा (कतर), वारसा (पोलैंड), लीमा (पेरू), पेरिस, माराकेश (मोरक्को), बॉन (जर्मनी) और कातोवित्से (पोलैंड) में हुए पर्यावरण सम्मेलनों में शिरकत की। मुंबई, ट्यूनिस (ट्यूनीशिया) और हेलसिंकी (फिनलैंड) में आयोजित विश्व सामाजिक मंच (डब्लूएसएफ) के सम्मेलनों और भोपाल, न्यूयॉर्क और पारामारिबो (सूरीनाम) में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलनों में भी हिस्सा लिया। वे साहित्य अकादेमी के प्रतिनिधिमंडल में हवाना (क्यूबा) के सांस्कृतिक सम्मेलन में गए। भारत के उपराष्ट्रपति के दल में बुख़ारेस्ट (रोमानिया), जॉर्जटाउन (गयाना), पोर्ट ऑफ़ स्पेन (त्रिनिदाद-टोबेगो), येरेवान (आर्मीनिया), मिंस्क (बेलारूस), पेरिस और लंदन आदि में आयोजित कार्यक्रमों में भी शामिल हुए। ब्रिटिश शासन के आमंत्रण पर संपादकों के समूह के साथ इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड की यात्रा की। उन्होंने मिस्र, यूनान, चीन, हंगरी, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया, ऑस्ट्रिया, कनाडा, मलेशिया, थाईलैंड, मॉरीशस, स्पेन, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड आदि देशों की भी यात्रा की है और अनेक संस्मरण लिखे हैं।
कृतित्व Hitesh meel
मुअनजोदड़ो - हड़प्पा सभ्यता के ऊपर विमर्शपरक किताब।
अपने-अपने अज्ञेय (सं.) - संस्मरण; अज्ञेय जन्मशती पर दो खंडों में स्मृतिग्रंथ।
अतीत में दबे पाँव: यह सिंधु घाटी सभ्यता (मुअनजो-दड़ो और हड़प्पा) पर आधारित एक प्रसिद्ध यात्रा-वृत्तांत और रिपोर्ताज है। इस शीर्षक का अर्थ हज़ारों वर्ष पुराने इतिहास और प्राचीन सभ्यता के अवशेषों के माध्यम से अतीत को खोजना और महसूस करना है।राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT), कक्षा 12 हिंदी (एच्छिक) - वितान भाग 2, अध्याय: अतीत में दबे पाँव (ओम थानवी)
सम्मान
पत्रकारिता के लिए थानवी को भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रतिष्ठित गणेशशंकर विद्यार्थी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। प्रसिद्ध कृति 'मुअनजोदड़ो' के लिए इन्हें शमशेर सम्मान, सार्क लिटरेरी एवार्ड, तथा बिहारी पुरस्कार प्राप्त हुआ।Press Trust of India https://www.business-standard.com/article/pti-stories/bihari-puraskar-for-writer-journalist-om-thanvi-115041300645_1.html Bihari Puraskar for writer-journalist Om Thanvi | Business Standard News Business-standard.com 2018-09-03 https://web.archive.org/web/20180903215425/https://www.business-standard.com/article/pti-stories/bihari-puraskar-for-writer-journalist-om-thanvi-115041300645_1.html 3 सितंबर 2018 live https://aajtak.intoday.in/story/bihari-puraskar-for-writer-journalist-om-thanvi-1-807852.html ‘मुअनजोदड़ो’ के लिए ओम थानवी को बिहारी पुरस्कार - bihari puraskar for writer journalist om thanvi - AajTak Aajtak.intoday.in 2015-04-14 2018-09-03 https://web.archive.org/web/20180903215513/https://aajtak.intoday.in/story/bihari-puraskar-for-writer-journalist-om-thanvi-1-807852.html 3 सितंबर 2018 live vanson https://www.jagranjosh.com/current-affairs/%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%93%E0%A4%AE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A5%80-24%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-2014-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4-1429346502-2 Bihari Puraskar for writer journalist Om Thanvi in Hindi Jagranjosh.com 2015-04-18 2018-09-03 https://web.archive.org/web/20180903215328/https://www.jagranjosh.com/current-affairs/%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%93%E0%A4%AE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A5%80-24%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-2014-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4-1429346502-2 3 सितंबर 2018 dead
अन्य सम्मान:
हिंदी अकादमी अवार्ड
हल्दीघाटी एवार्ड
माधवराव सप्रे राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार
सन्दर्भrenuka meel
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बाहरी कड़ियाँ
ओम थानवी, लेखक परिचय, वाणी प्रकाशन।
मुअनजोदड़ो, वाणी प्रकाशन द्वारा पुस्तक का परिचय।
राजेन्द्र उपाध्याय का ब्लॉग, वेबदुनिया पर।
ओम थानवी के कुछ लेख, कल्पना इट पर।
Life down Muanjodaro’s street, कुलदीप कुमार का ब्लॉग, द हिंदू। en
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