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शीत ऋतु
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Alfons Mucha - 1896 - Winter.jpg Alfons Mucha - 1896 - Winter.jpg शीतकालीन (अल्फोन मुचा, 18 9 6)
नवम्बर 2012
शीत ऋतु
सन्दर्भ
वर्षा ऋतु की समाप्ति के पश्चात् शरद् ऋतु का आगमन होता है । पंचवटी में श्रीराम-लक्ष्मण से शरदागम का वर्णन करते हुए कहते हैं:
वर्षा विगत सरद रितु आई । लछिमन देखहू परम सुहाई ।। फूले कास सकल महि छाई । जनु बरसा कृत प्रगट बुढ़ाई ।।
आश्विन और कार्तिक शरद् ऋतु के दो मास होते हैं । इस ऋतु में सूर्य पिंगल और उष्ण होता है । आकाश निर्मल और कहीं-कहीं श्वेत वर्ण मेघ युक्त होता है । सरोवर कमलों सहित हंसों से शोभायमान होते हैं । सूखी भूमि चीटियों से भर जाती है ।
वर्षा काल में भूमिस्थ जल में अनेक प्रकार के खनिज पदार्थ मिल जाते हैं । मल, मूत्र, कीट, कृमि उनका मल-मूत्र सब कुछ जल में आकर मिल जाता है । इसे निर्विष करने के लिए सूर्य की जीवाणु नाशक प्रखर किरणें, चन्द्रमा की अमृतमय किरणें और हवा आवश्यक है तथा यह सब शरद् ऋतु में प्राप्त होती है ।
शरद् ऋतु में रातें ठण्डी और सुहावनी हो जाती है । वन कुमुद और मालती के फूलों से सुशोभित होते हैं । अनगिनत तारों की चमक और चन्द्रमा की चांदनी से रात्रि का अन्धकार दूर हो जाता है । संसार ऐसा लगता है । मानों दूध के सागर में स्नान कर रहा हो ।
शरद् ऋतु के सुहावने मौसम में ऐसा कोई सरोवर नहीं है जिस में सुन्दर कमल न हों, ऐसा कोई पंकज नहीं है जिस पर भ्रमर नहीं बैठा हो, ऐसा कोई भौंरा नहीं है जो गूंज न रहा हो । ऐसी कोई भनभनाहट और पक्षियों का कलरव नहीं जो मन न हर रहा हो । कहने का तात्पर्य यह है कि शरद् ऋतु में कमल खिले हुए है, कमलों पर बैठे हुए भौरों की रसीली गूंज मनुष्यों के चित्त को चुरा रही हैं |
स्वास्थ्य सुरक्षा
आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार यह ऋतु सभी रोगों की माता है | रोगाणां शारदी माता |
इस समय विशेष कर पित्तजन्य बीमारियाँ होती हैं | इससे बचने के लिए खीर , गुलकंद , लौकी , पेठा जैसे पित्त शामक पदार्थ खाने चाहिए | तली हुई , मिर्च मसालेदार भोजन से बचना चाहिए |https://ashram.org/health/how-to-protect-health-in-autumn/#:~:text=%E0%A4%A4%E0%A4%B2%E0%A5%80%20%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%88%E0%A4%82%20%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%82%2C%20%E0%A4%85%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%20%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%95,10%2D12%20%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%87%20%E0%A4%9A%E0%A4%AC%E0%A4%BE%20%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87%20%E0%A5%A4 शरद ऋतु में कैसे करें स्वास्थ्य की रक्षा ?
इस ऋतु में आश्विन पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाता है | हिन्दू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है |
इस दिन खीर बनाकर चन्द्रमा के किरणों में रखा जाता है | यह उत्तम पित्तशामक होता है |https://www.aajtak.in/religion/news/story/sharad-purnima-2023-know-pujan-vidhi-shubh-muhurat-and-kheer-significance-tlifdg-1807893-2023-10-28#:~:text=%E0%A4%AA%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%95%2C%20%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%80,%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AC%20%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BE%20%E0%A4%B9%E0%A5%88. Sharad Purnima 2023: शरद पूर्णिमा आज, जानें खीर का महत्व और पूजन का शुभ मुहूर्त
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