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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

तोरमाण

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अक्टूबर 2018 तोरमाण भारत वर्ष पर आक्रमण करने वाला चीन से आने वासे हूणों का नेता था जिसने 500ई के लगभग मालवा पर अधिकार किया था। मिहिरकुल तोरमाण का ही पुत्र था, जिसने हूण साम्राज्य का विस्तार अफ़ग़ानिस्तान तक किया। तोरमाण ने कई विजय अभियान किये थे, एक बड़े विस्तृत भू-भाग पर अपना साम्राज्य स्थापित किया था। अपनी विजयों के बाद उसने 'महाराजाधिराज' की उपाधि धारण की थी। भारत के काफ़ी बड़े क्षेत्रफल पर उसने अपनी विजय पताकाएँ फहराई थीं। उसका प्रभुत्व सम्भवत: मध्यप्रदेश ,नमक की पहाड़ियों तथा मध्य भारत तक व्याप्त था। बहुत बड़ी संख्या में तोरमाण के चाँदी के सिक्के बरामद हुए हैं। thumb|300px| तोरमाण के सिक्के thumb|300px| तोरमाण का सोने का सिक्का जिसमे पीठ पर हिन्दू देवी लक्ष्मी का चित्र है(circa 490-515) तोरमाण का संजली शिलालेख,मालवा और गुजरात पर उसके विजय और नियंत्रण की बात करता है। उसके क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और कश्मीर भी शामिल था। वह संभवतः कौशांबी तक गया, जहाँ उसकी एक मुहर का पता चला था। १९८३ में खोजे गए रिस्थल (मंदसौर) शिलालेख के अनुसार, मालवा के औलीकर राजा प्रकाशधर्म ने उसे हराया था। तोरमाण का सुप्रसिद्ध पुत्र मिहिरकुल अथवा 'मिहिरगुल' लगभग 502 ई. में उसका उत्तराधिकारी बना सभी चित्र English Wikipedia के Toramana लेख से सधन्यवाद अवलोकन तोरमाण को राजतरंगिणी से,सिक्कों और शिलालेखों के माध्यम से जाना जाता है। पंजाब शिलालेख खुरा शिलालेख (495-500 ,पंजाब में सॉल्ट रेंज से और अब लाहौर में), तोरमाण मध्य एशियाई लोगों के अलावा भारतीय प्रतिगामी उपाधियों को स्वीकार करते हैं। यह मिश्रित संस्कृत में,एक बौद्ध अभिलेख है, जो महिषासक विद्यालय के सदस्यों को एक मठ (विहार) का उपहार,अभिलेखित करता है। ग्वालियर का मिहिरकुल शिलालेख ग्वालियर प्रशस्तिभारत के उत्तरी मध्य प्रदेश के ग्वालियर से प्राप्त, मिहिरकुल के ग्वालियर शिलालेख में, जो कि संस्कृत में लिखा गया है, तोरमाण इस रूप में वर्णित है: " पृथ्वी का एक महान शासक, जो महान योग्यता का स्वामी एवं  गौरवशाली तोरमाण नाम से प्रसिद्ध था, जिसके द्वारा (उसकी) वीरता विशेष रूप से उसकी सत्यता से चित्रित थी, पृथ्वी न्यायोचित रूप के साथ शासित थी।" श्रेणी:हूण साम्राज्य