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अमृतलाल चक्रवर्ती
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अमृतलाल चक्रवर्ती (1863-1936) बांग्लाभाषी होते हुए भी हिन्दीसेवी एवं पत्रकार थे। इन्होंने लगभग दस वर्ष तक साप्ताहिक 'हिन्दी बंगवासी' (कलकत्ता) का सम्पादन किया। वे हिन्दी साहित्य सम्मेलन के 16वें अधिवेशन (वृन्दावन) के सभापति रहे।
बंगाल के चौबीस परगना के नादरा गाँव में १८६३ में जन्मे अमृतलाल चक्रवर्ती की प्रारंभिक शिक्षा संस्कृत में हुई। गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) में अपने मामा के पास काफी दिनों तक रहने और वहाँ स्कूल में पढ़ने के कारण हिन्दी पर उनका अधिकार हो गया तो भोजपुरी पर भी। वे भोजपुरी बोल भी लेते थे। हिंदी, अँग्रेजी, फारसी और संस्कृत पर भी उनका अधिकार था और बांग्ला तो खैर उनकी मातृभाषा ही थी। अमृतलाल चक्रवर्ती ने औपचारिक शिक्षा पूरी करने से पूर्व ही इलाहाबाद में प्रकाशित 'प्रयाग-समाचार' पत्र से पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया। कुछ दिन कालाकांकर से प्रकाशित राजा रामपाल सिंह के पत्र 'हिंदोस्थान' में भी वे रहे। कालाकांकर में रहते हुए अमृतलाल चक्रवर्ती को शिक्षा पूरी करने का मन हुआ सो घर गए, फिर कालाकांकर नहीं लौटे। कोलकाता जाकर उन्होंने कानून की डिग्री ली, लेकिन वकालत में नहीं गए। योगेन्द्रचन्द्र बसु ने 1890 में जब 'हिंदी बंगवासी' निकाला तो उसके संपादन का दायित्व अमृतलाल चक्रवर्ती को सौंपा। यह अखबार डबल रायल आकार के दो बड़े पन्नों में हर हफ्ते प्रकाशित होता था। इसका वार्षिक मूल्य दो रुपए था और प्रसार संख्या दो हजार। उस जमाने में यह संख्या अपने आप में एक कीर्तिमान मानी जाती थी।
बाहरी कड़ियाँ
हिंदी पत्रकारिता को सींचनेवाले बांग्लाभाषी मनीषी (कृपाशंकर चौबे)
श्रेणी:हिन्दी पत्रकार