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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

रघुवीर सहाय

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रघुवीर सहाय Raghuvir Sahay thumb रघुवीर सहाय yes 1929 12 09 लखनऊ, उत्तरप्रदेश, भारत yes 1990 12 30 1929 12 09 दिल्ली, भारत हरदेव सहाय (एक शिक्षक) । कवि, लेखक, पत्रकार, अनुवादक भारतीय हिन्दी आधुनिक काल गद्य और पद्य कविता, कहानी, निबंध 1984 : साहित्य अकादमी पुरस्कार लोग भूल गए हैं के लिए रघुवीर सहाय (९ दिसम्बर १९२९ - ३० दिसम्बर १९९०) हिन्दी के साहित्यकार व पत्रकार थे। रघुवीर सहाय का जन्म लखनऊ में हुआ था। अंग्रेज़ी साहित्य में एम ए (१९५१) लखनऊ विश्वविद्यालय। साहित्य सृजन १९४६ से। पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक नवजीवन (लखनऊ) से १९४९ में। १९५१ के आरंभ तक उपसंपादक और सांस्कृतिक संवाददाता। इसी वर्ष दिल्ली आए। यहाँ प्रतीक के सहायक संपादक (१९५१-५२), आकाशवाणी के समाचार विभाग में उपसंपादक (१९५३-५७)। १९५५ में विमलेश्वरी सहाय से विवाह। रचनाएँ दूसरा सप्तक, सीढ़ियों पर धूप में, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो हँसो जल्दी हँसो (कविता संग्रह), रास्ता इधर से है (कहानी संग्रह), दिल्ली मेरा परदेश और लिखने का कारण(निबंध संग्रह) उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। समकालीन भारतीय साहित्य (पत्रिका) जनवरी मार्च १९९२ साहित्य अकादमी नई दिल्ली १९२ १२ जनवरी २००९ इसके अलावा 'बारह हंगरी कहानियाँ', विवेकानंद (रोमां रोला), 'जेको', (युगोस्लावी उपन्यास, ले० येर्ज़ी आन्द्र्ज़ेएव्स्की , 'राख़ और हीरे'( पोलिश उपन्यास ,ले० येर्ज़ी आन्द्र्ज़ेएव्स्की) तथा 'वरनम वन'( मैकबेथ, शेक्सपियर ) शीर्षक से हिन्दी भाषांतर भी समय-समय पर प्रकाशित हुए हैं।रघुवीर सहाय का कवि-कर्म , सुरेश शर्मा रघुवीर सहाय समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण स्तम्भ हैं। उनके साहित्य में पत्रकारिता का और उनकी पत्रकारिता पर साहित्य का गहरा असर रहा है। उनकी कविताएँ आज़ादी के बाद विशेष रूप से सन् ’60 के बाद के भारत की तस्वीर को समग्रता में पेश करती हैं। उनकी कविताएँ नए मानव संबंधों की खोज करना चाहती हैं जिसमें गैर बराबरी, अन्याय और गुलामी न हो। उनकी समूची काव्य-यात्रा का केंद्रीय लक्ष्य ऐसी जनतांत्रिक व्यवस्था की निर्मिति है जिसमें शोषण, अन्याय, हत्या, आत्महत्या, विषमता, दासता, राजनीतिक संप्रभुता, जाति-धर्म में बँटे समाज के लिए कोई जगह न हो। जिन आशाओं और सपनों से आज़ादी की लड़ाई लड़ी गई थी उन्हें साकार करने में जो बाधाएँ आ रही हों, उनका निरंतर विरोध करना उनका रचनात्मक लक्ष्य रहा है। वे जीवन के अंतिम पायदान पर खड़े होकर अपनी जिजीविषा का कारण ‘अपनी संतानों को कुत्ते की मौत मरने से बचाने’ की बात कहकर अपनी प्रतिबद्धता को मरते दम तक बनाए रखते हैं।रघुवीर सहाय: जीवन एवं संवेदना - डॉ जय शंकर तिवारी, एम० पी० कॉलेज कोंच (जालौन) उ०प्र० सम्मान कविता संग्रह 'लोग भूल गए हैं ' के लिए 1984 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित।http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp#hindi साहित्य अकादमी पुरस्कार: हिंदी sahitya-akademi.gov.in 7 मई 2017 https://web.archive.org/web/20160915135020/http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp#hindi 15 सितंबर 2016 dead सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ रघुवीर सहाय – हिंदी के विलक्षण कवि (प्रवासी दुनिया) रघुवीर सहाय की दुनियाजून 2020 InternetArchiveBot रघुवीर सहाय.. लंबे समय तक याद रखे जाने वाले जून 2020 InternetArchiveBot (जागरण) रघुवीर सहाय की 5 बेहतरीन अंतिम कविताएँ https://web.archive.org/web/20200325171855/https://www.shabdankan.com/2020/03/raghuvir-sahay-ki-5-behtrin-antim-kavitayen.html 25 मार्च 2020 (शब्दांकन) श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी भाषा के साहित्यकार श्रेणी:हिन्दी गद्यकार श्रेणी:हिन्दी कवि