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ज़्याँ मेरी गुस्ताव लेक्लेज़ियो

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ज़्याँ मेरी गुस्ताव लेक्लेज़ियो Jean-Marie Gustave Le Clézio-press conference Dec 06th, 2008-2.jpg 200px ज़्याँ मेरी गुस्ताव लेक्लेज़ियो १३ अप्रैल, १९४० रिवेयेरा, नीस, फ़्रांस death_place साहित्य फ़्रांसिसी फ्रेंच उपन्यास, कथा, निबंध, अनुवाद आप्रवास, प्रव्रजन, शैशव, पारिस्थितिकी उपन्यास- ली प्रोसेस वर्बल अंगूठाकार|ज़्याँ मेरी गुस्ताव लेक्लेज़ियो ज़्याँ मेरी गुस्ताव लेक्लेज़ियो (जन्म-१३ अप्रैल १९४०) फ़्रांसिसी उपन्यासकार हैं। उन्हें साल २००८ के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है।http://nobelprize.org/nobel_prizes/literature/laureates/2008/ दे नोबेल प्राइज़ इन लिटेरेचर २००८ ९ अक्टूबर २००८ नोबेल प्राइज़.ऑर्ग 22 अक्तूबर 2008 https://web.archive.org/web/20081011050238/http://nobelprize.org/nobel_prizes/literature/laureates/2008/ 11 अक्तूबर 2008 live इस साल १० दिसम्बर को स्टॉकहोम में होने वाले समारोह में उन्हें अन्य नोबेल पुरस्कार विजेताओं के साथ सम्मानित किया जाएगा। १९०१ में प्रथम नोबेल साहित्य पुरस्कार प्राप्तकर्ता फ्रेंच लेखक सुली प्रुधोम से आरम्भ हुए इस सफर में क्लेजियो १४वें फ्रेंच साहित्यकार हैं। स्वीडन की नोबेल पुरस्कार समिति ने उन्हें नई दिशा में लेखन करने वाला और काव्यात्मक प्रयोगधर्मी लेखक बताया है। स्वीडिश एकेडमी ने उन्हें मौजूदा सभ्यता के दायरे से परे और इसके अंदर जाकर मानवता की खोज करने वाले लेखक की संज्ञा की। एक उपन्यासकार के रूप में लेक्लेज़ियो उस समय चर्चा में आए, जब वर्ष १९८० में उनका उपन्यास मरूस्थल (फ्रांसिसी नाम डेज़र्ट) आया। इस उपन्यास में उन्होंने अवांछित व अप्रवासियों के जरिए उत्तरी अमेरिका के रेगिस्तान में खो चुकी संस्कृति का चित्रण किया गया है। स्वीडिश एकेडमी ने उनके इस उपन्यास की भी जम कर सराहना की।http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2008/10/081009_leclezio_nobel_pp.shtml लेक्लेज़ियो को साहित्य का नोबेल ९ अक्टूबर २००८ बीबीसी 22 अक्तूबर 2008 https://web.archive.org/web/20081230235139/http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2008/10/081009_leclezio_nobel_pp.shtml 30 दिसंबर 2008 live एकेडमी ने कहा कि इस उपन्यास में उत्तरी अफ़्रीका के रेगिस्तानों में खो चुकी सभ्यता को बेहतरीन अंदाज़ में पेश किया गया। उनके हाल के लेखन में शामिल है वर्ष २००७ में आया उपन्यास बैलासिने। इसमें उन्होंने फ़िल्म आर्ट के इतिहास पर लिखा है। इसके अलावा लेक्लेज़ियो ने बच्चों पर भी कई किताबें लिखी हैं। अपने लेखन के लिए लेक्लेज़ियो को फ़्रांस में कई सम्मान मिल चुके हैं। इनमें १९७२ में मिला प्री लरबॉ और १९९७ में मिला ग्रा प्रीं ज्याँ जियोनो शामिल है। वर्ष १९४० में फ्रांस के नीस शहर में जन्मे लेक्लेज़ियो बचपन में दो साल नाइजीरिया में भी रहे हैं। उन्होंने बैंकॉक, बोस्टन और मैक्सिको सिटी के विश्वविद्यालयों में पढ़ाया भी है। उनके पूर्वज मूलत: मॉरीशस के थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद क्लेजियो की माँ फ्रांस में बस गईं जहाँ उनका जन्म हुआ। तब किसने सोचा था कि एक दिन मॉरीशस मूल का यह व्यक्ति फ्रेंच साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार अर्जित करेगा। फ्रेंच पब्लिक स्कूल में अपना आरम्भिक अध्ययन करने वाले क्लेजियो का फ्रेंच भाषा से अटूट जुड़ाव रहा। किशोरावस्था से ही लेखन में प्रवृत्त रहे क्लेजियो का पहला उपन्यास २३ वर्ष की आयु में १९६३ में 'ली प्रोसेस वर्बल' नाम से प्रकाशित हुआ था। उनकी आरम्भिक कृतियाँ रोजमर्रा के भाब्दों के उपयोग के साथ गहन संवेदनात्मक अनुभूति पैदा करने वाले अलंकृत शब्दों के विलक्षण एवं अनुपम प्रयोग व अद्भुत कल्पनाशीलता की मिसाल मानी जाती हैं। कालांतर में उन्होंने बाल-साहित्य जैसी उपेक्षित विधा पर जोर देते हुए बचपन पर केन्द्रित कई अविस्मरणीय कथायें भी रचीं। इन कृतियों में उनके बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि की झलक देखी जा सकती है। उन्होंने लगातार फ्रांस में रहने वाले आप्रवासी नार्थ अमेरिकन्स, मैक्सिको में रहने वाले इंडियन्स और हिन्द महासागर में आइसलैंड वासियों के बारे में उसी तरह से लिखा है जैसे कि वे अपने अतीत के बारे में लिखते आए हैं।http://thatshindi.oneindia.in/art-culture/2008/10/10/frenchman-le-clezio-wins-nobel-literature-prize.html साहित्य का नोबेल सम्मान क्लैजियो को ९ अक्टूबर २००८ दैट्सइंडिया 22 अक्तूबर 2008 8 नवंबर 2008 https://web.archive.org/web/20081108004631/http://www.robotstxt.org/ dead युवा लेखक के रूप में क्लेजियो की पहचान अस्तित्ववादी चिंतन के बाद साहित्य जगत में रोमन नवयुग के प्रणेता की है। उनकी अन्य कृतियों में टेरा अमाटा, युद्ध (मूल पुस्तक के शीर्षक का हिन्दी अनुवाद), उड़ान पुस्तक (मूल पुस्तक के शीर्षक का हिन्दी अनुवाद), महाकाय (मूल पुस्तक के शीर्षक का हिन्दी अनुवाद), लुलाबी (१९८०), बेलाबिलो (१९८५), इटॉइल इरैन्ट (१९९२), बैलेसिनर (२००७) इत्यादि प्रमुख हैं। टेरा अमाटा, वार, द बुक ऑफ फ्लाइट्स, द जाइन्टस कृतियों से क्लेजियो का पारिस्थितिकी की तरफ झुकाव देखा जा सकता है। 'इटॉइल इरैन्ट' में यहूदी और फिलिस्तीनी लड़कियों के बहाने विस्थापित होने और इस दौर की यातनाओं को उन्होंने बखूबी बयां किया गया है तो 'बैलेसिनर' को सिनेमा पर आधारित किया है। इस कृति में बचपन में सिनेमा के दाखिल होने, फिर उसकी दखलंदाजी और इस बहाने पूरा सिनेमाई इतिहास महसूस किया जा सकता है। क्लेजियो को सशक्त रचनाधर्मिता के चलते फ्रेंच एकेडमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। सन्दर्भ श्रेणी:नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार