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उत्तर प्रदेश का इतिहास
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उत्तर प्रदेश का भारत के इतिहास एवं भारतीय धर्म में अहम योगदान रहा है। उत्तर प्रदेश आधुनिक भारत के इतिहास और राजनीति का केन्द्र बिन्दु रहा है और यहाँ के निवासियों ने भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में प्रमुख भूमिका निभायी। उदा देवी पासी जिनका महत्वपूर्ण योगदान था
उत्तर प्रदेश के इतिहास को निम्नलिखित पाँच भागों में बाटकर अध्ययन किया जा सकता है-
प्रागैतिहासिक एवं वैदिक काल (ल. 2000 से 500 ई.पू तक)
प्राचीन काल (ल. 500 ई.पू से 650 इस्वी तक)
मध्य काल (ल. 650 से 1750 इस्वी तक) इस समय काल में अवध छेत्र में मुख्यता भर/राजभर समुदाय का शासन रहा,अवध के प्रमुख भारशिव महाराजा भारद्वाज जी हुए हैं।
पूर्व मध्यकाल (ल. 650 से 1200 इस्वी तक)
उत्तर मध्यकाल (ल. 1200 से 1750 इस्वी तक)
आधुनिक काल (ल. 1750 से 1947 इस्वी तक)
पूर्व आधुनिक काल (ल. 1750 से 1857 इस्वी तक)
उत्तर आधुनिक काल (ल. 1857 से 1947 इस्वी तक)
स्वातंत्रोत्तर काल (1947 से अब तक)
प्रागैतिहासिक एवं पूर्ववैदिक काल
right|thumb|150px|वनवास के समय राम, लक्ष्मण, सीता
उत्तर प्रदेश का ज्ञात इतिहास लगभग 4000 वर्ष पुराना है। यह आर्यावर्त का प्रमुख भाग था। रामायण में वर्णित तथा हिन्दुओं के एक मुख्य भगवान "भगवान राम" का प्राचीन राज्य कौशल इसी क्षेत्र में था, अयोध्या इस राज्य की राजधानी थी। हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान कृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में हुआ था। संसार के प्राचीनतम शहरों में एक माना जाने वाला वाराणसी शहर भी यहीं पर स्थित है। वाराणसी के पास स्थित सारनाथ का चौखन्डी स्तूप भगवान बुद्ध के प्रथम प्रवचन की याद दिलाता है।
समय के साथ यह क्षेत्र छोटे-छोटे राज्यों में बँट गया या फिर बड़े साम्राज्यों, गुप्त, मौर्य और कुषाण के शासन का अंग रहा। ७वी शताब्दी में कन्नौज गुप्त साम्राज्य का प्रमुख केन्द्र था।
प्राचीन एवं पूर्व मध्यकाल
thumb|महाजनपदों का मानचित्र में स्थान (ल. 500 ई.पू )
सातवीं शताब्दी ई. पू. के अन्त से भारत और उत्तर प्रदेश का व्यवस्थित इतिहास आरम्भ होता है, जब उत्तरी भारत में 16 महाजनपद श्रेष्ठता की दौड़ में शामिल थे, इनमें से सात वर्तमान उत्तर प्रदेश की सीमा के अंतर्गत थे।
बुद्ध ने अपना पहला उपदेश वाराणसी (बनारस) के निकट सारनाथ में दिया और एक ऐसे धर्म की नींव रखी, जो न केवल भारत में, बल्कि चीन व जापान जैसे सुदूर देशों तक भी फैला। कहा जाता है कि बुद्ध को कुशीनगर में परिनिर्वाण (शरीर से मुक्त होने पर आत्मा की मुक्ति) प्राप्त हुआ था, जो पूर्वी ज़िले देवरिया में स्थित है।
पाँचवीं शताब्दी ई. पू. से छठी शताब्दी ई. तक उत्तर प्रदेश अपनी वर्तमान सीमा से बाहर केन्द्रित शक्तियों के नियंत्रण में रहा, पहले मगध, जो वर्तमान बिहार राज्य में स्थित था और बाद में उज्जैन, जो वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है। इस राज्य पर शासन कर चुके इस काल के महान शासकों में चक्रवर्ती सम्राट महापद्मनंद और उनके पुत्र सम्राट धनानंद थे, जिसने सिकंदर को युद्धों में हराया था थे।
इस काल के दौरान बौद्ध संस्कृति, का उत्कर्ष हुआ। अशोक के शासनकाल के दौरान बौद्ध कला के स्थापत्य व वास्तुशिल्प प्रतीक अपने चरम पर पहुँचे।
right|thumb|300px|देवगढ़ का दशावतार मंदिर, गुप्त-काल में निर्मित
गुप्त काल (लगभग 320–550) के दौरान हिन्दू कला का भी अधिकतम विकास हुआ। चन्द्रगुप्त प्रथम (319–335 ई.), समुद्रगुप्त (335–380 ई.) और चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य हैं (380–415 ई.) इसके प्रमुख सम्राट हुए।
एक अन्य प्रसिद्ध शासक हर्षवर्धन (606–647) थे। जिन्होंने कान्यकुब्ज (आधुनिक कन्नौज के निकट) स्थित अपनी राजधानी से समूचे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थानके कुछ हिस्सों पर शासन किया।
लगभग 647 ई. में हर्ष की मृत्यु के बाद हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान के साथ ही बौद्ध धर्म का धीरे-धीरे पतन हो गया। इस पुनरुत्थान के प्रमुख दक्षिण भारत में जन्मे आदि शंकराचार्य थे, जो वाराणसी पहुँचे, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मैदानों की यात्रा की और हिमालय में बद्रीनाथ में प्रसिद्ध मन्दिरकी स्थापना की। इसे हिन्दू मतावलम्बी चौथा एवं अन्तिम मठ (हिन्दू संस्कृति का केन्द्र) मानते हैं।
मध्य काल
इस क्षेत्र में हालांकि 1000-1030 ई. तक मुसलमानों का आगमन हो चुका था, लेकिन उत्तरी भारत में 12वीं शताब्दी के अन्तिम दशक के बाद ही मुस्लिम शासन स्थापित हुआ, जब मुहम्मद ग़ोरी ने गहड़वालों (जिनका उत्तर प्रदेश पर शासन था) और अन्य प्रतिस्पर्धी वंशों को हराया था। लगभग 600 वर्षों तक अधिकांश भारत की तरह उत्तर प्रदेश पर भी किसी न किसी मुस्लिम वंश का शासन रहा, जिनका केन्द्र दिल्ली या उसके आसपास था। 1526 ई. में बाबर ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी को हराया और सर्वाधिक सफल मुस्लिम वंश, मुग़ल वंश की नींव रखी। इस साम्राज्य ने 200 वर्षों से भी अधिक समय तक उपमहाद्वीप पर शासन किया। इस साम्राज्य का महानतम काल अकबर (शासनकाल 1556-1605 ई.) का काल था, जिन्होंने आगरा के पास नई शाही राजधानी फ़तेहपुर सीकरी का निर्माण किया। उनके पोते शाहजहाँ (शासनकाल 1628-1658 ई.) ने आगरा में ताजमहल (अपनी बेगम की याद में बनवाया गया मक़बरा, जो अपने चोह्दवें प्रसव के दौरान चल बसी थीं जिसके मरने के तीन महीने बाद उसकी छोटी बहन से निकाह कर लिया) बनवाया, जो विश्व के महानतम वास्तुशिल्पीय नमूनों में से एक है। शाहजहाँ ने आगरा व दिल्ली में भी वास्तुशिल्प की दृष्टि से कई महत्त्वपूर्ण इमारतें बनवाईं थीं।
उत्तर प्रदेश में केन्द्रित मुग़ल साम्राज्य ने एक नई मिश्रित संस्कृति के विकास को प्रोत्साहित किया। अकबर इसके महानतम प्रतिपादक थे, जिन्होंने बिना किसी भेदभाव के अपने दरबार में वास्तुशिल्प, साहित्य, चित्रकला और संगीत विशेषज्ञों को नियुक्त किया था। हिन्दुत्व और इस्लाम के टकराव ने कई नए मतों का विकास किया, जो इन दोनों और भारत की विभिन्न जातियों के बीच आम सहमति क़ायम करना चाहते थे। भक्ति आन्दोलन के संस्थापक रामानन्द (लगभग 1400-1470 ई.), जिनका दावा था कि, मुक्ति लिंग या जाति पर आश्रित नहीं है और सभी धर्मों के बीच अनिवार्य एकता की शिक्षा देने वाले कबीर ने उत्तर प्रदेश में मौजूद धार्मिक सहिष्णुता के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई केन्द्रित की। 18वीं शताब्दी में मुग़लों के पतन के साथ ही इस मिश्रित संस्कृति का केन्द्र दिल्ली से लखनऊ चला गया, जो अवध (औध, वर्तमान अयोध्या) के नवाब के अन्तर्गत था और जहाँ साम्प्रदायिक सदभाव के माहौल में कला, साहित्य, संगीत और काव्य का उत्कर्ष हुआ।
ब्रिटिश औपनिवेशिक काल
लगभग 75 वर्ष की अवधि में वर्तमान उत्तर प्रदेश के क्षेत्र का ईस्ट इण्डिया कम्पनी (ब्रिटिश व्यापारिक कम्पनी) ने धीरे-धीरे अधिग्रहण किया। विभिन्न उत्तर भारतीय वंशों 1775, 1798 और 1801 में नवाबों, 1803 में सिंधिया और 1816 में गोरखों से छीने गए प्रदेशों को पहले बंगाल प्रेज़िडेन्सी के अन्तर्गत रखा गया, लेकिन 1833 में इन्हें अलग करके पश्चिमोत्तर प्रान्त (आरम्भ में आगरा प्रेज़िडेन्सी कहलाता था) गठित किया गया। 1856 ई. में कम्पनी ने अवध पर अधिकार कर लिया और आगरा एवं अवध संयुक्त प्रान्त (वर्तमान उत्तर प्रदेश की सीमा के समरूप) के नाम से इसे 1877 ई. में पश्चिमोत्तर प्रान्त में मिला लिया गया। 1902 ई. में इसका नाम बदलकर संयुक्त प्रान्त कर दिया गया।
1857-1859 ई. के बीच ईस्ट इण्डिया कम्पनी के विरुद्ध हुआ विद्रोह मुख्यत: पश्चिमोत्तर प्रान्त तक सीमित था। 10 मई 1857 ई. को मेरठ में सैनिकों के बीच भड़का विद्रोह कुछ ही महीनों में 25 से भी अधिक शहरों में फैल गया। 1858 ई. में विद्रोह के दमन के बाद पश्चिमोत्तर और शेष ब्रिटिश भारत का प्रशासन ईस्ट इण्डिया कम्पनी से ब्रिटिश ताज को हस्तान्तरित कर दिया गया। 1880 ई. के उत्तरार्द्ध में भारतीय राष्ट्रवाद के उदय के साथ संयुक्त प्रान्त स्वतंत्रता आन्दोलन में अग्रणी रहा। प्रदेश ने भारत को मोतीलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय, जवाहरलाल नेहरूऔर पुरुषोत्तमदास टंडन जैसे महत्त्वपूर्ण राष्ट्रवादी राजनीतिक नेता दिए। 1922 में भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाने के लिए किया गया महात्मा गांधी का असहयोग आन्दोलन पूरे संयुक्त प्रान्त में फैल गया, लेकिन चौरी चौरागाँव (प्रान्त के पूर्वी भाग में) में हुई हिंसा के कारण महात्मा गांधी ने अस्थायी तौर पर आन्दोलन को रोक दिया। संयुक्त प्रान्त मुस्लिम लीग की राजनीति का भी केन्द्र रहा। ब्रिटिश काल के दौरान रेलवे, नहरऔर प्रान्त के भीतर ही संचार के साधनों का व्यापक विकास हुआ। अंग्रेज़ों ने यहाँ आधुनिक शिक्षा को भी बढ़ावा दिया और यहाँ पर लखनऊ विश्वविद्यालय (1921 में स्थापित) जैसे विश्वविद्यालय व कई महाविद्यालय स्थापित किए।
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
१८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
वर्ष 1857 में ब्रिटिश सेना के भारतीय सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया। यह विद्रोह लगभग एक वर्ष तक चला और मुख्य रूप से उत्तर तथा मध्य भारत में फैल गया। इसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा जाता है। इस विद्रोह का आरंभ मेरठ से हुआ था।Cartwright Mark 2022-10-18 Sepoy Mutiny https://www.worldhistory.org/Sepoy_Mutiny/ World History Encyclopedia en इसका तात्कालिक कारण अंग्रेज़ों द्वारा गाय और सूअर की चर्बी वाले कारतूसों का प्रयोग बताया गया, हालाँकि सरकार ने यह घोषणा की कि कारतूस में गाय और सूअर का प्रयोग नहीं किया। लेकिन सिपाहियों का मानना था कि सरकार झूठ बोलकर उन्हें धोखा दें रही हैं।https://books.google.co.in/books?redir_esc=y&id=rsdLAQAAIAAJ&focus=searchwithinvolume&q=%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AF+%E0%A4%94%E0%A4%B0+%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%85%E0%A4%B0+ Bhārata kā rāshṭrīya āndolana tathā saṃvaidhānika vikāsa: 1600-1858 Ī Nāgorī Esa Ela Nāgorī Kāntā 2006 Āra Bī Esa E Pabliśarsa 978-81-7611-362-5 hi 99 इस संग्राम का एक अन्य प्रमुख कारण डलहौज़ी की व्यपगत का सिद्धांत भी था।https://www.britannica.com/topic/doctrine-of-lapse Doctrine of lapse British Raj, Annexation, Subsidiary Alliance Britannica www.britannica.com en 2026-08-08
यह लड़ाई मुख्यतः मेरठ, दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, झाँसी, बरेली, फैज़ाबाद और बिहार में लड़ी गई। इस ऐतिहासिक संग्राम में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, अवध की बेगम हज़रत महल, दिल्ली के प्रतीकात्मक नेता बहादुर शाह ज़फ़र व उनके सैन्य कमांडर बख्त खान, कानपुर के नाना साहेब और तात्या टोपे, इलाहाबाद के मौलवी लियाक़त अली, फैज़ाबाद के मौलवी अहमदुल्लाह शाह, बरेली के खान बहादुर खान, जगदीशपुर के कुँवर सिंह तथा रायबरेली के बेनी माधव सिंहhttps://www.jansatta.com/rajya/who-was-rana-beni-madhav-singh-rahul-gandhi-unveiled-statue-in-rae-bareli/3839514/ Who was Rana Beni Madhav Singh Rahul Gandhi unveiled statue in Rae Bareli -कौन थे राणा बेनी माधव सिंह? राहुल गांधी ने रायबरेली में किया प्रतिमा का अनावरण Jansatta www.jansatta.com hi 2026-08-08 सहित अनेक क्रांतिकारियों ने भाग लिया।
बीसवीं सदी
सन १९०२ में नार्थ वेस्ट प्रोविन्स का नाम बदल कर यूनाइटिड प्रोविन्स (संयुक्त प्रान्त) कर दिया गया। साधारण बोलचाल की भाषा में इसे यूपी कहा गया। सन १९२० में प्रदेश की राजधानी को इलाहाबाद से लखनऊ कर दिया गया। प्रदेश का उच्च न्यायालय इलाहाबाद ही बना रहा और लखनऊ में उच्च न्यायालय की एक् न्यायपीठ स्थापित की गयी।
स्वतंत्रता के पश्चात का काल
1947 में संयुक्त प्रान्त नव स्वतंत्र भारतीय गणराज्य की एक प्रशासनिक इकाई बना। दो साल बाद इसकी सीमा के अन्तर्गत स्थित, टिहरी गढ़वाल और रामपुर के स्वायत्त राज्यों को संयुक्त प्रान्त में शामिल कर लिया गया। 1950 में नए संविधान के लागू होने के साथ ही 24 जनवरी सन 1950 को इस संयुक्त प्रान्त का नाम उत्तर प्रदेश रखा गया और यह भारतीय संघ का राज्य बना। स्वतंत्रता के बाद से भारत में इस राज्य की प्रमुख भूमिका रही है। इसने देश को जवाहर लाल नेहरू और उनकी पुत्री इंदिरा गांधी सहित कई प्रधानमंत्री, सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक आचार्य नरेन्द्र देव, जैसे प्रमुख राष्ट्रीय विपक्षी (अल्पसंख्यक) दलों के नेता और भारतीय जनसंघ, बाद में भारतीय जनता पार्टी व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता दिए हैं। राज्य की राजनीति, हालांकि विभाजनकारी रही है और कम ही मुख्यमंत्रियों ने पाँच वर्ष की अवधि पूरी की है। गोविंद वल्लभ पंत इस प्रदेश के प्रथम मुख्य मन्त्री बने। अक्टूबर १९६३ में सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश एवम भारत की प्रथम महिला मुख्य मन्त्री बनी।
सन २००० में पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र स्थित गढ़वाल और कुमाऊँ मण्डल को मिला कर एक नये राज्य उत्तरांचल का गठन किया गया जिसका नाम बाद में बदल कर उत्तराखण्ड कर दिया गया है।
मायावती पहली दलित महिला हैं जो भारत के किसी राज्य की मुख्यमन्त्री बनीं हैं।[२].
उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिलें का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया है ।।
राज्य का विभाजन
उत्तर प्रदेश के गठन के तुरन्त बाद उत्तराखण्ड क्षेत्र (गढ़वाल और कुमाऊँ क्षेत्र द्वारा निर्मित) में समस्याएँ उठ खड़ी हुईं। इस क्षेत्र के लोगों को लगा कि, विशाल जनसंख्या और वृहद भौगोलिक विस्तार के कारण लखनऊ में बैठी सरकार के लिए उनके हितों की देखरेख करना सम्भव नहीं है। बेरोज़गारी, ग़रीबों और सामान्य व्यवस्था व पीने के पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं की कमी और क्षेत्र के अपेक्षाकृत कम विकास ने लोगों को एक अलग राज्य की माँग करने पर विवश कर दिया। शुरू-शुरू में विरोध कमज़ोर था, लेकिन 1990 के दशक में इसने ज़ोर पकड़ा व आन्दोलन तब और भी उग्र हो गया, जब 2 अक्टूबर 1994 को मुज़फ़्फ़रनगर में इस आन्दोलन के एक प्रदर्शन में पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में 40 लोग मारे गए। अन्तत: नवम्बर, 2000 में उत्तर प्रदेश के पश्चिमोत्तर हिस्से से उत्तरांचल के नए राज्य का, जिसमें कुमाऊं और गढ़वाल के पहाड़ी क्षेत्र शामिल थे, गठन किया गया।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
महाजनपद
संयुक्त प्रान्त
१८५७ का स्वतंत्रता संग्राम
श्रेणी:उत्तर प्रदेश का इतिहास