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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कोरारी गाँव, बेल्छी (पटना)

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मार्च 2025 गाँव कोरारी बिहार पटना हिन्दी, मगही, मैथिली, भोजपुरी, अंगिका, उर्दु, अंग्रेज़ी BR patna.bih.nic.in/ http://patna.bih.nic.in/ 25.611 85.144 right yes yes कोरारी भारतीय राज्य बिहार के पटना जिले के बेल्छी प्रखण्ड का एक गाँव है। भूगोल जनसांख्यिकी यातायात आदर्श स्थल पटना जिले के बेलछी ब्लॉक अंतर्गत कोरारी गांव में स्थित शिवाला मंदिर आस्था और अटूट विश्वास का एक ऐतिहासिक केंद्र है। पटना शहर से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर, बिहटा-सरमेरा बाईपास के पूर्व में स्थित कोरारी गांव का यह प्राचीन शिवालय अपनी सुंदरता और आध्यात्मिक शक्ति के लिए विख्यात है। सन् 1940 में स्थापित यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर भी है। गौरवशाली इतिहास भक्ति विनोद कुमार सिंह जी के अनुसार, यह कोरारी गांव का सबसे प्राचीन मंदिर है। इसका निर्माण उनके परदादा जी द्वारा कराया गया था। पीढ़ियों से इस मंदिर की देखरेख उनके परिवार और समस्त ग्रामवासियों द्वारा सामूहिक रूप से की जा रही है। समय-समय पर ग्रामीण मिलकर इसका जीर्णोद्धार और मरम्मत कराते रहते हैं, जो उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। मंदिर की वास्तुशिल्प और विशेषता अद्वितीय बनावट: यह शिवालय चतुर्भुज आकृति (Four-sided structure) में निर्मित है, जो इसकी भव्यता और वास्तुकला की सुंदरता को निखारता है। मनोकामना सिद्धि: मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। विशेषकर मंदिर की साफ-सफाई और सेवा करने वाले भक्तों पर महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है। शुभ कार्यों का साक्षी: गांव में कोई भी शुभ कार्य हो, विशेषकर विवाह संस्कार, ग्रामीण इसी मंदिर की चौखट पर आकर महादेव का आशीर्वाद लेना अनिवार्य समझते हैं। धार्मिक आयोजन और उत्सव यूं तो वर्ष भर श्रद्धालु यहां बेलपत्र और पूजन सामग्री के साथ अपनी हाजिरी लगाते हैं, लेकिन सावन माह के प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहां का नजारा अद्भुत होता है। इन विशेष अवसरों पर मंदिर को भव्य तरीके से सजाया जाता है और दूर-दराज से भक्तों का जनसैलाब महादेव के दर्शन के लिए उमड़ पड़ता है। अतिरिक्त विशेष बिंदु (धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से): 1. शांति और ध्यान का केंद्र: गांव के कोलाहल से दूर, यह शिवालय अपने आप में शांति का एक द्वीप है। चतुर्भुज आकृति होने के कारण मंदिर के गर्भगृह में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा का अनुभव होता है, जो ध्यान और मानसिक शांति के लिए अत्यंत उपयुक्त है। 2. प्रकृति और भक्ति का संगम: शिवालयों में अक्सर बेल, पीपल या बरगद के वृक्षों का सानिध्य होता है। कोरारी का यह मंदिर न केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा है, बल्कि यह गांव की हरियाली और शुद्ध वातावरण के बीच महादेव के साक्षात वास का अहसास कराता है। 3. सामुदायिक एकता का प्रतीक: यह मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का सूत्रधार है। होली, दिवाली हो या सावन का मेला, गांव के लोग जात-पात और भेदभाव भूलकर यहाँ एक साथ एकत्रित होते हैं। मंदिर की मरम्मत में हर घर का सहयोग इसे एक 'साझा विरासत' बनाता है। 4. महादेव का 'अभिषेक' और श्रृंगार: यहाँ की एक विशेष परंपरा यह भी है कि भक्त न केवल जल चढ़ाते हैं, बल्कि अपनी श्रद्धा अनुसार मंदिर को बेलपत्रों और पुष्पों से पूरी तरह आच्छादित (ढक) देते हैं। शाम की आरती के समय जब दीयों की रोशनी चतुर्भुज दीवारों पर पड़ती है, तो मंदिर की सुंदरता अलौकिक हो जाती है। श्रद्धा के लिए कुछ विशेष पंक्तियां (Quotes): "जहाँ श्रद्धा अटूट हो, वहीं महादेव का वास होता है। कोरारी का यह शिवालय हमारी पीढ़ियों की आस्था का प्रमाण है।" लेखक: - श्री ऋषभ राज (रिसर्च स्कॉलर), जय प्रकाश विश्वविद्यालय, शिक्षा सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:पटना जिला के गाँव