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गाफिल स्वामी
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गाफिल स्वामी (जन्म: २२ जुलाई १९५३, इगलास, अलीगढ) एक भारतीय साहित्यकार, कवि, लेखक एवं पत्रकार हैं।http://www.jagran.com/uttar-pradesh/aligarh-city-10260243.html गाफिल स्वामी को मिली शब्द भूषण की उपाधि ३१ मार्च २०१३ दैनिक जागरण hi 21 नवंबर 2014 https://web.archive.org/web/20150119084110/http://www.jagran.com/uttar-pradesh/aligarh-city-10260243.html 19 जनवरी 2015 live
http://www.bhaskar.com/news/MP-GWA-MAT-latest-gwalior-news-030510-862663-NOR.html मन की कुटिया रंगी जिसमें... १७ नवम्बर २०१४ दैनिक भाष्कर hi 21 नवंबर 2014 https://web.archive.org/web/20141129032919/http://www.bhaskar.com/news/MP-GWA-MAT-latest-gwalior-news-030510-862663-NOR.html 29 नवंबर 2014 livehttp://www.livehindustan.com/news/location/rajwarkhabre/article1-story-1-0-450284.html देररात तक हुई कविताओं की बौछार १० सितम्बर २०१४ लाइव हिंदुस्तान hi 21 नवंबर 2014 https://web.archive.org/web/20141129103233/http://www.livehindustan.com/news/location/rajwarkhabre/article1-story-1-0-450284.html 29 नवंबर 2014 deadhttp://www.thenetpress.com/2012/07/blog-post_30.html मुजफ्फरनगर में काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह द नेट प्रेस hi 21 नवंबर 2014 https://web.archive.org/web/20141129052316/http://www.thenetpress.com/2012/07/blog-post_30.html 29 नवंबर 2014 dead
जीवन परिचय
कवि गालिफ स्वामी का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ जनपद के ग्राम लालपुर, इगलास में २२ जुलाई १९५३ को हुआ था। इनके पिता का नाम स्व. श्री धीरी सिंह व माता श्रीमती धौरा देवी है। इनका वास्तविक नाम गौरीशंकर सिंह हैं। वें एम. ए. में परास्नातक हैं। इनकी काव्य संग्रह "जय हो भ्रष्टाचार की" के लिए मध्य प्रदेश के शब्द प्रवाह साहित्य मंच, उज्जैन द्वारा इन्हें शब्द भूषण की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया हैं।
जिंदगी पत्रकारिता से शुरुआत हुई। अनेक समाचार पत्रों में सभी तरह का कार्य किया। देश के कई प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओ में इनकी रचनाये छपती रहती है। वर्ष २०१२ में निरूपमा प्रकाशन, मेरठ से जय हो भ्रष्टाचार की नामक इनकी काव्य संग्रह प्रकाशित हुई। यह पुस्तक देश में व्याप्त भ्रष्टाचार पर केन्द्रित है।
आप हाथरस से विमल साहित्य संवर्धक संस्था (पंजी.) द्वारा वर्ष २०१० से नियमित रूप में प्रकाशित होने वाली त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका शेषामृत के विशिष्ट संरक्षक हैं।
260px right true #FFFFF0 right बाँटो जितना हो सके, प्रेम और मुस्कान।
सुख दुःख में भागी बनो, होगा सुखी जहान।
होगा सुखी जहान, समस्या हल हों सारी।
बढे आपसी प्रेम, बने जीवन सुखकारी।
कह 'गाफिल' कविराय, वक्त जैसा हो काटो।
मगर प्रेम, मुस्कान, हमेशा सबको बाँटो। गाफिल स्वामी का एक काव्य
प्रकाशित कृतियाँ
जय हो भ्रष्टाचार की
इन्हें भी देखें
शेषामृत
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
अनुभूति पर गाफिल स्वामी की कुण्डलिया
अधिकारिक ब्लॉग
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स्वामी, गाफिल
स्वामी, गाफिल
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