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भारत में कॉफी उत्पादन
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thumb|right|300px|भारत में कॉफी वन
thumb|right|300px|भारत में कॉफी बागान
भारत में कॉफ़ी का उत्पादन मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों के पहाड़ी क्षेत्रों में होता है। यहां कुल 8200 टन कॉफ़ी का उत्पादन होता है जिसमें से कर्नाटक राज्य में अधिकतम 53 प्रतिशत, केरल में 28 प्रतिशत और तमिलनाडु में 11 प्रतिशत उत्पादन होता है। भारतीय कॉफी दुनिया भर की सबसे अच्छी गुणवत्ता की कॉफ़ी मानी जाती है, क्योंकि इसे छाया में उगाया जाता है, इसके बजाय दुनिया भर के अन्य स्थानों में कॉफ़ी को सीधे सूर्य के प्रकाश में उगाया जाता है।http://ip.cals.cornell.edu/courses/iard602/2006spring/documents/sample_papers/value_coffee.ppt#1 Value Addition to Coffee in India 5 अक्टूबर 2010 Cornell Education:Intag 602 Salomey Yeboah 8 मार्च 2005 https://web.archive.org/web/20060919130235/http://ip.cals.cornell.edu/courses/iard602/2006spring/documents/sample_papers/value_coffee.ppt#1 19 सितंबर 2006 live भारत में लगभग 250000 लोग कॉफ़ी उगाते हैं; इनमें से 98 प्रतिशत छोटे उत्पादक हैं। 2009 में, भारत का कॉफ़ी उत्पादन दुनिया के कुल उत्पादन का केवल 4.5% था। भारत में उत्पादन की जाने वाली कॉफ़ी का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा निर्यात कर दिया जाता है।Illy Andrea Viani Rinantonio Espresso coffee: the science of quality http://books.google.com/books?id=AJdlfSFCmVIC&pg=PA47 2005 Academic Press 0123703719 47 30 मई 2011 https://web.archive.org/web/20140708113219/http://books.google.com/books?id=AJdlfSFCmVIC&pg=PA47 8 जुलाई 2014 live निर्यात किये जाने वाले हिस्से का 70 प्रतिशत हिस्सा जर्मनी, रूस संघ, स्पेन, बेल्जियम, स्लोवेनिया, संयुक्त राज्य, जापान, ग्रीस, नीदरलैंड्स और फ्रांस को भेजा जाता है। इटली को कुल निर्यात का 29 प्रतिशत हिस्सा भेजा जाता है। अधिकांश निर्यात स्वेज़ नहर के माध्यम से किया जाता है।
कॉफी भारत के तीन क्षेत्रों में उगाई जाती है। कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु दक्षिणी भारत के पारम्परिक कॉफ़ी उत्पादक क्षेत्र हैं। इसके बाद देश के पूर्वी तट में उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के गैर पारम्परिक क्षेत्रों में नए कॉफ़ी उत्पादक क्षेत्रों का विकास हुआ है। तीसरे क्षेत्र में उत्तर पूर्वी भारत के अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय, मणिपुर और आसाम के राज्य शामिल हैं, इन्हें भारत के "सात बन्धु राज्यों" के रूप में जाना जाता है।http://www.indiacoffee.org/indiacoffee.php?page=CoffeeRegionsIndia Coffee Regions – India 6 अक्टूबर 2010 Indian Coffee Organization https://web.archive.org/web/20081225202559/http://www1.indiacoffee.org/indiacoffee.php?page=CoffeeRegionsIndia 25 दिसंबर 2008 dead
भारतीय कॉफी, जिसे अधिकतर दक्षिणी भारत में मानसूनी वर्षा में उगाया जाता है, को "भारतीय मानसून कॉफ़ी" भी कहा जाता है। इसके स्वाद "सर्वश्रेष्ठ भारतीय कॉफ़ी के रूप में परिभाषित किया जाता है, पेसिफिक हाउस का फ्लेवर इसकी विशेषता है, लेकिन यह एक साधारण और नीरस ब्रांड है।"http://www.coffeeresearch.org/coffee/india.htm Indian Coffee 6 अक्टूबर 2010 Coffee Research organization 28 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20101228183932/http://www.coffeeresearch.org/coffee/india.htm dead कॉफ़ी की चार ज्ञात किस्में हैं अरेबिका, रोबस्टा, पहली किस्म जिसे 17 वीं शताब्दी में कर्नाटक के बाबा बुदान पहाड़ी क्षेत्र में शुरू किया गया, का विपणन कई सालों से केंट और S.795 ब्रांड नामों के तहत किया जाता है।अराकुनोमिक्स माडल कोफी कृषि के लिए जाना जाता है
इतिहास
कॉफी उगाने का एक लम्बा इतिहास है, जो पहले इथोपिया से, इसके बाद अरेबिया से जुड़ा है, यह येमेन से भी काफी सम्बन्ध रखता है। हालांकि, पेरिस में बिबलियोथेक नेशनेल के अनुसार, इसका सबसे पुराना इतिहास 875 ई. पूर्व का है। इसका मूल स्रोत एब्बिसिनिया में भी पाया गया है, जहां से इसे 15 वीं शताब्दी में अरेबिया लाया गया।
भारतीय सन्दर्भ एक भारतीय मुस्लिम संत, बाबा बुदान से शुरू हुआ,http://books.google.co.uk/books?id=BuwFF2JLw1MC&pg=PA293 Lee Hau Leung Lee Chung-Yee Building supply chain excellence in emerging economies 2007 293–94 0387384286 30 मई 2011 https://web.archive.org/web/20121113110037/http://books.google.co.uk/books?id=BuwFF2JLw1MC&pg=PA293 13 नवंबर 2012 livehttp://www.archive.org/stream/encyclopediabrit06newyrich/encyclopediabrit06newyrich_djvu.txt The encyclopaedia britannica; a dictionary of arts, sciences, and general literature Coffee 110–112 दिसम्बर 1, 2010 Encyclopedia Britannica Archive.org https://web.archive.org/web/20121110123408/http://www.archive.org/stream/encyclopediabrit06newyrich/encyclopediabrit06newyrich_djvu.txt 10 नवंबर 2012 live जब मक्का की एक तीर्थयात्रा पर सात कॉफ़ी बीन्स को तस्करी के द्वारा येमेन से भारत के मैसूर में लाया गया। इन्हें वह अपनी कमर पर बांध कर लाया था, इन्हें चंद्रगिरी की पहाड़ियों में उगाया गया (1829 m), अब इन्हें चिक्कामगलुरु जिले में बाबा बुदान गिरी के नाम से जाना जाता है। यह नाम उसी संत के नाम पर पड़ा. (गिरी का अर्थ है "पहाड़ी"). कॉफ़ी के हरे बीजों को अरब से बहार लेजाना गैर-कानूनी माना जाता था। क्योंकि सात नंबर को इस्लाम में एक पवित्र नंबर माना जाता है, इसलिए संत के द्वारा सात कॉफ़ी के बीजों को ले जाया जाना एक धार्मिक कार्य माना गया।Robertson Carol The Little Book of Coffee Law 77–79 नवम्बर 29, 2010 http://books.google.co.in/books?id=Hy0YIUYybOsC&pg=PA78 American Bar Association 2010 1604429852 https://web.archive.org/web/20121103051541/http://books.google.co.in/books?id=Hy0YIUYybOsC&pg=PA78 3 नवंबर 2012 live
यह भारत में कॉफी उद्योग की शुरुआत थी और विशेष रूप से, मैसूर के तत्कालीन राज्य में जो वर्तमान में कर्नाटक राज्य का एक हिस्सा है। इसे बाबा बुदान की बहादुरी की उपलब्धि थी, क्योंकि अरब में अन्य देशों को कॉफ़ी के निर्यात पर सख्ती से रोक लगायी गयी थी, इसे केवल भुन कर या उबाल कर ही किसी अन्य देश को ले जाने की अनुमति थी। ताकि किसी और देश में इसका अंकुरण न किया जा सके.Playne Somerset Bond J.W. Wright Arnold Southern India – Its History, People, Commerce: Its History, People, Commerce, and Industrial Resources https://archive.org/details/southernindiaits00some 2004 Asian Educational Services 8120613449 219-222
thumb|right|ऊटी कॉफी बागान
बाबा बुदान के द्वारा पहली बार बीज बोये जाने के बाद जल्दी ही इसकी व्यवस्थित खेती की शुरुआत हो गयी, 1670 में इसे निजी तौर पर उगाया जाने लगा, 1840 में बाबा बुदान गिरी के आस पास और कर्नाटक में आस पास की पहाड़ियों में इसकी पहली खेती की गयी। यह विनाड के अन्य क्षेत्रों (वर्तमान में केरल का हिस्सा है), तमिलाडू में नीलगिरी और शेवारोयस में फ़ैल गयी। 19 वीं सदी में ब्रिटिश औपनिवेशिक मौजूदगी के सात इसकी जड़ें भारत में और मजबूत हो गयीं, भारत में निर्यात के लिए कॉफ़ी का उत्पादन किया जाने लगा. इस प्रकार से कॉफ़ी की संस्कृति दक्षिणी भारत में तेजी से फ़ैल गयी।
प्रारंभ में अरेबिया लोकप्रिय था। हालांकि, आरम्भ में इस किस्म को कॉफ़ी रस्ट के कारण काफी नुकसान हुआ, कॉफ़ी की एक वैकल्पिक किस्म पैदा हुई, जिसे रोबस्टा कहा जाने लगा. लिबेरिका और अरेबिका के बीच की एल संकर, अरेबिका की रस्ट सहिष्णु किस्म लोकप्रिय हो गयी। यह कॉफ़ी की सबसे आम किस्म है, जिसे देश में उगाया जाता है। अकेले कर्नाटक में इस किस्म का 70 प्रतिशत हिस्सा उगाया जाता है।
सीमांत किसानों को सरंक्षण प्रदान किया, इस अधिनियम के तहत भारतीय कॉफ़ी बोर्ड की स्थापना की गयी, जिसका संचालन वाणिज्य मंत्रालय के द्वारा किया गया। सरकार ने नाटकीय रूप से भारत में कॉफ़ी के निर्यात पर अपना नियंत्रण बढ़ा दिया, कॉफ़ी के उत्पादकों को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया। ऐसा करने में, उच्च गुणवत्ता की कॉफ़ी के उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहन मिला और कॉफ़ी की गुणवत्ता स्थिर हो गयी।
पिछले 50 सालों में भारत में कॉफ़ी का उत्पादन 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है।Coffee pests, diseases and their management Waller, J. M., Bigger, M., Hillocks, R.J. CABI 2007 1845931297 26 1991 से, भारत में आर्थिक उदारीकरण हुआ, उद्योग ने इसका पूरा फायदा उठाया, उत्पादन की लगत सस्ती हो गयी।http://books.google.co.uk/books?id=_RU8D9kB714C&pg=PA74 Clay, Jason, W. World agriculture and the environment: a commodity-by-commodity guide to impacts and practices आइलैंड प्रेस 2004 74 1559633700 30 मई 2011 https://web.archive.org/web/20121113110057/http://books.google.co.uk/books?id=_RU8D9kB714C&pg=PA74 13 नवंबर 2012 live 1993 में, एक बड़े आंतरिक बिक्री कोटा के डरा कॉफ़ी उद्योग में उदारीकरण में पहला कदम उठाया गया, इसमें निश्चित किया गया कि कॉफ़ी के किसान अपने 30 प्रतिशत उत्पादन को भारत में ही बेचेंगे. 1994 में इसमें संशोधन किया गया, जब मुक्त बिक्री कोटा के द्वारा बड़े और छोटे पैमाने के उत्पादकों को अपनी कॉफ़ी के 70 से 100 प्रतिशत तक हिस्से को घरेलू या अंतर्राष्ट्रीय रूप से बेचने की अनुमति दे दी गयी। सितम्बर 1996 में अंतिम संशोधन किया गया जिसमें देश में सभी कॉफ़ी उत्पादकों से संबंधित नियमों का उदारीकरण किया गया और उन्हें स्वतंत्रता दे दी गयी कि वे जहां चाहें अपने उत्पाद बेच सकते थे और अभी तक इस स्वतंत्रता को यथावत रखा गया है।
उत्पादन
पृष्ठभूमि
thumb|right|भारत के मुख्य कॉफ़ी उत्पादक राज्य
thumb|right|कर्नाटक कॉफी बीन्स
सीलोन की तरह, 1870 के दशक से भारत में कॉफ़ी के उत्पादन में तेजी से गिरावट आयी, इसे उभरते हुए चाय उद्योग ने तेजी से बाहर कर दिया. विनाशकारी कॉफी के रस्ट ने कॉफ़ी के उत्पादन को इतना अधिक प्रभावित किया कि कॉफ़ी की लगत बढ़ गयी। कई स्थानों पर कॉफ़ी की जगह चाय की खेती शुरू कर दी गयी।http://books.google.co.uk/books?id=Mu48AAAAIAAJ&pg=PA462 The Cambridge History of the British Empire, Volume 1 CUP 1929 462 30 मई 2011 https://web.archive.org/web/20121113110108/http://books.google.co.uk/books?id=Mu48AAAAIAAJ&pg=PA462 13 नवंबर 2012 live हालांकि, सीलोन में कॉफी उद्योग पर इस का अधिक प्रभाव नहीं पड़ा था। भारत में चाय उद्योग ने इसे काफी हद तक प्रतिस्थापित भी किया था, फिर भी ब्रिटिश गयाना के साथ ब्रिटिश साम्राज्य में भारत कॉफ़ी के उत्पादन का एक गढ़ था। 1910-12 की अवधि में, दक्षिणी पूर्वी राज्यों में 203134 acre क्षेत्र में कॉफ़ी के बगान थे, इसके अधिकांश हिस्से को इंग्लैण्ड को निर्यात कर दिया जाता था।203134 acre
1940 के दशक में, भारतीय फिल्टर कॉफी, गहरे रोस्टेड कॉफ़ी बीन्स से बनायी जाने वाली मीठी दूध की कॉफ़ी (70%–80%) और चिकोरी (20%–30%) व्यावसायिक रूप से काफी सफल हुई. यह विशेष रूप से आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिल नाडू के दक्षिणी राज्यों में लोकप्रिय थी। कॉफ़ी के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किये जाने वाले बीन्स अरेबिका और रोबस्टा हैं जिन्हेंकर्नाटक (कोडागु, चिक्कामगलारू और हस्सन), केरल (मालाबार क्षेत्र) और तमिल नाडू (नीलगिरी जिला, येरकौड़ और कोडईकनाल में उगाया जाता है।
thumb|left|ग्लेंलोरना टाटा कॉफी एस्टेट, कूर्ग, भारत
भारत में कॉफ़ी उत्पादन 1970 के दशक में तेजी से बढ़ा, यह 1971–72 में 68,948 टन से बढ़ कर 1979–80 में 120,000 टन तक पहुंच गया और 1980 के दशक में इसमें 4.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई.http://books.google.co.uk/books?id=soowfYHKJloC&pg=PA112 Medium-term prospects for agricultural commodities: projections to the year 2000 संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन of the संयुक्त राष्ट्र 112 1994 9251034826 30 मई 2011 https://web.archive.org/web/20121113110115/http://books.google.co.uk/books?id=soowfYHKJloC&pg=PA112 13 नवंबर 2012 live इसमें 1990 के दशक में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, उत्पादन में विकास की दृष्टि से केवल युगांडा इसका प्रतिस्पर्धी था।The Eastern economist, Volume 75, Part 2 1980 950–1http://books.google.co.uk/books?id=kUu4DjBo4WQC&pg=PA128 Talbot, John M. Grounds for agreement: the political economy of the coffee commodity chain Rowman & Littlefield 2004 128 0742526291 30 मई 2011 https://web.archive.org/web/20121113110136/http://books.google.co.uk/books?id=kUu4DjBo4WQC&pg=PA128 13 नवंबर 2012 live 2007 तक, जैविक कॉफी के बारे में हो गया था 2600 ha टन के बारे में 1700 उत्पादन एक साथ अनुमान है। खाद्य और कृषि संस्थान के द्वारा 2008 में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, भारत में हरी कॉफ़ी के उत्पादन का क्षेत्र 342000 ha था,http://faostat.fao.org/site/567/DesktopDefault.aspx?PageID=567#ancor Area Harvested (ha) 6 अक्टूबर 2010 FAO https://web.archive.org/web/20150906230329/http://faostat.fao.org/site/567/DesktopDefault.aspx?PageID=567#ancor 6 सितंबर 2015 live इससे अनुमानतः 7660 हेक्टोग्राम प्रति हेक्टेयर का उत्पादन हुआ,http://faostat.fao.org/site/567/DesktopDefault.aspx?PageID=567#ancor Yield Harvested (hg/Ha) 6 अक्टूबर 2010 FAO https://web.archive.org/web/20150906230329/http://faostat.fao.org/site/567/DesktopDefault.aspx?PageID=567#ancor 6 सितंबर 2015 live कुल उत्पादन अनुमानतः 262,000 टन था।http://faostat.fao.org/site/567/DesktopDefault.aspx?PageID=567#ancor Production (tonnes) 6 अक्टूबर 2010 FAO https://web.archive.org/web/20150906230329/http://faostat.fao.org/site/567/DesktopDefault.aspx?PageID=567#ancor 6 सितंबर 2015 live
भारत में लगभग 250000 कॉफ़ी उत्पादक हैं; इनमें 98 प्रतिशत छोटे उत्पादक हैं। इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक छोटे फ़ार्म हैं, जिनमें 10 acreया कम शामिल हैं। 2001-2002 के लिए प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, भारत में कॉफी के तहत कुल क्षेत्रफल 346995 ha acre था जिसमें से 175,475 छोटे क्षेत्र 71.2% हिस्सा बनाते हैं। 346995 ha acre 100 ha से अधिक बड़े क्षेत्रों के तहत आने वाला क्षेत्र 31571 ha था (सभी क्षेत्रों का केवल 9.1 %) जो 167 क्षेत्रों के तहत आता था। 2 haसे कम क्षेत्रों में आने वाला क्षेत्र 138,209 धारकों में 114546 ha था (कुल क्षेत्रफल का 33 प्रतिशत).
जोत का आकार संख्या (2001-2002) जोत का क्षेत्रफल 10 हेक्टेयर से कम 10 ha 175,475 247087 ha 10 और 100 हेक्टेयर के बीच और ज्यादा. 2833 99908 ha कुल 178,308 346995 ha
उत्पादन के महत्वपूर्ण क्षेत्र दक्षिण भारतीय राज्यों कर्नाटक, केरल और तमिल नाडू में हैं जो 2005 -2006 के उत्पादक सीज़न में भारत की कॉफ़ी उत्पादन का 92 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाते हैं। इसी सीज़न में, भारत ने 440000 lb से ज्यादा कॉफ़ी का निर्यात किया, इसका 25 प्रतिशत इटली को निर्यात किया गया। परंपरागत रूप से, भारत अरेबिका कॉफ़ी का विख्यात उत्पादक है, लेकिन पिछले दशक में, रोबस्टा का उत्पादन अधिक हुआ है, जो अब भारत के कॉफ़ी उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाते हैं। कॉफ़ी की घरेलू खपत 1995 में 50000 टन से बढ़कर 2008 में 94400 टन हो गयी।http://www.indiacoffee.org/indiacoffee.php?page=CoffeeData Coffee Data 5 अक्टूबर 2010 Coffee Board of India 14 अगस्त 2009 https://web.archive.org/web/20090814115306/http://www.indiacoffee.org/indiacoffee.php?page=CoffeeData bot: unknown
भारतीय कॉफ़ी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, रोबस्टा और अरेबिका कॉफ़ी का अनुमानित उत्पादन "2009–10 के मानसून के बाद के समय" और "2010–11 के फूल खिलने के बाद के सीज़न" के लिए भिन्न राज्यों में क्रमशः 308000 टन और 289600 टन था।http://www.indiacoffee.org/indiacoffee.php?page=CoffeeData Database on Coffee – May–June 2010 दिसम्बर 1, 2010 Coffee Board of India https://web.archive.org/web/20100815055117/http://www.indiacoffee.org/indiacoffee.php?page=CoffeeData 15 अगस्त 2010 dead 2010 में भारत में उगाई गयी कॉफ़ी का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा विदेशों में निर्यात किया गया।http://economictimes.indiatimes.com/news/economy/foreign-trade/Coffee-exports-rise-57-pc-in-Jan-Nov-to-271-L-tn/articleshow/7025245.cms Coffee exports rise 57 pc in Jan–Nov to 2.71 L tn दि इकॉनोमिक टाइम्स दिसम्बर 1, 2010 https://web.archive.org/web/20110109013258/http://economictimes.indiatimes.com/news/economy/foreign-trade/Coffee-exports-rise-57-pc-in-Jan-Nov-to-271-L-tn/articleshow/7025245.cms 9 जनवरी 2011 live
उगने के लिए परिस्थितियां
भारत में उगाई जाने वाली साडी कॉफ़ी छाया में उगाई जाती है, आमतौर पर इसे छाया के दो स्तरों में उगाया जाता है। अक्सर इसके साथ बीच बीच में इलायची, दालचीनी, लौंग और जायफल उगाया जाता है, इससे कॉफ़ी के भडारण, हेंडलिंग में काफी लाभ मिलता है।http://www.coffeereview.com/article.cfm?ID=10 Indias Davids Ken जनवरी 2001 coffeereview.com दिसम्बर 1, 2010 https://web.archive.org/web/20110708174455/http://www.coffeereview.com/article.cfm?ID=10 8 जुलाई 2011 dead अरेबिका (प्रीमियर कॉफ़ी) के विकास के लिए उंचाई समुद्र तल के ऊपर 1000 m ft on और 1500 m ft on के बीच है तथा रोबस्टा (हालांकि इसकी गुणवत्ता कुछ कम होती है, यह पर्यावरणी परिस्थितियों के लिए रोबस्ट होती है) के लिए 500 m ft on और 1000 m ft on के बीच है।http://www.indiacoffee.org/indiacoffee.php?page=CoffeeRegionsIndia Coffee Regions – India Sept.16, 2009 indiacoffee.org Coffee Board 1 दिसम्बर 2010 Bangalore, भारत https://web.archive.org/web/20081225202559/http://www1.indiacoffee.org/indiacoffee.php?page=CoffeeRegionsIndia 25 दिसंबर 2008 dead
आदर्श रूप से रोबस्टा और अरेबिका दोनों को पानी से भरपूर मिटटी में उगाया जाता है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में कार्बनिक पदार्थ हों और जो कम अम्लीय हो (pH 6.0–6.5) बहरहाल, भारतीय कॉफ़ी कम अम्लीय होती है, जिसका स्वाद संतुलित और मीठा हो सकता है, या निष्क्रिय और उदासीन हो सकता है। अरेबिका की ढलान कम से मध्यम होती है, जबकि रोबस्टा की ढलान कम से कुछ समतल होती है।
फूल खिलना और परिपक्व होना
right|thumb|right|कॉफी का फूल
right|thumb|सिंचित कॉफी बागान
ब्लूमिंग या फूल खिलना वह समय है जब कॉफ़ी के पौधों पर सफ़ेद फूल खिलते हैं, जो 3-४ दिन में परिपक्व को होकर बीज में बदल जाते हैं, (इस अवधि को क्षण भंगुर काल कहा जाता है). जब कॉफी के बागानों में सब जगह फूल खिले होते हैं, तब ये देखने में बहुत रमणीय और सुन्दर लगते हैं। फूल खिलने और फल आने के बीच की अवधि किस्म और जलवायु के अनुसार अलग अलग होती है; अरेबिका के लिए यह लगभग सात महीने की होती है और रोबस्टा के लिए यह लगभग नौ महीने की होती है। जब फल पूरी तरह से पाक जाता है, तब इसे हाथ से इकठ्ठा किया जाता है। इस समय यह लाल बैंगनी रंग का होता है।The New Encyclopaedia Britannica, Volume 1 Hau Leung Lee Chung-Yee Lee 158 दिसम्बर 1, 2010 http://books.google.co.in/books?ei=Vez1TOz2FMnSrQey8P2aBw&ct=result&id=eYcoAQAAIAAJ&dq=Indian+Coffee+when+it+is+fully+ripe+and+red-purple+in+colour&q=ripe++and+red-purple+in+colour#search_anchor Encyclopedia Britannica 1991 0852295294 https://web.archive.org/web/20121103051438/http://books.google.co.in/books?ei=Vez1TOz2FMnSrQey8P2aBw&ct=result&id=eYcoAQAAIAAJ&dq=Indian+Coffee+when+it+is+fully+ripe+and+red-purple+in+colour&q=ripe++and+red-purple+in+colour#search_anchor 3 नवंबर 2012 livehttp://www.google.co.in/search?hl=en&client=firefox-a&hs=udM&rls=org.mozilla%3Aen-US%3Aofficial&q=blooming+and+maturing+of+the+fruit+varies+appreciably+with+the+variety+and+the+climate%3B+for+the+Arabica%2C&btnG=Search&aq=f&aqi=&aql=&oq=&gs_rfai Britannica – "coffee production" article दिसम्बर 1, 2010 Encyclopedia Britannica Mobile https://web.archive.org/web/20150924040739/http://www.google.co.in/search?hl=en&client=firefox-a&hs=udM&rls=org.mozilla%3Aen-US%3Aofficial&q=blooming+and+maturing+of+the+fruit+varies+appreciably+with+the+variety+and+the+climate%3B+for+the+Arabica%2C&btnG=Search&aq=f&aqi=&aql=&oq=&gs_rfai 24 सितंबर 2015 deadhttp://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:YpPb0l0u7gIJ:www.indiastudychannel.com/resources/54339-Chikmagalur-Karnataka-where-coffee-was-first-planted-India.aspx+Coffee+Blooming+in+India&cd=24&hl=en&ct=clnk&gl=in&client=firefox-a Chikmagalur in Karnataka, where coffee was first planted in India. दिसम्बर 1, 2010 India Study Channel
जलवायु की परिस्थितियां
कॉफ़ी उगाने के लिए आदर्श जलवायु परिस्थितियां तापमान और वर्षा पर निर्भर करती हैं; अरेबिका किस्म के लिए दो तीन माह के सूखे के बाद 73 F और 82 F की रेंज का तापमान तथा 60 - 80 inch m रेंज की वर्षा उपयुक्त होती है ज़माने वाला ठंडा तापमान कॉफ़ी के लिए उपयुक्त नहीं है। जहां वर्षा 40 in mसे कम होती है, वहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। दक्षिण भारतीय पहाड़ों के उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में, इन परिस्थितियों के कारन बड़ी संख्या में कॉफ़ी के बागान उगते हैं।http://www.britannica.com/EBchecked/topic/124337/coffee Coffee Production 5 अक्टूबर 2010 एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका https://web.archive.org/web/20100429094019/http://www.britannica.com/EBchecked/topic/124337/coffee 29 अप्रैल 2010 live अरेबिका के लिए सापेक्ष आर्द्रता 70–80% जबकि रोबस्टा के लिए 80–90% है।
thumb|left|एक भारतीय कॉफी बागान पर कोबरा
कॉफी के रोग
भारत में कॉफ़ी के पौधों में पाया जाने वाला आम रोग है इन पर कवक का विकास.
यह कवक हेमिलिया वास्ताट्रिक्स कहलाती है, यह अंत: पादपी कवक है जो पत्ती के भीतर विकसित होती है, इसके उन्मूलन के लिए किसी प्रभावी उपचार की खोज नहीं हुई है। दुसरे प्रकार के रोग को कॉफ़ी रोट कहा जाता है, जिसने वर्षा के मौसम में, विशेष रूप से कर्नाटक में इसकी फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इस रोट या रस्ट को पेलीकुलारिया कोले-रोटा नाम दिया गया है, जिसमें एक जिलेटिन की चिकनी परत के जम जाने के कारण पत्तियां काले रंग की दिखने लगती हैं।
इसके कारण कॉफ़ी की पत्तियां और कॉफ़ी के फलों के गुच्छे जमीन पर गिर जाते हैं। सांप जैसे कोबरा भारत में कॉफ़ी के बागानों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं।
प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग)
भारत में कॉफी प्रसंस्करण दो विधियों से किया जाता है, एक सूखा प्रसंस्करण और दूसरा गीला प्रसंस्करण. सूखे या शुष्क प्रसंस्करण में इसे पारंपरिक रूप से धूप में सुखाया जाता है, यह इसके फ्लेवर को बेहतर बनाने के लिए एक उपयुक्त तरीका है। गीले प्रसंस्करण में, कॉफ़ी के बीन्स में किण्वन करके इन्हें धोया जाता है, पैदावार बढ़ाने के लिए इस तरीके को अधिक प्राथमिकता दी जाती है। गीले प्रसंस्करण में खराब बीजों को अलग करने के लिए सफाई की जाती है।
इसके बाद भिन्न किस्मों और आकारों के बीन्स को मिलाया जाता है ताकि सर्वश्रेष्ठ फ्लेवर प्राप्त किया जा सके.
अगली प्रक्रिया में इसे रोस्टर या निजी रोस्टर के माध्यम से भुना जाता है। इसके बाद भुनी हुई कॉफ़ी को उपयुक्त आकार दिया जाता है।
किस्में
right|thumb|कूर्ग में कावेरी नदी की पहाड़ियों पर कॉफी
भारतीय कॉफी की चार मुख्य वनस्पति किस्में हैं, केंट, S.795, कावेरी और सलेक्शन 9.
1920 के दशक में, भारत में अरेबिका की सबसे पुरानी किस्म को केंट नाम दिया गया यह नाम मैसूर में दोदेनगुदा एस्टेट के एक उत्पादक, अंग्रेज एल. आर. केंट के नाम पर दिया गया था।Cramer Pieter Johannes Samuel A Review of Literature of Coffee Research in Indonesia http://books.google.com/books?id=O9UqAAAAYAAJ&pg=PA102 1957 IICA Biblioteca Venezuela 102 30 मई 2011 https://web.archive.org/web/20140708114031/http://books.google.com/books?id=O9UqAAAAYAAJ&pg=PA102 8 जुलाई 2014 live संभवतया भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया में सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली अरेबिका S.795 है, जिसे इसके संतुलित स्वाद और मोक्का के फ्लेवर के लिए जाना जाता है। 1940 के दशक में पैदा होने वाली यह किस्म केंट और S.288 किस्मों के बीच संकरण का परिणाम है।Neilson Jeff Pritchard Bill Value chain struggles: institutions and governance in the plantation districts of South India http://books.google.com/books?id=-sCWby8NT24C&pg=PA124 2009 Wiley-Blackwell 1405173939 124 30 मई 2011 https://web.archive.org/web/20140708131432/http://books.google.com/books?id=-sCWby8NT24C&pg=PA124 8 जुलाई 2014 live कावेरी, जिसे सामान्यतः केटिमोर के रूप में जाना जाता है, वह कतुरा और हाइब्रिडो-डे-तिमोर के बीच संकरण के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुई है, जबकि पुरस्कार विजेता सलेक्शन-9 ताफरिकेला और हाइब्रिडो-डे-तिमोर के बीच संकरण का परिणाम है। सेन रामोन और कतुरा के बौने और अर्ध-बौने संकर का विकास उच्च घनत्व के पौधों की मांग को ध्यान में रखते हुए किया गया।Sera T. Soccol C. R. Pandey A. Coffee biotechnology and quality: proceedings of the 3rd International Seminar on Biotechnology in the Coffee Agro-Industry, III SIBAC, Londrina, Brazil http://books.google.com/books?id=L5e98rcrnakC&pg=PA23 2000 स्प्रिंगर 0792365828 23 30 मई 2011 https://web.archive.org/web/20140708105924/http://books.google.com/books?id=L5e98rcrnakC&pg=PA23 8 जुलाई 2014 live देवामेची संकर (सी. अरेबिका और सी. केनेफोरा) की खोज भारत में 1930 के दशक में की गयी थी।Wintgens Jean Nicolas Coffee: Growing, Processing, Sustainable Production: A Guidebook for Growers, Processors, Traders, and Researchers http://books.google.com/books?id=Lxbz7TG5wwAC&pg=PA64 2009 Wiley-VCH 3527322868 64सितंबर 2021 InternetArchiveBot
भारतीय कॉफी संघ की साप्ताहिक नीलामी में इन किस्मों को शामिल किया जाता है जैसे अरेबिका चेरी, रोबस्टा चेरी, अरेबिका प्लान्टेशन और रोबस्टा पार्चमेंट.http://in.reuters.com/article/idINSGE6AB0IE20101112 India coffee slightly higher on selective buying Nov 12, 2010 Reuters 1 दिसम्बर 2010 1 फ़रवरी 2013 https://archive.today/20130201040025/http://in.reuters.com/article/idINSGE6AB0IE20101112 dead
क्षेत्रीय लोगो और ब्रांड्स में शामिल हैं:एनामलीस, अरकू वेली, बाबाबुदानगिरीस, बिलिगिरिस, ब्रह्मपुत्र, चिकमगलूर, कूर्ग, मंजराबाद, निल्गीरिस, पुल्नेस, शेवेरोयस, त्रावणकोर और व्यानाद. कई विशिष्ट ब्रांड भी हैं जैसे मनसुनेद मालाबार एए, मैसूर नगेट्स एक्स्ट्रा बोल्ड और रोबस्टा कापी रोयाल.
thumb|left|केरल में श्रमिक
कार्बनिक कॉफी
कार्बनिक कॉफी का निर्माण कृत्रिम एग्रो-रसायनों तथा पादप सरंक्षण विधियों के द्वारा किया जाता है। ऐसी कॉफ़ी का विपणन करने के लिए एजेंसी के पास प्रमाण पत्र होना आवश्यक है (इसके लोकप्रिय रूप हैं रेगुलर, डिकैफ़िनेटेड, फ्लेवर्ड और इंस्टेन्ट कॉफ़ी), ये यूरोप, संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान में लोकप्रिय हैं। भारतीय भूभाग और जलवायु परिस्थितियां इस प्रकार की कॉफ़ी के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हैं, इसे वन की गहरी और उर्वर मृदा में, द्वि स्तरीय मिश्रित छाया में, पशु उर्वरक, कम्पोस्टिंग और मेनुअल बागवानी का उपयोग करते हुए उगाया जाता है। इसकी विभिन्न बागवानी गतिविधियों में होर्टीकल्चर प्रथाओं को काम में लिया जाता है; इस किस्म की कॉफ़ी के लिए छोटे जोत एक और फायदे की बात हैं। इन फायदों के बावजूद, भारत में प्रमाणित कार्बनिक कॉफ़ी के जोत, 2008 के नियम के अनुसार (भारत में इसकी 20 मान्यता प्राप्त एजेंसियां हैं) का क्षेत्रफल 2600 ha था, जिससे 1700 टन का उत्पादन हुआ। इस प्रकार की कॉफ़ी को बढ़ावा देने के लिए कॉफ़ी बोर्ड ने, क्षेत्रीय प्रयोगों, सर्वेक्षणों और केस अध्ययनों के आधार पर कई पैकेज निकाले हैं। जो सुचना दिशानिर्देशों और तकनिकी दस्तावेजों के पूरक हैं।
अनुसंधान और विकास
कॉफी अनुसंधान और विकास के प्रयास भारत में काफी संगठित तरीके से किये जाते हैं। ये प्रयास कॉफ़ी अनुसंधान संस्थान के द्वारा किये जाते हैं। जिसे दक्षिणी पूर्वी एशिया में प्रमुख अनुसंधान केंद्र माना जाता है।
यह एक स्वायत्त निकाय कॉफ़ी बोर्ड ऑफ़ इण्डिया के तहत काम करता है। जिस पर वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार का नियंत्रण है। जिसकी स्थापना संसद के एक अधिनियम के द्वारा की गयी थी। इसका उद्देश्य है भारतीय कॉफ़ी का विकास, विस्तार, इसकी गुणवत्ता में सुधार, विपणन की जानकारी और घरेलू एवं बाहरी स्तर पर इसे बढ़ावा दिया जाना.http://www.admissionnews.com/collegedetails.aspx?colid=15949 Central Coffee Research Institute 6 अक्टूबर 2010 भारत कॉफी संगठन https://web.archive.org/web/20101119120437/http://admissionnews.com/collegedetails.aspx?colid=15949 19 नवंबर 2010 dead इसे कॉफ़ी के बागानों के बीच कर्नाटक के के चिक्कामगलुर जिले में बेलेहोनर के पार स्थापित किया गया है। इस संस्थान की स्थापना से पहले कोप्पा में 1915 में एक अस्थायी अनुसंधान इकाई की स्थापना की गयी। ताकि पर्ण रोगों के द्वारा फसल को होने वाले नुक्सान के लिए समाधान निकाला जा सके. इसके बाद 1925 में तत्कालीन मैसूर की सरकार के द्वारा क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन की स्थापना की गयी, जिसे "मैसूर कॉफ़ी एक्सपेरिमेंटल स्टेशन" नाम दिया गया। इसे कॉफ़ी बोर्ड को सौंप दिया गया जिसका गठन में किया गया था और स्टेशन पर अनुसंधान की शुरुआत 1944 में हुई. भारत में कॉफ़ी अनुसंधान के संस्थापक का श्री डॉक्टर एल सी कोलेमन को दिया जाता है।http://www.chickmagalur.nic.in/htmls/ccri_main.htm Central Coffee Research Institute, Balehonnur 6 अक्टूबर 2010 चिकमंगलूर, राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र https://web.archive.org/web/20180422140927/http://www.chickmagalur.nic.in/htmls/ccri_main.htm 22 अप्रैल 2018 dead भारत का कॉफी बोर्ड एक स्वायत्त निकाय है, जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्य करता है। यह बोर्ड भारत में कॉफ़ी के एक मित्र, दार्शनिक और गाइड का काम करता है। इसकी स्थापना वर्ष में भारतीय संसद के एक अधिनियम के द्वारा की गयी थी। यह बोर्ड भारतीय कॉफ़ी के अनुसंधान, विकास, विस्तार, गुणवत्ता में सुधार, विपणन जानकारी और घरेलू एवं बाहरी पदोन्नति पर फोकस करता है।
thumb|right|चिकमगलूर जिला, भारत कॉफी बोर्ड के मुख्यालय, जिन्हें कर्नाटक राज्य के भीतर दिखाया गया है।
इस संस्थान के द्वारा कवर की जाने वाली अनुसंधान गतिविधियों में शामिल हैं एग्रोनोमी, मृदा विज्ञान और कृषि रसायन, वनस्पति विज्ञान, कीट विज्ञान/ निमेटोलोजी, पादप कार्यिकी, जैव प्रोद्योगिकी और पोस्ट हार्वेस्ट तकनीक. इन सब का मूल उद्देश्य है भारत में कॉफ़ी की उत्पादकता और गुणवत्ता को बढ़ाना. संस्थान की अनुसंधान गतिविधियों में 60 वैज्ञानिक और तकनिकी कर्मचारी शामिल हैं। संस्थान के पास फसल अनुसंधान के लिए सुसज्जित 130.94 ha की कृषि भूमि है, जिसमें से 80.26 ha को कॉफ़ी अनुसंधान के लिए समर्पित किया गया है (51.32 ha अरेबिका के और 28.94 ha रोबस्टा के), 10 ha का उपयोग सी एक्स आर के लिए किया जाता है, 12.38 ha नर्सरी, सडक और इमारतों के लिए निर्धारित है और बचा हुआ 12.38 ha का क्षेत्र भावी विस्तार के लिए सरंक्षित है। अनुसंधान फ़ार्म के पास चेक डेम का सुसज्जित नेटवर्क है, जो बागवानी के लिए विनियमित जल स्रोत उपलब्ध कराता है। जो छाया में उगाये जाने वाले पेड़ों की एक बड़ी रेंज प्रस्तुत करता है, जिसमें कॉफ़ी उगाई जाती है। साथ ही इथोपिया सहित सभी कॉफ़ी उगाने वाले देशों से जर्मप्लास्म और बहरी सामग्री उपलब्ध करायी जाती है जिसे अरेबिका का गृह देश कहा जाता है। इसके अलावा, काली मिर्च और सुपारी जैसी फसलों के फसल विविधीकरण भी संस्थान के लिए आय सृजन के स्रोत हैं।
संस्थान के एक हिस्से में अनुसंधान प्रयोगशाला है, जो न केवल कॉफ़ी के लिए बल्कि एनी फसलों के लिए भी अनुसंधान करती है। इसमें पुस्तकों और पत्रिकाओं से युक्त पुस्तकालय भी शामिल हैं। कर्मचारियों का प्रशिक्षण संस्थान की एक महत्वपूर्ण गतिविधि है। संस्थान की प्रशिक्षण इकाई कॉफ़ी बागानों के एस्टेट प्रबंधकों और सुपरवाइज़र कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करती है। इसमें कॉफ़ी बोर्ड के विस्तार अधिकारी भी शामिल हैं। UNDP और USDA के द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान की प्रशिक्षण इकाई कॉफ़ी की खेती में विदेशों को भी प्रशिक्षण प्रदान करती है, इनमें इथोपिया, वियतनाम, श्री लंका, नेपाल और नेस्ट्ले सिंगापुर के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, मैसूर में उतक संवर्धन और जैव प्रोद्योगिकी डिविजन के एक सयंत्र की स्थापना की गयी है, जो उच्च उत्पादकता की, कीट और रोफ विरोधी फसलों के उत्पादन में पूरक पारंपरिक प्रजनन क्रय्क्रमों के द्वारा जैव प्रोद्योगिकी और आणविक जीव विज्ञान में विशेष अनुसंधान करती है। कॉफ़ी बोर्ड ऑफ़ इंडिया ने बैंगलोर में अपने हेड ऑफिस में एक गुणवत्ता नियंत्रण डिविजन बनाया है। जो "कप में कॉफ़ी की गुणवत्ता" में सुधार हेतु एनी प्रकार के अनुसंधानों में महत्वूर्ण भूमिका निभाता है।
क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन
भिन्न कृषि जलवायु परिस्थितियों को को कवर करने वाले प्रत्येक कॉफ़ी उत्पादक क्षेत्र के लिए अनुसंधान हेतु निम्नलिखित पांच अनुसंधान स्टेशन हैं जो केन्द्रीय कॉफ़ी अनुसंधान परिषद संस्थान के नियंत्रण में कार्य करते हैं।http://www.chickmagalur.nic.in/htmls/ccri_reg_research.htm Regional Research Stations 6 अक्टूबर 2010 चिकमंगलूर, राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र https://web.archive.org/web/20180216031112/http://www.chickmagalur.nic.in/htmls/ccri_reg_research.htm 16 फ़रवरी 2018 dead कर्नाटक के कूर्ग जिले में, कॉफ़ी अनुसंधान उप-स्टेशनम, शेताली की स्थापना 1946 में की गयी। एस उप स्टेशन एमिन एक सुसज्जित प्रयोगशाला है, जो 131 ha का क्षेत्रफल कवर करती है, जिसमें से 80 ha कॉफ़ी अनुसंधान गतिविधियों के लिए निर्धारित है। आन्ध्र प्रदेश के विशाखापट्नम जिले में आर वी नगर में क्षेत्रीय कॉफ़ी अनुसंधान स्टेशन पूर्वी तट पर उड़ीसा को भी कवर करता है। इस अनुसंधान स्टेशन की स्थापना 1976 में की गयी थी, यह गैर-पारंपरिक शेत्रों में कॉफ़ी के विकास में अपनी सेवाएं प्रदान करता है, इसके पास कॉफ़ी बागवानी के लिए 30 ha का क्षेत्रफल है। इस क्षेत्र में कॉफ़ी की शुरुआत का उदेश्य था, वन क्षेत्र में 'पोडू' विकास के तहत फसलें उगाने के लिए आदिवासी आबादी को हटाना. इससे न केवल वन पारिस्थितिकी का सरंक्षण होगा बल्कि इससे क्षेत्र की आदिवासी जनसंख्या की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. क्षेत्रीय कॉफ़ी अनुसंधान स्टेशन, चुनदाले गांव, वायनाड जिला, केरल की स्थापना प्राथमिक रूप से क्षेत्र में उचित तकनीक के विकास के लिए की गयी, जहां रोबस्टा प्रमुख फसल है। केरल को कॉफ़ी की रोबस्टा किस्म के लिए देश का दूसरा सबसे बड़ा कॉफ़ी उत्पादक राज्य माना जाता है।
स्टेशन 116 ha का क्षेत्रफल कवर करता है, जिसमें से फार्म के 30 ha क्षेत्रफल में एक प्रयोगशाला है, जहां अनुसंधान किया जाता है। तमिल नाडू के डिंडीगुल जिले में थान्दिगुदी में क्षेत्रीय कॉफ़ी अनुसंधान स्टेशन (RCRS) अनुसंधान केन्द्र की स्थापना का उद्देश्य था तमिल नाडू में कॉफ़ी बागानों के क्षेत्र में बागवानी की उचित प्रथाओं का विकास करना. जहां देश के अन्य क्षेत्रों के विपरीत उत्तर पूर्वी मानसून के दौरान काफी वर्षा होती है। यह स्टेशन 12.5 ha क्षेत्रफल में फैला है, जिसमें प्रयोगशाला सुविधाओं से युक्त एक 6.5 ha का अनुसंधान फार्म है। आसाम के कार्बी एंग्लोन जिले में दिफू, क्षेत्रीय कॉफ़ी अनुसंधान स्टेशन की स्थापना 1980 में उत्तरपूर्वी क्षेत्र में की गयी। जो कॉफ़ी की बागवानी में शिफ्टिंग और झूम प्रथा के लिए आर्थिक विकल्प उपलब्ध कराता है। इस प्रथा का उपयोग वनों की पहाड़ियों में आदिवासियों के द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता है। जो इस क्षेत्र की अर्थव्यवथा के संरक्षण के लिए एक चिंता का विषय था। यह क्षेत्रीय स्टेशन 25 ha के क्षेत्रफल में फैला है।
लोकप्रियता
thumb|right|कॉफी लट्टे
भारत कॉफी हाउस श्रृंखला की शुरुआत 1940 के दशक के प्रारंभ में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई. 1950 के दशक के मध्य में, बोर्ड ने नीति परिवर्तन के कारण कॉफ़ी हाउस को बंद कर दिया. हालांकि, जिन कर्मचारियों को छुट्टी दे दी गयी थी, उन्हें कम्मुनिस्ट नेता ऐ के गोपालन के नेतृत्व में फिर से इन्डियन कॉफ़ी हाउस में रखा गया। पहली भारतीय कॉफ़ी वर्कर्स को-ओपरेटिव सोसाइटी की स्थापना 19 अगस्त 1957 को बैंगलोर में की गयी। पहला भारतीय कॉफ़ी हाउस नयी दिल्ली में 27 अक्टूबर 1957 को स्थापित किया गया। धीरे धीरे, भारतीय कॉफी हाउस की श्रृंखला का विस्तार पोपोरे देश में हो गया, 1958 के अंत तक पोंडिचेरी, थ्रिसुर, लखनऊ, नागपुर, जबलपुर, मुम्बई, कोलकाता, तेलीचेरी और पुणे में इसकी शाखाएं खोली जा चुकीं थीं।
देश में ये कॉफी हाउस 13 सहकारी समितियों के द्वारा चलये जाते हैं, जिनका नियंत्रण कर्मचारियों के द्वारा चयनित प्रबंधन समितियों के द्वारा किया जाता है। सहकारी समितियों का संघ एक नेशनल अम्ब्रेला संगठन है जिसका नेतृत्व इन सोसाईटीयों के द्वारा किया जाता है।http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/09/23/stories/2002092300480100.htm More than just coffee 'n snacks दिसम्बर 1, 2010 द हिन्दू सितंबर 23, 2010 https://web.archive.org/web/20090502032934/http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/09/23/stories/2002092300480100.htm 2 मई 2009 deadhttp://www.indiancoffeehouse.com/abtus.htm Indian coffee House दिसम्बर 1, 2010 Indian Coffee House https://web.archive.org/web/20080724080620/http://www.indiancoffeehouse.com/abtus.htm 24 जुलाई 2008 dead
हालांकि, अब एनी श्रृंखलाओं के साथ नए कॉफ़ी बार भी काफी लोकप्रिय हो गए हैं, जैसे बरिस्ता, केफे कॉफ़ी डे देश की सबसे बड़ी कॉफ़ी बार श्रृंखलाएं हैं।http://www.commodityonline.com/news/Cafe-Coffee-Day-bags-8-awards-at-India-Barista-15824-3-1.html Cafe Coffee Day bags 8 awards at India Barista मार्च 7, 2009 commodityonline.com 1 दिसम्बर 2010 https://web.archive.org/web/20110722190133/http://www.commodityonline.com/news/Cafe-Coffee-Day-bags-8-awards-at-India-Barista-15824-3-1.html 22 जुलाई 2011 dead भारत में दक्षिणी भारत के घरों में कॉफ़ी का उपभोग सबसे ज्यादा किया जाता है।Majumdar Ramanuj Consumer Behaviour: Insights From Indian Market http://books.google.com/books?id=KF57x1Nrn2UC&pg=RA2-PA279 2010 PHI Learning Pvt. Ltd. 8120339630 279 30 मई 2011 https://web.archive.org/web/20140708114210/http://books.google.com/books?id=KF57x1Nrn2UC&pg=RA2-PA279 8 जुलाई 2014 live
भारतीय कॉफी यूरोप में अच्छी मानी जाती है, क्योंकि यह कम अम्लीय होती है और इसमें मिठास होती है। इसका उपयोग एक्सप्रेसो कॉफ़ी में बड़े पैमाने पर किया जाता है। हालाँकि अमेरिकन अफ़्रीकी और दक्षिण अमेरिकी कॉफ़ी को अधिक पसंद करते हैं जो बेहतर किस्म होने के साथ अधिक अम्लीय होती है।
सलेक्शन 9 को 2002 फ्लेवर ऑफ़ इण्डिया कपिंग प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ अरेबिका के लिए फाइन कप अवार्ड का विजेता घोषित किया गया। 2004 में, "टाटा कॉफ़ी" ब्रांड नाम के साथ भारतीय कॉफ़ी ने पेरिस में ग्रांड कास डे केफे प्रतियोगिता में तीन स्वर्ण पदक जीते.
गैलरी
सन्दर्भ
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श्रेणी:देश से कॉफी उत्पादन
श्रेणी:भारत में जिंसों बाजार
श्रेणी:भारत में कृषि
श्रेणी:कॉफ़ी