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बेवक़ूफ़
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बेवक़ूफ़ (चलचित्र) इंद्रसेन जौहर इंद्रसेन जौहर इंद्रसेन जौहर किशोर कुमारमाला सिन्हाइंद्रसेन जौहरप्राणलीला चिटनिस रोके एम॰ लेटन माधव एस॰ शिंदे सचिन देव बर्मन १९६० भारत हिन्दी
बेवक़ूफ़ (उर्दू: بیوقوف, Bewaqoof) १९६० का एक भारतीय नाट्य-चलचित्र है, जिसके मुख्य कलाकार किशोर कुमार, माला सिन्हा, इंद्रसेन जौहर, प्राण तथा लीला चिटनिस हैं।
परिचय
यह चलचित्र पारिवारिक सम्बन्ध, सामाजिक कलंक तथा न्याय की उलझनों का एक मार्मिक वृत्तान्त प्रस्तुत करता है। कथा साधारण प्रतीत होते हुए भी मानवीय संवेदना तथा परम्परागत कुलीनता-धारणाओं पर तीक्ष्ण दृष्टि डालती है।
कथानक
आदरणीय वकील राय बहादुर एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता हैं, जिनके कोई पुत्र या पुत्री न रही। उनके संबंध एक वेश्या मेहर से बनते हैं और मेहर गर्भावस्था में प्रवेश कर जाती है। लगभग उसी कालखण्ड में राय बहादुर की पत्नी भी गर्भवती हो जाती है और दोनोंाएँ एकसाथ, एक ही अस्पताल में, एक ही दिन पुत्र को जन्म देती हैं। जब राय बहादुर को यह समाचार मिलता है कि मेहर ने भी उसका पुत्र जन्म दिया है, तो वह उसे अस्पताल में मिलने जाता है; परन्तु मेहर उसे चेतावनी देती है कि यदि वह अपने पुत्र को उसका युक्त अधिकार न देगा तो दुष्परिणाम हुये बिना न रहेंगे। वह उसे दबाव में रखती है और पुत्रों की अदला-बदली करने का आग्रह करती है।
विवश होकर तथा धन के प्रलोभन से प्रेरित होकर राय बहादुर अस्पताल की एक नर्स से प्रश्रय करता है कि वह शिशु बदल दे। नर्स प्रारम्भ में सहमत होती है; किन्तु पश्चात् उसकी अंतरात्मा उसे ऐसा कृत्य करने से मना कर देती है। परन्तु वह राय बहादुर से कह देती है कि उसने बच्चे बदल दिए हैं, यद्यपि हकीकत इस विपरीत थी। अतः राय बहादुर यह मान बैठता है कि जो बालक उसके बंगले में है, अर्थात् किशोर, मेहर का पुत्र है, और जो बालक मेहर के पास है वह उसकी गृहिणी का पुत्र है। उसी समय उसकी पत्नी रोगग्रस्त होकर बारीक बुखार से पीड़ित रहती है। धीरे-धीरे राय बहादुर का उस बालक के प्रति स्नेह क्षीण हो जाता है जो उस घर में रह रहा था, और वह दूसरे बालक प्राण के लिये सौहार्द और प्रियता भाव प्रकट करने लगता है। अंततः वह किशोर तथा उसकी मातृ मेहर को अपने बंगले से निष्कासित कर देता है और प्राण को, जिसे वह समझता है कि अपनी पत्नी का औलाद है, अपनाकर बंगले में ले आता है।
इस प्रकार किशोर, मेहर तथा श्रीमती राय बहादुर के साथ दीन-दलीय जीवन व्यतीत करता है, और प्राण विलासितापूर्ण वातावरण में बढ़ता-पलता है। समय के साथ दोनों ही बालक मुक्केबाज़ी के क्षेत्र में प्रवेश कर एक ही मुक्केबाज़ी संघ के सदस्य बन जाते हैं। किशोर अकस्मात् प्राण को पराजित कर देता है; किन्तु प्राण नीच चालों तथा अनुचित उपायों से प्रतिफलित होकर हर बार किशोर का हक छीन लेता है। किशोर, प्राण की सहायक एवं प्रेमिका माला से प्रेम करने लगता है; माला एक सम्पन्न कुल की कन्या है। एक एल॰एल॰बी॰ का विद्यार्थी, जो स्वयं उस मुक्केबाज़ी क्लब का सदस्य है, किशोर का मित्र बनकर उसकी सहायता करता है। मित्र की सहायता से किशोर माला के ह्रदय पर अधिकार कर लेता है।
एक दिवस वही नर्स, जिसने शिशु परिवर्तन के विषय में मिथ्या कथन किया था, प्राण को सच्चाई प्रकट कर बैठती है। प्राण, इस कलंक वेश्या के घर में जन्मे होने के कलंक से बचने के भय से उस नर्स की हृदयहीन हत्या कर देता है। वह फिर किशोर को बहकाकर फँसाता है और हत्याकाण्ड का आरोप किशोर पर लाद दिया जाता है। तब तक किशोर का मित्र जो एलएल॰बी॰ का छात्र था, वकील बन चुका होता है और न्यायालय में किशोर की सहायता करता है। सत्य तथा तर्क के बल पर वह उन मिथ्या आरोपों को निर्मूल कर देता है। अन्ततः न्याय होता है: किशोर को उसका अधिकार अर्जित होता है और उसे माला, उसका प्रेम, भी मिल जाता है।
कलाकार
किशोर कुमार - किशोर कुमार
माला सिन्हा - माला
इंद्रसेन जौहर - जौहर
प्राण - प्राण
लीला चिटनिस - श्रीमती लीला राय बहादुर
बिपिन गुप्ता - वकील राय बहादुर
सबिता चटर्जी - मेहर
विनोद मेहरा - युवा किशोर कुमार
रमेश सिप्पी - युवा प्राण
संगीत तथा गीत
गीतगायिका/गायकतू तू तू जाम के लिए जा आँखों सेकिशोर कुमार, मन्ना देमाइकल है तो साइकिल हैकिशोर कुमार, मन्ना दे, आशा भोसलेसच सच ओ डियर सच सचकिशोर कुमारतुमि पिया चिकाराँ हूँ हूँ हूँ गरसियाकिशोर कुमार, आशा भोसलेमुबारक हो ख़ुशियों का ये ज़मानाआशा भोसले, वृन्दगानधड़कता दिल धक से देखा है जब सेआशा भोसले, मन्ना देदेख इधर देख तेरा ध्यान कहाँ हैआशा भोसले, मन्ना देदिलदार कमन्दोवाले का हर तीरमन्ना दे, शमशाद बेगमहम तो हैं तुम पर दिल से फ़िदामोहम्मद.रफ़ी
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
0231254 बेवक़ूफ़
श्रेणी:एस॰ डी॰ बर्मन द्वारा संगीतबद्ध फिल्में