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411 समाचार
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शनि शिंगणापुर

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शनि शिंगणापुर Shani Shingnapur गाँव Shingnapur.jpg शनि शिंगणापुर India Maharashtra 19.4000 74.8167 inline, title महाराष्ट्र में स्थिति ज़िला अहमदनगर ज़िला प्रान्त महाराष्ट्र देश 2011 भाषा प्रचलित मराठी भारतीय मानक समय +5:30 शनि शिंगणापुर (Shani Shingnapur) भारत के महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर ज़िले में स्थित एक गाँव है जो अपने शनी देवता के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।"RBS Visitors Guide India: Maharashtra Travel Guide https://web.archive.org/web/20190703140613/https://books.google.com/books?id=TQ1ACQAAQBAJ 3 जुलाई 2019 ," Ashutosh Goyal, Data and Expo India Pvt. Ltd., 2015, ISBN 9789380844831"Mystical, Magical Maharashtra https://web.archive.org/web/20190630170850/https://books.google.com/books?id=5xefEXhvG8EC 30 जून 2019 ," Milind Gunaji, Popular Prakashan, 2010, ISBN 9788179914458 मूर्ति शनि भगवान की स्वयंभू मूर्ति काले रंग की है। 5 फुट 9 इंच ऊँची व 1 फुट 6 इंच चौड़ी यह मूर्ति संगमरमर के एक चबूतरे पर धूप में ही विराजमान है। यहाँ शनिदेव अष्ट प्रहर धूप हो, आँधी हो, तूफान हो या जाड़ा हो, सभी ऋतुओं में बिना छत्र धारण किए खड़े हैं। राजनेता व प्रभावशाली वर्गों के लोग यहाँ नियमित रूप से एवं साधारण भक्त हजारों की संख्या में देव दर्शनार्थ प्रतिदिन आते हैं। गाँव लगभग तीन हजार जनसंख्या के शनि शिंगणापुर गाँव में किसी भी घर में दरवाजा नहीं है।http://www.lokchetna.com/shani-shingnapur.html शनि शिंगणापुर शनि भगवान का जीते जागते भगवान का उदाहरण है २९ अगस्त २०१४ https://web.archive.org/web/20140903062231/http://www.lokchetna.com/shani-shingnapur.html 3 सितंबर 2014 live कहीं भी कुंडी तथा कड़ी लगाकर ताला नहीं लगाया जाता। इतना ही नहीं, घर में लोग आलीमारी, सूटकेस आदि नहीं रखते। ऐसा शनि भगवान की आज्ञा से किया जाता है। लोग घर की मूल्यवान वस्तुएँ, गहने, कपड़े, रुपए-पैसे आदि रखने के लिए थैली तथा डिब्बे या ताक का प्रयोग करते हैं। केवल पशुओं से रक्षा हो, इसलिए बाँस का ढँकना दरवाजे पर लगाया जाता है। गाँव छोटा है, पर लोग समृद्ध हैं। इसलिए अनेक लोगों के घर आधुनिक तकनीक से ईंट-पत्थर तथा सीमेंट का इस्तेमाल करके बनाए गए हैं। फिर भी दरवाजों में किवाड़ नहीं हैं। यहाँ दुमंजिला मकान भी नहीं है। यहाँ पर कभी चोरी नहीं हुई। यहाँ आने वाले भक्त अपने वाहनों में कभी ताला नहीं लगाते। कितना भी बड़ा मेला क्यों न हो, कभी किसी वाहन की चोरी नहीं हुई। शनिवार शनिवार के दिन आने वाली अमावस को तथा प्रत्येक शनिवार को महाराष्ट्र के कोने-कोने से दर्शनाभिलाषी यहाँ आते हैं तथा शनि भगवान की पूजा, अभिषेक आदि करते हैं। प्रतिदिनप्रातः 4 बजे एवं सायंकाल 5 बजे यहाँ आरती होती है। शनि जयंती पर जगह-जगह से प्रसिद्ध ब्राह्मणों को बुलाकर 'लघुरुद्राभिषेक' कराया जाता है। यह कार्यक्रम प्रातः 7 से सायं 6 बजे तक चलता है। महिमा हिन्दू धर्म में कहते हैं कि कोबरा का काटा और शनि का मारा पानी नहीं माँगता। शुभ दृष्टि जब इसकी होती है, तो रंक भी राजा बन जाता है। देवता, असुर, मनुष्य, सिद्ध, विद्याधर और नाग ये सब इसकी अशुभ दृष्टि पड़ने पर समूल नष्ट हो जाते हैं। परंतु यह स्मरण रखना चाहिए कि यह ग्रह मूलतः आध्यात्मिक ग्रह है। महर्षि पाराशर ने कहा कि शनि जिस अवस्था में होगा, उसके अनुरूप फल प्रदान करेगा। जैसे प्रचंड अग्नि सोने को तपाकर कुंदन बना देती है, वैसे ही शनि भी विभिन्न परिस्थितियों के ताप में तपाकर मनुष्य को उन्नति पथ पर बढ़ने की सामर्थ्य एवं लक्ष्य प्राप्ति के साधन उपलब्ध कराता है। नवग्रहों में शनि को सर्वश्रेष्ठ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह एक राशि पर सबसे ज्यादा समय तक विराजमान रहता है। श्री शनि देवता अत्यंत जाज्वल्यमान और जागृत देवता हैं। आजकल शनि देव को मानने के लिए प्रत्येक वर्ग के लोग इनके दरबार में नियमित हाजिरी दे रहे हैं। इन्हें भी देखें अहमदनगर ज़िला सन्दर्भ श्रेणी:अहमदनगर ज़िला श्रेणी:महाराष्ट्र के गाँव श्रेणी:अहमदनगर ज़िले के गाँव श्रेणी:महाराष्ट्र में हिन्दू मंदिर श्रेणी:शनि मंदिर