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अल-फ़ातिहा
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सूरा अल-फ़ातिहा سورة الفاتحة Meccan आरम्भ *उम्म अल-किताब
उम्म अल-कुरान
कुन्जी
सूरा अल-हम्द 1 क़ुरआन ११४ क़ुरआन २ १ पैगंबर मुहम्मद की प्रवक्तावादी आरम्भिक जीवन में १ ७ २५ नहीं ईश्वर की स्तुति: 3पालक (सृजनकर्ता) एवं पालित (सृजित) के बीच सम्बन्ध: 1मानव जाति की प्रार्थना: 3 कोई नहीं
thumb|right|ٱلۡفَاتِحَةِ
सूरा अल-फ़ातिहा (سورة الفاتحة), "आरम्भ्," इस्लाम की पवित्र ग्रन्थ कुरआन का पहला सूरा, या अध्याय है। इसमें 7 आयतें हैं। इसमें ईश्वर यानी अल्लाह के निर्देश एवं दया यानी रहम हेतु प्रार्थना की गई है। इस अध्याय का खास महत्त्व है, दैनिक प्रार्थना के आरम्भ में बोला जाने वाला सूरा है।
thumb|क़ुरआन का पहला सूरा|alt=
टिप्पणी
इस सूरा की प्रथम आयत
बिस्मिल्ला - हिर् - रह़्मा - निर् - रह़ीम
जिसका उच्चारण है "Bismillāhir rahmānir rahīm", (बिस्मिल्ला हिर्रहमा निर्रहीम), अरबी या अरबी जानने वाले लोगों के अलावा भी बहुत लोगों द्वारा सुना गया होगा। क्योंकि यह कुरान के प्रत्येक सूरा के पहले आता है। और दैनिक प्रार्थना एवं किसी शुभ कार्य को आरम्भ करने से पहले भी प्रायः बोला जाता है।
प्रकटीकरण
इसे दोनों मक्की एवं मदीनी सूरा गिना जाता है।
वैकल्पित नाम
नाम अल-फातिहा https://www.irfani-islam.in/2021/01/fatiha-ka-tarika-in-hindi.html Ala Hazrat Fatiha Ka Tarika In Hindi Mein फातिहा का तरीका हिंदी Sheikh Irfan Irfani-Islam - इस्लाम की पूरी मालूमात हिन्दी 2022-02-16 12 दिसंबर 2021 https://web.archive.org/web/20211212072854/https://www.irfani-islam.in/2021/01/fatiha-ka-tarika-in-hindi.html dead("सलामी देनेवाला / खोलने वाला") सूरत की विषय-वस्तु के कारण है।
फातिहा यह है कि जो विषय या पुस्तक या किसी अन्य चीज को खोलता है दूसरे शब्दों में, एक प्रकार की प्रस्तावना।
इसे उम्म अल-क़िताब ("पुस्तक की मां") और उम्म अल-कुरान ("कुरान की माता") कहा जाता है; Tafsir al-Quran al-Karim Mulla Sadra 1:163–164Ibn Kathir Tafsir Ibn Kathir http://www.quran4u.com/Tafsir%20Ibn%20Kathir/001%20Fatihah.htm 16 जून 2017 https://web.archive.org/web/20170620224437/http://www.quran4u.com/Tafsir%20Ibn%20Kathir/001%20Fatihah.htm 20 जून 2017 dead सबा अल मथानी ("सात बार दोहराया [छंद ] ", कुरान के 15:87 सूरा से लिया गया पदनाम;)
अल-हम्द (" प्रशंसा "), क्योंकि एक हदीस ने मुहम्मद ने यह कहा है:" प्रार्थना [अल-फतह] दो हिस्सों में विभाजित है मेरे और मेरे कर्मचारियों के बीच, जब सेवक कहता है, 'सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए है', अल्लाह जिसका अस्तित्व है, अल्लाह कहते हैं, 'मेरे बंदे ने मेरी प्रशंसा की है'।Al-Bayan Fi Tafsir al-Quran Abu al-Qasim al-Khoei 446
अल-शिफा '(" इलाज " ), क्योंकि एक हदीस में मुहम्मद ने कहा था "इस का खोलना हर ज़हर का इलाज है"। Bihar al-Anwar Muhammad Baqir Majlisi 89:238Wasā'il al-Shīʿa Al-Hurr al-Aamili 6:232
अल-रुक़ाह ("उपाय" या "आध्यात्मिक इलाज "), और अल-आसस," द फाउंडेशन ", पूरे कुरान के लिए एक नींव के रूप में अपनी सेवा का जिक्र करते हैं Joseph E. B. Lumbard, "Introduction to Sūrat al-Fātiḥah," The Study Quran. ed. Seyyed Hossein Nasr, Caner Dagli, Maria Dakake, Joseph Lumbard, Muhammad Rustom (San Francisco: Harper One, 2015), p. 3.
सारांश
यह सूरह मक्की है, इस में सात आयते है।
यह सूरह आरंभिक युग में मक्का में उतरी है, जो कुरान की भूमिका के समान है। इसी कारण इस का नाम सुरहा फातिहा अर्थात: “आरंभिक सूरह “है। इस का चमत्कार यह है कि इस की सात आयतों में पूरे कुरान का सारांश रख दिया गया है। और इस में कुरान के मौलिक संदेश: तौहीद, रीसालत तथा परलोक के विषय को संक्षेप में समो दिया गया है। इस में अल्लाह की दया, उस के पालक तथा पूज्य होने के गुणों को वर्णित किया गया है।
इस सुरह के अर्थो पर विचार करने से बहुत से तथ्य उजागर हो जाते है| और ऐसा प्रतीत होता है कि सागर को गागर में बंद कर दिया गया है।
इस सुरह में अल्लाह के गुण–गान तथा उस से पार्थना करने की शिक्षा दी गई है कि अल्लाह की सराहना और प्रशंशा किन शब्दो से की जाये। इसी प्रकार इस में बंदो को न केवल वंदना की शिक्षा दी गई है बल्कि उन्हें जीवन यापन के गुण भी बताये गये है।
अल्लाह ने इस से पहले बहुत से समुदायो को सुपथ दिखाया किन्तु उन्होंने कुपथ को अपना लिया, और इस में उसी कुपथ के अंधेरे से निकलने की दुआ है। बंदा अल्लाह से मार्ग–दर्शन के लिये दुआ (पार्थना) करता है तो अल्लाह उस के आगे पूरा कुरान रख देता है कि यह सीधी राह है जिसे तू खोज रहा है। अब मेरा नाम लेकर इस राह पर चल पड़।
अनुवाद
सूरए फातेहा मक्का में नाज़िल हुई इसीलिए इसे मक्की सूरत कहा जाता है। इस में 7 आयते हैं
+ अल-फ़ातिहा (الفَاتِحَة) आयत Text लिप्यान्तारीकरण अनुवाद https://ar.m.wikisource.org/wiki/القرآن_الكريم/سورة_الفاتحة Al-Fatiha (Wikisource) https://web.archive.org/web/20190428142131/https://ar.m.wikisource.org/wiki/%D8%A7%D9%84%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86_%D8%A7%D9%84%D9%83%D8%B1%D9%8A%D9%85/%D8%B3%D9%88%D8%B1%D8%A9_%D8%A7%D9%84%D9%81%D8%A7%D8%AA%D8%AD%D8%A9 28 अप्रैल 2019 dead 1.1. بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ बिस्मिल्लाहि र-रहमानि र-रहीम (शुरू करता हूँ) अल्लाह के नाम से, जो सब पर दया करता है, अत्यंत दयालु है। 1.2. ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ अल हम्दु लिल्लाहि रब्बि ल-आलमीन सब तारीफ़ अल्लाह (ही) के लिए हैं, जो पूरी दुनिया का ईश्वर है। 1.3. ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ अर रहमानि र-रहीम जो सब पर दया करता है, अत्यंत दयालु है। 1.4. مَالِكِ يَوْمِ ٱلدِّينِ मालिकि यौमि द-दीन जो क़यामत (यानी बदले के दिन) का मालिक है। 1.5. إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ इय्याक न'आबुदु व इय्याक नस्त'ईन (ऐ अल्लाह!) हम आपका ही इबादत करते हैं और आप ही से मदद चाहते हैं। 1.6. ٱهْدِنَا الصِّرَاطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ इह्दिन स-सिरात अल-मुस्तक़ीम (ऐ अल्लाह!) हमें सही रास्ता दिखा। 1.7. صِرَاطَ ٱلَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ ٱلْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا ٱلضَّآلِّين सिरात अल-लादीना अन'अमता अलैहिम ग़ैरिल मग़दूबि अलैहिम वलद दाल्लीन उन लोगों का रास्ता जिनपर आपने इनाम रखा। उनका रास्ता नहीं जो आपके गुस्से का शिकार हुए एवं न (ही) उनका जो भटके हुए हैं।
इन्हें भी देखें
क़ुरान
नमाज़
01 - अल-फ़ातिहा कोई नहीं अल-बक़रा
सन्दर्भ
बाहरी कडि़यां
The Holy Qur'an/Al-Fatiha अल-फ़ातिहा
अल-फ़ातिहा Altafsir.com पर
Sura 1, The Key (अल-फ़ातिहा)
तफ़सीर इब्न कसीर
एक रॉली ख़ुत्बा
फ़ातिहा
श्रेणी:नमाज़