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मंडलेश्वर
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स्थापना का कारण गलत लिखा है मंडन मिश्र का कार्य क्षेत्र महेश्वर रहा है जिसका उल्लेख पुराणों में है ।
रियासत काल w ब्रिटिश शासन के दौरान राजधानी महेश्वर से दूर जघन्य अपराधियों को बंदी रखने w उन्हें सजा देने का स्थान जेल w फांसी बैडी आज भी है तब अंग्रेज अधिकारी का यहां निवास बनाए हुए फिर आबादी रहने लगी । अपराधियों को मृत्यु दंड से पूर्व मुंडन किया जाता था इसलिए बाद अपभ्रंश मुंडन से महेश्वर की तर्ज पर मंडलेश्वर हुआ है ।
छप्पन देव में मुगलों से मूर्तियों को बचाने के लिए छप्पन मूर्तियों को यहां गाड़ कर छिपाया गया था ।
गुप्तेश्वर की स्थापना अभी 10,20 साल पुरानी है यहां अंग्रेज पानी से बिजली बनाने के लिए अपराधी बंदियों से श्रम कराया जाता था ।
देश आजाद होने पर यहां पावर फूल नेताओं ने संविधान की मंशा के विपरीत अवैध जिला न्यायालय बनवाया है बाद राजनीतिक संरक्षण में फल फूल रहा है ।
शिक्षा
मंडलेश्वर निमाड़ का शैक्षणिक केंद्र बिंदु भी है यहाँ स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल महाविद्यालय क्षेत्र का प्रमुख डिग्री कॉलेज है, इसके अतिरिक्त सरदार पटेल इंजीनियरिंग कॉलेज,चरक फार्मेसी कॉलेज , आकांक्षा स्कॉलर अकादमी, सरदार पटेल इंटरनेशनल स्कूल,श्री कंवरतारा पब्लिक हायर सेकंडरी स्कूल मंडलेश्वर आदि भी प्रमुख शैक्षणिक संस्थाएं भी शैक्षणिक गतिविधियों को तीव्रता से बढ़ावा दे रही ।
पर्यटन
पर्यटन के लिए श्रेष्ठ मंडलेश्वर नर्मदा नदी के तट पर स्थित है और यह नगर सुंदर घाट और प्राचीन मंदिरों के कारण प्रसिद्ध है। यहाँ इंदौर , धामनोद और बडवाह से आसानी से पहुंचा जा सकता है, यहाँ ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था है। यहा प्रथम बाजीराव पेशवा द्वारा निर्मित काशी विश्वनाथ मंदिर है इसमें शिव पंचायत है एवं साथ ही वासुदेवानंद सरस्वती स्वामी महाराज द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर में ही उनकी कुटी है जहाँ उनके चरण पादुका है यह मंदिर करीब 250 वर्ष पुराना है जो प्रथम बाजीराव पेशवा द्वारा मंदिर के संथापक अनिल जहागिरदार जी के पूर्वजो को दिया गया था तब से ही यह मंदिर की जिम्मेदारी जहागिरदार परिवार की है
इन्हें भी देखें
खरगोन ज़िला
सन्दर्भ
श्रेणी:खरगोन ज़िला
श्रेणी:मध्य प्रदेश के शहर
श्रेणी:खरगोन ज़िले के नगर