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झाँसी की रानी रेजिमेंट
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झाँसी की रानी रेजिमेंट Jhansi Trooper.JPG ४० के दशक में प्रशिक्षण लेती झाँसी की रानी रेजिमेंट की एक सैनिक का चित्र अक्टूबर १९४३ - मई १९४५ १२ जुलाई १९४३ भारत आजाद हिंद इन्फेंट्री गोरिल्ला इन्फेंट्री, नर्सिंग कोर १,००० (अनुमानित) सुभाष चन्द्र बोस Lt Col। लक्ष्मी सहगल लक्ष्मी स्वामीनाथनजानकी आती नाहप्पन
झाँसी की रानी रेजिमेंट आज़ाद हिन्द फ़ौज की एक महिला रेजिमेंट थी, जो १९४२ में भारतीय राष्ट्रियावादियो द्वारा दक्षिण-पूर्व एशिया में जापानी सहायता से औपनिवेशिक भारत को ब्रिटिश राज से आज़ादी दिलवाने के उद्देश्य से लक्ष्मी स्वामीनाथन के नेतृत्व में बनायी गयी थी।Pradeep K. A revolutionary and a singer http://www.thehindu.com/features/metroplus/a-revolutionary-and-a-singer/article3682419.ece?ref=relatedNews 18 February 2015 The Hindu 25 July 2012 https://web.archive.org/web/20140331100029/http://www.thehindu.com/features/metroplus/a-revolutionary-and-a-singer/article3682419.ece?ref=relatedNews 31 मार्च 2014 live इस यूनिट का निर्माण जुलाई १९४३ में दक्षिण-पूर्व एशिया की प्रवासी भारतीय महिलाओं ने स्वेच्छा से किया गया।Joyce Lebra, Women Against the Raj: The Rani of Jhansi Regiment (2008) ch. 1–2 इस रेजिमेंट का नाम झाँसी राज्य की रानी, लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा गया था।Edwardes, Michael (1975) Red Year: the Indian Rebellion of 1857. London: Sphere; p. 126
स्थापना
रेजिमेंट के गठन की घोषणा सुभाष चन्द्र बोस ने १२ जुलाई १९४३ को की थी।Indian National Army: Women's Regiment: How It All Began http://www.nas.gov.sg/archivesonline/online_exhibit/indian_national_army/breaking.htm www.nas.gov.sg National Archives of Singapore 2003 18 February 2015 https://web.archive.org/web/20141102032815/http://www.nas.gov.sg/archivesonline/online_exhibit/indian_national_army/breaking.htm 2 नवंबर 2014 live रेजिमेंट की अधिकांश महिलाएं मलयान रबर एस्टेट से आयी भारतीय मूल की किशोर स्वयंसेविकाएँ थी; बहुत कम ही कभी भारत में रही थी।Lebra, ch 2 रेजिमेंट का केंद्र प्रारंभ में सिंगापुर में स्थित इसके प्रशिक्षण शिविर के साथ स्थापित किया गया था, जहाँ लगभग एक सौ सत्तर कैडेट थे। इन कैडेटों को उनकी शिक्षा के अनुसार गैर-कमीशन अधिकारी या सिपाही की रैंक दी गई थी। बाद में, रंगून और बैंकॉक में शिविर स्थापित किए गए, और नवंबर १९४३ तक इस इकाई में तीन सौ से अधिक कैडेट थे।
प्रशिक्षण
कैडेटों का प्रशिक्षण सिंगापुर में २३ अक्टूबर १९४३ को शुरू हुआ।Sahgal Lakshmi My days in the Indian National Army by Lakshmi Sahgal http://www.ndtv.com/india-news/my-days-in-the-indian-national-army-by-lakshmi-sahgal-493887 18 February 2015 NDTV-New Delhi Television 23 July 2012 https://web.archive.org/web/20150218074504/http://www.ndtv.com/india-news/my-days-in-the-indian-national-army-by-lakshmi-sahgal-493887 18 फ़रवरी 2015 live सभी रंगरूट अनुभागों और प्लेटों में विभाजित किए गए थे, और उन्हें उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुसार गैर-कमीशन अधिकारी और सिपाही के पद दिए गए थे। इन रंगरूटों को सामान्य या युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार करने के लिए ड्रिल और रूट मार्च के साथ-साथ राईफ़ल, हथगोले और बैयोनेट जैसे हथियार चलाने का प्रशिक्षण भी दिया गया था। इसके बाद कई कैडेटों का चयन बर्मा में जंगल युद्ध में अधिक उन्नत प्रशिक्षण के लिए किया गया। ३० मार्च १९४४ को रेजिमेंट के सिंगापुर प्रशिक्षण शिविर में पांच सौ सैनिकों की पहली पासिंग आउट परेड हुई।Indian National Army: Women's Regiment: Life in camp http://www.nas.gov.sg/archivesonline/online_exhibit/indian_national_army/life.htm www.nas.gov.sg National Archives of Singapore 2003 18 February 2015 https://web.archive.org/web/20141102032533/http://www.nas.gov.sg/archivesonline/online_exhibit/indian_national_army/life.htm 2 नवंबर 2014 live
कुछ २०० कैडेटों को नर्सिंग प्रशिक्षण के लिए भी चुना गया था, जो बाद में चांद बीबी नर्सिंग कोर का हिस्सा बने थे।Meeta Deka, Women's agency and social change : Assam and beyond (2013) ch. 4
सेवा
अंगूठाकार|इम्फाल अभियान के दौरान झाँसी की रानी रेजिमेंट की लगभग सौ सैनिकों को मेम्यो में तैनात किया गया था।
आईएनए के इम्फाल अभियान के दौरान, झाँसी की रानी रेजिमेंट की लगभग सौ सैनिकों का प्रारंभिक दल मेम्यो की ओर रवाना हुआ, जहाँ इनका इरादा इम्फाल के [अपेक्षित] पतन के बाद बंगाल के गांगेय मैदानों में प्रवेश करने के लिए एक अग्रणी इकाई बनाने था। दल के एक हिस्से ने मेम्यो के आईएनए अस्पताल में नर्सिंग का काम भी सम्भाला। इम्फाल की घेराबंदी में विफल होने पर आईएनए को वापसी करनी पड़ी, और इसके बाद झाँसी की रानी रेजिमेंट की सैनिकों को मौनय्वा और मेम्यो में तैनात आईएनए सैनिकों की राहत और देखभाल का काम सौंपा गया। इस रेजिमेंट ने इसके बाद किसी भी युद्ध में हिस्सा नहीं लिया।
समाप्ति
रंगून के पतन, और शहर के साथ साथ बर्मा से भी आज़ाद हिंद सरकार और सुभाष चंद्र बोस की वापसी के बाद, बर्मा में ही रेजिमेंट की कुछ इकाइयों को भंग कर दिया गया, जबकि शेष इकाइयां वापस जा रही जापानी सेनाओं के साथ ही लौट गई। पीछे हटने के दौरान इन्हें कई हवाई हमलों, और साथ ही साथ बर्मी प्रतिरोध बलों से कुछ संघर्षों का भी सामना करना पड़ा। इन हमलों के पीड़ितों की कुल संख्या ज्ञात नहीं है। कुछ समय बाद रेजिमेंट को पूरी तरह भंग कर दिया गया।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
The Women's Regiment. (महिला रेजिमेंट) नेशनल आर्काइव्ज ऑफ़ सिंगापुर
"Freedom To Us: Intensive training of the Women troops of the Indian National Army" (स्वतंत्रता हमारे लिए: भारतीय राष्ट्रीय सेना की महिला सैनिकों का गहन प्रशिक्षण), निप्पन न्यूज़, संख्या २०४, एनएचके के आधिकारिक जालस्थल पर।
विस्तृत पठन
हिल्स, कैरोल तथा डेनियल सी सिल्वरमैन Nationalism and Feminism in Late Colonial India: The Rani of Jhansi Regiment मॉडर्न एशियन स्टडीज http://web.calstatela.edu/faculty/swells2/hills-carol.pdf २७ ४ अक्टूबर १९९३ ७४१–७६० 0026-749X pdf कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस कैल स्टेट एलए 10 अगस्त 2018 https://web.archive.org/web/20160303223012/http://web.calstatela.edu/faculty/swells2/hills-carol.pdf 3 मार्च 2016 dead
लेब्रा, जॉयस चैपमैन Women Against the Raj: The Rani of Jhansi Regiment २००८ https://books.google.com.au/books?id=fuw1Wt1-O7EC&printsec=frontcover&source=gbs_ge_summary_r&cad=0#v=onepage&q&f=false इंस्टिट्यूट ऑफ़ साउथ-ईस्ट एशियन स्टडीज 978-981-230-809-2 गूगल बुक्स 10 अगस्त 2018 https://web.archive.org/web/20180810105138/https://books.google.com.au/books?id=fuw1Wt1-O7EC&printsec=frontcover&source=gbs_ge_summary_r&cad=0#v=onepage&q&f=false 10 अगस्त 2018 live
डेका, मीता Women's agency and social change : Assam and beyond २०१३ https://books.google.co.in/books?id=pxdBDwAAQBAJ&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false सेज पब्लिशिंग इण्डिया 978-935-150-784-0 गूगल बुक्स 10 अगस्त 2018 https://web.archive.org/web/20180810072551/https://books.google.co.in/books?id=pxdBDwAAQBAJ&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false 10 अगस्त 2018 live
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