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मैत्रेयी पुष्पा
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Maitreyi-Pushpa.jpg Maitreyi-Pushpa.jpg मैत्रेयी पुष्पा
मैत्रेयी पुष्पा हिंदी लेखिका हैं। उन्हें हिन्दी अकादमी दिल्ली का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।http://www.pressnote.in/Litrature-News_271550.html%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F संग्रहीत प्रति 21 मई 2015 21 जून 2022 https://web.archive.org/web/20220621142148/https://www.pressnote.in/Litrature-News_271550.html%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%9F dead
जीवन
उनका जन्म 30 नवंबर, 1944 को अलीगढ़ जिले के सिकुर्रा गाँव में हुआ। उनके जीवन का आरंभिक भाग बुंदेलखण्ड में बीता।
शिक्षा
उनकी आरंभिक शिक्षा झाँसी जिले के खिल्ली गाँव में तथा एम॰ए॰ (हिंदी साहित्य) बुंदेलखंड कालेज, झाँसी में हुआ।
कृतियाँ
उपन्यास
स्मृति दंश (१९९०)गोपाल राय हिन्दी उपन्यास का इतिहास २०१४ राजकमल प्रकाशन नई दिल्ली ३८७
बेतवा बहती रही (१९९३)
इदन्नमम (१९९४)
चाक (१९९७)
झूला नट (१९९९)
अल्मा कबूतरी
कहै ईसुरी फाग
चिन्हार
गुनाह बेगुनाह
फ़रिश्ते निकले (2014)
आत्मकथा
कस्तूरी कुण्डल बसै(२००३)
गुड़िया भीतर गुड़िया(२००८)
कहानी संग्रह
चिन्हार
ललमनियाँ तथा अन्य कहानियां
त्रिया हठ
फैसला
सिस्टर
सेंध
अब फूल नहीं खिलते
बोझ
पगला गई है भागवती
छाँह
तुम किसकी हो बिन्नी?
कविता संग्रह
लकीरें
यात्रा संस्मरण
अगनपाखी
लेख संग्रह
खुली खिड़कियां
सम्मान
हिंदी अकादमी द्वारा साहित्य कृति सम्मान
कहानी 'फ़ैसला' पर कथा पुरस्कार मिला
'बेतवा बहती रही' उपन्यास पर उ.प्र. हिंदी संस्थान द्वारा प्रेमचंद सम्मान(१९९५)
'इदन्नमम' उपन्यास पर शाश्वती संस्था बंगलौर द्वारा नंजनागुडु तिरुमालंबा पुरस्कार
म.प्र. साहित्य परिषद द्वारा वीरसिंह देव सम्मान
वनमाली सम्मान 2011http://www.jagranjosh.com/current-affairs/%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-2011-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4-1298445345-2 जोश''' 7 जून 2012 https://web.archive.org/web/20110320014529/http://www.jagranjosh.com/current-affairs/%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-2011-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%AF%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4-1298445345-2 20 मार्च 2011 dead
बाहरी कडियाँ
खुद को पत्नी माना ही नहीं कभी: हंस के एक अंक में राजेन्द्र यादव ने मैत्रेयी की तुलना मरी हुयी गाय से की, इस पर साहित्य जगत में काफी हलचल हुयी। इस व अन्य विषयों पर कथाकार अमरीक सिंह दीप की मैत्रेयी पुष्पा से निरंतर ब्लॉगज़ीन में प्रकाशित बातचीत।
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