Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

चित्रगुप्त मन्दिर,खजुराहो

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

चित्रगुप्त मन्दिर File:India-5707 - Flickr - archer10 (Dennis).jpg India Madhya Pradesh#India मध्य प्रदेश, भारत में स्थान खजुराहो 24.8544234 79.9200664 region:IN inline,title हिन्दू धर्म चित्रगुप्त भगवान छत्तरपुर मध्य प्रदेश भारत ११वीं शताब्दी चित्रगुप्त मंदिर मध्य भारत के राज्य मध्य प्रदेश के खजुराहो क्षेत्र में बना निरंधार प्रासाद शैली का एक मन्दिर है। इस मंदिर का निर्माण ९७५ ईसवी सन में हुआ था और यहां मिथुन नर्तक, देवांगनाएँ, शार्दूल काफी मात्रा में अंकित किये गए हैं।http://kayasthsangh.weebly.com/chitragupta-temples.html खजुराहो चित्रगुप्त मंदिर कायस्थ संघ 25 अप्रैल 2018 26 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20180426075810/http://kayasthsangh.weebly.com/chitragupta-temples.html dead इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सामाजिक दृश्य को उत्कृष्टता से अंकित किया गया है। स्थापत्य मंदिर के मुखमंडप, महामंडप, अंतराल तथा गर्भगृह सुसज्जित हैं। मंदिर का भीत धारशिला से निर्मित किया गया है तथा उस पर खार- शिलाएँ आरोपित हैं। भीत पर पीठ के खाँचे हैं तथा अंतराल गज, अश्व, नर, देव उपासना एवं मिथुनों से सजाया गया है। इसके गर्भगृह में ४ फ़ीट १० इञ्च ऊँची चित्रगुप्त भगवान की प्रतिमा विराजमान है। यह प्रतिमा अपने सप्त अश्वीय रथ के साथ इस प्रकार से अंकित की गयी है, जैसे रथ से उतर कर मंदिर में स्थापित हो गये हैं। ७५ लम्बाई एवं ५१ फ़ीट की चौड़ाई वाले, मंदिर से लगभग ११० गज की दूरी पर एक सीढ़ीदार व तालाबनुमा कुँआ है। मंदिर का अंतरप साधारण तौर पर सजाया गया है। मंदिर के मुखमंडप के ऊपरी एवं बाहरी भाग में रथिकाएँ अंकित की गई हैं। भद्र पर मूर्तियों की दो पंक्तियाँ एवं जंघा पर तीन पंक्तियाँ अंकित है। मंदिर त्रयंग है। इसके मूलमंजरी पर दो उरु: श्रृंग हैं। इनके तल से करणपत श्रृंग अंकित हैं। नीचे के उरु: श्रृंग के दोनों ओर दो श्रृंग हैं, जो प्रतिरथ और करण को घेरे हुए हैं। ये श्रृंग पंचरथ प्रकृति के हैं। करणरथ पर केवल तीन भूमि- आम्लक है। शिखर पर तीन चंद्रिकाएँ हैं। मंदिर के अंतराल में केवल एक रथिका अंकित है, जिसपर चतुर्भुज शिव विराजमान हैं। मंदिर के महामंडप में एक प्रमुख घंटे और तीन कूट घंटे लगाए गए हैं। कूट घंटों के चार- चार पीठे हैं, जिनपर चंद्रिका, आम्लक और कलश आरोहित हैं। महामंडप का सभागृह वर्गाकार है, जिसे अष्टकोणिय बनाया गया है। महामंडप की चतुष्किया सीधी- सादी है। वितान के साथ- साथ अप्सराओं के लिए भी टोड़ा अंकित किया गया है। वितान नाविच्छंद प्रकृति का है, मंदिर के अंदर ब्रह्मा, विष्णु, भैरव, सूर्य, कुबेर तथा अन्य चतुर्भुज की प्रतिमाएँ अंकित की गई हैं। भरत मंदिर चित्रगुप्त मंदिर को भरत जी का मंदिर भी कहा जाता है। इसमें विष्णु की एकादशमुखी प्रतिमा अंकित की गई है। जिसमें एक मुखविष्णु का है तथा अन्य दस मुख उनके अवतारों का अंकित किया गया है। मंदिर का द्वार नौ शाखाओं से सजाया गया है। प्रथम शाखा पर साधारण प्रस्तर उत्कीर्ण युक्त है। तीसरी तथा पांचवी शाखा में व्याल उत्कीर्ण किया गया है। चौथी शाखा स्तंभ शाखा है, जिस पर मिथुन उत्कीर्ण है। द्वितीय एवं छठी शाखा पर गज वर्तमान है। सातवीं एवं आठवीं शाखाएँ सामान्य प्रस्तर सज्जा, कमल पत्र तथा नाग मूर्तियों से सजाई गई हैं। नवीं शाखा को गोल पुष्पचक्रों से सजाया गया है। द्वार मंदिर के द्वार भाग में विद्याधर, सूर्य, भूत नायक इत्यादि की प्रतिमाएँ भी रथिकाओं पर अंकित की गई है। द्वार शाखा के शुरु में दोनों ओर गंगा- यमुना अंकित हैं। इसकी रथिकाओं पर सेविकाएँ, द्वारपाल तथा चारों वाहक महिलाएँ भी मूतांकित है। ऊपर की रथिका पर शिव- पार्वती की दैविक शांतियुक्त प्रतिमा अद्भूत है। प्रतिमाएँ परंपरागत हैं। दक्षिण- पश्चिम कोने में आज्ञात चतुर्भुज देव, शिव, यम अपने भैंसे के साथ, नॠति की नग्न प्रतिमा वर्तमान हैं। यहाँ की अधिकतर प्रतिमाओं में शिव को सौम्य रुपी दर्शाया गया है। दक्षिणी मुख की मुख्य रथिकाओं पर त्रिमुखी ब्रह्मा चतुर्भुज देव, वृषभ मुखी वसु, चतुर्भुज अग्नि, ब्राह्मण- ब्राह्मणी, शिव- पार्वती, लक्ष्मी नारायण, चतुर्भुज नॠति की प्रतिमाएँ अंकित की गई हैं। इस तरह मंदिर के इस भाग में चतुर्भुज प्रतिमाओं की अधिकता है। उत्तर मुख मंदिर के उत्तरी मुख की रथिकाओं पर वायु, वसु, शिव- पार्वती, शिव कल्यान सुंदरमुर्कित्त, कुबेर की खंडित प्रतिमाएँ सजायी गई हैं। यहाँ मूर्तियों को अंकित करने में दोहराया गया है। उत्तरी- पूर्वी मुख के भाग में छः प्रतिमाएँ चतुर्भुज अनाम देवता की बनाई गई है। यहाँ वरुण की एक खंडित मूर्ति भी वर्तमान है। पूर्वी मुख के ऊपर दक्षिण की ओर की एक रथिका में एक विशाल उदर देव ललित प्रतिमा में विराजमान हैं। देवता प्रायः भावहीन हैं। गर्भ गृह गर्भगृह की प्रमुख प्रतिमा सूर्य की है। भग्नहस्त प्रतिमा किरिट- मुकुट धारण किए हैं। पिंगला प्रतिमा पर सिर को अंकित नहीं किया गया है। गर्भगृह के खाली स्थान को भरने के लिए उषा और प्रत्युषा आलिंग्णासन में तीर चलाते हुए विराजमान हैं। अन्य धनुषधारी महिलाएँ फलक रूप में हैं। एक रथिका पर योगासन में शिव हैं। इस रथिकाओं को सुंदर बनाने के लिए नारी प्रतिमा, अश्व सिर अश्विनीकुमार द्धय तथा अन्य सेवकों के साथ अंकित किया गया है। उपर्युक्त से स्पष्ट है कि चित्रगुप्त मंदिर की मूर्तियाँ मूर्तिकला की दृष्टि से उत्कृष्ट हैं और कलाकारों की अथक साधना का पुरस्कार हैं। चित्र दीर्घा सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:मध्य प्रदेश के हिन्दू मंदिर