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व्यक्तित्व का वर्गीकरण

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जुलाई 2014जुलाई 2014विभिन्न प्रकार के व्यक्तियों का मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण व्यक्तित्व प्ररूप (Personality type) कहलाता है। कभी-कभी व्यक्तित्व प्ररूप और व्यक्तित्व विशेषक (personality traits) को अलग-अलग माना जाता है। परिचय व्यक्ति के व्यक्तित्व का अध्ययन करने के लिए मनोवैज्ञानिक सदियों से प्रयत्न करते रहे हैं। नये-नये सिद्धांतों की खोज और व्यक्ति को विभिन्न वर्गों में रखकर व्यक्तित्व का अध्ययन करने का प्रयत्न किया गया। ईसा के चार सौ वर्ष पूर्व प्रसिद्ध दार्शनिक व चिकित्सक हिप्पोक्रेट्स ने कायरस (humours) के आधार पर व्यक्ति के व्यक्तित्व को चार भागों में बांटा। अपने अध्ययन में उसने मनुष्य में चार रसों की उपस्थिति मानी, ये चार रस हैं- 1. रक्त, 2. कृष्ण पित्त, 3. पीत पित्त और 4. कफ। हिप्पोक्रेट्स के अनुसार इन चारों में से एक काय रस की व्यक्ति में प्रधानता होती है और उसके अनुसार उसकी चित्त-वृत्ति होती है। इसी तरह आयुर्वेद में भी वात, कफ, पित्त के आधार पर व्यक्ति के चित्त की प्रकृति का वर्णन किया गया है। भगवद्गीता में भी तीन गुणों सत्, रज, तम के आधार पर व्यक्ति के व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया गया है। इस शताब्दी के मनोवैज्ञानिकों ने भी विभिन्न सिद्धांतों द्वारा व्यक्तित्व का अध्ययन करने का प्रयत्न किया। जर्मन मनोवैज्ञानिक क्रेत्समर (1925) ने शारीरिक रचना के प्रकारों के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया। उसने व्यक्तियों को चार भागों में वर्गीकृत किया। इसी तरह अमेरिकन चिकित्सक विलियम शेल्डन (1942) ने व्यक्तियों को तीन वर्गों में वर्गीकृत किया है- एन्डोमॉर्फी अथवा स्थूलकाय, मीजोमॉर्फी या मध्यकाय, एक्टोमॉर्फी या लम्बकाय। युंग तथा अन्य प्रमुख मनोवैज्ञानिकों ने व्यक्तियों के व्यक्तित्व को दो भागों में बांटा- बहिर्मुखी और अंतर्मुखी। इसी तरह से कई अन्य मनोवैज्ञानिकों ने व्यक्तित्व को तीन भागों में बांटा- अंतर्मुखी, बहिर्मुखी और उभयमुखी। आइजैनक (1970, 1975) ने व्यक्तित्व को चार भागों में बांटा- अंतर्मुखी, बहिर्मुखी, स्थिर और अस्थिर। आलपोर्ट (1966) ने शीलगुणों (ट्रेट्स) के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया। व्यक्तित्व का सम्पूर्ण अध्ययन करने के लिए कई सिद्धांतों का प्रतिपादन हुआ। इन सिद्धांतों को पांच वर्गों में रखा जा सकता है- 1. प्रकार और गुणशील सिद्धांत (type and trait theory), 2. मनोगत्यात्मक सिद्धांत (Psychodynamic theories), 3. मानवीय सिद्धांत (Humanistic theories), 4. अधिगम सिद्धांत (Learning theories), 5. ज्ञानात्मक सिद्धांत (cognitive theories)। उपरोक्त पांच प्रकार के सिद्धांतों से व्यक्ति के व्यक्तित्व का वर्गीकरण और अध्ययन किया जा सकता है। युंग का व्यक्तित्व प्ररूप युंग ने व्यक्तिव के 3 प्रकार बताये हैं। 1.अंतर्मुखी 2.बहिर्मुखी 3.उभयमुखी व्यक्तित्व का A और B प्रकार फ्रीडमन व रोजरमन ने दिया | TYPE A अशांत ,अधीर TYPE B शांत , चिंतामुक्त