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गला ग्रसनी प्रतिवाह
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दिसम्बर 2025
एक्स्ट्राएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (ईईआरडी)।),Kahrilas PJ Maximizing outcome of extraesophageal reflux disease Am J Manag Care 6 16 Suppl S876–82 October 2000 11184658 मौन भाटा,Koufman JA Laryngopharyngeal reflux is different from classic gastroesophageal reflux disease Ear, Nose, & Throat Journal 81 9 Suppl 2 7–9 2002 12353431 और सुप्रा-एसोफेजियल रिफ्लक्सZerbib F, Stoll D Management of laryngopharyngeal reflux: an unmet medical need. Neurogastroenterol Motil 2010 22 2 109–12 20067549 10.1111/j.1365-2982.2009.01437.x 39810748
Pharynx (PSF).png
मानव सिर और गर्दन के अग्र भाग का धनु चित्र। LPR में, ग्रसनी (1), मुख-ग्रसनी (2) और स्वरयंत्र (3) गैस्ट्रिक सामग्री के संपर्क में आते हैं जो ग्रासनली से ऊपर की ओर प्रवाहित होती है।
जठरांत्ररोगविज्ञान
स्वरयंत्र-ग्रसनी भाटा (अंग्रेज़ी: Laryngopharyngeal reflux, संक्षेप में एल.पी.आर.) एक चिकित्सीय स्थिति है जिसमें पेट का अम्ल या अन्य पाचक रस उलटी दिशा में बहकर स्वरयंत्र (गला), मुखग्रसनी अथवा नासाग्रसनी तक पहुँच जाता है।Galluzzi Francesca Schindler Antonio Gaini Renato Maria Garavello Werner 2015-10-01 The assessment of children with suspected laryngopharyngeal reflux: An Otorhinolaringological persepective https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0165587615003729 International Journal of Pediatric Otorhinolaryngology 79 10 1613–1619 10.1016/j.ijporl.2015.07.037 0165-5876 यह स्थिति गले और श्वसन से संबंधित अनेक प्रकार की परेशानियाँ उत्पन्न करती है, जैसे — लगातार खाँसी आना, घरघराहट होना, गले में जलन या दर्द, तथा निगलने में कठिनाई।
एल.पी.आर. अन्य रोगों जैसे साइनसाइटिस (नाक के आसपास के खोखलों की सूजन), मध्यकर्णशोथ (कान का संक्रमण), राइनाइटिस (नाक की सूजन) और दमा (अस्थमा) से भी जुड़ा हो सकता है। इसे कई बार गैस्ट्रो-इसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जी.ई.आर.डी.) के समान समझ लिया जाता है, परंतु इसकी क्रियाविधि भिन्न होती है। संयुक्त राज्य अमेरिका की लगभग 10 प्रतिशत जनसंख्या इस रोग से प्रभावित है। वहीं आवाज़ से जुड़े रोगों वाले लोगों में यह अनुपात लगभग 50 प्रतिशत पाया गया है।Li Yading Xu Gaofan Zhou Bingduo Tang Yishuang Liu Xiaowen Wu Yue Wang Yi Kong Jing Xu Tingting 2022-06 Effects of acids, pepsin, bile acids, and trypsin on laryngopharyngeal reflux diseases: physiopathology and therapeutic targets https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9072476/ European archives of oto-rhino-laryngology: official journal of the European Federation of Oto-Rhino-Laryngological Societies (EUFOS): affiliated with the German Society for Oto-Rhino-Laryngology - Head and Neck Surgery 279 6 2743–2752 10.1007/s00405-021-07201-w 1434-4726 9072476 34860271
लक्षण
इस रोग में पेट की अम्लीय सामग्री गले के ऊपरी भागों तक पहुँच जाती है, जिससे अनेक लक्षण उत्पन्न होते हैं —
आवाज़ बैठना या भारी होना
गले में जलन या खराश
बार-बार गला साफ़ करना
पोस्ट-नेज़ल ड्रिप (नाक के पीछे से बलगम बहना)
निगलने में कठिनाई
खट्टापन या मुँह में खराब स्वाद
कुछ लोगों में छाती में जलन (हार्टबर्न) भी होती है, जबकि कई में नहीं गंभीर अवस्था में पेट की अम्लीय सामग्री के कारण दाँतों की परत (एनामेल) भी घिस सकती है।
एल.पी.आर. स्वरयंत्र में सूजन पैदा करता है जिससे आवाज़ में कर्कशता होती है। इससे बोलने में थकान, तनाव तथा आवाज़ पर ज़ोर देने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो मांसपेशीय तनाव-जनित कर्कशता हो सकती है, जिसके उपचार के लिए प्रायः वाक्-भाषा चिकित्सक द्वारा आवाज़-चिकित्सा दी जाती है।http://www.voiceinstituteofnewyork.com/silent-reflux-laryngopharyngeal-reflux-lpr-is-ubiquitous/ Laryngopharyngeal Reflux (“Silent Reflux”): The Basics The Voice Institute of New York Dr. Jamie Koufman www.voiceinstituteofnewyork.com en-US 2025-10-18
निदान
एल.पी.आर. के लक्षण अन्य कई गले या श्वसन रोगों से मिलते-जुलते हैं, इसलिए इसका निदान कठिन होता है। गले की जाँच (लैरिंगोस्कोपी) में कभी-कभी लालिमा, सूजन या छोटे-छोटे दाने (ग्रैनुलोमा) दिखाई देते हैं, परंतु ये संकेत अन्य सामान्य स्थितियों में भी पाए जा सकते हैं। कुछ मामलों में चिकित्सक अम्ल-नियंत्रक औषधियाँ (जैसे प्रोटॉन-पंप अवरोधक) देकर रोग की पुष्टि करते हैं। यदि रोगी को इनसे लाभ होता है तो एल.पी.आर. की संभावना मानी जाती है। हालांकि, यह तरीका हमेशा भरोसेमंद नहीं होता। सटीक निदान के लिए ग्रासनली या गले के ऊपरी भाग में अम्ल की मात्रा मापने की जाँच की जाती है। हाल के अध्ययनों में पेप्सिन (Pepsin) नामक पाचक एंजाइम को एल.पी.आर. का मुख्य संकेतक माना गया है। यह एंजाइम स्वरयंत्र की कोशिकाओं में पहुँचकर धीरे-धीरे क्षति पहुँचाता है और आवाज़ की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।https://search.worldcat.org/title/882106592 Reflux laryngitis and related disorders WorldCat.org search.worldcat.org en 2025-10-18
कैंसर से संबंध
हालाँकि धूम्रपान स्वरग्रसनी (Hypopharynx) के कैंसर का प्रमुख कारण है, परंतु शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि पित्त भाटा (Bile Reflux) भी इस भाग में कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। कमजोर अम्लीय पित्त कोशिकाओं के डी.एन.ए. को क्षति पहुँचाकर कैंसरजनक प्रक्रिया प्रारंभ कर सकता है।
इतिहास
स्वरयंत्र-ग्रसनी भाटा को एक स्वतंत्र रोग के रूप में 1970 और 1980 के दशक में पहचाना गया। 1930 के दशक में ही यह अनुमान लगाया गया था कि पाचन तंत्र के रोग और श्वसन रोगों के बीच कोई संबंध हो सकता है।
1968 में अम्ल से होने वाले स्वरयंत्रीय घाव (ulcers) और ग्रैनुलोमा का उल्लेख किया गया।
1979 में यह सिद्ध हुआ कि पेट की अम्लीय सामग्री का ऊपर लौटना (reflux) ही इन लक्षणों का कारण है। बाद में यह भी पाया गया कि भाटा-रोधी उपचार से इन लक्षणों में सुधार होता है।Lechien Jérôme R. Finck Camille Costa De Araujo Pedro Huet Kathy Delvaux Véronique Piccaluga Myriam Harmegnies Bernard Saussez Sven 2017-01 Voice outcomes of laryngopharyngeal reflux treatment: a systematic review of 1483 patients http://link.springer.com/10.1007/s00405-016-3984-7 European Archives of Oto-Rhino-Laryngology en 274 1 1–23 10.1007/s00405-016-3984-7 0937-4477
सन्दर्भ
श्रेणी: ग्रासनाली
श्रेणी: स्वरयंत्र संबंधी विकार