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आर्द्रा
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एक हिन्दू नक्षत्र आद्रा नामक तारे आद्रा तारा
300px|right|thumb|आद्रा
आर्द्रा भारतीय ज्योतिष में एक नक्षत्र है। संस्कृत भाषा से आए इस नाम का अर्थ होता है "नम"। आर्द्रा से सम्बन्धित हिंदू मिथक बृहस्पति की दूसरी पत्नी तराका के साथ है। तराका एक असुर है जिसे ब्रह्मा द्वारा अखंडनीयता का वरदान मिला हुआ है। आर्द्रा सताइस नक्षत्रों में से एक है।Harness Dennis M. The Nakshatras: The Lunar Mansions of Vedic Astrology 1999 लोट्स प्रेस Wisconsin 0-914955-83-7 23 http://books.google.co.in/books?id=-iAVEpTwwloC&lpg=PP1&pg=PA23#v=onepage&q&f=false 3 अक्तूबर 2012 https://web.archive.org/web/20121105135053/http://books.google.co.in/books?id=-iAVEpTwwloC&lpg=PP1&pg=PA23#v=onepage&q&f=false 5 नवंबर 2012 live आकाशमंडल में आर्द्रा नक्षत्र छटा है। यह राहू का नक्षत्र है व मिथुन राशि में आता है। आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहू है व इसकी दशा 18 वर्ष की होती हैं, लेकिन मिथनु राशि पर 5 माह 12 दिन से 18 वर्ष तक चंद्र की स्थितिनुसार दशा जन्म के समय भोगना पड़ती है।
इसके बाद ही ज्ञान के कारक गुरु की दशा लगती है, जो पूरे 16 वर्ष भोगना पड़ती है। किसी भी जातक का जन्म जिस नक्षत्र में होता है। उस नक्षत्र के स्वामी का प्रभाव उसके जीवन पर अवश्य देखा जाता है। आर्द्रा नक्षत्र व मिथुन राशि पर जन्में जातक को राहू व बुध का जीवन
भर प्रभाव रहेगा। वहीं गुरु का भी महत्त्व उसके जीवन में देखने को मिलेगा।
इस नक्षत्र में जन्में जातक चंचल स्वभाव के हँसमुख, अभिमानी, दुःख पाने वाले, बुरे विचारों वाले व्यसनी भी होते हैं। राहू की स्थितिनुसार फल भी मिलता है। मेष लग्न हो राहू लग्न में आर्द्रा नक्षत्र का हो तो ऐसा जातक राजनीति में पराक्रमी, चतुर चालक अपने विरोधियों को परास्त करने वाला, शत्रुहंता होता है। ऐसा जातक अत्यन्त कामुक होता है। वृषभ तथा मिथुन का राहू इस लग्न में वाणी से चतुर बनाएगा, शत्रुहंता भी होगा।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
नक्षत्र सूची
श्रेणी:नक्षत्र