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महिला सशक्तीकरण
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300px|thumb|right|सन् २०१७ के अन्तरराष्ट्रीय साहसी महिला पुरस्कार विजेताओं के साथ मिलेनिया ट्रम्प
महिला सशक्तीकरण से जुड़े सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और क़ानूनी मुद्दों पर संवेदनशीलता और सरोकार व्यक्त किया जाता है।http://www.care.org/newsroom/publications/whitepapers/woman_and_empowerment.pdf Women’s Empowerment 28 अगस्त 2017 https://web.archive.org/web/20120512210633/http://www.care.org/newsroom/publications/whitepapers/woman_and_empowerment.pdf 12 मई 2012 dead सशक्तीकरण की प्रक्रिया में समाज को पारंपरिक पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण के प्रति जागरूक किया जाता है, जिसने महिलाओं की स्थिति को सदैव कमतर माना है। वैश्विक स्तर पर नारीवादी आंदोलनों और यूएनडीपी आदि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने महिलाओं के सामाजिक समता, स्वतंत्रता और न्याय के राजनीतिक अधिकारों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।http://www.undp.org/content/undp/en/home/ourwork/womenempowerment/overview.html Women's Empowerment 28 अगस्त 2017 https://web.archive.org/web/20170810212018/http://www.undp.org/content/undp/en/home/ourwork/womenempowerment/overview.html 10 अगस्त 2017 dead महिला सशक्तीकरण, भौतिक या आध्यात्मिक, शारिरिक या मानसिक, सभी स्तर पर महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा कर उन्हें सशक्त बनाने की प्रक्रिया है।http://www.selfgrowth.com/articles/Articles_Women_Empowerment.html Definition: Women Empowerment 28 अगस्त 2017 https://web.archive.org/web/20170825144236/http://www.selfgrowth.com/articles/Articles_Women_Empowerment.html 25 अगस्त 2017 dead
महिला सशक्तीकरण क्या है?
महिला सशक्तीकरण को बेहद आसान शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है कि इससे महिलाएँ शक्तिशाली बनती है जिससे वह अपने जीवन से जुड़े सभी फ़ैसले स्वयं ले सकती है और परिवार और समाज में अच्छे से रह सकती है। समाज में उनके वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना महिला सशक्तीकरण है। इसमें ऐसी ताक़त है कि वह समाज और देश में बहुत कुछ बदल सके।
भारत में महिला सशक्तीकरण
भारत की आधी आबादी महिलाओं की है और विश्व बैंक की एक रिपॉर्ट के अनुसार, अगर महिला श्रम में योगदान दे तो भारत की विकास दर दहाई की संख्या में होगी। फिर भी यह दुर्भाग्य की बात है कि सिर्फ़ कुछ लोग महिला रोज़गार के बारे में बात करते हैं जबकि अधिकतर लोगों को युवाओं के बेरोज़गार होने की ज़्यादा चिंता है। हाल ही में प्रधानमंत्री की ‘आर्थिक सलाहकार परिषद’ की पहली बैठक में 10 ऐसे प्रमुख क्षेत्रों की चिह्नित किया गया जहाँ ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है। दुर्भाग्य की बात यह है कि महिलाओं का श्रम जनसंख्या में योगदान तेज़ी से कम हुआ है। यह लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। लेकिन फिर भी, महिला रोजगार को अलग श्रेणी में नहीं रखा गया है। नैशनल सांपल सर्वे (68वाँ राउंड) के अनुसार, 2011-12 में महिला सहभागिता दर 25.51% थी, जो कि ग्रामीण क्षेत्र में 24.8% और शहरी क्षेत्र में मात्र 14.7% थी। जब रोजगार की कमी है तो आप महिलाओं के लिए पुरुषों के समान कार्य अवसरों की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? एक पुरुष ज़्यादा समय तक काम कर सकता है, उसे मातृत्व अवकाश की ज़रूरत नहीं होती है और कहीं भी यात्रा करना उसके लिए आसान होता है। जबकि निर्माण कार्यों में महिलाओं के लिए पालना घर या शिशुओं के लिए पालन की सुविधा मुहैया कराना ज़रूरी होता है।
ऐसे कई कारण हैं, जिनसे भारत की महिला श्रमिक सहभागिता दर्ज में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है और यह दर दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के बाद सबसे कम है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश में जनसंख्या के अनुपात के अनुसार महिला रोज़गार ज़्यादा है। इन क्षेत्रों के पुरुष काम करने के लिए भारत आते हैं और उनके पीछे महिलाएँ अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए खेतों में काम करती है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महिलाएँ मात्र 17% का योगदान दे रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के अनुसार क्रिसटीन लगार्डे का कहना है कि ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएँ अगर श्रम में भागीदारी करे, तो भारत की जीडीपी 27% तक बढ़ सकती है।
महिला सशक्तीकरण के लिए दिए गए अधिकार
समान वेतन का अधिकार - समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, अगर बात वेतन या मज़दूरी की हो, तो लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता।
कार्य-स्थल में उत्पीड़न के ख़िलाफ़ क़ानून - यौन उत्पीड़न अधिनियम के तहत आपको वर्किंग प्लेस पर हुए यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराने का पूरा हक़ है। केंद्र सरकार ने भी महिला कर्मचारियों के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिसके तहत वर्किंग प्लेस पर यौन शोषण के शिकायत दर्ज होने पर महिलाओं को जाँच लंबित रहने तक 90 दिन का पैड लीव दी जाएगी।
कन्या भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ अधिकार - भारत के हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह एक महिला को उसके मूल अधिकार ‘जीने के अधिकार’ का अनुभव करने दें। गर्भाधान और प्रसव से पूर्व पहचान करने की तकनीक लिंग चयन पर रोक अधिनियम (पीसीपीएनडीटी) कन्या भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ अधिकार देता है।
संपत्ति पर अधिकार - हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला और पुरुष दोनों का बराबर हक़ है।
गरिमा और शालीनता के लिए अधिकार - किसी मामले में अगर आरोपित एक महिला है, तो उस पर की जाने वाली कोई भी जाँच-प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए।
महिला सशक्तीकरण - महिलाओं का पारिवारिक बंधनों से मुक्त होकर अपने और अपने देश के बारे में सोचने की क्षमता का विकास होना ही महिला सशक्तीकरण कहलाता है।
महिला श्रेष्ठता - समाज में महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखा जाना चाहिए, क्योंकि आज के समय में महिला हर क्षेत्र में आगे है, चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर खेल के क्षेत्र में।
इन्हें भी देखें
नारीवाद
भारतीय महिलाओं उद्देश्य तथा पार्संगिकता
महिला सशक्तीकरण
शिक्षा में छिपा है महिला सशक्तीकरण का रहस्य
आदिवासी महिला सशक्तीकरण योजना
सन्दर्भ
श्रेणी:नारीवाद
श्रेणी:सामाजिक न्याय और अधिकारिता