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पारसनाथ पहाड़
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पारसनाथ पहाड़ (अंग्रेजी: Parasnath Hill) झारखंड राज्य के गिरिडीह ज़िले में स्थित एक प्रमुख पर्वत है। यह जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है और इसे श्री समेत शिखरजी भी कहा जाता है। यह पहाड़ लगभग 1,365 मीटर (4,478 फीट) ऊँचा है और झारखंड का सबसे ऊँचा पर्वत माना जाता है।
परिचय
पारसनाथ पहाड़ जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से 20 के निर्वाण स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ सैकड़ों जैन मंदिर और तोरण द्वार बने हुए हैं। जैन धर्मावलंबी इस स्थान को मोक्षभूमि मानते हैं और प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन और पदयात्रा करने आते हैं।
इतिहास
परंपरा के अनुसार, यहाँ 20 जैन तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया था। मौर्य और गुप्त काल से लेकर मध्यकालीन शासकों तक ने इस क्षेत्र के संरक्षण में योगदान दिया। ब्रिटिश शासनकाल में भी यह पर्वत धार्मिक पर्यटन और तीर्थयात्रा के लिए प्रसिद्ध था।
धार्मिक महत्व
जैन धर्म में पारसनाथ पहाड़ का वही स्थान है जो हिंदुओं के लिए वाराणसी या बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए बोधगया का है। यहाँ के प्रमुख मंदिरों में पारसनाथ मंदिर, जलमंदिर, और गौतम स्वामी मंदिर शामिल हैं। हर साल कार्तिक और चैत्र माह में विशेष मेला और यात्रा आयोजित की जाती है।
पहुँच मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन – पारसनाथ स्टेशन (ग्रैंड कॉर्ड लाइन, हजारीबाग रोड)।
निकटतम हवाई अड्डा – राँची (लगभग 190 किमी दूर)।
गिरिडीह और धनबाद से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
स्थापत्य और प्राकृतिक सौंदर्य
पारसनाथ पहाड़ पर बने जैन मंदिर संगमरमर और पत्थरों की कलात्मक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं। चारों ओर हरियाली और वन क्षेत्र इस स्थान को प्राकृतिक दृष्टि से भी आकर्षक बनाते हैं। यहाँ की ऊँचाई और वातावरण तीर्थयात्रियों को अध्यात्म और शांति का अनुभव कराता है।
इन्होंने भी देखें
समेत शिखरजी
जैन धर्म
झारखंड के धार्मिक स्थल
संदर्भ
श्रेणी:झारखंड के पर्यटन स्थल
श्रेणी:जैन धर्म
श्रेणी:भारत के पर्वत
श्रेणी:जैन तीर्थ