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411 समाचार
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पाइथागोरस

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पाइथागोरस property raw P18 properties linked references P569 properties linked references linked P19 properties linked references edit linked P1477 properties linked references edit linked P2048 properties linked references edit linked P2048 properties linked references edit linked P27 properties linked references edit linked P69 properties linked references edit linked P108 properties linked references edit linked P25 properties linked references edit linked P22 properties linked references edit P570 properties linked references edit P20 properties linked references edit linked P172 properties linked references edit P102 properties references edit P1196 properties references edit P509 properties linked references edit linked P106 properties linked references edit linked P26 properties linked references edit linked P40 properties linked references edit linked P166 properties linked references edit linked P551 properties linked references edit linked P800 properties linked references edit linked P793 properties linked references edit linked P2218 properties linked references edit linked P140 property raw P109 properties linked references edit linked P856 properties linked references edit linked P7047 properties linked references edit linked P39 properties linked references edit linked P119 पाईथोगोरस (grc Πυθαγόρας ὁ Σάμιος प्राचीन यूनानी बहुज्ञ थे। उनका जन्म 580 और 572 ई॰पू॰ के बीच हुआ और मृत्यु 500 और 490 ई॰पू॰ के बीच हुई), या फ़ीसाग़ोरस, एक अयोनिओयन ग्रीक गणितज्ञ और दार्शनिक थे और पाईथोगोरियनवाद नामक धार्मिक आन्दोलन के संस्थापक थे। उन्हें अक्सर एक महान गणितज्ञ, रहस्यवादी और वैज्ञानिक के रूप में सम्मान दिया जाता है; हालाँकि कुछ लोग गणित और प्राकृतिक दर्शन में उनके योगदान की संभावनाओं पर सवाल उठाते हैं। हीरोडोट्स उन्हें "यूनानियों के बीच सबसे अधिक सक्षम दार्शनिक" मानते हैं। उनका नाम उन्हें पाइथिआ और अपोलो से जोड़ता है; एरिस्तिपस ने उनके नाम को यह कह कर स्पष्ट किया कि "वे पाइथियन (पाइथ-) से कम सच (एगोर-) नहीं बोलते थे," और लम्ब्लिकास एक कहानी बताते हैं कि पाइथिआ ने भविष्यवाणी की कि उनकी गर्भवती माँ एक बहुत ही सुन्दर, बुद्धिमान बच्चे को जन्म देगी जो मानव जाती के लिए बहुत ही लाभकारी होगा। (The Savisier-) Riedweg, Christoph Pythagoras: His Life, Teaching and Influence https://archive.org/details/pythagorashislif00ried Cornell University 2005 5–6, 59, 73 उन्हें मुख्यतः पाईथोगोरस की प्रमेय (Pythagorean theorem) के लिए जाना जाता है, जिसका नाम उनके नाम पर दिया गया है। पाइथोगोरस को "संख्या के जनक" के रूप में जाना जाता है, छठी शताब्दी ईसा पूर्व में धार्मिक शिक्षण और दर्शन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। पूर्व सुकराती काल के अन्य लोगों की तुलना में उनके कार्य ने कथा कहानियों को अधिक प्रभावित किया, उनके जीवन और शिक्षाओं के बारे में अधिक विश्वास के साथ कहा जा सकता है। हम जानते हैं कि पाइथोगोरस और उनके शिष्य मानते थे कि सब कुछ गणित से सम्बंधित है और संख्याओं में ही अंततः वास्तविकता है और गणित के माध्यम से हर चीज के बारे में भविष्यवाणी की जा सकती है तथा हर चीज को एक ताल बद्ध प्रतिरूप या चक्र के रूप में मापा जा सकता है। लम्बलीकस के अनुसार, पाइथोगोरस ने कहा कि "संख्या ही विचारों और रूपों का शासक है और देवताओं और राक्षसों का कारण है।" वो पहले आदमी थे जो अपने आप को एक दार्शनिक, या बुद्धि का प्रेमी कहते थे,सिसरौ, टुसकुलन डिसप्यूटेशन्स ५ .३ .८ -९ = हिराकलिदास पोंतिकस एफ आर.८८ वरली, डायोजीन्स लर्तियस १.१२, ८.८, लम्बलीकस वी पी ५८.बर्कार्ट ने इस प्राचीन परम्परा को बदलने की कोशिश की, लेकिन इसका बचाव सी जे दी वोगल के द्वारा किया गया, पाइथोगोरस और प्रारंभिक पाइथोगोरियन्वाद (१९६६), पीपी. ९७ -१०२ और सी.रीदवेग, पाइथोगोरस: उनका जीवन, शिक्षाएं और प्रभाव (२००५) पी ९२ और पाइथोगोरस के विचारों ने प्लेटो पर एक बहुत गहरा प्रभाव डाला। दुर्भाग्य से, पाइथोगोरस के बारे में बहुत कम तथ्य ज्ञात हैं, क्योंकि उन के लेखन में से बहुत कम ही बचे हैं। पाइथोगोरस की कई उपलब्धियां वास्तव में उनके सहयोगियों और उत्तराधिकारियों की उपलब्धियां हैं। जीवन पाईथोगोरस का जन्म सामोस (Samos) में हुआ, जो एशिया माइनर के किनारे पर, पूर्वी ईजियन में एक यूनानी द्वीप है। उनकी माँ पायथायस (समोस की निवासी) और पिता मनेसार्चस (टायर के एक फोनिसियन व्यापारी) थे। जब वे जवान थे तभी उन्होंने, अपने जन्म स्थान को छोड़ दिया और पोलिक्रेट्स की अत्याचारी सरकार से बच कर दक्षिणी इटलीमें क्रोटोन केलेब्रिया में चले गए। लम्ब्लिकस के अनुसार थेल्स उनकी क्षमताओं से बहुत अधिक प्रभावित था, उसने पाइथोगोरस को इजिप्त में मेम्फिस को चलने और वहाँ के पुजारियों के साथ अध्ययन करने की सलाह दी जो अपनी बुद्धि के लिए जाने जाते थे। वे फोनेशिया में टायर और बैब्लोस में शिष्य बन कर भी रहे। इजिप्ट में उन्होंने कुछ ज्यामितीय सिद्धांतों को सिखा जिससे प्रेरित होकर उन्होंने अंततः प्रमेय दी जो अब उनके नाम से जानी जाती है। यह संभव प्रेरणा बर्लिन पेपाइरस में एक असाधारण समस्या के रूप में प्रस्तुत है। समोस से क्रोटोन, केलेब्रिया, इटली, आने पर उन्होंने एक गुप्त धार्मिक समाज की स्थापना की जो प्रारंभिक ओर्फिक कल्ट से बहुत अधिक मिलती जुलती थी और संभवतः उससे प्रभावित भी थी। thumb|पाईथोगोरस की प्रतिमा, वेटिकन पाइथोगोरस ने क्रोटन के सांस्कृतिक जीवन में सुधर लाने की कोशिश की, नागरिकों को सदाचार का पालन करने के लिए प्रेरित किया और अपने चारों और एक अनुयायियों का समूह स्थापित कर लिया जो पाइथोइगोरियन कहलाते हैं। इस सांस्कृतिक केन्द्र के संचालन के नियम बहुत ही सख्त थे। उसने लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए सामान रूप से अपना विद्यालय खोला.जिन लोगों ने पाइथोगोरस के सामाज के अंदरूनी हिस्से में भाग लिए वे अपने आप को मेथमेटकोई कहते थे। वे स्कूल में ही रहते थे, उनकी अपनी कोई निजी संपत्ति नहीं थी, उन्हें मुख्य रूप से शाकाहारी भोजन खाना होता था, (बलि दिया जाने वाला मांस खाने की अनुमति थी) अन्य विद्यार्थी जो आस पास के क्षेत्रों में रहते थे उन्हें भी पाइथोगोरस के स्कूल में भाग लेने की अनुमति थी। उन्हें अकउसमेटीकोई के नाम से जाना जाता था और उन्हें मांस खाने और अपनी निजी सम्पति रखने की अनुमति थी। रिचर्ड ब्लेक्मोर ने अपनी पुस्तक दी ले मोनेस्ट्री (१७१४) में पाइथोगोरियनो के धार्मिक प्रेक्षणों को बताया, "यह इतिहास में दर्ज संन्यासी जीवन का पहला उदाहरण था। लम्ब्लिकास के अनुसार, पाइथोगोरस ने धार्मिक शिक्षण, सामान्य भोजन, व्यायाम, पठन और दार्शनिक अध्ययन से युक्त जीवन का अनुसरण किया। संगीत इस जीवन का एक आवश्यक आयोजन कारक था: शिष्य अपोलो के लिए नियमित रूप से मिल जुल कर भजन गाते थे; वे आत्मा या शरीर की बीमारी का इलाज करने के लिए वीणा का उपयोग करते थे; याद्दाश्त को बढ़ाने के लिए सोने से पहले और बाद में कविता पठन किया जाता था। फ्लेवियस जोजेफस, एपियन के विरुद्ध, यहूदी धर्म की रक्षा में ग्रीक दर्शनशास्त्र के खिलाफ कहा कि समयरना के हर्मिपस (Hermippus of Smyrna) के अनुसार पाइथोगोरस यहूदी विश्वासों से परिचित था, उसने उनमें से कुछ को अपने दर्शन में शामिल किया। जिंदगी के अंतिम चरण में उसके और उसके अनुयायियों के खिलाफ क्रोतों के एक कुलीन सैलों द्वारा रचित शाजिश की वजह से वह मेतापोंतुम भाग गया। वह अज्ञात कारणों से मेटापोंटम म में ९० साल की उम्र में मर गया। बर्ट्रेंड रसेल, ने पश्चिमी दर्शन के इतिहास, में बताया कि पाइथोगोरस का प्लेटो और अन्य लोगों पर इतना अधिक प्रभाव था कि वह सभी पश्चिमी दार्शनिकों में सबसे ज्यादा प्रभावी माना जाता था। ' पाइथोगोरियन Pythagoreans thumb|केंद्र में एक आदमी जो किताब लिए खडा है और संगीत सिखा रहा है, एथेंस के एक स्कूल में (The School of Athens)राफेल (Raphael) के द्वारा . The so-called Pythagoreans, who were the first to take up mathematics, not only advanced this subject, but saturated with it, they fancied that the principles of mathematics were the principles of all things. Aristotle Metaphysics 1-5 , cc. 350 BC यह संगठन कुछ मायनों में एक स्कूल, कुछ मायनों में एक भाईचारा और कुछ मायनों में एक मठ था। यह पाइथोगोरस के धार्मिक उपदेशों पर आधारित था और बहुत ही गुप्त था। सबसे पहले, स्कूल समाज की नैतिकता से बहुत अधिक सम्बंधित था। सदस्यों को नैतिकता के दृष्टिकोण के साथ जीना होता था, एक दूसरे से प्यार करना होता था, राजनीतिक मान्यताओं को बाँटना होता था, शांति का अनुसरण करना होता था और स्वयं को प्रकृति के गणित को समर्पित कर देना होता था। पाइथोगोरस के अनुयायी सामान्यतः "पैथोगोरियन्स "कहलाते थे। उन्हें सामान्यतः दार्शनिक गणितज्ञ कहा जाता है, जिनका अक्षीय ज्यामिति की शुरुआत पर एक प्रभाव था, जो इसके विकास के २०० सालों के बाद यूक्लिड (Euclid) के द्वारा दी एलिमेंट्स (The Elements) में लिखा गया। पाइथोगोरस ने शांति के एक नियम का प्रेक्षण किया जो एकेमाइथिया (echemythia) कहलाता था, इस नियम को तोड़ने पर मौत की सजा दी जाती थी। ऐसा इसलिए था क्योंकि पाइथोगोरस का मानना था कि एक व्यक्ति के शब्द आम तौर पर लापरवाही से युक्त होते हैं, जिससे उसकी गलत अभिव्यक्ति होती है और उनके अनुसार यदि किसी को इस बात पर संदेह है कि उसे क्या कहना चाहिए तो उसे हमेशा चुप रहना चाहिए। उनका एक और नियम था कि "किसी भी व्यक्ति कि एक परेशानी में मदद करनी चाहिए, उसे नीचे नहीं गिरने देना चाहिए, क्योंकि निष्क्रियता को प्रोत्साहित करना एक बहुत बड़ा पाप है।" और वे कहते थे कि "अपने घर से निकल जाने के बाद वापिस मत जाओ, क्योकि फुरीस आपके साथ होंगे," यह उन्हें याद दिलाता था कि सब कुछ सीखे बिना बहुत कम सीखने से अच्छा है सृष्टि, भगवान और गणित के बारे में, सच्चाई को सीखना (दी सेक्रेट टीचींग्स ऑफ आल एजेस मेनली पी हाल के द्वारा)। पाइथोगोरस की जीवनी पोरफायरी (Porphyry) में (पाइथोगोरस के समय के सात शताब्दियों बाद लिखी गयी), कहा गया कि "यह शांति कोई साधारण किस्म की शांति नहीं थी। "पाइथोगोरियन्स एक आंतरिक सर्कल मेथमेटीकोई ("गणितज्ञ ") और एक बाहरी सर्कल अकउसमेटीकोई ("श्रोता") में विभाजित थे। पोरफायरी में लिखा गया कि मेथमेटीकोईइस ज्ञान को अधिक विस्तार पूर्वक सीखते थे और अकउसमेटीकोई बिना किसी सटीक प्रदर्शनी के पाइथोगोरस की लेखनी के केवल सारांश शीर्षकों को सुनते थे।लम्ब्लिकास (Iamblichus) के अनुसार अकउसमेटीकोई आमफ़हम (exoteric) शिष्य थे जो पाइथोगोरस के व्याख्यानों को एक पर्दे के बाहर से सुनते थे।अकउसमेटीकोई को पाइथोगोरस को देखने की इजाजत नहीं थी और उन्हें पंथ के अंदरूनी रहस्य नहीं सिखाये जाते थे। इसके बजाय उन्हें गुप्त तरीके से व्यवहार और नैतिकता सिखाई जाती थी, गुप्त अर्थों से युक्त संक्षिप्त बातें बताई जाती थी। अकउसमेटीकोईने मेथमेटीकोईको असली पाइथोगोरियन्स माना लेकिन इसका विपरीत नहीं था।साइक्लोन (Cylon) के कोहोर्ट, एक क्रोधी शिष्य के द्वारा कई मेथमेटीकोई की हत्या के बाद, दोनों समूह एक दुसरे से पूरी तरह से अलग हो गए, पाइथोगोरस की पत्नी थेनो (Theano) और उनकी दो बेटियाँ मेथमेटीकोईका नेत्रित्व कर रहीं थीं। थेनो एक ओर्फिक अनुयायी की बेटी थी, वह अपने आप में एक गणितज्ञ थी। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने भी गणित, भौतिक विज्ञान, चिकित्सा और बाल मनोविज्ञान पर कई पुस्तकें लिखीं, हालाँकि उनके लेखन में से कुछ नहीं बचा है। उनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य है गोल्डन मीन (golden mean) के दार्शनिक सिद्धांत पर एक पुस्तक ऐसे समय में जब महिलाओं को उनके पति की संपत्ति माना जाता था और उन्हें केवल अपने पति का घर संभालना होता था, पाइथोगोरस ने महिलाओं को काम करने के लिए बराबर दर्जा दिया। Women in Mathematics Lynn M. Osen MIT Press 1975 9780262650090 http://books.google.com/books?id=81kQ9VtTal4C&pg=PA17&dq=Theano+golden-mean&ei=jTJhSaDwJIbokATf7tD-BA पाइथोगोरस के समाज में कई रोक थीं। जैसे एक क्रोसबार पर कदम नहीं रखा जाये और फलियाँ नहीं खायी जाएँ। ये नियम पुराने अंधविश्वास (superstition) थे, जैसे "एक सीढ़ी के नीचे चलना दुर्भाग्य पूर्ण होता है।"यहाँ तक कि प्राचीन समय में भी पाइथोगोरस को बदनाम करने के लिए मिस्टिकोस लोगोस (mystikos logos)("रहस्यमय भाषण") नामक अपमानजनक उपाधि दी गयी। फलियों पर रोक फेविज्म (favism) से सम्बंधित हो सकती है जो भूमध्य क्षेत्र के आस पास व्यापक रूप से फैला है। यहाँ मुख्य बिंदु है अकउसमाटा अर्थात "नियम", ताकि अन्धविश्वासी निषेध प्राथमिक रूप से अकउसमेटीकोईपर लागू होते थे और अधिकांश नियम पाइथोगोरस की मृत्यु के बाद आये और मेथमेटीकोईसे बिलकुल मुक्त थे। जो तार्किक रूप से पाइथोगोरस की परम्परा के वास्तविक संरक्षक हैं। मेथमेटीकोईने अकउसमेटीकोईकी तुलना में अंदर की समझ पर अधिक जोर दिया। यहाँ तक कि कुछ नियमों और पूजा पद्धतियों के विस्तार पर भी बल दिया। मेथमेटीकोई के लिए पाइथोगोरियन होने का मतलब है एक जन्मजात गुणवत्ता और आंतरिक समझ की उपस्थिति।अकउसमाटा और -के साथ निपटने का एक और तरीका भी था; उनके प्रतीक कथात्मक चित्रण द्वारा। हमारे पास इसके कुछ उदाहरण हैं, एक है उनकी अरस्तू (Aristotle) की व्याख्या: " एक संतुलन पर कदम मत रखो', अर्थात लालची मत बनो; 'आग पर तलवार से प्रहार मत करो", अर्थात एक क्रोधित व्यक्ति से साथ तीखे शब्दों में बात मत करो, "दिल को मत खाओ " अर्थात अपने आप को दुःख में मत जकड लो आदि। हमारे पास पाँचवीं सदी ईसा पूर्व तक के पाइथोगोरियन सजीव चित्रण के सबूत हैं, इसका मतलब है कि ऐसी अजीब बातें पहेली के रूप में कही गयी। पाइथोगोरियन को उनकी आत्माओं की स्थानांतरगमन के सिद्धांत के लिए भी जाना जाता है और साथ ही उनका सिद्धांत कि संख्या में चीजों की वास्तविक प्रकृति है। उन्होंने शुद्धिकरण संस्कारों को अपनाया और जीने के भिन्न नियमों को विकसित किया, वे ऐसा मानते थे कि ये नियम देवताओं के बीच उन्हें एक उच्च पद को प्राप्त करने के लिए सक्षम बनायेंगे। उनके ज्यादातर रहस्यवाद आत्मा को ओर्फिक (Orphic) परम्परा से अभिन्न रखते हुए प्रतीत होते हैं। ओर्फिक्स ने कई परिशोधक संस्कारों को अपनाया और साथ ही अंडरवर्ल्ड में विभिन्न विकास संस्कारों को अपनाया। पाइथोगोरस सिरोस के फेरेसीडस (Pherecydes of Syros) से भी निकट रूप से सम्बंधित है, एक प्राचीन टिप्पणीकार व्यक्ति जो आत्माओं के स्थानांतरगमन की शिक्षा देने वाले पहले ग्रीक माने जाते हैं। प्राचीन टिप्पणीकार मानते हैं कि फेरेसीडस पाइथोगोरस का सबसे अंतरंग शिक्षक था। फेरेसीडस ने पेंटा मईकोस (पाँच गुप्त गुहएं) के शब्दों में आत्मा के बारे में शिक्षा दी और-; पेंटाग्राम के पाइथोगोरियन उपयोग की सबसे संभावित उत्पत्ति, उनके द्वारा सदस्यों के बीच पहचान के प्रतीक के रूप में प्रयुक्त की जाती थी और आंतरिक स्वास्थ्य के एक प्रतीक के रूप में (युजेइया ) प्रयुक्त की जाती थी। संगीत के सिद्धांत और जांच पाई थोगोरस संगीत में बहुत अधिक रूचि लेते थे, अतः उनके अनुयायी भी संगीत में रूचि रखते थे। पाइथोगोरस एक संगीतज्ञ और गणितज्ञ थे। पाइथोगोरस अपने समय के संगीत में सुधार लाना चाहते थे, उनका मानना था कि इस संगीत में पर्याप्त सामंजस्य नहीं है, यह बहुत ही व्यस्त रखने वाला था। पौराणिक कथा के अनुसार, पाइथोगोरस ने खोजा कि संगीत के नोट को गणितीय समीकरणों में अनुवाद किया जा सकता है, यह तब हुआ जब वह एक दिन एक काम कर रहे लोहार के पास से हो कर निकला और उसने सोचा कि उनकी निहाई की चोट से उत्पन्न होने वाली आवाज सुंदर और सामंजस्य पूर्ण थी और उसने यह निर्धारित कर लिया कि जो भी वैज्ञानिक नियम इसका कारण है वह अवश्य ही गणितीय होना चाहिए और इसे संगीत पर लागू किया जा सकता है। वह लोहार के पास गया और उसके औजारों को देख कर यह पता लगाने की कोशिश की कि यह कैसे हुआ। उसने पाया कि निहाईयां (anvil) एक दूसरे के साधारण अनुपात में थीं। एक पहली के आधे आकार की थी और दूसरी आकार की २ /३ थी और इसी प्रकार से था। (देखिए Pythagorean ट्यूनिंग (Pythagorean tuning).) पाइथोगोरस ने संख्या के सिद्धांत को विस्तारपूर्वक स्पष्ट किया, जिसका सही अर्थ आज भी विद्वानों के बीच बहस का विषय बना हुआ है। पाइथोगोरस "गोलों की संततता " (harmony of the spheres) पर विश्वास करता था, उनका मानना था कि ग्रह और तारे गणितीय समीकरणों के अनुसार गति करते हैं, इसी प्रकार की कुछ समानता संगीत के स्वरों में पाई जाती है और इससे एक मधुर संगीत का उत्पादन होता है।क्रिस्टोफ रीडवेग, पाइथोगोरस: उसका जीवन, शिक्षाएं और प्रभाव, कार्नेल: कार्नेल विश्वविद्यालय प्रेस, २००५ Anaximander Pherecydes of Syros Hermodamas of Samos Thales Ameinias Bathyllus Brontinus Calliphon Cercops Echecrates Empedocles Eurytus Hippasus Leon Lysis of Tarentum Milon, whose house was used as a Pythagorean meeting place Parmeniscus Petron Philolaus of Croton Theano, Pythagoras' Wife/Daughter of Milon Xenophilus of Chaldice Zalmoxis, प्रभाव thumb|पाइथोगोरस की प्रमेय ; आधारों (अ और ब) पर दो वर्गों के क्षेत्रफलों का योग विकर्ण (स ) पर वर्ग के क्षेत्रफल के बराबर होता है। चौथी सदी इसवी से, पाइथोगोरस को पाइथोगोरस की प्रमेय (Pythagorean theorem) की खोज का श्रेय दिया जाता है, ज्यामिति में एक प्रमेय जो स्थापित करती है कि एक समकोण त्रिभुज में विकर्ण स (समकोण के सामने वाली भुजा) का वर्ग अन्य दो भुजाओं ब और अ के वर्ग के योग के बराबर होता है। अर्थात a² + b² = c². हालाँकि वह प्रमेय जो अब उनके नाम से जानी जाती है, पहले इसे बेबिलोनियों (Babylonians) और भारतीयों के द्वारा काम में लिया गया। अक्सर कहा जाता है कि उन्होंने या उनके विद्यार्थियों ने इसके पहले प्रमाण दिए। हालाँकि इस बात पर दबाव डाला जाना चाहिए कि जिस तरीके से बेबिलोनियों ने पाइथोगोरस की संख्याओं को संभाला उससे पता चलता है कि वे जानते थे कि यह सिद्धांत सामान्यतः सही साबित होता है और वे कुछ ऐसे प्रमाणों के बारे में भी जानते थे जिन्हें अब तक (अब भी बड़े पैमाने पर अप्रकाशित) क्युनीरूप (cuneiform) स्रोतोंकेवल ब्रिटिश संग्रहालय (British Museum) में ही लगभग 100000 अप्रकाशित क्युनीरूप स्रोत हैं। पाइथोगोरस की प्रमेय के प्रमाण के बेबीलोनिय ज्ञान की चर्चा जे होइराप के द्वारा की गयी, पाइथोगोरस का "नियम" और "प्रमेय" - बेबीलोनिय और यूनानी गणितज्ञ के बीच सम्बन्ध का प्रतिबिम्ब :जे रेंगर (रेड): बेबीलोन Focus mesopotamischer Geschichte, Wiege früher Gelehrsamkeit, Mythos in der Moderne (१९९९). में नहीं खोजा गया है। उनके स्कूल की गुप्त प्रकृति की वजह से और इसके विद्यार्थियों के द्वारा सब कुछ अपने शिक्षकों को अर्पित कर देने की वजह से, इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि पाइथोगोरस ने इस प्रमेय को साबित करने के लिए इस पर खुद काम किया। उस मामले के लिए, इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि उन्होंने किसी भी गणितीय या परा गणितीय समस्याओं पर काम किया। कुछ लोग मानते हैं कि यह पाइथोगोरस की मृत्यु के दो सदियों के बाद प्लेटो के अनुयायियों के द्वारा सावधानीपूर्वक निर्मित एक मिथक है। मुख्यतः प्लेटो की परा भौतिकी के मामले को आध्यात्मिक ठहराने के लिए, जो उनके द्वारा पाइथोगोरस को समर्पित विचारों का साथ ठीक प्रकार से काम करते थे। यह अध्यारोपण सदियों से चला आ रहा है और आधुनिक समय से भी जुडाक्रिस्टोफ रीडवेग से, पाइथोगोरस: उसका जीवन, शिक्षाएं और प्रभाव, कार्नेल: कार्नेल विश्वविद्यालय प्रेस, २००५ : ""पाइथोगोरस और उसकी शिक्षाओं को प्लेटो के दर्शन शास्त्र में नहीं लिखा गया है और रोमन साम्राज्य के काल में इस "हस्त रेखा विशेषज्ञ" ने प्लेटो वादियों के बीच इस चुनोतियों को प्राप्त किया। इसे मानना बहुत कठिन होगा कि मध्य काल और वर्तमान समय के आधुनिक विद्वान सामोस से इतने आकर्षक करिश्माई आंकडे प्राप्त करेंगे। वास्तव में, एक नियम के रूप में यह पाइथोगोरस के वर्णन का नव पाइथोगोरसवाद और नव प्लेटोवाद के द्वारा प्रतिम्बिबिकरण था जिसने उस विचार का निर्धारण किया जिसे पाइथोगोरियन्स सदियों से अनुसरण कर रहे थे। हुआ है। पाइथोगोरस के नाम का इस प्रमेय से सम्बन्ध स्थापित करने का सबसे पहला उल्लेख उनकी मृत्यु के पाँच सदियों के बाद सिसरौ (Cicero) और प्लूटार्क (Plutarch) के लेखन में मिलता है। आज पाइथोगोरस को उसके अनुयायी ग्रीक प्लेटो के साथ अहल अल तौहीद (Ahl al-Tawhid)या ड्रुज (Druze) विश्वास के द्वारा एक भक्त के रूप में प्रतिष्ठित किया जाता है, लेकिन पाइथोगोरस के आलोचक भी थे, जैसे हेराक्लीटस (Heraclitus) जिन्होंने कहा कि "ज्यादा सीख पढ़ लेने से बुद्धि नहीं आती है; अन्यथा यह हेसिओड (Hesiod) और पाइथोगोरस को और फिर से जेनोफेंस (Xenophanes) और हेकाटेयस (Hecataeus) को सिखाया गया।दिओग L. ix.१ (ऍफ़ आर . ४० वोर्सोक्रातिकेर में, आइ 3, पी.८६ १ -३) धर्म और विज्ञान thumbnail पाइथोगोरस का दृष्टिकोण धार्मिक और वैज्ञानिक था, उनकी नजर में विज्ञान और धर्म एक दुसरे से सम्बंधित हैं। धार्मिक रूप से पाइथोगोरस मेटेम्पसाइकोसिस (metempsychosis) के अनुयायी थे। वे स्थानांतर आगमन या आत्मा के पुनर् जन्म में विश्वास करते थे, उनका मानना था कि आत्मा जब तक सदाचारी नहीं हो जाती तब तक वह मानव, पशु, या सब्जियों में बार बार अवतार लेती रहती है। उनका पुनर्जन्म का विचार प्राचीन यूनानी धर्म से प्रभावित था। वह पहले व्यक्ति थे जिसने यह प्रस्तावित किया की विचार प्रक्रिया और आत्मा मष्तिष्क में स्थित है दिल में नहीं। उन्हें खुद विस्तार से चार जीवन याद थे जैसा कि वे दावा करते थे कि उन्होंने जिए हैं और वे अपने मृत मित्र के रोने की आवाज को एक कुत्ते के भौंकने के रूप में सुनते थे। पाइथोगोरस का एक विश्वास यह था कि जीवन का सार संख्या है। इस प्रकार से, सभी चीजों की स्थिरता ब्रह्माण्ड को बनाती है। स्वास्थ्य जैसी चीजें तत्वों के एक स्थिर अनुपात पर निर्भर करती हैं; किसी भी चीज का बहुत कम या बहुत ज्यादा होना एक असंतुलन का कारण होता है जो किसी भी जीव को अस्वस्थ बना सकता है। वे विचारों की तुलना संख्या की गणनाओं से करते थे। जब दर्शन लोक सिद्धांतों से जुड़ जाता है तो वह विश्वास बन जाता है, कि जीवन के सार का ज्ञान संख्याओं के रूप में खोजा जा सकता है। यदि इसे एक कदम आगे ले जाया जाये कहा जा सकता है कि क्योंकि गणित एक अनदेखा सार है, जीवन का सार एक अनदेखा लक्षण है जिसका गणित के अध्ययन के द्वारा सामना किया जा सकता है। साहित्यिक कार्य पाइथोगोरस के कोई भी लेखन नहीं मिलते हैं, हालाँकि उनके नाम के साथ कुछ जाली लेखन जुड़े हैं और इनमें से वर्तमान में भी पाए जाते हैं; ये पुरातनता (antiquity) में प्रसारित हुए हैं। जटिल प्राचीन स्रोत जैसे अरस्तू (Aristotle) और एरिस्टोजेनस (Aristoxenus) इन लेखनों पर संदेह प्रस्तुत करते हैं। प्राचीन पाइथोगोरियन्स ने आमतौर पर अपने स्वामी के वाक्यांशों को मुहावरे औटोस एफे के साथ स्पष्ट किया ("उन्होंने खुद स्पष्ट किया") और अपने शिक्षण की मूलतः मौखिक प्रकृति पर बल दिया। पाइथोगोरस ओविड (Ovid) के मेटामोर्फोसेस (Metamorphoses)की आखिरी किताब के चरित्र के रूप में, जहाँ ओविड ने उसके दार्शनिक दृष्टिकोण पर व्याख्या की है। पाइथोगोरस को यह कहते हुए उद्धृत किया गया है, "कोई भी आदमी मुक्त नहीं है जो अपने आप को नियंत्रित नहीं कर सकता है।" लोर पाइथोगोरस का एक अन्य पक्ष भी है, जिसमें वह अपने ऐतिहासिक व्यक्तित्व के आस पास विस्तृत किंवदंतियों का एक विषय बन गए। अरस्तू ने पाइथोगोरस को एक अलौकिक व्यक्ति के रूप में वर्णित किया है जो आश्चर्य जनक कार्य करता है, उन्हें एक गोल्डन थाई के रूप में ऐसे पहलू के रूप में वर्णित किया गया है, जो देवत्व की निशानी है। अरस्तू और अन्य लोगों के अनुसार, कुछ प्राचीन लोग मानते थे कि उनमें अन्तरिक्ष और समय से होकर यात्रा करने की क्षमता है और जानवरों और पोधों के साथ बात करने की क्षमता है।हफमेन, कार्ल.पाईथोगोरस (दर्शन पर स्टेनफोर्ड विश्वकोश)ब्र्युअर्स डिक्शनरी ऑफ फ्रेस एंड फेबल (Brewer's Dictionary of Phrase and Fable) की प्राविष्टि से एक उद्धरण है "गोल्डन थाई"ऐसा कहा जाता था कि पाइथोगोरस के पास एक गोल्डन थाई था, जिसे उसने एबेरिस को दर्शाया, जो उत्तरदेशवासी पुजारी था और उसने ओलिंपिक खेलों में प्रदर्शन किया।ब्र्युअर, ई कोबहेम, "ब्र्युअर्स डिक्शनरी ऑफ फ्रेस एंड फेबल एक अन्य कथा जो ब्र्युअर के शब्दकोश से ली गयी है। वह उनके चन्द्रमा के बारे में वर्णन को दर्शाती है। पाइथोगोरस ने माना की वह चन्द्रमा पर लिख सकता था। उनकी योजना थी कि रक्त में एक दर्पण पर लिखा जाये और इसे चाँद के सामने रख दिया जाये और जब चाँद की डिस्क पर शिलालेख प्रतिबिंबित होगा.ब्र्युअर, ई कोबहेम, "ब्र्युअर्स डिक्शनरी ऑफ फ्रेस एंड फेबल अन्य उपलब्धियां मई 2008 right|thumb|150px|संख्या अन-अनुपातिक है पाइथोगोरस की एक मुख्य उपलब्धि थी एक खोज, कि संगीत १ से ४ तक संख्याओं के अनुपातिक अन्तराल पर आधारित होता है। उसका विश्वास था कि संख्या प्रणाली और इसीलिए ब्रह्मांड प्रणाली, इन संख्याओं के योग पर आधारित होती है: दस देवताओं के बजाय दस या टेट्राकटिस ऑफ दी डेकड़ (Tetrachtys of the Decad) के द्वारा पाइथोगोरस की कसम। विषम संख्याएँ नर थे और सम संख्याए मादा थीं। उसने ३ से ५ ज्यामितीय ठोसों से निर्मित, गणितीय अनुपातों के सिद्धांतों की खोज की। उसके क्रम के एक सदस्य हिप्पासस (Hippasos) ने अन अनुपातिक संख्या (irrational numbers) की भी खोज की, लेकिन यह विचार पाइथोगोरस के लिए सोचने योग्य नहीं था और पौराणिक कथा के अनुसार हिप्पासस को मार डाला गया था। पाइथोगोरस या (पाइथोगोरियन्स) ने वर्ग संख्याओं की भी खोज की। उन्होंने पाया कि उदाहरण के लिए यदि चार पत्थर लेकर उन्हें एक वर्ग के रूप में व्यवस्थित कर दिया जाये, तो न केवल प्रत्येक भुजा दूसरी भुजा के बराबर होती है, बल्कि यदि दो भुजाओं को एक दूसरे से गुणा किया जाये तो, वे वर्ग की व्यवस्था में पत्थरों की कुल संख्या के योग के बराबर होती हैं। इसीलिए इसे "वर्ग मूल" कहा जाता है।एलिओटो, एंथोनी. ऐ हिस्ट्री ऑफ वेस्टर्न साइंस -दूसरा संस्करण न्यू यॉर्क: प्रेन्टिस हॉल, १९९२ . पी.३९ -४२ वे ये सोचने वाले पहले व्यक्तियों में से एक थे, कि पृथ्वी गोल है और सभी ग्रहों का एक अक्ष है और सभी ग्रह एक केन्द्रीय बिंदु के चारों और घूमते हैं। उन्होंने कहा कि यह केन्द्रीय बिंदु पृथ्वी है, लेकिन बाद में कहा गया कि यह केन्द्रीय बिंदु "अग्नि" है जिसे उन्होंने कभी भी सूर्य के रूप में नहीं पहचाना। उन्होंने यह भी कहा कि चाँद एक अन्य ग्रह है जिसे उन्होंने "काउंटर अर्थ "कहा- बाद में उन्होंने सीमित-असीमित (Limited-Unlimited) में विश्वास जताया। पाईथोगोरस से प्रभावित समूह प्लेटो पर प्रभाव पाइथोगोरस या एक व्यापक अर्थ में पाइथोगोरियन्स ने प्लेटो के काम पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। आर एम हरे (R. M. Hare) के अनुसार उनके प्रभाव में तीन बिंदु शामिल थे: अ) प्लेटोनिक गणराज्य (platonic Republic)"एक समान सोच वाले लोगों के एक संगठित समुदाय " के विचारों से सम्बंधित हो सकता है, जैसा कि पाइथोगोरस ने क्रोटोन में स्थापित किया। ब) इस बात के प्रमाण हैं कि संभवतः प्लेटो ने पाइथोगोरस से यह विचार लिया कि गणित और सामान्य भाषा, अमूर्त सोच दार्शनिक सोच के लिए एक सुरक्षित आधार है, साथ ही विज्ञान और नैतिकता (morals) में पर्याप्त थीसिस के लिए भी या आधार है। स) प्लेटो और पाइथोगोरस ने "आत्मा (soul) और भौतिक दुनिया (material world) में इसके स्थान के लिए रहस्यवादी दृष्टिकोण" में सामान विचार प्रस्तुत किया। ऐसा लगता है कि दोनों ओर्फिज्म (Orphism) से प्रभावित थे।आर एम हरे, सी सी डबल्यू टेलर में प्लेटो, आर एम हरे और जोनाथन बर्न्स, यूनानी दार्शनिक, सुकरात, प्लेटो और अरस्तू, ऑक्सफोर्ड :ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, १९९९ (१९८२), १०३ -१८९, यहाँ ११७ -९ प्लेटो के विचार स्पष्ट रूप से अर्कितास (Archytas) के काम से प्रभावित हुए, जो तीसरी पीढी का एक वास्तविक पाइथोगोरियन था, उसने ज्यामिति में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो यूक्लिड (Euclid) के तत्वोंकी आठवीं पुस्तक में प्रतिबिंबित होता है। रोमन प्रभाव प्राचीन रोम और नूमा पोम्पिलिअस (Numa Pompilius) की किवदंतियों में रोम का दूसरा राजा, पाइथोगोरस के अधीन अध्ययन करता था, ऐसा कहा जाता है। इसकी सम्भावना नहीं है क्योंकि दो जीवों के लिए सामान रूप से स्वीकृत तारीखें अध्यारोपित नहीं करती हैं। गुप्त समूहों पर प्रभाव पाइथोगोरस ने एक गुप्त समाज की स्थापना की जो पाइथोगोरियन ब्रदरहुड कहलाती है यह गणित के अध्ययन को समर्पित थी। इसका भावी गुप्त परम्पराओं पर गहरा प्रभाव पड़ा, जैसे रोसीक्रुसीएनिज्म (Rosicrucianism) और फ्रीमेसनरी (Freemasonry), ये दोनों ऐसे समूह गणित के अध्ययन को समर्पित थे, दोनों का दावा था कि वे पाइथोगोरियन ब्रदरहुड से विकसित हुए हैं। पाइथोगोरस के गणित के रहस्यमयी और गुप्त गुणों की चर्चा मेनली पी हाल के अध्याय दी सेक्रेट टीचिंग्स ऑफ आल एजेस '' में की गयी है जिसका शीर्षक है "पाइथोगोरियन मेथमेटिक्स "। पाइथोगोरस के सिद्धांत ने बाद में संख्या विज्ञान (numerology) पर गहरा प्रभाव डाला, जो प्राचीन दुनिया में पूरे मध्य पूर्व में बहुत अधिक लोकप्रिय हुआ। 8 वीं सदी के मुस्लिम (Muslim)कीमियागर (alchemist)जाबिर इब्न हयान (Jabir ibn Hayyan) ने व्यापक संख्या विज्ञान के आधार पर काम किया, वह पाइथोगोरस के सिद्धांत से बहुत अधिक प्रभावित था। इन्हें भी देखें तायना के अपोलोनियास (Apollonius of Tyana) हिप्पासस (Hippasus) पाईथोगोरियनवाद (Pythagoreanism) पाईथोगोरियन कोमा (Pythagorean comma) पाईथोगोरियन कप (Pythagorean cup) पाईथोगोरस की प्रमेय (Pythagorean theorem) पवित्र ज्यामिति (Sacred geometry) हेलियो पोलिस-पाईथोगोरस कनेक्शन (Heliopolis-Pythagoras connection) पाईथोगोरस की वीणा (Lute of Pythagoras) पाईथोगोरस वृक्ष (Pythagoras tree) हार्मोनी ऑफ़ दी स्फेयर्स (Harmony of the spheres) सन्दर्भ 3 स्रोत पाइथोगोरस के बारे में कोई प्राथमिक स्रोत नहीं बचे हैं। यह लेख पाइथोगोरस की शास्त्रीय व्याख्या करता है जो बाद के लेखकों के लेखों पर आधारित है। चूँकि बहुत सी जानकारी जो उपलब्ध है वह पाइथोगोरस के जीवन के सदियों के बाद लिखी गयी, उनकी सटीकता अनिश्चित है। ऐसा माना जाता है कि प्रारंभिक पाइथोगोरियन का गणितीय महत्त्व अतिशयोक्तिपूर्ण है (उनका हार्मोनिक्स का सिद्धांत अपवाद है) और पाइथोगोरियन ओर्फिक (Orphic) यानि गुप्त पंथी थे। उनका संख्या विज्ञान (numerology) पर प्रभाव था, बाद में उनमें से ही गंभीर गणितज्ञों का जन्म हुआ जब ज्यामीति पूरे ग्रीस में लोकप्रिय हो गयी।https://sites.google.com/view/pythagorus-numerology/ पाइथोगोरस और संख्या विज्ञान Google Sites Astro Numerology Horaz hi 30 सितम्बर 2025 क्लासिकल द्वितीयक स्रोत केवल कुछ ही प्रासंगिक स्रोत पाइथोगोरस और पाइथोगोरियन्स से सम्बन्ध रखते हैं, अधिकांश विभिन्न भाषाओँ में उपलब्ध हैं। अन्य लेख आमतौर पर इन कार्यों में जानकारी के आधार पर निर्मित हैं। डायोजीन्स लर्तियस (Diogenes Laertius), वेती फिलोसोफोरम VIII (Vitae philosophorum VIII)(लाइव्स ऑफ एमिनेंट फिलोसोफर्स ), सी २०० ईस्वी जो लोस्ट वर्क (lost work)सक्सेशन ऑफ फिलोसोफ़र्स (Successions of Philosophers)एलेक्ज़ेंडर पोलीहिस्टर (Alexander Polyhistor) के द्वारा) और -;"पाइथोगोरस", सी डी योंज के द्वारा अनुवाद https://web.archive.org/web/20120809064058/http://classicpersuasion.org/pw/diogenes/dlpythagoras.htm 9 अगस्त 2012 पोरफायरी (Porphyry), विटा पाइथोगोरा (पाइथोगोरस का जीवन ), सी .२७० ईस्वी लम्बलीकस (Iamblichus), डी विटा पाइथागोरिका (पाइथोगोरयन जीवन पर ) सी .३०० ईस्वी एप्युलियस (Apuleius) भी पाइथोगोरस के बारे में एपोलोजिया में लिखते हैं, जिसमें उनकी कहानी भी शामिल है जो जोरास्टर के बेबिलोनी शिष्य के द्वारा सिखाई गयी। १५० ईस्वी एलेक्जेंड्रिया के हिरोक्लीस (Hierocles of Alexandria) गोल्डन वर्सेस ऑफ पाइथोगोरस , कोंकोर्ड ग्रोव पी आर, १९८३ सी ४३० ई. आधुनिक द्वितीयक स्रोत बुर्कर्ट, वाल्टर (Burkert, Walter).प्राचीन पाइथोगोरियन वाद में विद्या और विज्ञानहार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, १ जून, १९७२ .आई एस बी एन ० -६७४ -५३९१८ -४ बुर्न्येट, एम एफ (Burnyeat, M. F.)" दी ट्रुथ अबाउट पाईथोगोरस .लंदन की पुस्तकों की समीक्षा , २२ फ़रवरी २००७ . गुथीरे, डब्लेयु के यूनानी दर्शन का एक इतिहास : प्राचीन प्रेसोक्रिटिक्स और पाइथोगोरियन्स कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, १९७९ आई एस बी एन ० -५२१ -२९४२० -७ किंग्सले, पीटर (Kingsley, Peter). प्राचीन दार्शनिक, रहस्य और जादू: एम्पिदोक्लेस और पाइथोगोरस की परम्पराएँ. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 1995. हरमन, अर्नोल्ड (Hermann, Arnold). टू थिंक लाइक गोड : पाइथोगोरस और पर्मेनिदेस -डी ओरिजिन ऑफ फिलोसफी पर्मेनिदेस प्रकाशन, २००५ आईएसबीएन ९७८ -१ -९३०९७२ -० ० -१ ओ'मेरा, डोमिनिक जे. पाइथोगोरस रिवाइव्द ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, १९८९ आई एस बी एन ० -१९ -८२३९१३ -० (पेपर्बेक), आई एस बी एन ० -१९ -८२४४८५ -१ (हार्ड कवर) बाहरी सम्बन्ध "अदर लाइव्स "एम एफ बर्नयेट के द्वारा, वर्तमान पाइथोगोरस छात्रवृत्ति के बारे में एक लेख पाइथोगोरियनइसम वेब साइट https://web.archive.org/web/20110719161749/http://users.ucom.net/~vegan/ 19 जुलाई 2011 पाइथोगोरस के सन्दर्भ "पाइथोगोरस ", इंटरनेट एन्साइक्लोपिदिय ऑफ फिलोसफी. https://web.archive.org/web/20090414170930/http://www.utm.edu/research/iep/p/pythagor.htm 14 अप्रैल 2009 "पाइथोगोरस ऑफ सामोस", डी मेक ट्यूटर हिस्ट्री ऑफ मेथ मेटिक्स आर्चीव, गणित और सांख्यिकी का स्कूल, सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय, स्कोट लैण्ड "पाइथोगोरस और पाइथोगोरियन्स, फ्रेग्मेंट्स एंड कमेंट्री," आर्थर फेयरबैंक्स हनोवर हिस्टोरिकल टेक्स्ट प्रोजेक्ट, इतिहास का हनोवर कॉलेज विभाग "पाइथोगोरस और पाइथोगोरियन्स, "गणित विभाग, टेक्सास ए एंड एम विश्वविद्यालय https://web.archive.org/web/20090309180348/http://www.math.tamu.edu/~don.allen/history/pythag/pythag.html 9 मार्च 2009 "पाइथोगोरस और पाइथोगोरियन्स," कैथोलिक विश्वकोश पाइथोगोरियनइसम वेब अनुच्छेद ओकल्ट कोंसेप्शन ऑफ पाईथोगोरियनिस्म "सामोस के पाइथोगोरस " https://web.archive.org/web/20090421215115/http://www-groups.dcs.st-and.ac.uk/~history/Mathematicians/Pythagoras.html 21 अप्रैल 2009 फिलोसफी एंट्री का स्टेनफोर्ड विश्वकोश टेट्राकटिस https://web.archive.org/web/20051027072218/http://www.organelle.org/organelle/tetra/tetraktys.html 27 अक्तूबर 2005 गोल्डन वर्सेस ऑफ पाईथोगोरस पाइथोगोरस ओन वेजीटेरीयानिज्म https://web.archive.org/web/20090213151737/http://animalrightshistory.org/timeline-antiquity/pythagoras.htm 13 फ़रवरी 2009 शाकाहार पर पाइथोगोरस के विचारों पर ऐतिहासिक साहित्य के प्राथमिक स्रोतों से तथ्य, न्याय और दया. वानड्रिंग सोल्स: पाइथोगोरस के दर्शन में स्थानांतरगमन का सिद्धांत, डॉ॰ जेम्स लुच्टे के द्वारा http://www-groups.dcs.st-and.ac.uk/~history/Biographies/Pythagoras.html https://web.archive.org/web/20150707160917/http://www-groups.dcs.st-and.ac.uk/~history/Biographies/Pythagoras.html 7 जुलाई 2015 श्रेणी:पाश्चात्य दर्शन श्रेणी:यूनान के दार्शनिक श्रेणी:प्राचीन यूनानी गणितज्ञ