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विज्ञान परिषद् प्रयाग

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विज्ञान परिषद् प्रयाग विज्ञान परिषद् प्रयाग hi VigyanParishadPrayag.jpg 280px विज्ञान परिषद् प्रयाग विज्ञान परिषद् प्रयाग वी.पी.पी. 1913 03 10 yes इलाहाबाद, संयुक्त प्रान्त, ब्रिटिश भारत वैज्ञानिक संस्था सक्रिय हिन्दी सहित भारतीय भाषाओं में विज्ञान साहित्य का सृजन, विज्ञान संचार, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रसार नागरी प्रेस परिसर 91/186, अलोपीबाग, प्रयागराज – 211006, उत्तर प्रदेश, भारत भारत हिन्दी सभापति डॉ॰ कृष्ण बिहारी पाण्डेय प्रधान मंत्री डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद मिश्र विज्ञान (मासिक), विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका (त्रैमासिक), विज्ञान विषयक पुस्तकें एवं विशेषांक https://www.vijnanaparishadprayag.org विज्ञान परिषद् प्रयाग भारत की एक वैज्ञानिक, शैक्षिक एवं विज्ञान-संचार संस्था है जिसकी स्थापना 10 मार्च 1913 को तत्कालीन इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज), उत्तर प्रदेश में हिन्दी सहित भारतीय भाषाओं में विज्ञान के अध्ययन, लेखन, प्रकाशन तथा प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई थी। यह संस्था हिन्दी भाषा में वैज्ञानिक साहित्य के विकास तथा विज्ञान के लोकप्रियकरण के क्षेत्र में कार्य करने वाले भारत के प्रमुख संगठनों में से एक है। स्थापना के समय परिषद् का उद्देश्य विज्ञान को भारतीय भाषाओं के माध्यम से जनसामान्य तक पहुँचाना, वैज्ञानिक पारिभाषिक शब्दावली का विकास करना, विज्ञान लेखन को प्रोत्साहित करना तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना था। परिषद् ने अपने आरम्भिक वर्षों से ही वैज्ञानिक साहित्य के प्रकाशन, वैज्ञानिक व्याख्यानों, संगोष्ठियों तथा विज्ञान शिक्षा के प्रसार के माध्यम से हिन्दी विज्ञान साहित्य को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिषद् अप्रैल 1915 से विज्ञान नामक मासिक पत्रिका का निरंतर प्रकाशन कर रही है, जिसे हिन्दी की सबसे पुरानी निरंतर प्रकाशित विज्ञान पत्रिकाओं में सम्मिलित किया जाता है। वर्ष 1958 से परिषद् विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका नामक त्रैमासिक शोध पत्रिका का भी प्रकाशन कर रही है, जिसमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न विषयों पर हिन्दी में शोध लेख प्रकाशित किए जाते हैं। परिषद् द्वारा अब तक विज्ञान विषयक 145 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है। एक शताब्दी से अधिक की अपनी यात्रा में विज्ञान परिषद् प्रयाग ने विज्ञान लेखन, विज्ञान संचार, वैज्ञानिक शोध, स्मृति व्याख्यानमालाओं, राष्ट्रीय संगोष्ठियों, विज्ञान विषयक पुरस्कारों तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार के माध्यम से हिन्दी विज्ञान साहित्य और विज्ञान संचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्ष 2013 में परिषद् ने अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष विविध राष्ट्रीय कार्यक्रमों, व्याख्यानों, प्रकाशनों तथा सम्मान समारोहों के साथ मनाया। वर्तमान में विज्ञान परिषद् प्रयाग का कार्यालय नागरी प्रेस परिसर, अलोपीबाग, प्रयागराज से संचालित होता है। इतिहास स्थापना की पृष्ठभूमि उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध और बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक वर्षों में भारत में आधुनिक विज्ञान का अध्ययन और शिक्षण मुख्यतः अंग्रेज़ी भाषा तक सीमित था। इसके परिणामस्वरूप वैज्ञानिक ज्ञान भारतीय भाषाओं के माध्यम से व्यापक समाज तक नहीं पहुँच पा रहा था। इसी काल में भारतीय भाषाओं में आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के साहित्य के विकास की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी। विशेष रूप से हिन्दी में वैज्ञानिक पुस्तकों, पारिभाषिक शब्दावली तथा लोकप्रिय विज्ञान साहित्य के अभाव ने एक ऐसे संगठित प्रयास की आवश्यकता उत्पन्न की जो विज्ञान को जनभाषा के माध्यम से समाज तक पहुँचा सके। प्रयाग (वर्तमान प्रयागराज) उस समय भारतीय शिक्षा, साहित्य और बौद्धिक गतिविधियों का एक प्रमुख केन्द्र था। म्योर सेंट्रल कॉलेज तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जुड़े अनेक शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने यह अनुभव किया कि विज्ञान की उन्नति तभी व्यापक होगी जब उसका साहित्य भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध हो। इसी विचार ने विज्ञान परिषद् प्रयाग की स्थापना का आधार तैयार किया। स्थापना एवं प्रारम्भिक विकास (1913–1915) विज्ञान परिषद् प्रयाग की स्थापना 10 मार्च 1913 को इलाहाबाद में हुई। इसकी स्थापना में डॉ॰ गंगानाथ झा, प्रो॰ हमीदुद्दीन साहब, बाबू रामदास गौड़, पं॰ शालिग्राम भार्गव तथा अन्य शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रारम्भिक विचार-विमर्श के दौरान संस्था के लिए "Vernacular Scientific Literature Society" नाम का भी प्रस्ताव रखा गया, किन्तु बाद में हिन्दी नाम विज्ञान परिषद् स्वीकार किया गया। 31 मार्च 1913 को आयोजित प्रथम अधिवेशन में परिषद् की नियमावली का प्रारूप तैयार किया गया तथा संस्था के संगठनात्मक स्वरूप का निर्धारण किया गया। परिषद् ने प्रारम्भ से ही यह स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल विज्ञान का प्रचार करना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक साहित्य का सृजन, वैज्ञानिक शब्दावली का विकास तथा विज्ञान शिक्षा को प्रोत्साहित करना होगा। 30 जुलाई 1913 को आयोजित दूसरे अधिवेशन तक परिषद् के सदस्यों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो चुकी थी। इसी अवधि में भौतिकी, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान तथा अन्य विषयों के लिए पारिभाषिक शब्दावली तैयार करने हेतु विभिन्न समितियों का गठन किया गया। इन समितियों ने हिन्दी वैज्ञानिक शब्दावली के प्रारम्भिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हिन्दी में विज्ञान साहित्य का विकास (1914–1938) परिषद् ने अपने स्थापना काल के तुरंत बाद वैज्ञानिक पुस्तकों के प्रकाशन का कार्य प्रारम्भ किया। वर्ष 1914 में विज्ञान प्रवेशिका का प्रथम भाग प्रकाशित किया गया, जिसे हिन्दी में आधुनिक विज्ञान के व्यवस्थित प्रारम्भिक ग्रन्थों में गिना जाता है। इस प्रकाशन के माध्यम से वैज्ञानिक अवधारणाओं के लिए हिन्दी पारिभाषिक शब्दों का व्यवस्थित प्रयोग प्रारम्भ हुआ। अप्रैल 1915 में परिषद् ने अपने मुखपत्र विज्ञान का प्रकाशन प्रारम्भ किया। यह पत्रिका लोकप्रिय विज्ञान, विज्ञान शिक्षा, वैज्ञानिक समाचार, शोध तथा विज्ञान लेखन का प्रमुख माध्यम बनी। समय के साथ यह हिन्दी विज्ञान साहित्य के सबसे महत्वपूर्ण प्रकाशनों में सम्मिलित हो गई और निरन्तर प्रकाशित होती रही। इसी अवधि में परिषद् ने विज्ञान विषयक पुस्तकों, अनुवादों, लोकप्रिय विज्ञान लेखों तथा सार्वजनिक व्याख्यानों के माध्यम से विज्ञान को सामान्य पाठकों तक पहुँचाने का कार्य किया। परिषद् द्वारा आयोजित व्याख्यानों में विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों, शिक्षकों तथा विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिससे हिन्दी में विज्ञान लेखन और वैज्ञानिक विमर्श को नई दिशा मिली। संस्थागत विस्तार एवं भवन निर्माण (1925–1956) संस्था के विस्तार के साथ परिषद् के लिए स्थायी कार्यालय भवन की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी। 1920 के दशक में प्रयाग में परिषद् के लिए भूमि प्राप्त करने के प्रयास प्रारम्भ हुए। परिषद् के पदाधिकारियों तथा सहयोगियों के संयुक्त प्रयासों से भवन निर्माण की योजना तैयार की गई और आगामी वर्षों में इसका क्रमिक विकास हुआ। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् परिषद् की गतिविधियों का विस्तार हुआ तथा इसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में स्थायी रूप से कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। 1956 में परिषद् के भवन का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया। यह भवन कई दशकों तक परिषद् की शैक्षिक, प्रकाशन तथा प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र बना रहा। स्वतंत्रता के बाद का विकास (1956–2012) स्वतंत्रता के बाद परिषद् ने विज्ञान संचार, विज्ञान लेखन तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया। 1958 में परिषद् ने विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ किया, जिसके माध्यम से हिन्दी भाषा में वैज्ञानिक शोध को एक नियमित मंच प्राप्त हुआ। इस पत्रिका में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, कृषि, पर्यावरण तथा अन्य वैज्ञानिक विषयों पर शोध लेख प्रकाशित होने लगे। इसी अवधि में परिषद् ने विज्ञान विषयक पुस्तकों के प्रकाशन, राष्ट्रीय संगोष्ठियों, स्मृति व्याख्यानों, विज्ञान लेखन प्रतियोगिताओं तथा पुरस्कार योजनाओं का भी विस्तार किया। हिन्दी के माध्यम से विज्ञान संचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से देश के विभिन्न भागों में परिषद् की शाखाओं का गठन किया गया तथा अनेक शिक्षण एवं शोध संस्थानों के साथ शैक्षिक सहयोग स्थापित किया गया। शताब्दी वर्ष एवं समकालीन विकास (2013–वर्तमान) वर्ष 2013 में विज्ञान परिषद् प्रयाग ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी समारोह आयोजित किया। इस अवसर पर वर्ष भर व्याख्यानमालाओं, राष्ट्रीय संगोष्ठियों, प्रदर्शिनियों, विशेष प्रकाशनों तथा सम्मान समारोहों का आयोजन किया गया। शताब्दी वर्ष के दौरान विज्ञान संचार, हिन्दी विज्ञान लेखन तथा वैज्ञानिक शिक्षा में योगदान देने वाले अनेक वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विज्ञान लेखकों को सम्मानित किया गया। हाल के वर्षों में परिषद् ने अपने प्रकाशनों का आधुनिकीकरण, डिजिटल माध्यमों का उपयोग तथा युवा शोधकर्ताओं और विज्ञान लेखकों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी कार्य किया है। परिषद् द्वारा विज्ञान मासिक और विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका का नियमित प्रकाशन जारी है तथा विज्ञान विषयक पुस्तकों, व्याख्यानों, पुरस्कारों और वैज्ञानिक गतिविधियों के माध्यम से हिन्दी में विज्ञान संचार की अपनी परम्परा को आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2024 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर से स्थानांतरण के बाद परिषद् का वर्तमान कार्यालय प्रयागराज के अलोपीबाग स्थित नागरी प्रेस परिसर से संचालित हो रहा है, जहाँ से संस्था की प्रकाशन, प्रशासनिक तथा शैक्षिक गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं। उद्देश्य विज्ञान परिषद् प्रयाग की स्थापना का मूल उद्देश्य विज्ञान को भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिन्दी, के माध्यम से जनसामान्य तक पहुँचाना तथा वैज्ञानिक ज्ञान को समाज के व्यापक वर्ग के लिए सुलभ बनाना था। परिषद् का मानना रहा है कि वैज्ञानिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रभावी प्रसार तभी संभव है जब विज्ञान का अध्ययन एवं अभिव्यक्ति मातृभाषाओं में भी समान रूप से विकसित हो। परिषद् की नियमावली तथा समय-समय पर निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार संस्था के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं— हिन्दी सहित भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक साहित्य का सृजन, प्रकाशन तथा प्रसार। विज्ञान शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विज्ञान लेखन को प्रोत्साहित करना। वैज्ञानिक पारिभाषिक शब्दावली का विकास तथा वैज्ञानिक विषयों को भारतीय भाषाओं में अभिव्यक्त करने की परम्परा को सुदृढ़ बनाना। विज्ञान एवं समाज के मध्य संवाद स्थापित कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार में योगदान देना। विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा विज्ञान लेखकों को विज्ञान लेखन एवं अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित करना। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, कृषि, स्वास्थ्य तथा समसामयिक वैज्ञानिक विषयों पर व्याख्यान, संगोष्ठियाँ, सम्मेलन तथा कार्यशालाओं का आयोजन करना। विज्ञान विषयक पुस्तकों, शोध पत्रिकाओं एवं लोकप्रिय विज्ञान साहित्य का प्रकाशन करना। विज्ञान संचार के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं एवं शिक्षण-संगठनों के साथ सहयोग स्थापित करना। इन उद्देश्यों के अनुरूप परिषद् अपनी स्थापना से ही विज्ञान को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचाने के लिए प्रकाशन, प्रशिक्षण, व्याख्यानमालाओं, शोध गतिविधियों तथा विज्ञान लोकप्रियकरण कार्यक्रमों का संचालन करती रही है। संगठन एवं प्रशासन विज्ञान परिषद् प्रयाग एक पंजीकृत वैज्ञानिक एवं शैक्षिक संस्था है जिसका संचालन इसकी नियमावली के अनुसार निर्वाचित पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी द्वारा किया जाता है। परिषद् का प्रशासनिक ढाँचा समय के साथ विकसित हुआ है तथा वर्तमान में संस्था का संचालन सभापति, प्रधान मंत्री, कार्यकारिणी परिषद् तथा विभिन्न समितियों के माध्यम से किया जाता है। परिषद् के संगठनात्मक ढाँचे में विभिन्न पदाधिकारी, विषय-विशेषज्ञ, सम्पादकीय मण्डल, प्रकाशन समिति तथा अन्य कार्यकारी समितियाँ सम्मिलित रहती हैं। परिषद् अपनी विभिन्न गतिविधियों के संचालन हेतु आवश्यकता के अनुसार विशेष समितियों का भी गठन करती है। सभापति सभापति परिषद् का सर्वोच्च निर्वाचित पदाधिकारी होता है तथा संस्था की नीतिगत दिशा, शैक्षिक गतिविधियों एवं दीर्घकालीन विकास से सम्बन्धित विषयों में मार्गदर्शन प्रदान करता है। वर्तमान में परिषद् के सभापति डॉ॰ कृष्ण बिहारी पाण्डेय हैं। प्रधान मंत्री प्रधान मंत्री परिषद् का मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी होता है तथा संस्था के प्रशासन, प्रकाशनों, बैठकों, कार्यक्रमों एवं विभिन्न गतिविधियों के संचालन का उत्तरदायित्व निभाता है। वर्तमान में यह दायित्व डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद मिश्र द्वारा निर्वहन किया जा रहा है। कार्यकारिणी परिषद् की कार्यकारिणी संस्था की प्रशासनिक एवं नीतिगत गतिविधियों का संचालन करती है। कार्यकारिणी परिषद् के कार्यक्रमों, प्रकाशनों, सदस्यता, वित्तीय प्रबन्धन तथा विभिन्न शैक्षिक एवं वैज्ञानिक आयोजनों के सम्बन्ध में निर्णय लेती है। सदस्यता विज्ञान परिषद् प्रयाग की सदस्यता विज्ञान, शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान लेखन तथा विज्ञान संचार से जुड़े व्यक्तियों के लिए उपलब्ध है। परिषद् समय-समय पर विभिन्न प्रकार की सदस्यता योजनाएँ संचालित करती रही है जिनके माध्यम से शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा विज्ञान में रुचि रखने वाले नागरिकों को संस्था की गतिविधियों से जोड़ा जाता है। सदस्य परिषद् के प्रकाशनों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, वैज्ञानिक कार्यक्रमों तथा अन्य शैक्षिक गतिविधियों में सहभागिता कर सकते हैं। परिषद् अपने सदस्यों को विज्ञान लेखन, शोध तथा विज्ञान संचार से सम्बन्धित विभिन्न अवसर भी उपलब्ध कराती है। वर्तमान संचालन वर्तमान में विज्ञान परिषद् प्रयाग का प्रशासनिक एवं प्रकाशन कार्य प्रयागराज के अलोपीबाग स्थित नागरी प्रेस परिसर से संचालित होता है। परिषद् यहाँ से अपनी वैज्ञानिक, शैक्षिक एवं प्रकाशन सम्बन्धी गतिविधियों का संचालन करती है। संस्था द्वारा विज्ञान मासिक पत्रिका तथा विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका का नियमित प्रकाशन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त परिषद् विभिन्न वैज्ञानिक व्याख्यानमालाओं, राष्ट्रीय संगोष्ठियों, पुरस्कार समारोहों, पुस्तक प्रकाशनों तथा विज्ञान लोकप्रियकरण कार्यक्रमों का भी नियमित आयोजन करती है। शाखाएँ विज्ञान परिषद् प्रयाग ने अपने उद्देश्यों के व्यापक प्रसार के लिए समय-समय पर विभिन्न नगरों में शाखाओं की स्थापना की। इन शाखाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर विज्ञान संचार, व्याख्यान, विज्ञान लेखन, छात्र गतिविधियों तथा अन्य वैज्ञानिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है। परिषद् की विभिन्न अवधियों में काशी (वाराणसी), अयोध्या (फैज़ाबाद), लखनऊ, चित्रकूट, जोधपुर, बड़ौदा, इन्दौर, प्रतापगढ़, औरंगाबाद, उज्जैन तथा प्रयागराज क्षेत्र में शाखाएँ स्थापित की गईं। इनमें से कुछ शाखाएँ वर्तमान में सक्रिय हैं तथा परिषद् के प्रकाशनों, व्याख्यानों एवं अन्य कार्यक्रमों के संचालन में सहयोग प्रदान करती हैं। वर्ष 2026 में उज्जैन में परिषद् की एक नई शाखा की स्थापना की गई, जिसने स्थापना के पश्चात् विज्ञान संचार एवं संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी प्रारम्भ की। प्रकाशन विज्ञान परिषद् प्रयाग की स्थापना से ही वैज्ञानिक साहित्य के सृजन, प्रकाशन और प्रसार को संस्था की प्रमुख गतिविधियों में सम्मिलित किया गया। परिषद् ने हिन्दी भाषा में विज्ञान लेखन को प्रोत्साहित करने तथा वैज्ञानिक विषयों को जनसामान्य तक पहुँचाने के उद्देश्य से पत्रिकाओं, शोध पत्रिकाओं, पुस्तकों, विशेषांकों तथा अन्य वैज्ञानिक प्रकाशनों का नियमित प्रकाशन किया है। इन प्रकाशनों ने हिन्दी में विज्ञान संचार की परम्परा के विकास तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। परिषद् के प्रमुख प्रकाशनों में विज्ञान मासिक पत्रिका, विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका, विज्ञान विषयक पुस्तकें, विशेषांक, स्मारिकाएँ तथा वैज्ञानिक संदर्भ ग्रन्थ सम्मिलित हैं। विज्ञान (मासिक पत्रिका) विज्ञान (हिन्दी पत्रिका) विज्ञान विज्ञान परिषद् प्रयाग का आधिकारिक मुखपत्र है, जिसका प्रकाशन अप्रैल 1915 में प्रारम्भ हुआ। इसका उद्देश्य हिन्दी भाषा के माध्यम से विज्ञान को सामान्य पाठकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा शोधकर्ताओं तक पहुँचाना था। प्रारम्भ से ही पत्रिका ने लोकप्रिय विज्ञान लेखों, वैज्ञानिक समाचारों, शोधपरक लेखों तथा विज्ञान शिक्षा सम्बन्धी सामग्री के प्रकाशन को प्राथमिकता दी। यह पत्रिका हिन्दी की सबसे पुरानी निरन्तर प्रकाशित विज्ञान पत्रिकाओं में सम्मिलित है तथा एक शताब्दी से अधिक समय से नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है। इसके माध्यम से विज्ञान परिषद् प्रयाग ने वैज्ञानिक विषयों को सरल, सुलभ तथा प्रमाणिक भाषा में प्रस्तुत करने की परम्परा विकसित की। पत्रिका में समय-समय पर निम्नलिखित प्रकार की सामग्री प्रकाशित होती रही है— लोकप्रिय विज्ञान लेख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर विशेष लेख विज्ञान शिक्षा सम्बन्धी सामग्री वैज्ञानिकों के जीवन एवं योगदान पर लेख विज्ञान इतिहास पुस्तक समीक्षाएँ विज्ञान समाचार पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि तथा समसामयिक वैज्ञानिक विषयों पर विशेषांक विज्ञान पत्रिका के अनेक विशेषांक प्रकाशित किए जा चुके हैं, जिनमें विभिन्न वैज्ञानिक विषयों, वैज्ञानिक व्यक्तित्वों तथा समसामयिक विज्ञान विषयों पर केन्द्रित सामग्री प्रकाशित की गई। परिषद् के विभिन्न पुरस्कारों, व्याख्यानों, सम्मेलनों तथा अन्य गतिविधियों की जानकारी भी समय-समय पर इसी पत्रिका के माध्यम से प्रकाशित की जाती रही है। विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका का प्रकाशन जनवरी 1958 में प्रारम्भ किया गया। यह परिषद् की त्रैमासिक शोध पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दी भाषा में उच्चस्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना तथा शोधकर्ताओं को वैज्ञानिक लेख प्रकाशित करने का मंच उपलब्ध कराना है। इस पत्रिका में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, भूविज्ञान, पर्यावरण, कृषि, अभियांत्रिकी तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अन्य विषयों से सम्बन्धित शोध लेख प्रकाशित किए जाते हैं। शोध लेखों के साथ उनके अंग्रेज़ी सार (Abstract) भी प्रकाशित किए जाते हैं जिससे उनका उपयोग व्यापक शोध समुदाय द्वारा किया जा सके। पत्रिका का सम्पादन विषय विशेषज्ञों के सम्पादकीय मण्डल द्वारा किया जाता है तथा इसमें प्रकाशित शोध लेख निर्धारित सम्पादकीय एवं समीक्षकीय प्रक्रिया के उपरान्त प्रकाशित किए जाते हैं। विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका हिन्दी भाषा में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने वाली प्रमुख शोध पत्रिकाओं में सम्मिलित है तथा इसके विभिन्न अंक भारत एवं विदेश के अनेक पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थानों में उपलब्ध हैं। पुस्तक प्रकाशन विज्ञान परिषद् प्रयाग ने स्थापना के आरम्भिक वर्षों से ही विज्ञान विषयक पुस्तकों के प्रकाशन को अपनी प्रमुख गतिविधियों में सम्मिलित किया। परिषद् द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का उद्देश्य विज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत करना, वैज्ञानिक शब्दावली का विकास करना तथा विज्ञान शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना रहा है। परिषद् का प्रथम प्रमुख प्रकाशन विज्ञान प्रवेशिका था, जिसने हिन्दी में विज्ञान शिक्षा के लिए आधारभूत ग्रन्थ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके पश्चात् परिषद् द्वारा भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, विज्ञान शिक्षा तथा विज्ञान के इतिहास से सम्बन्धित अनेक पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। परिषद् द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में लोकप्रिय विज्ञान साहित्य, पाठ्य-सहायक ग्रन्थ, वैज्ञानिक संदर्भ पुस्तकें, अनुवाद, वैज्ञानिक जीवनियाँ तथा विज्ञान संचार सम्बन्धी प्रकाशन सम्मिलित हैं। समय के साथ परिषद् ने विज्ञान विषयक 145 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया है। विशेषांक एवं स्मारिकाएँ विज्ञान परिषद् प्रयाग समय-समय पर विशेष अवसरों, वैज्ञानिक विषयों तथा महत्वपूर्ण आयोजनों के उपलक्ष्य में विशेषांक एवं स्मारिकाओं का भी प्रकाशन करती रही है। इनमें विज्ञान पत्रिका के विषय-विशेषांक, जयंती विशेषांक, शताब्दी विशेषांक तथा विभिन्न वैज्ञानिक विषयों पर केन्द्रित प्रकाशन सम्मिलित हैं। वर्ष 2013 में परिषद् के शताब्दी वर्ष के अवसर पर शताब्दी स्मारिका एवं अन्य विशेष प्रकाशनों का प्रकाशन किया गया, जिनमें परिषद् के इतिहास, उपलब्धियों तथा विज्ञान संचार में उसके योगदान का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। हिन्दी विज्ञान साहित्य में योगदान विज्ञान परिषद् प्रयाग के प्रकाशनों ने हिन्दी को वैज्ञानिक अभिव्यक्ति की भाषा के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिषद् ने वैज्ञानिक पारिभाषिक शब्दावली के विकास, विज्ञान लेखन की परम्परा को सुदृढ़ करने तथा विज्ञान विषयक गुणवत्तापूर्ण साहित्य उपलब्ध कराने में निरन्तर योगदान दिया है। परिषद् की पत्रिकाओं और पुस्तकों ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं तथा विज्ञान लेखकों के लिए एक दीर्घकालीन संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त परिषद् के प्रकाशनों ने विज्ञान संचार, विज्ञान शिक्षा तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गतिविधियाँ विज्ञान परिषद् प्रयाग अपनी स्थापना से ही हिन्दी माध्यम से विज्ञान के प्रचार-प्रसार तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास के उद्देश्य से विविध शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सामाजिक गतिविधियों का संचालन करती रही है। परिषद् की गतिविधियाँ केवल प्रकाशनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विज्ञान संचार, वैज्ञानिक विमर्श, शोध, प्रशिक्षण तथा जन-जागरूकता के विभिन्न आयामों तक विस्तृत हैं। समय के साथ परिषद् ने व्याख्यानमालाओं, राष्ट्रीय संगोष्ठियों, वैज्ञानिक सम्मेलनों, कार्यशालाओं, विज्ञान लेखन, पुरस्कारों तथा प्रकाशनों के माध्यम से विज्ञान एवं समाज के मध्य संवाद स्थापित करने का प्रयास किया है। विज्ञान संचार विज्ञान परिषद् प्रयाग की प्रमुख गतिविधियों में विज्ञान संचार का विशेष स्थान रहा है। परिषद् हिन्दी भाषा के माध्यम से विज्ञान को जनसामान्य तक पहुँचाने के उद्देश्य से लोकप्रिय विज्ञान साहित्य, व्याख्यान, विज्ञान समाचार तथा समसामयिक वैज्ञानिक विषयों पर आधारित सामग्री का नियमित प्रकाशन एवं प्रसार करती है। परिषद् का उद्देश्य विज्ञान को केवल शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित न रखकर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना रहा है। इसी उद्देश्य से विभिन्न आयु वर्गों के पाठकों के लिए सरल भाषा में विज्ञान विषयक साहित्य उपलब्ध कराया जाता रहा है। व्याख्यानमालाएँ परिषद् द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय एवं स्थानीय स्तर पर अनेक स्मृति व्याख्यानों तथा विशेष व्याख्यानमालाओं का आयोजन किया जाता है। इन व्याख्यानों में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों तथा वैज्ञानिक संगठनों से जुड़े वैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं विषय-विशेषज्ञ भाग लेते रहे हैं। इन व्याख्यानमालाओं का उद्देश्य विज्ञान के नवीनतम विकास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा समसामयिक वैज्ञानिक विषयों पर सार्वजनिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है। परिषद् द्वारा आयोजित अनेक स्मृति व्याख्यान भारतीय वैज्ञानिकों एवं विद्वानों की स्मृति में स्थापित किए गए हैं तथा उनका नियमित आयोजन किया जाता है। सम्मेलन एवं संगोष्ठियाँ विज्ञान परिषद् प्रयाग विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, पर्यावरण, कृषि, स्वास्थ्य तथा अन्य समसामयिक वैज्ञानिक विषयों पर राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर की संगोष्ठियों तथा सम्मेलनों का आयोजन करती रही है। इन आयोजनों में शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा विज्ञान लेखकों को अपने शोध, विचार एवं अनुभव प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया जाता है। परिषद् द्वारा आयोजित संगोष्ठियाँ विज्ञान एवं समाज से जुड़े समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच रही हैं। कार्यशालाएँ एवं प्रशिक्षण परिषद् विज्ञान लेखन, वैज्ञानिक अनुसंधान, विज्ञान शिक्षा तथा विज्ञान संचार से सम्बन्धित प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं का आयोजन भी करती रही है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विज्ञान लेखकों की क्षमता का विकास करना तथा हिन्दी माध्यम से विज्ञान लेखन को प्रोत्साहित करना है। विज्ञान लेखन एवं सम्पादन हिन्दी में विज्ञान लेखन को प्रोत्साहित करना परिषद् की प्रमुख गतिविधियों में सम्मिलित है। परिषद् ने विज्ञान लेखकों, अनुवादकों, सम्पादकों तथा शोधकर्ताओं को मंच उपलब्ध कराकर हिन्दी विज्ञान साहित्य के विकास में निरन्तर योगदान दिया है। परिषद् द्वारा प्रकाशित पत्रिकाओं एवं पुस्तकों के माध्यम से अनेक विज्ञान लेखकों को अपनी रचनाएँ प्रकाशित करने का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे हिन्दी विज्ञान लेखन की एक सुदृढ़ परम्परा विकसित हुई। विज्ञान शिक्षा परिषद् ने विज्ञान शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों से जुड़े विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया है। परिषद् द्वारा आयोजित व्याख्यानों, प्रकाशनों तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने विज्ञान शिक्षा को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया है। विज्ञान लोकप्रियकरण विज्ञान परिषद् प्रयाग ने लोकप्रिय विज्ञान साहित्य, सार्वजनिक व्याख्यानों, प्रदर्शनियों, विज्ञान लेखन, विशेषांकों तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास का निरन्तर प्रयास किया है। परिषद् की गतिविधियों का प्रमुख उद्देश्य विज्ञान को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना तथा वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना रहा है। हिन्दी भाषा में विज्ञान को सरल एवं बोधगम्य रूप में प्रस्तुत करना परिषद् की पहचान रही है। शताब्दी वर्ष की गतिविधियाँ परिषद् ने अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष के अवसर पर वर्ष 2013 में विविध राष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस अवधि में विशेष व्याख्यानमालाएँ, वैज्ञानिक संगोष्ठियाँ, प्रदर्शिनियाँ, स्मारिका प्रकाशन, सम्मान समारोह तथा विज्ञान संचार से सम्बन्धित अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। शताब्दी समारोह के अंतर्गत देश के विभिन्न भागों से वैज्ञानिकों, शिक्षकों, विज्ञान लेखकों तथा विज्ञान संचारकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर हिन्दी माध्यम से विज्ञान के प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले अनेक व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया। समकालीन गतिविधियाँ वर्तमान में परिषद् अपने पारम्परिक प्रकाशनों के साथ-साथ व्याख्यानमालाओं, पुरस्कारों, शोध गतिविधियों, विज्ञान लेखन तथा विज्ञान संचार कार्यक्रमों का नियमित आयोजन कर रही है। संस्था डिजिटल माध्यमों के उपयोग, युवा विज्ञान लेखकों के प्रोत्साहन तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार की दिशा में भी निरन्तर कार्य कर रही है। पुरस्कार एवं सम्मान विज्ञान परिषद् प्रयाग ने विज्ञान लेखन, विज्ञान संचार, वैज्ञानिक अनुसंधान, विज्ञान शिक्षा तथा हिन्दी माध्यम से विज्ञान के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विज्ञान लेखकों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न पुरस्कारों, पदकों एवं सम्मानों की स्थापना की है। इन सम्मानों का उद्देश्य वैज्ञानिक लेखन, शोध, नवाचार तथा विज्ञान के लोकप्रियकरण को बढ़ावा देना है। परिषद् के अधिकांश पुरस्कारों की घोषणा इसके आधिकारिक प्रकाशनों में की जाती है तथा चयन परिषद् द्वारा गठित विशेषज्ञ समितियों की अनुशंसा के आधार पर किया जाता है। शताब्दी सम्मान विज्ञान परिषद् प्रयाग की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी सम्मान की स्थापना की गई। यह सम्मान विज्ञान, शिक्षा, विज्ञान संचार, विज्ञान लेखन तथा समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। शताब्दी समारोह के अवसर पर अनेक वैज्ञानिकों, विज्ञान संचारकों, शिक्षकों तथा अन्य विशिष्ट व्यक्तियों को इस सम्मान से अलंकृत किया गया। विज्ञान वाचस्पति सम्मान विज्ञान वाचस्पति सम्मान परिषद् के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है। यह सम्मान विज्ञान के क्षेत्र में दीर्घकालीन योगदान, विज्ञान संचार तथा हिन्दी भाषा के माध्यम से विज्ञान के विकास में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वैज्ञानिकों एवं विद्वानों को प्रदान किया जाता है। विज्ञान भास्कर सम्मान विज्ञान भास्कर सम्मान हिन्दी माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च स्तरीय विज्ञान लेखन तथा विज्ञान शिक्षा में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। इसका उद्देश्य हिन्दी में वैज्ञानिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना है। विज्ञानश्री सम्मान विज्ञानश्री सम्मान विशेष रूप से हिन्दी माध्यम से विज्ञान लेखन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया। यह सम्मान विज्ञान विषयक पुस्तकों, विज्ञान लोकप्रियकरण तथा विज्ञान लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। विज्ञान वारिधि सम्मान विज्ञान वारिधि सम्मान विज्ञान संचार तथा उच्च स्तरीय वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाने वाला विशेष सम्मान है। यह परिषद् द्वारा समय-समय पर विशिष्ट वैज्ञानिकों को प्रदान किया जाता है। डॉ. गोरख प्रसाद विज्ञान लेखन पुरस्कार यह पुरस्कार विज्ञान परिषद् की मासिक पत्रिका विज्ञान में प्रकाशित उत्कृष्ट विज्ञान लेखन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया। इस पुरस्कार के माध्यम से हिन्दी में गुणवत्तापूर्ण विज्ञान लेखन को बढ़ावा दिया जाता है। व्हिटेकर विज्ञान लेखन पुरस्कार व्हिटेकर विज्ञान लेखन पुरस्कार विज्ञान के इतिहास, वैज्ञानिकों की जीवनियों तथा विज्ञान विषयक उत्कृष्ट लेखन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदान किया जाता है। स्वामी हरिशरणानन्द पुरस्कार यह पुरस्कार हिन्दी भाषा में मौलिक विज्ञान साहित्य के सृजन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। यह सम्मान सामान्यतः विज्ञान विषयक उत्कृष्ट मौलिक पुस्तकों के लिए प्रदान किया जाता है। डॉ. रत्नकुमारी स्मृति पदक डॉ. रत्नकुमारी स्मृति पदक विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका में प्रकाशित उत्कृष्ट शोध लेखों के लिए प्रदान किया जाता है। इसका उद्देश्य हिन्दी माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है। सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार पुरस्कार विज्ञान परिषद् प्रयाग सूचना प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक नवाचार तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के समकालीन क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं शोधकर्ताओं को भी सम्मानित करती है। इन पुरस्कारों का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवीन क्षेत्रों में हिन्दी माध्यम से वैज्ञानिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना है। युवा एवं बाल विज्ञान लेखन पुरस्कार परिषद् द्वारा युवा विज्ञान लेखकों तथा बाल विज्ञान साहित्य को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। इन पुरस्कारों का उद्देश्य नई पीढ़ी में विज्ञान लेखन तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास को प्रोत्साहित करना है। कृषि विज्ञान लेखन पुरस्कार कृषि विज्ञान तथा ग्रामीण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लोकप्रिय एवं उपयोगी विज्ञान लेखन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से परिषद् कृषि विज्ञान लेखन पुरस्कार भी प्रदान करती है। अन्य सम्मान उपरोक्त सम्मानों के अतिरिक्त परिषद् समय-समय पर विशेष स्मृति पुरस्कार, विज्ञान लेखन सम्मान, सम्पादन सम्मान तथा विभिन्न स्मृति व्याख्यानों से सम्बद्ध सम्मान भी प्रदान करती रही है। इन पुरस्कारों के माध्यम से परिषद् हिन्दी विज्ञान साहित्य, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा विज्ञान संचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित करती है। प्रभाव एवं महत्व विज्ञान परिषद् प्रयाग द्वारा स्थापित पुरस्कार एवं सम्मान हिन्दी भाषा में विज्ञान लेखन तथा विज्ञान संचार की परम्परा को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इन सम्मानों के माध्यम से अनेक वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं तथा विज्ञान लेखकों को प्रोत्साहन मिला है तथा हिन्दी में वैज्ञानिक साहित्य के विकास को निरन्तर बल प्राप्त हुआ है। उल्लेखनीय कार्यक्रम विज्ञान परिषद् प्रयाग ने अपनी स्थापना के पश्चात् विज्ञान संचार, विज्ञान शिक्षा तथा हिन्दी विज्ञान साहित्य के विकास के उद्देश्य से अनेक राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इन कार्यक्रमों में स्मृति व्याख्यानमालाएँ, राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ, विज्ञान सम्मेलन, विज्ञान लेखन कार्यशालाएँ, पुस्तक विमोचन समारोह, पुरस्कार वितरण समारोह तथा विशेष व्याख्यान सम्मिलित हैं। स्मृति व्याख्यानमालाएँ परिषद् द्वारा समय-समय पर विभिन्न वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों तथा विज्ञान संचारकों की स्मृति में व्याख्यानमालाओं का आयोजन किया जाता है। इन व्याख्यानों का उद्देश्य समकालीन वैज्ञानिक विषयों पर विशेषज्ञों एवं समाज के मध्य संवाद स्थापित करना तथा विज्ञान के प्रति जन-जागरूकता को प्रोत्साहित करना है। इन व्याख्यानमालाओं में भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, पर्यावरण, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान शिक्षा जैसे विविध विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं। परिषद् की स्मृति व्याख्यानमालाएँ उसके नियमित शैक्षिक कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण भाग हैं। शताब्दी समारोह वर्ष 2013 में विज्ञान परिषद् प्रयाग ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी समारोह आयोजित किया। इस अवसर पर वर्षभर विभिन्न वैज्ञानिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ, विशेष व्याख्यान, स्मारिका प्रकाशन, प्रदर्शिनियाँ तथा सम्मान समारोह सम्मिलित थे। शताब्दी समारोह के दौरान विज्ञान, शिक्षा तथा विज्ञान संचार के क्षेत्र में योगदान देने वाले अनेक वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं विज्ञान लेखकों को सम्मानित किया गया। शाखाएँ विज्ञान परिषद् प्रयाग ने अपने उद्देश्यों के व्यापक प्रसार के लिए देश के विभिन्न नगरों में समय-समय पर शाखाओं की स्थापना की। इन शाखाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर विज्ञान व्याख्यान, विज्ञान लेखन, प्रकाशन, छात्र गतिविधियाँ तथा अन्य शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। परिषद् की शाखाएँ उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित की गई हैं। समय के साथ इन शाखाओं की सक्रियता में परिवर्तन होता रहा है, तथापि परिषद् की अनेक शाखाएँ आज भी विज्ञान संचार एवं प्रकाशन सम्बन्धी गतिविधियों में सहयोग प्रदान कर रही हैं। योगदान एवं विरासत अपनी स्थापना के बाद से विज्ञान परिषद् प्रयाग ने हिन्दी माध्यम से विज्ञान के विकास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार तथा विज्ञान संचार की संस्थागत परम्परा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिषद् का योगदान केवल प्रकाशनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विज्ञान शिक्षा, वैज्ञानिक शब्दावली के विकास, विज्ञान लेखन, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा विज्ञान लोकप्रियकरण जैसे विविध क्षेत्रों तक विस्तृत रहा है। हिन्दी में विज्ञान साहित्य बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में जब आधुनिक विज्ञान का अधिकांश साहित्य अंग्रेज़ी भाषा तक सीमित था, तब विज्ञान परिषद् प्रयाग ने हिन्दी में वैज्ञानिक साहित्य के व्यवस्थित विकास का कार्य प्रारम्भ किया। परिषद् द्वारा प्रकाशित पुस्तकों, पत्रिकाओं तथा अन्य प्रकाशनों ने हिन्दी को विज्ञान की अभिव्यक्ति की एक सक्षम भाषा के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। परिषद् ने विज्ञान विषयों पर मौलिक लेखन, अनुवाद, लोकप्रिय विज्ञान साहित्य तथा वैज्ञानिक संदर्भ ग्रन्थों के प्रकाशन को प्रोत्साहित किया। इसके परिणामस्वरूप हिन्दी माध्यम के विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा सामान्य पाठकों के लिए विज्ञान विषयक साहित्य की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। विज्ञान संचार विज्ञान परिषद् प्रयाग भारत में विज्ञान संचार के क्षेत्र में कार्य करने वाली प्रारम्भिक संस्थाओं में से एक रही है। परिषद् ने विज्ञान को जनसामान्य तक पहुँचाने के लिए लोकप्रिय विज्ञान लेखन, सार्वजनिक व्याख्यानों, वैज्ञानिक सम्मेलनों, विज्ञान पत्रिकाओं तथा विभिन्न जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। परिषद् का प्रमुख उद्देश्य विज्ञान को केवल शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित न रखकर समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाना रहा है। इस दिशा में परिषद् की पत्रिकाओं, पुस्तकों तथा व्याख्यानमालाओं ने विज्ञान एवं समाज के मध्य संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वैज्ञानिक पारिभाषिक शब्दावली परिषद् के प्रारम्भिक कार्यों में हिन्दी वैज्ञानिक पारिभाषिक शब्दावली के निर्माण का विशेष महत्व रहा। स्थापना के कुछ ही समय बाद विभिन्न वैज्ञानिक विषयों के विशेषज्ञों की समितियों का गठन किया गया, जिन्होंने भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान तथा अन्य विषयों के लिए हिन्दी शब्दावली विकसित करने का कार्य प्रारम्भ किया। यह प्रयास आगे चलकर हिन्दी माध्यम से विज्ञान शिक्षण एवं विज्ञान लेखन के विकास का आधार बना तथा वैज्ञानिक विषयों की अभिव्यक्ति के लिए मानकीकृत हिन्दी शब्दावली के विकास में सहायक सिद्ध हुआ। वैज्ञानिक अनुसंधान वर्ष 1958 में विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका के प्रकाशन के साथ परिषद् ने हिन्दी माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान को भी संस्थागत स्वरूप प्रदान किया। इस पत्रिका ने हिन्दी में शोध लेखों के प्रकाशन के लिए एक नियमित मंच उपलब्ध कराया तथा विज्ञान के विभिन्न विषयों में शोध कार्यों को प्रोत्साहित किया। विज्ञान शिक्षा परिषद् ने विज्ञान शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से व्याख्यानमालाओं, संगोष्ठियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा विज्ञान विषयक प्रकाशनों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों को निरन्तर सहयोग प्रदान किया। परिषद् की गतिविधियों ने हिन्दी माध्यम से विज्ञान अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराने में योगदान दिया। विज्ञान लेखन विज्ञान परिषद् प्रयाग ने हिन्दी विज्ञान लेखन की परम्परा को विकसित करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। परिषद् द्वारा प्रकाशित विज्ञान मासिक पत्रिका तथा अन्य प्रकाशनों के माध्यम से अनेक विज्ञान लेखकों, सम्पादकों तथा शोधकर्ताओं को अपनी रचनाएँ प्रकाशित करने का अवसर प्राप्त हुआ। परिषद् द्वारा स्थापित विभिन्न पुरस्कारों एवं सम्मानों ने भी विज्ञान लेखन को प्रोत्साहित करने तथा हिन्दी में गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक साहित्य के सृजन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्थागत विरासत एक शताब्दी से अधिक की अपनी यात्रा में विज्ञान परिषद् प्रयाग ने विज्ञान संचार, हिन्दी विज्ञान साहित्य तथा विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में एक विशिष्ट संस्थागत परम्परा विकसित की है। परिषद् के प्रकाशनों, व्याख्यानमालाओं, शोध गतिविधियों तथा पुरस्कारों ने अनेक पीढ़ियों के विद्यार्थियों, शिक्षकों, विज्ञान लेखकों एवं शोधकर्ताओं को प्रभावित किया है। परिषद् द्वारा प्रकाशित विज्ञान तथा विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका आज भी उसके प्रमुख प्रकाशनों में सम्मिलित हैं और हिन्दी माध्यम से विज्ञान के प्रचार-प्रसार की उसकी ऐतिहासिक परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। यह भी देखें विज्ञान (हिन्दी पत्रिका) विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका विज्ञान संचार राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद् राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद् सन्दर्भ ग्रन्थसूची गंगानाथ झा एवं अन्य. विज्ञान परिषद् प्रयाग का इतिहास। विज्ञान परिषद् प्रयाग. शताब्दी स्मारिका। प्रयागराज। विज्ञान (मासिक पत्रिका), विभिन्न अंक। विज्ञान परिषद् अनुसन्धान पत्रिका, विभिन्न अंक। विज्ञान परिषद् प्रयाग के आधिकारिक प्रकाशन। बाहरी कड़ियाँ विज्ञान परिषद् प्रयाग की आधिकारिक वेबसाइट श्रेणी:भारत के वैज्ञानिक संगठन श्रेणी:उत्तर प्रदेश के संगठन श्रेणी:प्रयागराज श्रेणी:हिन्दी श्रेणी:विज्ञान शिक्षा श्रेणी:विज्ञान संचार श्रेणी:विज्ञान साहित्य श्रेणी:1913 में स्थापित संगठन श्रेणी:1913 में भारत में स्थापित संस्थाएँ बाहरी कड़ियाँ आधिकारिक वेबसाइट विज्ञान परिषद् प्रयाग की आधिकारिक वेबसाइट विज्ञान 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