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फोनी युद्ध
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अंगूठाकार|फोनी युद्ध के दौरान फ्रांस में बिटिश अभियान की एक 8-इंची एमएम हॉवित्जर तोप
फोनी युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के आरंभिक चरण को कहा जाता है, जो सितंबर 1939 से मई 1940 तक चला। (fr Drôle de guerre; de Sitzkrieg; pl Dziwna wojna)
द्वितीय विश्व युद्ध 1 सितंबर 1939 को जर्मनी के पोलैंड पर हमले से शुरू हुआ। इसके बाद 3 सितंबर को यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। लेकिन पश्चिमी मोर्चे पर कई महीनों तक बड़े पैमाने पर कोई निर्णायक जमीनी सैन्य अभियान नहीं हुआ। इस कारण ब्रिटेन में इसे Phoney War और फ्रांस में Drôle de guerre (अर्थात् विचित्र युद्ध) कहा गया।यहीं से फोनी युद्ध की शुरुआत मानी जाती है।
पश्चिमी सहयोगियों ने फोनी युद्ध के दौरान बड़ी सैन्य कार्रवाइयाँ नहीं कीं। उन्होंने इस दौरान मुख्यत: एक आर्थिक युद्ध लड़ा। इसमें जर्मनी की नौसैनिक नाकाबंदी, बाल्कन में एक एंग्लो-फ्रांसीसी मोर्चा, जर्मनी के लौह अयस्क के मुख्य स्रोत पर नियंत्रण हासिल करने के लिए नॉर्वे पर आक्रमण और सोवियत संघ के खिलाफ प्रतिबंध लगाना शामिल था, जो जर्मनी का प्राथमिक तेल आपूर्तिकर्ता था।Talbot Charles Imlay 2004 A reassessment of Anglo-French strategy during the Phoney War, 1939–1940 https://archive.org/details/sim_english-historical-review_2004-04_119_481/page/333 English Historical Review 119 481 333–372 10.1093/EHR/119.481.333
युद्ध की स्थिति
फोनी युद्ध के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर दोनों पक्षों ने अपनी सेनाओं को संभावित बड़े आक्रमण के लिए तैयार रखा, लेकिन किसी ने भी तत्काल व्यापक जमीनी हमला नहीं किया। फ्रांसीसी सेना मुख्यतः मैजिनो रेखा और उसके आसपास की रक्षात्मक स्थिति में रही, जबकि ब्रिटिश सेना ने ब्रिटिश अभियान बल को फ्रांस भेजना शुरू किया।
इस अवधि में समुद्र और वायु क्षेत्र में युद्ध अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय था। अटलांटिक का युद्ध आरंभ हो चुका था और जर्मन पनडुब्बियाँ मित्र राष्ट्रों के व्यापारिक तथा सैन्य जहाजों को निशाना बना रही थीं। ब्रिटिश नौसेना ने जर्मनी की समुद्री नाकाबंदी लागू करने का प्रयास किया। पश्चिमी मोर्चे पर सीमित सैन्य गतिविधियों के बावजूद दोनों पक्षों ने अपने सैनिकों, हथियारों और सैन्य संसाधनों को बड़े युद्ध के लिए तैयार किया।
अंत
फोनी युद्ध का अंत 10 मई 1940 को हुआ, जब जर्मनी ने फ्रांस की लड़ाई के अंतर्गत बेल्जियम, नीदरलैंड और लक्ज़मबर्ग पर आक्रमण कर दिया। जर्मन सेना ने ब्लिट्जक्रिग की रणनीति और तेज़ गति से किए गए बख्तरबंद अभियानों के माध्यम से मित्र राष्ट्रों की रक्षात्मक व्यवस्था को शीघ्र ही भेद दिया।
जर्मन आक्रमण के परिणामस्वरूप ब्रिटिश और फ्रांसीसी सेनाएँ पीछे हटने लगीं। मई और जून 1940 में डनकर्क की निकासी हुई और जून में फ्रांस ने जर्मनी के सामने युद्धविराम स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही पश्चिमी यूरोप में फोनी युद्ध का निष्क्रिय चरण समाप्त हो गया और द्वितीय विश्व युद्ध का पश्चिमी मोर्चा व्यापक तथा निर्णायक सैन्य संघर्ष में बदल गया।
संदर्भ
श्रेणी:ब्रिटेन के युद्ध