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411 समाचार
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बख्त सिंह (मारवाड़)

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महाराजा बख्त सिंह राठौड़ (दरबार) जोधपुर के महाराजा File:Maharaja Bakhat Singh portrait cropped.jpg जुलाई 1751 – 21 सितंबर 1752 8 जुलाई 1751 16 अगस्त 1706 मेहरानगढ़ किला, जोधपुर 21 सितंबर 1752 (आयु 46 साल) सिंधोलिया माताजी के पास भोपालाव जी मंदिर राजस्थान टोंक (मालपुरा) पिन कार्ड {304503} राठौड़ वंश अजीत सिंह हिन्दू महाराजा बख्त सिंह राठौड़ या बख्त सिंह (16 अगस्त 1706 - 21 सितंबर 1752) राठौड़ वंश के 18वीं शताब्दी के भारतीय राजा थे। उन्होंने जोधपुर और मारवाड़ राज्यों पर शासन किया और अपने जीवन के दौरान एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति थे।Gupta, Bakshi pp. 152–155https://www.geni.com/people/Maharaja-Bakht-Singh/6000000009753481732 Maharaja Bakht Singh geni_family_tree en-US 2017-05-02 प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक उदगम बख्त सिंह का जन्म 16 अगस्त 1706 को मारवाड़ के शासक थे और अजीत सिंह दूसरे बेटे के रूप में हुआ था। उनके जन्म के समय, उनका परिवार गुजरात पर चल रहे क्षेत्रीय विवाद के कारण मुगल साम्राज्य के खिलाफ खुले विद्रोह में था।Bhati N. S. Studies in Marwar History 1979 Rajasthani Shodh Sansthan https://books.google.co.in/books/about/Studies_in_Marwar_History.html?id=r98tAAAAMAAJ&redir_esc=y 28 दिसम्बर 2020 en 1708 में उनके पिता को मुहम्मद आज़म शाह द्वारा क्षमा कर दिया गया था, जो मारवाड़ के साम्राज्य और जोधपुर शहर पर राठौड़ वंश का नियंत्रण था।Munis pp. 316Richards pp. 180–181 1724 में बख्त सिंह इनके बड़े भाई अजीत सिंह जोधपुर की पब्लिक को परेशान किया करते थे इस लिए जोधपुर की पब्लिक परेशान हो कर मारवाड़ बख्त सिंह के पास चली गई और वहां जा के राजा को बोले की आप के बड़े भाई हमारे ऊपर बहुत हत्या मार पीट और परेशान किया करते है तब राजा को गुस्सा आ गया ये सब सुन कर तब उन्होंने अपना राज छोड़ कर अपनी सेना लेकर जोधपुर निकल गए युद्ध कर ने के लिए और जोधपुर पर चढ़ाई कर के अपने बड़े भाई को युद्ध में हरा के मार कर फिर ये जोधपुर के राजा बने और इनके एक बहन थी जिस की शादी जयपुर हो रखी थी और राजा बनने के बाद जयपुर वालो के और राजा बख्त सिंह के बीच आपसी मतभेद के कारण इन के बीच दुश्मनी हो गई और जब राजा बख्त सिंह जोधपुर से जयपुर युद्ध के लिए अपनी सेना लेकर निकले और गुरुवार की रात में राजस्थान के टोंक जिले में मालपुरा तहसील के बागड़ी गांव के पास पड़ाव डाल के रुक गए तालाब देख कर रुक गए की अपनी इतनी सेना साथ चल रही है तो पानी कहा पियेगी इस लिए यहां गुरुवार की रात को यहां रुके थे । फिर अगले दिन शुक्रवार को जयपुर वालो को पता चल गया था तो जयपुर के राजा ने बख्त सिंह की बहन को ये भ्रमित कर दिया की तेरा भाई प्यारा है या तेरा सुहाग तब बहन ने बोला की मुझे तो मेरा सुहाग प्यारा है तो जयपुर वालो को पता चल गया की बागड़ी गांव के पास पड़ाव डाल के रुके हुए हैं तो जयपुर वालो ने बख्त सिंह की बहन को बोला की तू तेरे भाई को वहां जा के मार दे कैसे भी कर के तो उसने अपने अन्दर युद्ध के कपड़े पहन कर फिर उनके ऊपर साधे कपडे पहन कर जहर लगा के कपड़ो पर फिर गले मिल लिया अपने भाई से तो यही राजस्थान के टोंक जिले में मालपुरा तहसील के बागड़ी गांव के पास पड़ाव डाल के रुक गए यही इनकी मृत्यु हुई। फिर इनकी सेना भी ये सोच में पड़ गई की जयपुर जाए तो वहां जाके कैसे युद्ध करें अपने राजा ही नहीं रहे। फिर इनकी सेना सोची की जोधपुर वापस लौट जाए तब तब वहां जाकर क्या मुंह दिखाएंगे इस लिए सेना भी यही आपस में युद्ध कर के यही मर गए। फिर सब मरने के बाद राजा और सेना भूत बन गए । जहां यह मरे वहां इनकी सेना आदि रात मे यहां पंचमुखी महादेव का बहुत बड़ा मंदिर बनाया गया क्योंकि राजा महादेव जी के भक्ति कर थे थे । फिर इनकी और इनकी सेना की भूतों की मीटिंग होने लगी । तब ये महादेव का मंदिर में भक्त आने लगे और पूजा पाठ कर ने लगे । फिर मीटिंग में भक्तों का जो भी इच्छा होती वोह एक पते पर लीख के यहां महादेव के पास रख देते अगले दिन वापस आ के पुजारी देख था तो उस में जवाब मिल था कि तेरी इच्छा पूरी हो जाएगी । ओर एक नीम का पेड़ था जो मंदिर के अंदर जो नीम है वोह मीठा है ओर मंदिर के दीवार के बाहर नीम कड़वा है अगर पूरा इतिहास जानना है तो यहां के पुजारी से मिल सकते हो। सन्दर्भ ग्रंथ सूची R.K Gupta, S.R Bakshi (2008). Rajasthan Through the Ages, Vol 4, Jaipur Rulers and Administration. Sarup & Sons. 9788176258418. Jodhpur and the Later Mughals, AD 1707–1752, by R. S. Sangwan. Published by Pragati Publications, 2006. यदुनाथ सरकार (1994). A History of Jaipur 1503–1938. Orient Longman. 81-250-0333-9. Faruqui, Munis D. (2012). The Princes of the Mughal Empire, 1504–1719. Cambridge University Press. p. 316. 978-1-107-02217-1. Gazetteer of the Bombay Presidency: Ahmedabad. Google Books 2015 (Public Domain text). 7 January 2015. pp. 248–262. Retrieved 1 February 2015. रिचर्ड जॉन एफ़॰ (1995). The Mughal Empire (Reprinted ed.). Cambridge University Press. pp. 180–181. 978-0-52156-603-2. श्रेणी:1706 में जन्मे लोग श्रेणी:१७५२ में निधन श्रेणी:मारवाड़ के शासक