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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

धन सिंह गुर्जर

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भारतीय गुर्जर अंग्रेज़ी भारतीय नागरिक भारत कोतवाल धन सिंह गुर्जर २७ नवंबर १८२०/१८२४ ४ जुलाई १८५७ KotwalDhanSinghGurjarMeerut.jpg कोतवाल धन सिंह गुर्जर (१८२० - ४ जुलाई १८५७) एक स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी और १८५७ के महान क्रांतिकारी एवं शहीद थे।Singh Nau Nihal The Royal Gurjars: Their Contribution to India http://books.google.co.in/books?id=BznWnPT5aYcC&pg=PA339 2003 Anmol Publications 978-81-261-1414-6 339 Kotwal Dhan Singh Gurjar was the leader of this initial battle of 1857. Dhan Singh Gurjar was the Kotwal of Meerut in 1857 21 अक्तूबर 2014 https://web.archive.org/web/20140714144926/http://books.google.co.in/books?id=BznWnPT5aYcC&pg=PA339 14 जुलाई 2014 live १० मई १८५७ को मेरठ में क्रान्ति में मुख्य योगदान धन सिंह गुर्जर है। १८५७ की क्रांति का आरम्भ thumb|left|सन् १८५७ के सैनिक विद्रोह की एक झलक मेरठ क्रान्ति का प्रारम्भ/आरम्भ ”१० मई १८५७“ को हुआ था। क्रान्ति की शुरूआत करने का श्रेय अमर शहीद कोतवाल धनसिंह गुर्जर को जाता है। उस दिन मेरठ में धनसिंह के नेतृत्व मे विद्रोही सैनिकों और पुलिस फोर्स ने अंग्रेजों के विरूद्ध क्रान्तिकारी घटनाओं को अंजाम दिया। धन सिंह कोतवाल जनता के सम्पर्क में थे। उनका संदेश मिलते ही हजारों की संख्या में क्रान्तिकारी रात में मेरठ पहुंच गये। समस्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश, देहरादून, दिल्ली, मुरादाबाद, बिजनौर, आगरा, झांसी, पंजाब, राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र तक के गुर्जर इस स्वतन्त्रता संग्राम में कूद पड़े। विद्रोह की खबर मिलते ही आस-पास के गांव के हजारों ग्रामीण गुर्जर मेरठ की सदर कोतवाली क्षेत्र में जमा हो गए। इसी कोतवाली में धन सिंह पुलिस प्रमुख थे। १० मई १८५७ को धन सिंह ने की योजना के अनुसार बड़ी चतुराई से ब्रिटिश सरकार के वफादार पुलिस कर्मियों को कोतवाली के भीतर चले जाने और वहीं रहने का आदेश दिया और धन सिंह के नेतृत्व में देर रात २ बजे जेल तोड़कर ८३६ कैदियों को छुड़ाकर जेल को आग लगा दी। छुड़ाए कैदी भी क्रान्ति में शामिल हो गए। उससे पहले भीड़ ने पूरे सदर बाजार और कैंट क्षेत्र में जो कुछ भी अंग्रेजों से सम्बन्धित था सब नष्ट कर चुकी थी। रात में ही विद्रोही सैनिक दिल्ली कूच कर गए और विद्रोह मेरठ के देहात में फैल गया। इस क्रान्ति के पश्चात् ब्रिटिश सरकार ने धन सिंह को मुख्य रूप से दोषी ठहराया, और सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि धन सिंह कोतवाल क्योंकि स्वयं गुर्जर है इसलिए उसने गुर्जरो की भीड को नहीं रोका और उन्हे खुला संरक्षण दिया। इसके बाद घनसिंह को गिरफ्तार कर मेरठ के एक चौराहे पर फाँसी पर लटका दिया गया। मेरठ की पृष्ठभूमि में अंग्रेजों के जुल्म की दास्तान छुपी हुई है। मेरठ गजेटियर के वर्णन के अनुसार ४ जुलाई, १८५७ को प्रातः ४ बजे पांचली पर एक अंग्रेज रिसाले ने ५६ घुड़सवार, ३८ पैदल सिपाही और १० तोपों से हमला किया। पूरे ग्राम को तोप से उड़ा दिया गया। सैकड़ों गुर्जर किसान मारे गए, जो बच गए उनको कैद कर फांसी की सजा दे दी गई। आचार्य दीपांकर द्वारा रचित पुस्तक "स्वाधीनता आन्दोलन" और मेरठ के अनुसार पांचली के ८० लोगों को फांसी की सजा दी गई थी। ग्राम गगोल के भी ९ लोगों को दशहरे के दिन फाँसी दे दी गई और पूरे ग्राम को नष्ट कर दिया। आज भी इस ग्राम में दश्हरा नहीं मनाया जाता। सम्मान मेरठ विश्वविद्यालय के एक कैम्पस का नाम महान क्रन्तिकारी कोतवाल धन सिंह गुर्जर के नाम पर रखा गया हैं।http://www.ccsuniversity.ac.in/new/Health-Care.htm#DSCC Meerut University 21 अक्तूबर 2014 https://web.archive.org/web/20140911011206/http://www.ccsuniversity.ac.in/new/Health-Care.htm#DSCC 11 सितंबर 2014 dead  मेरठ में स्तिथ पुलिस प्रशिक्षण अकादमी का नाम उत्तरप्रदेश सरकार ने शहीद धन सिंह गुर्जर कोतवाल पुलिस प्रशिक्षण अकादमी कर दिया 11 मार्च 2023 को प्रशिक्षण परिसर में कोतवाल धन सिंह गुर्जर जी की मूर्ति का अनावरण भारतवर्ष के उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनकड़ ने किया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर की विशेष उपस्तिथि रही। इन्हें भी देखें १८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम गुर्जर मंगल पांडे सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ 1857 की क्रान्ति का नायक धनसिंह गुर्जर कोतवाल १८५७ की क्रांति और मेरठ श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी:१८५७ के क्रांतिकारी