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साबित बिन दहदाह
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साबित बिन दहदाह रज़ियल्लाहुअन्हु अंसारी सहाबी हैं।
नाम व वंशावली
नाम साबित, कुनियत अबुद्दहदाह, क़बीला बली के ख़ानदान अनीफ़ या अजलान से थे और अम्र बिन औफ़ के हलीफ़ (सहयोगी) थे। सिलसिला-ए-नसब यह है: साबित बिन दहदाह बिन नईम बिन ग़नम।
इस्लाम
हिजरत के बाद मुसलमान हुए।
ग़ज़वात
ग़ज़वा-ए-उहुद में नुमायां शिरकत की। जंग की शिद्दत से जब मुसलमानों के पाँव उखड़े तो उन्होंने आगे बढ़कर अंसार को आवाज़ दी: "इधर! इधर! मैं साबित बिन दहदाह हूँ! अगर मुहम्मदﷺ क़त्ल हुए तो ख़ुदा मौजूद है, तुम्हें अपने दीन के लिए लड़ना चाहिए, ख़ुदा फ़तह व नुसरत अता फ़रमाएगा।" अंसार के कुछ जांबाज़ इस दावत-ए-हक़ के इस्तक़बाल के लिए बढ़े। क़ुरैश मक्का की एक ज़बरदस्त जमाअत जिसमें ख़ालिद, अम्र बिन आस, इकरिमा बिन अबू जहल, ज़िरार बिन ख़त्ताब और दीगर रुऊसा-ए-क़ुरैश थे, क़रीब खड़ी थी। उन्होंने गिरोह अंसार के इन जांबाज़ों के साथ इस जमाअत पर हमला किया। ख़ालिद ने बढ़कर नेज़ा मारा जिससे हज़रत अबू दहदाह ज़ख़्मी होकर ज़मीन पर गिर पड़े। लोग उठाकर घर लाए।
वफ़ात
ग़ज़वा-ए-उहुद में ख़ालिद के नेज़े से जो ज़ख़्म आया, घर लाकर इलाज किया गया तो अस्थायी रूप से तंदरुस्त हो गए। लेकिन जंग हुदैबिया के बाद ज़ख़्म फिर उभर आए और वफ़ात पा गए।
आँहज़रतﷺ सहाबा के हमराह जनाज़े में शिरकत के लिए तशरीफ़ लाए और दफ़न करने के बाद घोड़ा मंगाकर सवार हुए। इस मौक़े पर आपने फ़रमाया: जन्नत में खजूर की कितनी शाख़ें हैं जो इब्न-ए-दहदाह के वास्ते लटकाई गई हैं।مسلم:1/256
इसके बाद आसिम बिन अदी को तलब फ़रमाया और पूछा: तुम लोगों से इनकी कुछ क़रीबी (रिश्तेदारी) थी? बोले: नहीं, अबूलुबाबा बिन अब्दुल मुंज़िर इनके भांजे थे। आँहज़रतﷺ ने तरका (विरासत) उनके हवाले किया।اسد الغابہ جلد1صفحہ 325حصہ دوم مؤلف: ابو الحسن عز الدين ابن الاثير، ناشر: المیزان ناشران و تاجران کتب لاہور
इन्हें भी देखें
मुहम्मद
सहाबा और सहाबियात की सूची
अशरह मुबशरह
ख़लीफ़ा
शरिया
इस्लाम
संदर्भ